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अहियारा धर्मप्रांत के प्रतिनिधि मंडल से संत पापा की मुलाकात

In Church on June 8, 2017 at 3:10 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 8 जून 17 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 8 जून को अबूजा के महाधर्माध्यक्ष एवं अहियारा के प्रेरितिक प्रशासक कार्डिनल जोन ओनाईयेकन, ओवेरी के महाधर्माध्यक्ष एस.ए. अंतोनी ओबीना, जोस के महाधर्माध्यक्ष एवं नाइजीरिया के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष इग्नासियुस कईगाना, अहियारा के धर्माध्यक्ष पीटर ओकपालेके    के साथ, अहियारा धर्मप्रांत के एक प्रतिनिधि मंडल से वाटिकन में मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल में पुरोहित, धर्मबहनें एवं कुछ लोकधर्मी भी थे।

अद् लीमिना अपोस्तोलोरूप मुलाकात के तहत, प्रतिनिधि मंडल ने प्रेरित संत पेत्रुस एवं संत पौलुस के कब्रों का दर्शन किया तथा मरिया मेजर महागिरजाघर में प्रार्थना अर्पित की। अंततः उन्होंने संत पापा फ्राँसिस से व्यक्तिगत मुलाकात की।

इससे पहले उन्होंने वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन एवं लोकधर्मियों की प्रेरिताई को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के अध्यक्ष से भी मुलाक़ातें की थी।

वाटिकन प्रेस द्वारा जारी एक वक्तव्य में कहा गया कि संत पापा ने अहियारा की स्थिति के अस्वीकार्य पक्ष पर बातें कीं तथा सुरक्षित और उचित कदम उठाने जाने की बात कही। उन्होंने अहियारा धर्मप्रांत को माता मरियम के चरणों सिपुर्द किया।


(Usha Tirkey)

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अंतरधार्मिक शिक्षा में महिलाओं की दृश्यता महत्वपूर्ण

In Church on June 8, 2017 at 3:06 pm

 

न्यूयॉर्क, बृहस्पतिवार, 8 जून 17 (वीआर सेदोक): अंतरधार्मिक वार्ता की मेज पर महिलाएं क्या रख सकती हैं? अंतरधार्मिक सौहार्द के लिए महिलाएँ क्या दे सकती हैं? उनके विशिष्ट गुणों एवं क्षमताओं के प्रयोग हेतु कलीसिया उनकी भूमिका को किस तरह दृढ़ता प्रदान कर सकती है?

ये सवाल हैं जिनके प्रकाश में अंतरधार्मिक वार्ता हेतु बनी परमधर्मपीठीय समिति की आमसभा में विचार-विमर्श किया जा रहा है जो 7 से 9 जून तक वाटिकन में आयोजित है।

बुधवार को पहले सत्र में अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल जाँ लुईस तौरान ने इस बात की ओर ध्यान आकृष्ट किया कि कुछ देशों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने एवं उनके विरूद्ध शर्मनाक हिंसा को दूर करने के लिए कितना कुछ करना बाकी है। उन्होंने कलीसिया के दृष्टिकोण को रखते हुए जोर दिया कि सभी एक समान हैं क्योंकि हम सब ख्रीस्त के एक ही शरीर के अंग हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि इस दृष्टिकोण को अपनाने के लिए और क्या किया जाना चाहिए ताकि बेहतर अंतरधार्मिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सके?

अंतरधार्मिक वार्ता के कार्यक्रम समन्वयक एवं विश्व कलीसियाओं की समिति के संयोजक डॉ. क्लेर अमोस जो प्रमुख वक्ता भी थे वाटिकन रेडियो से कहा कि सभा की शुरूआत ‘सार्वभौमिक भाईचारा की शिक्षा में महिलाओं की भूमिका’ की विषयवस्तु से हुई।

उन्होंने अंतरधार्मिक वार्ता की सभा में महिलाओं की दृश्यता पर गौर करते हुए कहा, ″यदि उन सभाओं में कोई महिला प्रतिनिधि नहीं है तब आप वास्तव में स्पष्ट वक्तव्य नहीं रख सकते हैं।″

आमोस ने कहा कि सभा में उन्होंने धर्म और हिंसा के क्षेत्र में उनके व्यापक कार्यों से संबंधित मुद्दों को उठाया है जो तब होता है जब धर्मसमाजी व्यक्ति अथवा संस्था यह सोचता है कि उन्हें कुछ जानना बाकी नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि हम पूर्ण नहीं हैं तथा पूर्ण सत्य को नहीं जानते हैं इस बात को स्वीकार करने के द्वारा भी हम अंतरधार्मिक वार्ता की मेज पर सहयोग दे सकते हैं।


(Usha Tirkey)

महासागरों और समुद्री संसाधनों के संरक्षण हेतु कार्डिनल टर्कशन के वक्तव्य

In Church on June 8, 2017 at 3:04 pm

न्यूयॉर्क, बृहस्पतिवार, 8 जून 2017 (वीआर सेदोक): समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कशन ने महासागरों, समुद्र और समुद्री संसाधनों के संरक्षण और स्थिरतापूर्वक उपयोग के संबंध में 5 से 9 जून तक न्यूयॉर्क में चल रहे सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए इसके सहयोग और समन्वय हेतु किये गये पहल का स्वागत किया।

कार्डिनल ने अपने सम्बोधन में बतलाया कि संत पापा फ्राँसिस ने गत माह व्यावसायिक निर्णय लेने, व्यापार संबंधी योजना बनाने और कानून एवं नीति को प्रभावित करने में पर्यावरणीय चिंताओं के महत्व को उजागर करने हेतु ″लौदातो सी चैलेंज″ नामक एक पहल जारी किया है जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासभा और दुनिया भर से प्रमुख व्यवसायिक और राजनीतिक नेता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वे इस पहल को आगे बढ़ाने एवं मजबूत करने हेतु कटिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि सशक्त विकास लक्ष्य 14 हासिल करना हर किसी के हित में है, क्योंकि हमारे महासागरों के सामने आने वाले मुद्दों की गंभीरता मानव जाति के अस्तित्व से जुड़ा है। खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ महासागर, वैश्विक कार्बन चक्र, जलवायु नियमन, अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य श्रृंखलाओं और निवासों के रखरखाव जैसे विभिन्न पर्यावरणीय आवश्यकताओं, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं, वायु एवं स्वच्छता हेतु कच्चे माल की आपूर्ति में अहम भूमिका निभाती है।

कार्डिनल टर्कशन ने संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक विश्व पत्र ″लौदातो सी″ का हवाला देते हुए कहा कि इसके द्वारा संत पापा पर्यावरण के नुकसान की गति को धीमी करने और पर्यावरण के लिए हानिकारक जीवन शैली के पैटर्न बदलने की अपील प्रत्येक व्यक्ति से करते हैं। उन्होंने कहा कि संसाधनों के प्रयोग में स्वार्थ की भावना को दूर करने के लिए व्यक्तिगत, राष्ट्रीय एवं विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के सभी स्तरों को सम्बोधित किया जाना चाहिए।

उन्होंने समुद्री संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव को रोकने तथा समुद्रों के दीर्घकालिक संरक्षण और टिकाऊ उपयोग हेतु हमें नैतिक विचारों को एकीकृत करने की आवश्यकता बतायी, क्योंकि पर्यावरणीय गिरावट, मानव एवं नैतिक पतन करीबी से जुड़े हैं। पर्यावरण को अपने आप से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि हम इसके अंग हैं तथा निरंतर इसके संपर्क में रहते हैं। इसलिए पर्यावरण संकट हम सभी का संकट है। यही कारण है कि हम सभी को पर्यावरण की रक्षा, गरीबी एवं बहिष्कार का सामना करना चाहिए ताकि सार्वजनिक संसाधनों का लाभ सभी को मिल सके।

नैतिक दृष्ट्कोण का अर्थ है इन बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों की देखभाल की हमारी जिम्मेदारी को गंभीरता पूर्वक लेना तथा उन लोगों की रक्षा करना, खासकर, जो गरीब, कमजोर तथा जो अपने दैनिक आवश्यकताओं के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं। नैतिक दृष्टिकोण से न केवल अधिकारों पर ध्यान देना है बल्कि दायित्वों पर भी, व्यक्तिगत एवं राष्ट्रीय दायित्वों। नियमों को सही तरह से लागू नहीं करने पर अधिकारों एवं दायित्वों के बीच दूरी आ जाती है। अतः हमारे आम गृह की देखभाल को हमेशा एक नैतिक अनिवार्यता के रूप में लिया जाना चाहिए।

कार्डिनल ने कहा कि इस दृष्टिकोण को अपनाने के द्वारा सभी को लाभ होगा किन्तु कई सालों से महासागरों एवं समुद्रों की स्थिति पर खास ध्यान नहीं दिया गया है। चूंकि ये विशाल हैं अंतः माना जाता था कि मानव क्रिया-कलाप से यह प्रभावित नहीं होगा। हमने इसका प्रयोग बहुत सहज से किया है किन्तु अपने दायित्वों को सही तरीके से नहीं निभाया है।

कार्डिनल ने स्मरण दिलाया कि नैतिक दृष्टि भावी पीढ़ी के साथ एकात्मता हेतु प्रेरित करता है। संत पापा हमें याद दिलाते हैं कि अंतरपीढी एकात्मता वैकल्पिक नहीं है वरन् न्याय का आधारभूत सवाल है क्योंकि जिस विश्व को हमने प्राप्त किया है वह आने वाली पीढ़ी द्वारा भी प्राप्त किया जाना है। अतः महासागरों की देखभाल इस बात पर फायदेमंद हैं कि हम भावी पीढ़ी को पर्यावरण गिरावट भुगतने से बचायेंगे ताकि वे भी इसकी अनोखी सुन्दरता का आनन्द ले सकेंगे।

कार्डिनल टर्कशन ने कहा कि कई धर्मों एवं संस्कृतियों में जल शुद्धीकरण का प्रतीक है इसी पृष्ट- भूमि पर संत पापा भी हमारे महासागरों, समुद्र और समुद्री संसाधनों के संरक्षण और स्थायी रूप से उपयोग करने के वैश्विक प्रयासों के नए सिरे से सहयोग और समन्वय के इस ताजी शुरुआत का स्वागत करते हैं।


(Usha Tirkey)

श्रीलंका के बाढ़ पीड़ितों की सहायता में काथलिक समुदाय

In Church on June 8, 2017 at 3:02 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 8 जून 2017 (वीआर अंग्रेजी): श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने काथलिक समुदाय से अपील की है कि वे देश में विनाशकारी चक्रवात से उत्पन्न बाढ़ एवं भूस्खलन से प्रभावित हज़ारों लोगों की मदद करना जारी रखें।

श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष विंस्टोन फेरनान्दो द्वारा 1 जून को जारी वक्तव्य में मानवीय सहायता हेतु ‘एकात्मता जारी’ रखने की अपील की गयी है। उसमें कहा गया है कि काथलिक कारितास, सरकारी एजेंसी तथा समाज के संगठन ″मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए अपने पूर्ण सहयोग का विस्तार″ करें। कोई भी वित्तीय, मानवीय और भौतिक समर्थन उन प्रभावित लोगों के लिए अमूल्य होगा।  जिन्होंने अपने निजी सामान और सम्पति को खो दिया है। ताकि इस मदद द्वारा उन्हें अपने आत्मविश्वास और सामान्य जीवन पर वापस लौटने में सहायता मिल सके।

जानकारी के अनुसार 30 मई को आये चक्रवात से करीब 658,500 लोग बाढ़ एवं भूस्खलन के कारण 15 विभिन्न जिलों में विस्थापित हैं तथा करीब 68,734 लोग 355 शिविरों में रह रहे हैं।

95 लोग जो लापता थे उन्हें मृत घोषित किया जा चुका है तथा मरने वालों की संख्या लगभग 300 हो गयी है। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) का अनुमान है कि कुल 2,500 घर नष्ट हो चुके हैं और लगभग 15, 900 क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ये संख्याएं बढ़ सकती हैं क्योंकि आने वाले हफ्तों में क्षति आकलन से डेटा संकलित किया जायेगा।

श्रीलंका के काथलिक करीतास के निदेशक फा. महेन्द्र गुनाथिलेक ने कहा कि वे व्यापक राहत अभियान चला रहे हैं और 60 ट्रक आवश्यक वस्तुओं का वितरित किया गया है। उन्होंने कहा कि उन सभी कारितास केंद्रों ने जो प्रतिकूल मौसम से प्रभावित नहीं हैं सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों रत्नापुरा, गाले और कोलंबो के लिए राहत सामग्री इकट्ठा किया है। गाले सबसे बुरी तरह से प्रभावित है। रिलीफ वेब के अनुसार 142,149 लोग एवं 36,314 परिवार प्रभावित हैं जिन्हें कारितास ने 20,645 पैकेट पकाया हुआ एवं 2,614 पैकेट खाद्य सामग्री उपलब्ध कराया है।


(Usha Tirkey)

आकाल तथा भूख की समस्या पर कनाडा के विभिन्न धार्मिक नेताओं की अपील

In Church on June 8, 2017 at 3:00 pm

कनाडा, बृहस्पतिवार, 8 जून 17 (वीआर सेदोक): दक्षिणी सूडान में आकाल तथा यमन, उत्तर पूर्वी नाईजीरिया एवं सोमालिया में भोजन की अत्यधिक कमी को देखते हुए कनाडा के विभिन्न धार्मिक नेताओं ने उसके समाधान हेतु अपील जारी की है।

कनाडा के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने अन्य ख्रीस्तीय समुदायों, यहूदी, मुस्लिम, सिक्ख तथा अन्य धार्मिक समुदायों के साथ आकाल एवं भूख का सामना करने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर अपील जारी की। माना जा रहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह विश्व के एक बड़े मानवीय संकट का सामना है जो चार अलग-अलग देशों में एक साथ होने वाली गंभीर वास्तविकता है।

2017 के फरवरी माह में संयुक्त राष्ट्र ने घोषित किया था कि इन चारों देशों में 20 मिलियन लोगों में से 1.4 मिलियन कमजोर बच्चे हैं जो आने वाले महीनों में मृत्यु की जोखिम से गुजर रहे होंगे। इस संकट का मुख्य कारण जारी सैनिक युद्ध तथा सूखा है जिसके कारण लाखों लोग अपने घर एवं भूमि से विस्थापित हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, संकट इस समय संसाधनों की वर्तमान उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा अब तक जमा किए गए धन राशि से अधिक है।

सभी धार्मिक नेताओं ने एक होकर विश्वासियों से तीन तरह के सहयोग की मांग की है। ये सहयोग प्रार्थना, दान एवं आवाज उठाने के द्वारा किया जाएगा।

उन्होंने अपील की है कि वे व्यक्तिगत एवं सामुदायिक रूप से दक्षिणी सूडान, सोमालिया, उत्तर पूर्वी नाइजीरिया एवं यमन के लिए प्रार्थना करें तथा वहाँ शांति, सरकारी अधिकारियों एवं क्षेत्र में मानवीय कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रार्थना करें।

इस संकट से निपटने के लिए17 मार्च से 30 जून तक दान जमा देने की भी अपील की गयी है जिसको कनाडा की सरकार द्वारा हाल में घोषित ″आकाल राहत फंड″ के साथ जोड़ा जाएगा।

तीसरे सहयोग में आवाज उठाने की अपील की गयी है। जिसमें सलाह दी गयी है कि इन देशों के संकट के बारे जानकारी प्राप्त करने हेतु समय देना एवं इसे अपने परिवारों, मित्रों एवं पड़ोसियों तथा स्थानीय समुदाय के एजेंसियों के बीच चर्चा करना और सांसदों से सम्पर्क करना।

 

विभिन्न धार्मिक नेताओं की अपील के साथ, कनाडा के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन अपने वेबसाईट में प्रकाशित करते विश्वासियों से संकट के लिए प्रार्थना करने की अपील की है। देशभर के काथलिक पल्ली इसके लिए खास चंदा जमा कर रहे हैं। अनुदान राशि उन चार देशों में, काथलिक सहायता एजेंसी के माध्यम से भेजा जायेगा।


(Usha Tirkey)

धर्माध्यक्ष की मृत्यु पर हत्या की आशंका

In Church on June 8, 2017 at 2:58 pm

कैमरून, बृहस्पतिवार, 8 जून 17 (वीआर सेदोक): कैमरून के धर्माध्यक्ष जाँ मेरी बेनोईट बाला को 31 मई को लापता बताया गया था तथा 1 जून को मृत पाया गया। उनका मृत शरीर नदी से बाहर, अपनी गाड़ी से 10 मील की दूरी पर पाया गया। उनकी गाड़ी में एक चिट्ठी मिली जिसमें लिखा था, ″मैं पानी में हूँ।″ जिसके कारण बहुतों का मानना है कि धर्माध्यक्ष ने आत्म हत्या की है।

बैरैना न्यूज के अनुसार, एक गोपनीय दस्तावेज में प्रकाशित शव परीक्षण के निष्कर्षों में बताया गया है कि जाँच में धर्माध्यक्ष के शरीर पर यातना के चिन्ह मिले हैं। ″सानागा नदी से निकाले गये उनके शरीर में बाहें कड़े एवं पेट पर मुड़े हुए थे जिससे लगता है कि वे पानी पर संघर्ष नहीं कर रहे थे। धर्माध्यक्ष बाला को यातनाएँ दी गयी हैं तथा क्रूरता से मार डाला गया है।″

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फेफड़े में पानी की एक भी बूंद नहीं थी तथा उनके शरीर की स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया गया है कि लाश को पाये जाने के पूर्व यह चार से भी कम घंटे पानी में था।

काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के वेबसाईट पर कहा गया है कि यह कैमरून के लिए दुखद है, और खासकर, हमारे काथलिक कलीसिया के लिए। हमें उन लोगों पर भरोसा है जो देश और कलीसिया की रक्षा में ईश्वर के इस व्यक्ति की मृत्यु के सही कारणों का पता लगाने में मदद कर रहे हैं।

58 वर्षीय धर्माध्यक्ष 2003 में संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा बाफिया के धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे। यहाँ का काथलिक समुदाय बहुधा आतंकी समूहों बोको हराम के आक्रमण के शिकार होता रहा है जिसका संबंध इस्लामिक स्टेट से है और जिसने कई पुरोहितों एवं धर्मबहनों का अपहरण कर उनकी हत्या की है।

स्थानीय कलीसिया के पल्ली पुरोहित फा. रेमी गोमो ने कहा, ″मैं कलीसिया के सभी मित्रों को निमंत्रण देता हूँ कि वे चाहे काथलिक हों अथवा नहीं, शांति, आशा एवं उदारता पर अपनी एकजुटता दिखायें तथा बेकार के निर्णय और बहस से दूर रहें कयोंकि इसके द्वारा शैतान एवं उसके सहयोगियों को अवसर मिलता है। ईश्वर अपनी योजना को प्रकट करेंगे तथा अपनी कृपा हमें प्रदान करेंगे ताकि जनता के अधिकारी इस दुखद घटना के रहस्य की सच्चाई का पता लगा सकें।″


(Usha Tirkey)

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