Vatican Radio HIndi

संत पापा फ्राँसिस की धर्माध्यक्षीय अभिषेक की 25वीं वर्षगाँठ

In Church on June 27, 2017 at 3:02 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 जून 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने अपने धर्माध्यक्षीय अभिषेक की 25वीं वर्षगाँठ पर, 27 जून को वाटिकन स्थित पौलीन प्रार्थनालय में कार्डिनलमंडल के साथ समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए अपना आभार प्रकट किया।

प्रवचन में उन्होंने अब्राहम का ईश्वर के साथ वार्तालाप पर चिंतन किया जिसमें ईश्वर उन्हें अपना देश छोड़कर, एक अंजान देश में जाने का आदेश देते हैं। (उत्प.12:12).

संत पापा ने प्रवचन में तीन मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला- उठो, देखो, आशा।

उठो, संत पापा ने कहा हमारा एक मिशन है जिसे हमें अपने रास्ते पर पूरा करना है जिसके लिए हम स्थिर बैठ नहीं सकते। अब्राहम चलना आरम्भ किया और वह चलता ही रहा जिसको हम उसके तम्बू के माध्यम से जान सकते हैं।

दूसरा बिन्दू है, देखना- अपनी नजरें उठाओ और जहाँ तुम खड़े हो वहाँ से उत्तर और दक्षिण की ओर देखो। (उत्प.13:14). संत पापा ने कहा कि हम क्षितिज की ओर देखें, दीवार का निर्माण नहीं करें और उसको देखते हुए लगातार आगे बढ़ें।

तीसरा बिन्दु है आशा- अब्राहम ने कहा, ″प्रभु आपने मुझे बहुत कुछ दिया है किन्तु मेरा नौकर ही मेरा उत्तराधिकारी होगा। तब प्रभु ने कहा, ″वह तुम्हारा उत्तराधिकारी नहीं होगा। तुम्हारा औरस पुत्र ही तुम्हारा उत्तराधिकारी होगा। (उत्प. 15:3-4).

संत पापा ने कहा कि एक व्यक्ति जिसको अपने बूढ़ापे एवं पत्नी के बांझपन के कारण संतान की कोई आशा नहीं थी किन्तु ईश्वर के कथन पर विश्वास किया तथा आशा बनाये रखा। आशा एक क्षितिज के समान है जिसकी कोई सीमा नहीं होती।

संत पापा ने कहा कि अब्राहम यद्यपि सेवानिवृत्त होने की स्थिति में था, उम्र के कारण शारीरिक पीड़ाएँ एवं परेशानियाँ थीं किन्तु उन्होंने ऐसे समय में ही अपने विश्वास के यात्रा की शुरूआत की। संत पापा ने कहा कि अब्राहम के लिए कहा गया कथन आज हमारे लिए भी लागू होता है कि हम उठें, देखें और आशा बनाये रखें।

संत पापा ने सुसमाचार पाठ से सिमोन एवं अन्ना की याद की जिन्होंने अपने जीवन में एक बड़ा स्वप्न देखा था। जिसके कारण उन्हें येसु के दादा-दादी बनने का सौभाग्य मिला। संत पापा ने कार्डिनल मंडल से कहा कि हमारे जीवन का स्वप्न जिसे प्रभु हमसे मांगते हैं कि हम दादा बनें क्योंकि उनके पास युवाओं को देने के लिए बहुत कुछ होता है। युवा हमसे इसी चीज की आशा करते हैं। हममें निहित अच्छाईयों को बांटने में हम बंद न हों। वे हम से अनुभव तथा कामों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक स्वप्न की आशा करते हैं।

संत पापा ने प्रार्थना की कि ईश्वर सभी को स्वप्न देखने एवं दादा दादी बनने की कृपा प्रदान करे। संत पापा ने अपनी 25वीं सालगिरह पर सभी को उनकी प्रार्थनाओं के लिए धन्यवाद दिया तथा कलीसिया की सेवा में उनके सहचर्या एवं सहयोग के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।


(Usha Tirkey)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: