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डॉन माजोलारी हमें गरीबों की कलीसिया बनने हेतु प्रेरित करते हैं

In Church on June 20, 2017 at 3:31 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 जून 2017 (वीआर इताली): संत पापा फ्राँसिस ने 20 जून को अपनी तीर्थयात्रा में सबसे पहले बोजोलो में डॉन प्रीमो माज़ोलारी के कब्रस्थान का दर्शन किया, तत्पश्चात वे बारबियाना जाकर डॉ. लोरेंजो मिलानी के कब्र का भी दर्शन किया।

बोजोलो के संत पेत्रुस गिरजाघर जिसके पल्ली पुरोहित डॉन प्रीमो थे, संत पापा ने कहा कि कलीसिया डॉन प्रीमो माजोलारी के समान चरवाहों को नहीं भूलती है जिन्होंने गरीबों एवं भटके हुए लोगों की खोज करने के कारण त्याग का जीवन अपनाया। कब्रस्थान पर संत पापा ने मौन प्रार्थना अर्पित की।

क्रेमोना के धर्माध्यक्ष अंतोनियो नापोलिओनी ने कहा, ″हम यहाँ सुसमाचार की उसी खुशबू का एहसास करते हैं जिसको डॉन माजोलारी ने स्वास लिया था।″ उन्होंने घोषणा की कि 18 सितम्बर से डॉन प्रीमो की धन्य घोषणा हेतु प्रकरण आरम्भ किया जाएगा।

″मैं भी संत पापा को प्यार करता हूँ।″ यही लिखा हुआ है बोजोलो के भवन में लगे बैनर पर। यह वाक्य डॉन प्रीमो माजोलारी के एक लेख का शीर्षक है जो संत पापा की यात्रा पर उपयुक्त प्रतीत हो रहा है।

यह यात्रा जो संत पापा की एक ‘व्यक्तिगत’ यात्रा थी डॉन माजोलारी पर श्रद्धा रखने वालों के लिए उत्सव में बदल गया। बोजोलो पल्ली में युवाओं ने संत पापा का स्वागत किया तथा उनके साथ समय व्यतीत किया। संत पापा ने लोगों के साथ संत पेत्रुस गिरजा में प्रवेश किया जहाँ उन्होंने माता मरियम को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा डॉन माजोलारी के समाधि स्थल पर गये एवं प्रार्थना की। यह साधारण चिन्ह था किन्तु अत्यन्त प्रभावशाली क्योंकि यह संत पेत्रुस के उतराधिकारी द्वारा ‘बेआराम’ (त्यागी) पुरोहित का आलिंगन था जिन्हें कई बार नहीं समझा गया क्योंकि वे एक नबी थे।

संत पापा ने डॉन प्रीमो माजोलारी के बारे कहा कि उन्होंने जो निशान छोड़ दिया है वह चमकदार है तथा डॉन प्रीमो ″इटली के पल्ली पुरोहित″ कहे जाते थे। उन्होंने कहा कि डॉन प्रीमो के लिखे अथवा कहे गये शब्द स्पष्ट थे तथा उसमें जीवन्त ईश्वर के शब्द होते थे। उन्होंने संस्कारों को कभी भी मात्र धर्मविधि तक सीमित नहीं किया।

डॉन माजोलारी ने भूत पर निराशा व्यक्त किये बिना विश्व में बदलाव लाना चाहा। लोगों के साथ मुलाकात की तथा ईश्वर की दया का प्रचार किया।

संत पापा ने प्रेरिताई कार्यों हेतु तीन तरह के संकेत का प्रयोग किया, पहला हाथों को गंदा नहीं करना, खिड़की से दुनिया को देखना। यह मनोभाव हमें अपने अंतःकरण की जाँच करने हेतु प्रेरित करता है। दूसरा, अलग करने की प्रवृति। उन्होंने कहा कि हम काथलिक कलीसिया को अलग रखने का प्रयास न करें। तीसरा है अलौकिकतावाद अमानवीयकरण। अध्यात्मवाद का प्रलोभन। डॉन प्रीमो दूर चले गये लोगों के पुरोहित थे क्योंकि उन्होंने हरदम उनकी खोज की।


(Usha Tirkey)

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