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उन से नहीं डरो जो शरीर को मार डालते हैं, संत पापा

In Church on June 26, 2017 at 3:17 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 26 जून 2017 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में रविवार 25 जून को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।″

आज के सुसमाचार पाठ में (मती. 10,26-33) येसु अपने शिष्यों को बुलाने के उपरांत एवं मिशन में प्रेषित करने के लिए उन्हें निर्देश देते तथा कठिनाईयों और अत्याचार का सामना करने हेतु तैयार करते हैं।″ संत पापा ने कहा कि मिशन में जाने का अर्थ पर्यटन में जाना नहीं है। येसु अपने लोगों को चेतावनी देते हैं कि ″उन्हें अत्याचार का सामना करना पड़ेगा, और समझाते हैं कि वे मनुष्यों से नहीं डरें। ऐसा कुछ भी गुप्त नहीं है जो प्रकाश में नहीं लाया जाएगा।… मैं जो तुम से अंधेरे में कहता हूँ उसे उजाले में सुनाओ।… उन से नहीं डरो जो शरीर को मार डालते हैं किन्तु आत्मा को नहीं मार सकते। (26-28).

संत पापा ने कहा कि येसु मिशन में शिष्यों की सफलता की गारंटी नहीं देते और न ही असफलता एवं पीड़ा में आश्रय प्रदान करते हैं। हमें तिरस्कार एवं अत्याचार दोनों के लिए तैयार रहना चाहिए। यह हमें भयभीत करता है किन्तु यही सच्चाई है।

संत पापा ने कहा कि शिष्य येसु के अनुरूप अपना जीवन अर्पित करने के लिए बुलाये जाते हैं। जो लोगों के कारण अत्याचार, अस्वीकृति, परित्याग और क्रूस पर मृत्यु सहा। स्थिरता के नाम पर किसी तरह का ख्रीस्तीय मिशन सम्भव नहीं है। कठिनाईयाँ एवं चुनौतियाँ सुसमाचार प्रचार के हिस्से हैं और उन्हीं में हम हमारे विश्वास की परख करने एवं येसु के साथ हमारे संबंध को जानने का अवसर पाते हैं। इन कठिनाईयों को हमें उत्साही मिशनरी बनने की संभावना एवं पिता ईश्वर पर भरोसा में बढ़ने का अवसर मानना चाहिए। पिता जो विपत्ति काल में अपने बच्चों को नहीं छोड़ते। संसार में ख्रीस्तीय साक्ष्य में कठिनाई के समय हम नहीं भुलाये जाते बल्कि पिता प्रज्ञा के वरदान द्वार हमेशा हमारा साथ देते हैं। यही कारण है कि आज के सुसमाचार पाठ में येसु तीन बार अपने शिष्यों को आश्वासन देते हैं कि वे नहीं डरें।

आज भी कई भाई बहनों को ख्रीस्तीय होने के कारण अत्याचार का सामना करना पड़ रहा है। हम उन भाई बहनों के लिए प्रार्थना करते हैं जो हिंसा के शिकार हो रहे हैं। हम ईश्वर की स्तुति इस लिए करते हैं कि इन सबसे बावजूद वे साहस एवं निष्ठा पूर्वक अपने विश्वास का साक्ष्य दे रहे हैं। उनका यह उदाहरण हमें हर परिस्थिति में ख्रीस्त का साहस पूर्वक साक्ष्य देने से नहीं घबराने हेतु प्रेरित करता है। वास्तव में, साक्ष्य का एक रूप, शत्रुता और क्लेश का अभाव भी है।

″भेड़ियों के बीच भेड़ की तरह″, प्रभु हमारे समय में भी हमें उन लोगों के बीच प्रहरी की तरह भेज रहे हैं जो दुनिया की अकर्मण्यता से जागना नहीं चाहते हैं। जो सुसमाचार की सच्चाई को अस्वीकार करते तथा अपने लिए अल्पकालिक सच्चाई गढ़ते हैं। जब हम ऐसी पृष्ठभूमि पर जाकर रहने लगते एवं सुसमाचार की घोषणा करते हैं यह उन्हें परेशान करता और वे हमें अच्छे भाव से देख नहीं सकते। किन्तु इन सब के बावजूद प्रभु हमें एक शिष्यों के रूप में समझाते हैं कि हम नहीं डरें।

संत पापा ने कहा कि हम उनके इन शब्दों को न भूलें जब हमें कठिनाई, अत्याचार एवं दुःख का सामना करना पड़े। हम अपने हृदय में येसु की आवाज सुनें। डरो मत, आगे बढ़ो, मैं तुम्हारे साथ हूँ। उन से नहीं डरो जो तुम्हारा उपहास करते और तुम्हारे साथ दुर्व्यवहार करते हैं। जो सामने वाहवाही किन्तु पीठ पीछे सुसमाचार का उपहास करते हैं। कई लोग सामने मुस्कराते हैं किन्तु बाद में सुसमाचार का तिरस्कार करते हैं। हम सभी एक-दूसरे को जानते हैं। येसु हमें अकेला नहीं छोड़ते क्योंकि हम उनके लिए मूल्यवान हैं। हम प्रत्येक येसु के लिए महत्व रखते हैं और वे हमारा साथ देते हैं।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा, ″धन्य कुँवारी मरियम, ईश वचन की विनम्र एवं साहसी अनुगामी हैं, हमें यह समझने में मदद दे कि विश्वास के साक्ष्य में सफलता की नहीं किन्तु विश्वसनीयता एवं ख्रीस्त के प्रति निष्ठा की गिनती होती है ताकि हम हर परिस्थिति में यहाँ तक कि अत्यन्त कठिन परिस्थिति में भी उनके मिशनरी शिष्य बने रह सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत उन्होंने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, ″रोम वासियों एवं तीर्थयात्रियों मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ विशेषकर, महाधर्माध्यक्ष, धर्माध्यक्ष, पुरोहित एवं यूक्रेन की ग्रीक काथलिक कलीसिया के विश्वासियों। साथ ही साथ बेलारूस के तीर्थयात्री जो संत जोसेफ की संत घोषणा की 150वीं वर्षगाँठ मना रहे हैं। आप जब संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग समारोह में सहभागी होंगे मैं आध्यात्मिक रूप से आपके साथ सहभागी होऊँगा।

प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि आप प्रत्येक को ख्रीस्तीय साक्ष्य हेतु साहस तथा यूक्रेन की प्रिय भूमि के लिए शांति का वरदान प्रदान करे।

संत पापा ने पोलैंड, चिले, रंकागुवा तथा कुपियापो के विश्वासियों का भी अभिवादन किया। उन्होंने पौलुस के संत फ्राँसिस के मिनिमेस धर्मसमाज के तीर्थयात्रियों की भी याद की।

अंत में उन्होंने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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