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सभी समस्याओं का समाधान ईश्वर द्वारा सम्भव, धर्माध्यक्ष डाबरे

In Church on June 10, 2017 at 3:29 pm

पुणे, शनिवार, 10 जून 2017 (वीआर सेदोक): संत पापा फ्राँसिस द्वारा 8 जून को, शांति हेतु एक मिनट की प्रार्थना की पहल दिखलाता है कि विश्व की सभी समस्याओं का समाधान ईश्वर द्वारा ही सम्भव है जो मानव प्रयासों एवं उपक्रमों द्वारा अपनी योजनाओं को पूर्ण करते हैं। शांति के लिए भी यह आवश्यक है। यह बात रोम में पुणे के धर्माध्यक्ष थॉमस डाबरे ने कही।

63 वर्षीय धर्माध्यक्ष ने 7- 9 जून तक वाटिकन में चल रहे अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति की आम सभा में भाग लिया जहाँ उन्होंने विश्व भाईचारा की शिक्षा में महिलाओं की भूमिका पर बहस की।

उन्होंने कहा, ″हमें शांति के प्रयासों को पूरा करने के लिए अनवरत प्रार्थना करने की जरूरत है जो दिखाता है कि हम ईश्वर पर निर्भर करते हैं।″

वाटिकन में आमदर्शन समारोह के अंत में संत पापा ने विश्वासियों को प्रोत्साहन दिया था कि वे शांति हेतु बृहस्पतिवार 8 जून को 1 बजे, एक मिनट की प्रार्थना करें। यह तिथि फिलीस्तीन के राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास तथा ईस्राएल के पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय शिमोन पेरेस के संत पापा फ्राँसिस के साथ, वाटिकन के उद्यान में 2014 को की गयी मुलाकात की तीसरी वर्षगाँठ थी।

संत पापा ने अपील में कहा था, ″हमारे समय में शांति हेतु प्रार्थना करने की अति आवश्यकता है- ख्रीस्तीय, यहूदी एवं मुसलमानों – के लिए शांति की।″

धर्माध्यक्ष डाबरे ने कहा कि संत पापा की इस अपील को न केवल भारत एवं विश्व भर के काथलिकों ने सुना है किन्तु सभी धर्मों एवं संस्कृति के लोगों ने बड़ी श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ सुना है।”

सभा के बारे जानकारी देते हुए धर्माध्यक्ष ने संत पापा के हवाले से कहा कि महान विचारों को यदि कार्यों एवं ठोस रूप में परिणत नहीं किया जाए तो यह व्यर्थ है। महिलाओं के मूल्यों को धर्माध्यक्ष डाबरे ने उत्तम कहा किन्तु उन्हें भी कार्य रूप दिये जाने की आवश्यकता बतलायी जिससे कि जमीनी हकीकत बदला जा सके।

बलत्कार एवं अपमान द्वारा भारत में महिलाओं की प्रतिष्ठा के हनन की बढ़ती परिस्थिति पर किये गये सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, सांसदों, सरकार और पुलिस के प्रयासों के आगे एक चीज की आवश्यकता है, मन और दिल के प्रशिक्षण (फोरमेशन) की आवश्यकता ताकि व्यक्ति अपना सोच बदल सके एवं यह समझ सके कि महिलाएँ भी मनुष्य हैं उनके शरीर शोषित, हत्या एवं फेंके जाने के लिए नहीं हैं।


(Usha Tirkey)

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