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5 लाख से अधिक बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता

In Church on June 22, 2017 at 4:23 pm

ईराक, बृहस्पतिवार, 22 जून 2017 (रेई): संयुक्त राष्ट्रसंघीय बाल निधि ″यूनिसेफ″ की एक रिपोर्ट अनुसार, ईराक में 2014 से लेकर अब तक 1,075 बच्चों की हत्या हुई है जबकि 2017 में 1,130 बच्चे विकृत और घायल हुए हैं। 2017 में ही कुल 4,650 बच्चे अपने परिवार से अलग अथवा अकेले छोड़ दिये गये हैं। स्कूलों में 138 एवं अस्पतालों में 58 हमले हुए हैं। 3 मिलियन बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जबकि 1.2 मिलियन बच्चे स्कूल से पूरी तरह वंचित हैं। 5 मिलियन बच्चों को तत्काल मानवीय सहायता की आवश्यकता है।

″नोवेर टू गो″ में किये गये अध्ययन से पता चलता है कि इराक में हिंसा को तेज करने के तीन साल के बाद, बच्चे अंतहीन हिंसा के चक्रों और तेजी से बढ़ती गरीबी के चक्र में फँसते जा रहे हैं।

यूनिसेफ के ईराक शाखा के प्रतिनिधि पीटर हॉकिन ने कहा, ″ईराक में बच्चे अब भी भयावह एवं कल्पना के परे हिंसा देख रहे हैं।″ वे मृत्यु के घाट उतारे जा रहे हैं, घायल हो रहे हैं एवं अपहरण के शिकार बन रहे हैं, साथ ही, हाल के सबसे क्रूर युद्ध में दूसरों को मार डालने के लिए मजबूर किये जा रहे हैं।″

पश्चिम मोसुल में परिवारों को दण्डित करने के लिए जानबूझ कर, बच्चों को निशाना बनाया जाता और उन्हें मार डाला जाता है। उन्हें हिंसा से बचकर भागने का भी अवसर नहीं दिया जाता है। दो महीनों से भी कम की अवधि में, मात्र मोसुल शहर में 23 बच्चों को मार डाला गया है एवं अनेक घायल हुए हैं।

करीब चालीस सालों से ईराक में हिंसा, युद्ध, प्रतिबंध और अस्थिरता की स्थिति है किन्तु विगत तीन सालों में ही 3 मिलियन लोग संघर्ष के कारण विस्थापित हुए जिसमें से आधी संख्या बच्चों की हैं। देश के कई हिस्से युद्ध क्षेत्र बन गये हैं। नागरिक बुनियादी ढांचे को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त या नष्ट कर दिया गया है। इराक के लगभग सभी विद्यालयों में मरम्मत की आवश्यकता है।

बच्चों के लिए अवसरों की कमी के कारण, यूनिसेफ बच्चों एवं परिवारों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सहायता प्रदान कर रही है किन्तु जारी युद्ध के अंत होने का कोई निशान नहीं दिखाई पड़ता।

यूनिसेफ ने सभी दलों से अपील की है कि संघर्ष का तत्काल अंत किया जाए। संकट से प्रभावित बच्चों को मानवीय सहायता एवं मौलिक सेवा प्रदान की जाए। बच्चों के लिए हर प्रकार की हिंसा का अंत हो जिसमें उन्हें हत्या, विघटन और युद्ध सैनिक का शिकार होना पड़ रहा है। परिवारों को सुरक्षित स्थलों में पलायन करने अथवा अपने घर की ओर लौटने हेतु स्वतंत्रता मिले। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सेवा की गुणवत्ता बढ़ायी जाए।


(Usha Tirkey)

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