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सांत्वना बनावटी नहीं हो सकती, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 12, 2017 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : सोमवार 12 जून को वाटिकन स्थित प्रेरितिक निवास संत मर्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस ने प्रातःकालीन ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान किया। संत पापा ने अपने प्रवचन को सांत्वना के अनुभव पर केंद्रित करते हुए कहा कि सांत्वना दूसरों की सेवा हेतु ईश्वर की ओर दिया गया एक उपहार है। कोई भी खुद को सांत्वना नहीं दे सकता है, एसा होने से आईने में देखकर खुद को सांत्वना दे देता।

सांत्वना की विशेषता पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा, ″19 लाइन के पहले पाठ पाठ में सांत्वना शब्द आठ बार आया है। उन्होंने कहा कि सांत्वना की पहली विशेषता “स्वायत्तता” नहीं है : सांत्वना का अनुभव एक आध्यात्मिक अनुभव है। इसे अनुभव करने के लिए हमें दूसरों की आवश्यकता होती है। कोई भी खुद को सांत्वना नहीं दे सकता, जो खुद को सांत्वना देता और दूसरों की आवश्यकता महसूस नहीं करता वह खुद में बंद हो जाता है और बढ़ने की सारे रास्ते बंद कर बनावटी सांत्वना से संतुष्ट रहता है।

संत पापा ने कहा, हम सुसमाचार में भी पाते हैं कि फरीसी और कानून के पंडित खुद में संतुष्टि पाते हैं। एक फरीसी ने मंदिर में यह करते हुए प्रार्थना की, ″मैं आपको धन्यवाद देता हूँ क्योंकि मैं इन लोगों के सदृश नहीं हूँ।″ संत पापा ने कहा कि यह व्यक्ति अपने आप को आइने में देखता था। अपने विचारों से बनी बनावटी आत्मा के लिए धन्यवाद दिया। येसु इस तरह के लोगों को जीवन और आत्मा की वास्तविकता दिखाना चाहते थे।

सांत्वना दूसरों की सेवा है।

संत पापा ने सांत्वना की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए कहा, ″सबसे पहले ईश्वर हमें सांत्वना का दान देते हैं ताकि हम दूसरों की सेवा में इसका प्रयोग कर सकें। सच्ची सांत्वना की दो विशेषताएँ हैं यह एक दान है तथा सेवा भी। सेवा के लिए एक निर्मल हृदय की आवश्यकता है।

आशीर्वचन में हम पाते हैं जो अपने को दीन-हीन समझते हैं वे ही धन्य और खुश हैं। वे जो शोक करते हैं, जो दयालु हैं, जो मेल कराते हैं, जो धार्मिकता के कारण अत्याचार सहते हैं इन लोगों के पास येसु सांत्वना के रुप में आते हैं और दूसरों को भी सांत्वना देने का प्रेरिताई कार्य सौंपते हैं। जबकि जिसका हृदय दूसरों के लिए बंद है, जो अपने आप से संतुष्ट हैं, उन्हें दूसरों की आवश्यकता नहीं है। उन्हें शोक करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि वे सोचते हैं कि उनके पास सांत्वना है। उन्हें अपने पापों से क्षमा मांगने की आवश्यकता महसूस नहीं होती जबकि उनका हृदय पाप के मलिन से भरा हुआ है। ऐसे लोगों का हृदय बंद है।

प्रवचन के अंत में संत पापा ने विश्वासियों को अपना हृदय प्रभु के लिए खोलने और सांत्वना का दान पाने हेतु पिता ईश्वर से प्रार्थना करने की प्रेरणा दी।


(Margaret Sumita Minj)

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त्रित्वमय उदारता का एक उदाहरण है धन्य इताला मेला

In Church on June 12, 2017 at 3:30 pm

 

रोम, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : ″ख्रीस्तीय समुदाय, सभी मानवीय सीमाओं के साथ पवित्र त्रित्व की सुन्दरता और उदारता में सहभागिता का प्रतिबिंब बन सकता है, लेकिन इसके लिए ईश्वर की दया और क्षमा का अनुभव जरूरी है। कल ला स्पेज़िया में इताला मेला को धन्य घोषित किया गया।”

उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 11जून को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हजारों तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के पश्चात कही। शनिवार,10 जून को इटली के ला स्पेज़िया में इताला मेला (1904-1957) को धन्य घोषित किया गया। संत पापा ने कहा, “वह विश्वास से दूर एक नास्तिक परिवार में बड़ी हुई। अपनी जवानी में उन्होंने एक नास्तिक होने का दावा किया था, लेकिन एक गहन आध्यात्मिक अनुभव के बाद उसका मन-परिवर्तन हुआ। उसने काथलिक शिक्षा हासिल की। उसके बाद वह एक बेनिदिक्तिन ओब्लेट बन गई और उसने एक रहस्यमय आधियात्मिक यात्रा की जो पवित्र त्रित्व के रहस्य पर केन्द्रित किया था, जिसका त्योहार आज हम विशेष रूप से मना रहे हैं।″

धन्य इताला मेला ख्रीस्तीय जीवन में त्रित्वमय ईश्वर की उपस्थिति को मजबूत करने हेतु अपना सारा जीवन समर्पित कर दिया, साथ ही वे लोकधर्मियों के लिए सामाजिक नवीकरण का एक उदाहरण बन गई।


(Margaret Sumita Minj)

मचेराता से लोरेटो के 39वे पैदल तीर्थयात्रियों को संत पापा का संदेश

In Church on June 12, 2017 at 3:29 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : शनिवार 10 जून को इटली के मरेचाता से लोरेटो तक 39वां पैदल तीर्थयात्रा का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर संत पापा ने तीर्थयात्रियों को संदेश दिया। संत पापा ने कहा, ″इस समय जब आप सभी अपनी पैदल तीर्थयात्रा शुरु करने वाले हैं, मैं आप सभी को तीर्थयात्रा की शुभकामनाएँ देता हूँ। तीर्थयात्रा का विषय एक बहुत ही सुंदर वाक्यांश है: “क्या तुम मुझे प्यार करते हो?”  लेकिन एक सड़के के दो किनारों के समान इस वाक्य का दो तरह से अर्थ निकाला जा सकता है। मैं येसु से पूछ सकता हूँ : “क्या आप मुझे प्यार करते हैं?” और वे मुझसे पूछते हैं: “क्या तुम मुझे प्यार करते हो? ”

मेरी शुभकामना है कि आज शाम तीर्थयात्रा के दैरान आप में से हरेक येसु की वाणी “क्या तुम मुझे प्यार करते हो?  को सुन सकें। आप सुनिये और येसु को जवाब दीजिए, फिर आप येसु से भी पूछिये “येसु क्या आप मुझे प्यार करते हैं?” और येसु का जवाब अपने हृदय में सुनें।

संत पापा ने कहा,″मैं माता मरियम के संरक्षण में रखते हुए सस्नेह आलिंगन के साथ तीर्थयात्रा की बहुत सारी शुभकामनाएँ देता हूँ।″

39वाँ पैदल तीर्थयात्रा माचेराता के हेलविया रेचिना स्टेडियम में पवित्र युखारीस्तीय समारोह के पश्चात रात्रि साढ़े आठ बजे शुरु हुई। ख्रीस्तयाग के मुख्य अधिष्ठाता लोकधर्मी, परिवार तथा जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कारडिनल केविन फार्रेल थे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने अहिरा धर्मप्रांत के प्रतिनिधियों से मुलाकात की

In Church on June 12, 2017 at 3:27 pm

रोम, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में 8 जून को नाईजीरिया के अहिरा धर्मप्रांत के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर कहा कि उनके लिए नियुक्त धर्माध्यक्ष को इनकार करने पर उन्हें “गहरा दुःख” पहुँचा था।

बैठक में संत पापा ने स्पष्ट रूप से अनुरोध किया कि अहिरा धर्मप्रांत की कलीसिया धर्माध्यक्ष पीटर एबेरे ओक्पालेके को स्वीकार करे जिसे सन् 2012 में संत पापा बेनेडिक्ट द्वारा अहिरा के लिए नियुक्त किया गया था।

कठोर भाषा के लिए क्षमा मांगते हुए संत पापा ने कहा कि धर्माध्यक्ष को धर्मप्रांत में आने से रोकने पर अहिरा की कलीसिया विधवा के समान है। उन्होंने संत मत्ती के उस दृष्टांत को याद किया जहाँ हत्यारे किरायेदार मालिक की विरासत को हड़पना चाहते थे।”इस वर्तमान परिस्थिति में, अहीरा धर्मप्रांत , दूल्हे के बिना है, वह फलदायी नहीं हो सकती क्योंकि उसने जन्म देने की क्षमता को खो दिया है। धर्माध्यक्ष पीटर एबेरे द्वारा अहिरा धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष के रुप पदभार लेने का विरोध करने वाला कोई भी व्यक्ति कलीसिया को नष्ट करना चाहता है।” संत पापा ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में जहाँ कलीसिया दुःख सह रही है, वे तटस्थ नहीं रह सकते।

धर्मप्रांत की इस परिस्थिति के प्रत्युत्तर में संत पापा ने कहा,″एक महीने के अंदर अहिरा धर्मप्रांत का हर पुरोहित चाहे वह धर्मप्रांत में या विदेश में काम करता हो माफी मांगते हुए मुझे एक पत्र लिखे। सभी को व्यक्तिगत रूप से लिखना चाहिए इस दुःख को हम सभी को मिलकर सहन करना चाहिए।”

संत पापा ने कहा, इन तीस दिनों के अंदर अर्थात आज से लेकर 9 जुलाई तक जो भी ऐसा करने में विफल रहता है उसे धार्मिक अनुष्ठान से निलंबित किया जाएगा और अपने वर्तमान कार्यालय से भी पदच्युक्त होना पड़ेगा।”

उन्होंने कहा, इस तरह की कार्रवाई आवश्यक थी, “क्योंकि ईश्वर के लोगों को आघात पहुँचा है। येसु हमें याद दिलाते हैं कि जो भी अपवाद का कारण बनता है उसे परिणाम भुगतना होगा। हो सकता है किसी ने कलीसियाई समुदाय को इतना भारी दुःख पहुंचाने की पूरी जानकारी बिना हेर-फेर कर दिया हो।

अबुजा महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष एवं अहीरा के प्रेरितिक प्रशासक कार्डिनल जोन ओनायेकान ने संत पापा को धन्यवाद दिया। उनकी टिप्पणी के बाद, सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिनल फर्नांडो फिलोनी ने संत पापा से आग्रह किया कि अहीरा की परिस्थिति सामान्य हो जाने पर अहीरा धर्मप्रांत की कलीसिया अपने धर्माध्यक्ष के साथ क्या रोम की तीर्थयात्रा कर उनसे मिलने आ सकती है। संत पापा ने उनके अनुरोध को स्वीकार किया।


(Margaret Sumita Minj)

क्वीरीनाले में उपस्थित बच्चों को संत पापा फ्राँसिस का संदेश

In Church on June 12, 2017 at 3:26 pm

बच्चों से मुलाकात करते हुए संत पापा फ्राँसिस – ANSA

12/06/2017 16:18

रोम, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : मुझे याद है कि अल्पाइन पहाड़ चढ़ने वाले इस गाने को गाते हैं, “पहाड़ चढ़ने की कला में सफलता गिरकर पड़े रहने से नहीं मिलती पर गिरकर उठने और आगे बढ़ने से मिलती है। गिरकर उठो और आगे बढ़ते चलो। आगे और आगे..” उक्त बातें संत पापा फ्राँसिस शनिवार 10 जून को रोम के राष्ट्रपति भवन, क्वीरीनाले की वाटिका में मध्य इटली के भुकम्प प्रभावित क्षेत्रों से आये करीब 200 बच्चों से मुलाकात कर कही।

संत पापा ने अपने अभिवादन में कहा कि वे इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को देखकर बहुत खुश हैं संत पापा ने बच्चों की उपस्थिति, उनके गाने और उनके साहस के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि साहस के साथ आगे बढ़ते चलो। आगे बढ़ते जाना भी एक कला है। यह सच है कि जीवन में बहुत सारी कठिनाईयां आती हैं। आप सबको भूकंप की वजह से बहुत दुःख सहना पड़ा है पर अब धीरज के साथ आगे बढ़ना है।

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस 10 जून को रोम के क्वीरीनाले राष्ट्रपति भवन में इटली के राष्ट्रपति सरजो मतरेल्ला के साथ आधिकारिक मुलाकात की। संत पापा के साथ वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परेलीन और प्रतिनिधि मंडल भी उपस्थित थे।


(Margaret Sumita Minj)

साधन में गरीब और प्यार में अमीर कलीसिया प्रकाशमान है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on June 12, 2017 at 3:25 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 जून 2017 (आरईआई) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर कलीसिया की अच्छाईयों पर प्रकाश डाला है।

संत पापा ने संदेश में लिखा, ″कलीसिया तब प्रकाशमान होती है जब वह प्रेरिताई कार्य करती, दूसरों का स्वागत करती, स्वतंत्र, विश्वासी, साधन में गरीब और प्यार में अमीर होती है।″


(Margaret Sumita Minj)

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