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माता-पिता का प्रेम ईश्वर का प्रेम

In Church on June 14, 2017 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

हम प्रेम के बिना अपने आप में नहीं रह सकते हैं। हममें से हर कोई प्रेम पाने की चाह रखता है। हम बहुधा अपने में इस सोच के शिकार हो जाते कि जब तक हम अपने में मजबूत, सुन्दर और आकर्षक न हो तो कोई हमें प्रेम या हमारी चिंता नहीं करेगा। कई लोग हैं जो आज भी अपने इस बाह्य खालीपन को भरने का प्रयास करते हैं मानो यह अति आवश्यकता हो। संत पापा ने कहा कि क्या हम एक ऐसे संसार की कल्पना कर सकते हैं जहाँ लोग एक-दूसरे को अपनी ओर आकर्षित होने की कामना करते हों जबकि दूसरी ओर ऐसा कोई नहीं है जो स्वेच्छा और स्वतंत्रता पूर्वक किसी को प्रेम करने की चाह रखता हो। यह देखने में मानव संसार प्रतीत होता हो लेकिन यह वास्तव में एक नारकीय स्थिति है। मानव के जीवन में अकेलेपन की स्थिति उसके जीवन में बहुत से अहंकारों को जन्म देती है। इस अवर्णनीय व्यवहार के पीछे उसके जेहन में एक प्रश्न उठता है कि क्या मैं एक नाम से बुलाया नहीं जा सकता हूँॽ

एक युवा के रुप में प्रेम नहीं किये जाने का एहसास हिंसा के भाव उत्पन्न करता है। मानव समाज में बहुत सारी सामाजिक बुराइयों और घृणा के पीछे एक बात यह होती है कि कोई व्यक्ति समाज में अपनी एक पहचान बना पाने में अपने को असमर्थ पाता है। बच्चे अपने में खराब नहीं होते और न ही वयस्क अपने में बुरे होते हैं लेकिन हम उनमें असंतुष्टि के भाव को पाते हैं। यह प्रेम के आदान-प्रदान की कमी है जो हमें अपने जीवन में नाखुश करती है। मानव का जीवन नज़रों का विनिमय है, यदि कोई हमें देख कर मुसकुराता है तो हम उस मुस्कान का प्रति उत्तर स्वेच्छा से देते हैं जो हमें अपने बंद उदासी से बाहर निकलने में मदद करता है।

संत पापा ने कहा कि इस संदर्भ में ईश्वर अपनी ओर से पहल करते और हमें अपने शर्त हीन प्रेम की निशानी प्रदान करते हैं। वे हमें इसलिए प्रेम नहीं करते कि हम अपने में प्रेम के योग्य है। वे हमें प्रेम करते हैं क्योंकि वे स्वयं प्रेम हैं, उनका स्वभाव ही प्रेम करना है। संत पौलुस ईश्वर के प्रेम की चर्चा करते हुए रोमियों के नाम अपने पत्र में लिखते हैं, “हम पापी ही थे, जब मसीह हमारे लिए मर गये थे। इस से ईश्वर ने हमारे प्रति अपने प्रेम का प्रमाण दिया” (रोमि.5.8)। हम ऊड़ाव पुत्र के समान पिता के प्रेम से “दूर” थे। “वह दूर ही था कि पिता ने उसे देख लिया और दया से द्रवित हो उठा…”(लूका. 15.20)। हमारे प्रेम के कारण ईश्वर अपने आप से बार निकलते और हमें खोजने आते हैं। वे हमारी गलतियों और पापों में पड़े रहने के बावजूद हमें प्रेम करते हैं।

संत पापा ने कहा कि माता-पिता के सिवाय कौन हमें ऐसा प्रेम करता है। माता अपने बेटे को तब भी प्रेम करती है जब वह कैदखाने में बंद रहता है। वह अपने में शर्म का अनुभव नहीं करती क्योंकि वह उसका पुत्र है। संत पापा ने कहा कि माता-पिता को अपनी संतान के कैदखाने में बंद होने के कारण कितना दुःख और अपमान का सामना करना होता है लेकिन वे अपनी संतान को प्रेम करना नहीं छोड़ते हैं। यह माता-पिता का प्रेम है जो हमें ईश्वर के प्रेम को समझने में मदद करता है। एक माँ मानवीय न्याय के निराकरण की माँग नहीं करती क्योंकि हर एक गलती की सज़ा होती है लेकिन वह अपने बेटे को दुःख की स्थिति में भी प्रेम करना नहीं छोड़ती है। उसके दोषी होने पर भी वह उससे प्रेम करती है। ईश्वर हमारे साथ भी ऐसा ही करते हैं क्योंकि हम उनकी प्रिय संतान हैं। वे हमें हमारी गलतियों के लिए सज़ा और श्राप नहीं देते हैं। यह हमारे लिए इस सत्य को प्रकट करता है कि प्रेम के इस संबंध में हम पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा में सदैव कृपा की दशा में रहते हैं। येसु ख्रीस्त में हम सभी प्रेम किये गये हैं, हम प्रिय हैं और पिता हमारी चिंता करते हैं। संत पापा ने कहा कि कोई तो है जो हमें मौलिक सुन्दरता से विभूषित करता है जिसे कोई भी पाप हम से पूर्ण रूपेण नहीं छीन सकता है। हम सदैव ईश्वर की आंखों से सामने रहते हैं जहाँ हमारे लिए जीवन की जलधारा प्रवाहित होती है। येसु ने समारी स्त्री से कहा, “जो पानी मैं तुम्हें दूंगा वह तुम में अनंत जीवन का स्रोत बन जायेगा (यो.4.14)

एक नाखुश व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन करने की दवा क्या हैॽ संत पापा ने कहा, एक व्यक्ति जो खुश नहीं है उसके जीवन को हम कैसे बदल सकते हैंॽ विश्वासी समुदाय ने कहा कि प्रेम के द्वारा। संत पापा ने विश्वासियों के जवाब हेतु धन्यवाद अदा करते हुए कहा कि हमें अपने प्रेम करने वाले को सर्वप्रथम गले लगाना है जिससे वे महत्वपूर्ण होने की अनुभूति प्राप्त करें और अपने दुःख से बाहर निकल सकें। प्रेम हमसे प्रेम की मांग करता है जो घृणा से अधिक शक्तिशाली है क्योंकि घृणा मृत्यु की ओर ले चलता है। येसु हमारे लिए मृत नहीं हैं वरन् वे हमारे लिए जीवित हैं उन्होंने हमें पापों से मुक्त किया है। यह हमारे लिए पुनरुत्थान का समय है जो हमें अपने निराश भरे क्षणों से बाहर निकलने को कहता, विशेषकर, उन्हें जो अपने में तीन दिनों से अधिक कब्र में पड़े हुए हैं। यह हमारे लिए आशा का संदेश और उपहार है कि पिता हम सभों को प्रेम करते हैं चाहे हम जैसे भी हों।
इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया और उन्हें खुशी और शांति की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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संत पापा ने आमदर्शन हेतु आये बीमारों से मुलाकात की

In Church on June 14, 2017 at 3:20 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में बुधवारीय आमदर्शन समारोह के पहले संत पापा पौल छठे सभागार में आमदर्शन हेतु आये बीमारों और विकलांगों से मुलाकात की। उनका अभिवादन कर संत पापा ने कहा,″आज आमदर्शन दो स्थानों में किया जाएगा पर हम बड़े पर्दे के माध्यम से एक दूसरे से जुड़े रहेंगे। आप यहाँ रहकर आराम से आमदर्शन समारोह में भाग ले पाएंगे। बाहर प्रांगण में बहुत गर्मी है।″

संत पापा ने उन्हें आमदर्शन समारोह में आने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि वे बाहर बैठे तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ एक होकर ध्यानपूर्वक उनकी बातों के सुनें जो वे बाहर प्रांगण में कहने जा रहे हैं।

संत पापा ने कहा कि हमारी कलीसिया ही एसी है एक दल यहाँ तो दूसरा दल वहाँ और एक अन्य दल वहाँ… पर सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। संत पापा ने पूछा, कौन कलीसिया को जोड़ता है? स्वंय इसका जवाव देते हुए कहा पवित्र आत्मा। आइये, हम प्रार्थना करें कि इस आमदर्शन समारोह में पवित्र आत्मा हमें आपस में जोड़े रखे। संत पापा ने ‘आओ पवित्र आत्मा’ प्रार्थना का पाठ किया इसके बाद संत पापा ने ‘हे पिता हमारे’ तथा ‘प्रणाम मरिया’ प्रार्थना की अगुवाई की।

संत पापा ने उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया और आमदर्शन समारोह के लिए संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण की ओर प्रस्थान किये।

समारोह के दौरान संत पापा ने बीमार भाई-बहने को संबोधित करते हुए कहा कि वे पिता ईश्वर से अपनी जरुरतों के लिए प्रार्थना करने से कभी न थकें।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा द्वारा जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकाडमी के नए सदस्यों का चुनाव

In Church on June 14, 2017 at 3:19 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) : मंगलवार 13 जून को संत पापा फ्राँसिस ने विभिन्न देशों से जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकाडमी के 45 सामान्य सदस्यों और 5 मानद सदस्यों को नियुक्त किया।

संत पापा फ्राँसिस ने 45 साधारण सदस्यों में भारत से फादर टोमी थोमस आई.एम.एस को नियुक्त किया। फादर टोमी भारतीय काथलिक स्वास्थ्य सम्मेलन, सिकंदराबाद के महानिदेशक हैं।

जीवन के लिए परमधर्मपीठीय अकाडमी संत पापा जॉन पॉल द्वितीय द्वारा स्थापित किया गया था।

इस अकाडमी की शुरुआत विशेष रूप से ख्रीस्तीय नैतिकता के आधार पर जैवनैतिकता के बारे में मानव जीवन की रक्षा और संवर्धन के लिए की गई थी। इस अकाडमी के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष विन्सेंट पालिया हैं।


(Margaret Sumita Minj)

प्राधिधर्माध्यक्ष बारथोलोमेओ के नाम दिवस पर संत पापा फ्राँसिस की शुभकामनाएँ

In Church on June 14, 2017 at 3:17 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) : कुस्तुनतुनिया के प्राधिधर्माध्यक्ष बारथोलोमेओ प्रथम के नाम दिवस पर संत पापा फ्राँसिस ने अपने हाथों से लिखकर शुभकामनाएँ भेजीं। पूर्वी रीति की कलीसियाएँ 11 जून को प्रेरित संत बारथोलोमी का त्योहार मनाती हैं।

संत पापा ने लिखा,″ सभी स्तरों पर शांति, सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने के लिए काथलिक और ऑर्थोडोक्स कलीसिया एक साथ मिलकर काम करती रहे।″

हाल ही में की गई मिस्र की यात्रा की याद करते हुए संत पापा ने लिखा,″ “वहाँ के ख्रीस्तीयों ने विश्वास और भाईचारे का जो संबंध जोड़ा है यह पूरे विश्व के लिए आशा और सांत्वना का संकेत है।”

प्राधिधर्माध्यक्ष को संबोधित कर उन्होंने लिखा, ″ख्रीस्त में मेरे प्रिय भाई″, मैं किस तरह से आपको शुभकामनाएँ दूँ। परमाध्यक्ष ने ऑरथोडोक्स के एक पुराने गाने को आपके लिए याद किया है। ″कलीसिया के लिए आप एक महान सुबह का तारा के रूप में प्रकट हुए हैं; आपके उपदेश प्रकाशमान और विस्मयकारी चमत्कार हैं, आपने जिन्हें प्रबुद्ध किया वे आपकी प्रशंसा करते हैं, प्रभु के प्रेरित, हे पवित्र बर्थोलोमेओ।”


(Margaret Sumita Minj)

वाटिकन द्वारा ‘प्रवास’ पर संगोष्ठी की मेजबानी

In Church on June 14, 2017 at 3:15 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) : वाटिकन में 12 और 13 जून को ‘प्रवासियों और शरणार्थियों’ पर सेमिनार का आयोजन किया गया था जिसमें 40 देशों के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के प्रतिनिधि धर्माध्यक्षों और विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। 2018 में संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक अंतरसरकारी महासम्मेलन होने के पहले सेमिनार का आयोजन किया गया जिससे कि विश्व के राजनेताओं के सामने प्रस्तुत करने हेतु एक दस्तावेज तैयार किया जा सके।

दस्तावेज़ चार सिद्धांतों पर आधारित है जिसे संत पापा फ्राँसिस ने खुद वर्तमान प्रवास समस्या के प्रति काथलिकों की प्रतिक्रिया के सारांश के रुप में नामित किया है, वे हैः स्वागत, संरक्षण, संवर्धन और एकीकरण।

वाटिकन के नए कार्यालय सम्पूर्ण मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठ से संलग्न एक नये परिषद प्रवासी और शरणार्थी विभाग द्वारा सेमिनार का आयोजन किया गया था।

एशियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के मानव विकास कार्यालय के पूर्व कार्यकारी सचिव पाकिस्तान के फादर बोनी मेंदेस ने भी सम्मेलन में भाग लिया। वाटिकन रेडियो की फिलिप्पा के साथ साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि सेमिनार में प्रवासियों और शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के मानव अधिकार पर चर्चा की गई जो विभिन्न कारणों से दूसरे देशों में रहते हैं। उनके लिए एक अधिकार पत्र बहुत महत्वपूर्ण है जिससे कि वे विशेषकर बच्चों और महिलाओं को ज्यादा तकलीफ न हो। उन्होंने कहा कि 2018 में वैश्विक कम्पैक्ट के विचार-विमर्श के पूर्व यह एक प्रारंभिक चरण है। इसी तरह की तैयारी काथलिक विशेषज्ञों ने सन् 2015 में पेरिस सी.ओ.पी. 21 के जलवायु परिवर्तन के लिए भी किया था।

फादर बोनी ने कहा कि इस मुद्दे पर संत पापा फ्राँसिस की बातों का, एशिया में विशेषकर मुस्लिम नेतागण “बहुत सम्मान करते” हैं। वे “लोगों के बीच लोकप्रिय” है, पर काथलिकों की आवाज सरकारों और राजनेताओं के स्तर पर सुनाना कठिन है। दस्तावेज में सरकारों से अर्ज की गई है कि वे प्रवास पर “राष्ट्रीय सुरक्षा परिप्रेक्ष्य” के बदले “मानव सुरक्षा परिप्रेक्ष्य” को अपनायें। ये दोनों एक-दूसरे का विरोधाभास नहीं पर एक दूसरे के साथ सहयोग के रुप में देखा जाना चाहिए।


(Margaret Sumita Minj)

हिंसा के खिलाफ और अधिकारों व सम्मान के लिए ख्रीस्तीय महिलाऐं

In Church on June 14, 2017 at 3:13 pm

ढाका, बुधवार, 14 जून 2017 (फीदेस) : “बांग्लादेश में महिलाऐं हिंसा और प्रताड़ना में जीवन बिताती हैं और यह उन्हें उनकी गरिमा और मनुष्य के रूप में अधिकारों के उल्लंघन को महसूस करने से रोकता है। प्रतिदिन की प्रताड़ना उन्हें शिक्षा, काम और अन्य अवसरों से रोकता है।” उक्त बातें बांग्लादेशी ख्रीस्तीय कार्यकर्ता मरिया हलदार ने फीदेस से कहा, जिसने हाल ही में ढाका में “हिंसा के खिलाफ महिलाऐं” विषय पर हो रहे सेमिनार में भाग लिया।

“बांग्लादेश में महिलाओं पर हिंसा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संदर्भ में निहित है और सरकार के ढांचे, सामाजिक संस्थाऐं और कानून इसे जारी रखने के लिए मदद करते हैं। बांग्लादेश में महिलाओं पर अपने ही पतियों द्वारा हिंसा, घरेलू हिंसा, नाबालिगों के दुरुपयोग, यौन उत्पीड़न, बाल-विवाह, मानव तस्करी, शिशु मृत्यु दर, हत्या और दहेज के कारण हिंसा शामिल हैं।

ढाका में सेमिनार का आयोजन एशिया के ख्रीस्तीय सम्मेलन ने बांग्लादेशी कलीसियाओं के राष्ट्रीय परिषद के साथ मिलकर किया। नागर समाज के बहुत से कार्यकर्ताओं और स्थानीय ख्रीस्तीय समुदायों ने देश में लिंग भेद और हिंसा समाप्त करने के लिए कानून को लागू करने हेतु सरकार से मांग की। “कई सरकारी नीतियाँ और सेवाएँ लिंग भेद की प्रवृत्ति को प्रतिबिंबित करती हैं। हिंसा के विभिन्न रूपों के खिलाफ कानूनी सुरक्षा के बावजूद न्यायिक व्यवस्था को अभी भी उन बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है जो सुधार में बाधक हैं।”

हिंसा के खिलाफ एक्यूमेनिकल महिलाओं की कार्रवाई संगठन की प्रधान सुनीला अमार ने फीदेस को बताया, कि जबतक महिलाओं पर हिंसा जारी रहेगा एशिया के किसी भी देश में शांति कायम नहीं की जा सकती। यह लड़ाई नारीवाद या वैचारिक नहीं है, यह कानून और मानवता को संदर्भित करता है। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि संयुक्त राष्ट्र के टिकाउ विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए लैंगिक समानता और महिलाओं की पदोन्नति भी शामिल है। इसलिए वे कलीसियाओं के नेताओं से आग्रह करती हैं कि वे इस आवश्यक प्रतिबद्धता के प्रति जागरुक बनें तथा सार्वजनिक संस्थानों और सरकारों को संवेदनशील बनाने की चुनौती को स्वीकार करें।


(Margaret Sumita Minj)

येसु ने हमारे सभी दुःखों को अपने उपर ले लिया, संत पापा

In Church on June 14, 2017 at 3:12 pm

 

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 जून 2017 (रेई) : आज विश्व के कई देशों में युद्ध और संघर्ष जारी है। संत पापा ने ट्वीट प्रेषित कर युद्धों के लिए उत्तरदायी लोगों के मन-परिवर्तन और युद्ध में फँसे लोगों को दुःख सहने की शक्ति पाने के लिए त्याग-तपस्या और प्रार्थना करने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने 13 जून के संदेश में लिखा, ″अपने दुःखभोग द्वारा येसु ने हमारे सभी दुःखों को अपने उपर ले लिया। वे हमारे दर्द को जानते और समझते हैं। वे हमें दिलासा देते और दुःख से उबरने की शक्ति देते हैं।”

14 जून के संदेश में उन्होंने लिखा,″विश्व में हो रहे युद्धों को समाप्त करने और मन-परिवर्तन की कृपा पाने हेतु हमें बहुत ज्यादा प्रार्थना और तपस्या की जरुरत है।″


(Margaret Sumita Minj)

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