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पवित्रता मानव जीवन की बुलाहट

In Church on June 21, 2017 at 2:58 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 21 जून 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

हमारे बपतिस्मा के दिन संतों ने हमारे लिए प्रार्थना की। हमें में बहुत कोई उस दिन अबोध बालक के रुप में थे जिन्हें माता-पिता ने अपनी गोद में उठा रखा था। पवित्र तेल विलेपन के ठीक पहले पुरोहित पूरे समुदाय के लोगों से आहृवान करते हैं कि वे बपतिस्मा ग्रहण करने वालों के प्रार्थना करें जिससे वे दुष्ट आत्मा से लड़ने की शक्ति प्राप्त करें और उनके लिए संतों के साहचर्य हेतु विनय की जाती है। वह पहला अवसर होता है जब हम से पहले बपतिस्मा प्राप्त और अपने विश्वास में पुख्ता हुए भाई-बहन हमारा साथ देते और हमारे लिए विनय करते हैं। इब्रानियों के नाम संत पौलुस के पत्र में हमारे लिए इस साक्ष्य को प्रस्तुत किया गया है जहाँ हम विश्वासियों के एक बड़े समुदाय के साक्ष्य के बारे में सुनते हैं।(इब्रा.12.1)

संत पापा ने कहा कि ख्रीस्तीय अपने जीवन में बुराइयों से लड़ते हुए निराश नहीं होते हैं। ख्रीस्तीयता हम में एक दृढ़ विश्वास को विकसित करती है जिसके द्वारा हम इस बात पर विश्वास करते हैं कि नकारात्मक और बुरी चीज़ें हमारे जीवन में सदैव कायम नहीं रह सकती हैं। मानव के इतिहास में घृणा, मृत्यु और युद्ध अंतिम शब्द नहीं हैं। हमारे जीवन के हर क्षण में ईश्वर का साथ बना रहता है। हम अपने जीवन में विश्वासियों के साहचर्य को पाते हैं जो हमसे पहले ईश्वर के राज्य में प्रवेश कर चुके हैं। उनका जीवन हमारे लिए इस सत्य को निरूपित करता है कि ख्रीस्तीय जीवन एक अगम्य आदर्श नहीं है। हम सभी एक साथ मिलकर इस बात का साक्ष्य देते हैं कि हम अकेले नहीं हैं बल्कि कलीसिया असंख्य विश्वासियों का एक समुदाय है जो अपने में बहुत बार बेनाम हैं वे हम से पहले ईश्वरीय निवास के भागीदार बन गये हैं, जहाँ से वे पवित्र आत्मा की शक्ति से हमें सहायता प्रदान करते हैं जो पृथ्वी पर अब भी जीवन यापन कर रहे हैं।

केवल बपतिस्मा ही हमारे लिए संतों की मध्यस्था मात्र नहीं जिसके द्वारा हम ख्रीस्तीय जीवन में अग्रसर होते हैं, संत पापा ने कहा कि जब दो प्रेमी विवाह के पवित्र संस्कार में प्रवेश करते तो संतों का समुदाय पुनः एक दम्पति के रुप में उनके लिए प्रार्थना करता है। यह विनय प्रार्थना दो युवा दिलों के लिए एक दूसरे के प्रति विश्वासी बने रहने का एक स्रोत बनता है जिसके द्वारा वे वैवाहिक जीवन की “यात्रा” शुरू करते हैं। वे दम्पति जो एक-दूसरे को सचमुच प्रेम करते वे अपने में यह कहने का साहस और जज्बा रखते हैं कि वे “सदैव” एक दूसरे के बने रहेंगे। वे अपने में इस बात का अनुभव करते हैं कि उन्हें ईश्वर की कृपा और संतों की सहायता की जरूरत है। यही कारण है कि धर्मविधि के दौरान हम उनकी मध्यस्था की याचना करते हैं। संत पापा ने कहा कि हमें अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में स्वर्ग की ओर नजरें उठाने का साहस करने की जरूरत है क्योंकि बहुत से ख्रीस्तीय अपने जीवन में दुःखों और कई तरह की विपत्तियों का सामना करते हुए बपतिस्मा रूपी सफेद वस्त्र को निर्मल बनाये रखा है, उन्होंने उसे मेमने के रक्त से धोया है। (प्रेति.7.14)  ईश्वर हमें कभी नहीं छोड़ते हैं। जब-जब हमें उनकी सहायता की आवश्यकता होती तो वे अपने दूतों को भेजकर हमें अपनी सांत्वना प्रदान करते हैं। ईश्वर के इन “दूतों” को हम मानव के हृदय के रुप में पाते हैं क्योंकि ईश्वर के संत गण हमेशा गुप्त रुप में हमारे बीच निवास करते हैं।

संत पापा ने पुरोहिताभिषेक की धर्मविधि की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि ईश्वर के चुने गये लोगों के लिए भी संतों की मध्यस्था माँगी जाती है जो कि धर्मविधि का एक अति हृदयस्पर्शी क्षण होता है। अभिषेक के उम्मीदवार को मुंह के बल जमीन पर लिटा दिया जाता और विश्वासियों का पूरा समुदाय धर्माध्यक्ष की अगवाई में उसके लिए संतों से विनय-याचना करती है। एक व्यक्ति अपने प्रेरिताई के कार्य जो उसे दिया जाता है उसके बोझ से दब जाता, लेकिन वह अपने में इस बात को अनुभव करता है कि पूरा स्वर्ग उसके साथ है और ईश्वर की कृपा उसका साथ कभी नहीं छोड़ेगी और यह अनुभूति उसे एक नई ऊर्जा और एक शक्ति से तरोताजा कर देती है। संत पापा ने कहा कि हम अपने में अकेले नहीं हैं।

हम अपने में धूल हैं जो स्वर्ग की चाह रखते हैं। हमारी शक्ति क्षीण हो जाती है लेकिन कृपा का रहस्य हम ख्रीस्तियों के जीवन का मजबूत आधार बनता है। हम इस धरती के विश्वासी हैं जिन्हें येसु ख्रीस्त ने अपने जीवन काल में सदैव प्रेम किया अतः हम विश्वास, भरोसे और आशा में दुनिया के परिवर्तन की राह देखते हैं जहाँ ईश्वरीय परिपूर्णतः में कोई आंसू, दोष और दुःख नहीं रह जायेगा।

उन्होंने कहा कि ईश्वर हमें आशावान बनाये जिससे हम पवित्रता में बने रहें। यह एक बड़ा उपहार है जिसे हम संसार को दे सकते हैं। ईश्वर हमें गहरे विश्वास से भरे दे जिससे हम येसु ख्रीस्त के प्रतिरूप को दुनिया के सामने पेश कर सकें। हमारा जीवन वृंतात ईश्वरीय अभिलाषा से पूर्ण हो जिससे हम प्रेम और भ्रातृत्व की मिसाल पेश कर सकें। हम अपने जीवन में दुःख तकलीफों को वहन करें जो हमें अपने में अन्यों की थकान और बोझ को वहन करने में मदद करता है क्योंकि इसके बिना संसार आशाहीन है। इतना कहने के बाद संत पापा ने सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों अभिवादन किया और उन्हें खुशी और शांति की शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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