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रोहंग्या की त्रासदी पर गंभीर चिंता, कार्डिनल बो

In Church on June 28, 2017 at 3:22 pm

यांगून, बुधवार,28 जून 2017 (फीदेस) : ” मैं एक पुरोहित हूँ। मैं राजनीतिज्ञ या अंतरराष्ट्रीय कानून का विशेषज्ञ नहीं हूँ। लोगों को त्रासदी में देख मुझे दुःख होता है। मेरे छोटे विश्वास तथा दया के साथ न्याय के लिए धन्यवाद, मैं इस देश में सभी प्रकार के दमन के खिलाफ बोलता हूँ। राखीन राज्य के लोगों की भारी पीड़ा मेरी बड़ी चिंताओं में से एक है। इस मामले को संत पापा फ्राँसिस ने साझा की है, उन्होंने रोहिंग्या मुस्लिमों के लिए अपनी आवाज उठाई है।” उक्त बातें यांगून के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स माउन्ग बो ने रमजान के अंत में अपना संदेश स्थानीय समाचार पत्रों और फीदेस को प्रेषित किया।

कार्डिनल बो म्यांमार की “बड़ी संभावनाओं” और “महान भविष्य” को याद करते हैं जिसे महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे गरीबी, मजबूर प्रवास, गुलामी के आधुनिक रूप, संघर्ष और लोगों के विस्थापन को साथ साथ धार्मिक अतिवाद और अल्पसंख्यक स्थिति का भी सामना करना पड़ रहा है।”हमने रोहंग्या अल्पसंख्यकों के लिए हमारी आवाज उठाना जारी रखा है। कई साल पहले हमने इस त्रासदी के कारणों को बताया था। संयुक्त राष्ट्र के सामने हमने भयानक उत्पीड़न का सामना कर रहे रोहंग्या अल्पसंख्यकों के बारे में रिपोर्ट की थी। हमारे देश के विवेक पर यह एक भयानक धब्बा है।”

जबकि मानवाधिकार विशेषज्ञ राखीन राज्य में, काचीन, शान और पूरे म्यांमार में मानवाधिकारों के उल्लंघन को तय करेंगे और “जातीय सफाई”, “युद्ध अपराध”, “मानवता के विरुद्ध अपराध”, “नरसंहार” आदि मुद्दों को बारे बात करने हेतु वे निर्णय लेंगे। कार्डिनल बो म्यांमार की सरकार से अपील करते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा रिपोर्ट किए गए अपराधों की जांच हेतु अंतराष्ट्रीय दल को स्वतंत्र रुप से काम करने में उनका सहयोग दें जिससे कि सच्चाई सामने आये और लोगों को न्याय मिल सके। म्यांमार बहुत सारी चुनौतियों का सामना कर रही है।

हम चाहते हैं कि सभी दल शांति के पथ को अपनायें। राखीन राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ किये गये  व्यवहार के आधार पर पूरी दुनिया सरकार का न्याय करती है। म्यांमार की सरकार को पद से हट जाना चाहिए, जो शांति के पक्ष में नहीं हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने देश की छवि को धुंधली करते हैं। हमें न्याय पर आधारित शांति बनाने के लिए आगे बढ़ने की आवश्यकता है।”

अंत में कार्डिनल बो ने कहा, “शांति संभव है। शांति ही एकमात्र पथ है।”


(Margaret Sumita Minj)

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