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संत पापा ने दी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना विकसित करने की सलाह

In Church on June 10, 2017 at 3:37 pm

रोम, शनिवार,10 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार को इटली के राष्ट्रपति सेरजो मतरेल्ला के साथ रोम के राष्ट्रपति भवन (क्वेरनाले) में अपने आधिकारिक मुलाकात के दौरान कहा कि ″इटली की कलीसिया देश की आत्मा के साथ दृढ़ता से जुड़ी है।″

इस मुलाकात के पूर्व संत पापा फ्राँसिस ने 2013 के नवम्बर माह में इटली के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्जो नापोलितानो से, इसी भवन में मुलाकात की थी।

इस ऐतिहासिक भवन में संत पापा ने अपने संदेश में, समस्याओं एवं जोखिम भरे विश्व में ख्रीस्तीय आशा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि इटली तथा समस्त यूरोप अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, व्यापक विस्थापन की स्थिति एवं विश्व के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक समस्याओं से जूझने हेतु बुलाये जा रहे हैं।

संत पापा ने जटिल शरणार्थी परिस्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ″यह स्पष्ट है कि कुछ ही देश सारे बोझ नहीं उठा सकते अतः यह अनिवार्य एवं अत्यावश्यक है कि एक व्यापक और गहन अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना विकसित की जाए।″

संत पापा ने इस बात पर भी गौर किया कि अपने नागरिकों की उदार प्रकृति और उसके संस्थानों की प्रतिबद्धता के माध्यम से विकास के मौके और नए अवसरों में इन चुनौतियों को बदलने के लिए काम किया जा रहे हैं।

संत पापा ने इटली द्वारा शरणार्थियों की मदद एवं पल्लियों तथा भुकम्प प्रभावित क्षेत्रों में स्वयंसेवकों के कार्यों पर ध्यान आकर्षित कराते हुए, उनकी सराहना की और कहा कि यही ख्रीस्तीय कार्य है।

अन्य मामलों में संत पापा ने रोजगार पर अपना विचार रखा। उन्होंने उन प्रक्रियाओं के निर्माण एवं उनके साथ चलने की बात पर जोर दिया जो नये सम्मानित कार्यों हेतु अवसर प्रदान करे।

राष्ट्रपति भवन में उपस्थित लोगों से संत पापा ने कहा कि इटली की कलीसिया एक महत्वपूर्ण  सच्चाई है, यह देश की आत्मा से दृढ़ता पूर्वक जुड़ी है।

उन्होंने अपने सम्बोधन के अंत में कहा कि काथलिक कलीसिया तथा ख्रीस्तीयता के सिद्धांत में, सामाजिक विकास, सहमति और इसकी वास्तविक प्रगति हेतु इटली हमेशा एक बेहतर संबंध प्राप्त करेगा।


(Usha Tirkey)

इटली के राष्ट्रपति भवन में संत पापा का आधिकारिक दौरा

In Church on June 10, 2017 at 3:35 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 10 जून को इटली के राष्ट्रपति सेरजो मत्तारेल्ला के साथ आधिकारिक मुलाकात, इटली के राष्ट्रपति भवन (क्वीरिनाले भवन) में की। संत पापा के साथ वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन एवं कई अन्य प्रतिनिधि भी थे।

क्वीरिनाले भवन में संत पापा एवं प्रतिनिधि मंडल का राष्ट्रपति मत्तारेल्ला ने सहर्ष स्वागत किया तथा उनके आदर में सैन्य सम्मान दिये गये। स्वागत समारोह के उपरांत संत पापा एवं राष्ट्रपति एक स्टूडियो में गये जहाँ उन्होंने व्यक्तिगत रूप से बातें की। व्यक्तिगत बात-चीत के उपरांत दोनों ने एक-दूसरे को उपहार भेंट किया। उसके बाद वे प्रार्थनालय में थोड़ी देर रूके। तत्पश्चात् संत पापा एवं इताली राष्ट्रपति के एक सभागार में गये जहाँ उन्होंने अपना संदेश दिया। संदेश समाप्त करने पर वे क्वीरिनाले भवन की वाटिका गये जहाँ उन्होंने करीब 200 बच्चों से मुलाकात की जो इटली के भुकम्प प्रभावित क्षेत्रों से आये थे। कार्यक्रम समाप्त कर संत पापा 12.45 बजे क्वीरिनाले भवन से विदा ली।


(Usha Tirkey)

स्कॉलस ऑकरेंत्स से संत पापा, शिक्षा न केवल संभ्रांतों के लिए हो

In Church on June 10, 2017 at 3:32 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 9 जून को वाटिकन में स्कोलास ऑकरेंत्स फाऊँडेशन के नये कार्यालय का उद्घाटन किया जो ″शांति हेतु मुलाकात की संस्कृति″ उत्पन्न करने में शिक्षा, कला तथा खेल के बहुमुखी स्वरूप को प्रोत्साहन देता है।″

इस अवसर पर संत पापा 9 विभिन्न देशों के युवा दलों से लाइव जुड़े, वे देश हैं- इटली, कोलोम्बिया, हैती, पाराग्वे, अर्जेंटीना, ब्राजील, मेक्सिको, स्पेन तथा संयुक्त अरब एमीरात।

लाइव विडियो के माध्यम से स्कोलास ऑकरेन्त्स के युवाओं को संदेश देते हुए संत पापा ने शिक्षा को मात्र संभ्रांत लोगों के लिए उपलब्ध किये जाने के विरूद्ध चेतावनी दी।

उन्होंने कहा, ″युवाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा खतरा है और वह खतरा है उत्कृष्टता। धीरे-धीरे, कुछ स्थलों पर शिक्षा के लिए मौद्रिक समर्थन कम हो रहा है तथा एक संभ्रांत वर्ग का निर्माण किया जा रहा है जो शिक्षा के लिए भुगतान कर सके।”

संत पापा ने कहा कि यह मनोभाव उन लड़के लड़कियों का बहिष्कार करता है जिन्हें अच्छी शिक्षा प्राप्त नहीं हो पायी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ मात्र चीजों की जानकारी रखना अथवा क्लास में शामिल लेना नहीं है बल्कि तीन चीजों- दिमाग, हृदय और हाथ का प्रयोग कर सहज से पाना है। जिसका मतलब है ″सीखना ताकि आप जो अनुभव एवं कार्य करते हैं उस पर विचार कर सकें, जो सोचते हैं उसे एहसास कर सकें, एवं जो एहसास करते हैं उसे कार्य रूप में परिणत कर सकें। यह व्यक्ति के अंदर का संघटित रूप है।

वैश्विकरण की विषयवस्तु पर बोलते हुए संत पापा ने कहा कि यह अच्छी बात है किन्तु इसमें बिलियर्ड गेंद समझ लेने का खतरा है, जिसमें एक क्षेत्र, जहां केंद्र से हर बिंदु समान है और एक लड़का या एक लड़की की व्यक्तिगत विशेषताओं को रद्द कर दिया जाता है। यह मान लिया जाता है कि या तो वह सिस्टम के अनुरूप हैं अथवा वह मौजूद ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा वैश्विकरण कई खंडों के साथ एक बहुतल के समान है जहाँ हम एक साथ आने का प्रयास करते हैं और जिसमें हर व्यक्ति अपनी क्षमता एवं गुणों को बनाये रख सकता है।

संत पापा ने युवाओं को सलाह दी कि वे अपने तरीक़ों की खोज करें, विशेषकर, दूसरों के साथ एकात्मता में बढ़ने हेतु, क्योंकि ″एक जीवन जो दूसरों के साथ नहीं बांटा गया है मालूम नहीं कि वह किस काम आयेगा? शायद संग्रहालय के काम आये, पर मैं नहीं सोचता हूँ कि आप में से कोई संग्रहालय में रखा जाना पसंद करेंगे।″

स्कोलास ऑकरेनत्स फाऊँडेशन की शुरूआत संत पापा फ्राँसिस ने 13 अगस्त 2013 को की थी। यह परमधर्मपीठ की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसका प्रमुख उद्देश्य है शिक्षा, तकनीकी, कला एवं खेल के द्वारा, शांति हेतु मुलाकात की संस्कृति को प्रोत्साहन देना।

इसका नया कार्यालय जिसका उद्घाटन संत पापा ने शुक्रवार को किया वह संत कलिस्तुस पैलेस में है तथा यह इटली में फाँडेशन के आधार के रूप में कार्य करेगा। फाँडेशन अब 190 देशों में फैला है जिसमें सभी धर्मों के आधे मिलियन विद्यार्थी एवं सार्वजनिक तथा निजी स्कूल जुड़े हैं। इस आंदोलन की शुरूआत 20 साल पहले अर्जेंटीना में बोयनोस आयरेस के महाधर्माध्यक्ष जोर्ज मारियो बेरगोलियो ने की थी जो अभी के संत पापा हैं।


(Usha Tirkey)

तेहरान में आतंकी हमले के शिकार लोगों के प्रति संत पापा की सहानुभूति

In Church on June 10, 2017 at 3:30 pm

 

वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 जून 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने ईरान के तेहरान में बुधवार को हुए आतंकी हमले के शिकार लोगों को एक संदेश भेजकर अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रकट किया।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने, संत पापा की ओर से शुक्रवार को प्रेषित एक तार संदेश में कहा कि हिंसा के इस मूर्खता पूर्ण एवं गंभीर कृत्य पर संत पापा शोकित हैं।

उन्होंने लिखा कि संत पापा अपनी हार्दिक सांत्वना के साथ, उन दिवंगत आत्माओं को सर्वशक्तिमान एवं करुणामय ईश्वर को समर्पित करते हैं।

वे ईरान के लोगों को अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देते हैं।

7 जून को ईरान की राजधानी तेहरान में संसद के भीतर और ईरान के पूर्व धार्मिक नेता अयातुल्लाह ख़ुमैनी की मज़ार पर हुई गोलीबारी में 17 लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है। 9 जून को तेहरान के हज़ारों लोगों ने मृतकों के अंतिम संस्कार में भाग लिया।


(Usha Tirkey)

सभी समस्याओं का समाधान ईश्वर द्वारा सम्भव, धर्माध्यक्ष डाबरे

In Church on June 10, 2017 at 3:29 pm

पुणे, शनिवार, 10 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस द्वारा 8 जून को, शांति हेतु एक मिनट की प्रार्थना की पहल दिखलाता है कि विश्व की सभी समस्याओं का समाधान ईश्वर द्वारा ही सम्भव है जो मानव प्रयासों एवं उपक्रमों द्वारा अपनी योजनाओं को पूर्ण करते हैं। शांति के लिए भी यह आवश्यक है। यह बात रोम में पुणे के धर्माध्यक्ष थॉमस डाबरे ने कही।

63 वर्षीय धर्माध्यक्ष ने 7- 9 जून तक वाटिकन में चल रहे अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति की आम सभा में भाग लिया जहाँ उन्होंने विश्व भाईचारा की शिक्षा में महिलाओं की भूमिका पर बहस की।

उन्होंने कहा, ″हमें शांति के प्रयासों को पूरा करने के लिए अनवरत प्रार्थना करने की जरूरत है जो दिखाता है कि हम ईश्वर पर निर्भर करते हैं।″

वाटिकन में आमदर्शन समारोह के अंत में संत पापा ने विश्वासियों को प्रोत्साहन दिया था कि वे शांति हेतु बृहस्पतिवार 8 जून को 1 बजे, एक मिनट की प्रार्थना करें। यह तिथि फिलीस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास तथा ईस्राएल के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय शिमोन पेरेस के संत पापा फ्राँसिस के साथ, वाटिकन के उद्यान में 2014 को की गयी मुलाकात की तीसरी वर्षगाँठ थी।

संत पापा ने अपील में कहा था, ″हमारे समय में शांति हेतु प्रार्थना करने की अति आवश्यकता है- ख्रीस्तीय, यहूदी एवं मुसलमानों – के लिए शांति की।″

धर्माध्यक्ष डाबरे ने कहा कि संत पापा की इस अपील को न केवल भारत एवं विश्व भर के काथलिकों ने सुना है किन्तु सभी धर्मों एवं संस्कृति के लोगों ने बड़ी श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ सुना है।”

सभा के बारे जानकारी देते हुए धर्माध्यक्ष ने संत पापा के हवाले से कहा कि महान विचारों को यदि कार्यों एवं ठोस रूप में परिणत नहीं किया जाए तो यह व्यर्थ है। महिलाओं के मूल्यों को धर्माध्यक्ष डाबरे ने उत्तम कहा किन्तु उन्हें भी कार्य रूप दिये जाने की आवश्यकता बतलायी जिससे कि जमीनी हकीकत बदला जा सके।

बलत्कार एवं अपमान द्वारा भारत में महिलाओं की प्रतिष्ठा के हनन की बढ़ती परिस्थिति पर किये गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, सांसदों, सरकार और पुलिस के प्रयासों के आगे एक चीज की आवश्यकता है, मन और दिल के प्रशिक्षण (फोरमेशन) की आवश्यकता ताकि व्यक्ति अपना सोच बदल सके एवं यह समझ सके कि महिलाएँ भी मनुष्य हैं उनके शरीर शोषित, हत्या एवं फेंके जाने के लिए नहीं हैं।


(Usha Tirkey)

उदारता का महत्व

In Church on June 10, 2017 at 3:27 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 10 जून को उदारता के सदगुण में बढने का प्रोत्साहन देते हुए उसके महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, ″जीवन केवल अन्यों के जीवन की उदारता के कारण जीवित रह सकता है।″


(Usha Tirkey)

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