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इताली-लातीनी अमेरिकी संगठन की 50वीं बरसी, संत पापा का संदेश

In Church on June 30, 2017 at 3:20 pm

वाटिकन सिटी, 30 जून 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने इताली-लातीनी अमेरिकी संगठन की 50वीं बरसी के अवसर पर संगठन के लोगों को संबोधित करते हुए अपने संदेश दिया।

संत पापा ने दोनों देशों के बीच विकास और तालमेल हेतु गठित संगठन के सदस्यों को वर्तमान परिस्थिति के अनुरूप तीन मुख्य बिन्दुओं की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि लातीनी अमेरीका के देश अपने इतिहास, संस्कृति और प्रकृति ससंधनों में धनी हैं साथ ही देश के निवासी अपने में अच्छे और दूसरों से अच्छा संबंध बनाने में सबल है। हमें अपने इन सामाजिक गुणों की प्रशंसा करते हुए इनका विस्तार करने की जरूरत है। दूसरी ओर अपनी इन सारी अच्छाइयों के बावजूद वर्तमान अर्थव्यवस्था ने बेरोजगारी और सामाजिक असमानता को जन्म दिया है जिसके कारण हमने अपने सामान्य निवास पृथ्वी का दोहन और दुरुपयोग किया गया है। ऐसी परिस्थिति में हमें लोगों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण करने की आवश्यकता है जो हमें उनकी ज़रूरतों से रूबरू करेगा और हम लोक धन को महत्व दे सकेंगे।

दूसरी महत्वपूर्ण बात हमारे लिए यह है कि हमें एकजुट होकर देश के लोगों की ज़रूरतों हेतु कार्य करना है। समन्वयन का अर्थ अन्यों के हाथों अपनी व्यवस्था को सुपुर्द करना नहीं वरन यह हम से समय और प्रयास की माँग करता है जो हम में गुप्त रुप से व्याप्त और अप्रशंसनीय है। लातीनी अमेरीका को एकजुट होकर वैश्विक प्रवासी समस्या का समाना करने की जरूरत है जो वर्षों से चली आ रही है और वर्तमान में और भी गहराती जान पड़ती है। अपने जीवन में जरूरत की पूर्ति हेतु हमारे लोग “नये रमणीय” स्थानों की खोज करते हैं जिससे वे स्थाई रुप से कार्य करते हुए सम्मानजनक जीवनयापन कर सकें। इस खोज में कितनों को दुःख और अपने मौलिक अधिकारों को खोना पड़ता है। इसके कारण बहुत से बच्चे और युवा मानव व्यापार और दुराचार के शिकार होते और अपराध की दुनिया में खो जाते हैं। प्रवास एक विभाजन करने वाला मंच है जहाँ परिवार, बच्चे, माता-पिता एक दूसरे और अपने वाजूद से अलग हो जाते और सरकार स्वयं इस हकीकत से अपने में विभक्त हो जाती है। हमें इस समस्या के समाधान हेतु एकजुट होकर कार्य करने की जरूरत है।

संत पापा ने कहा कि हमारे लिए तीसरी मुख्य बात है प्रचार। हमें वार्ता की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने की अति आवश्यकता है। बहुत से देशों को आज राजनीति, सामाजिक और अर्थव्यवस्था की दृष्टिकोण से कठिनाई का समाना करना पड़ रहा है। देश के नागरिक अल्प साधनों की स्थिति में भ्रष्टाचार के शिकार होते जा रहे हैं। हमें राजनीतिक स्तर पर संगठन और देशों के मध्य वार्ता का प्रचार करने की जरूरत है। इस समन्वयन और वार्ता के प्रचार में व्यवहार कुशलता द्वारा हम शांति और एकता की स्थापना कर सकते हैं। आज वार्ता हमारे लिए अपरिहार्य है लेकिन हम “बहरों से वार्ता” नहीं कर सकते हैं। यह हमें एक दूसरों को सुनने की माँग करता है जहाँ हम विश्वास में एक दूसरे के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान करते जो दोनों पक्षों को मजबूत प्रदान करती, आपसी मित्रता को बढ़ावा देती तथा न्याय और शांति की स्थापना करती है।

संत पापा ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि मैं आप सभों को प्रोत्साहित करता हूँ कि आप अपने समर्पण के द्वारा अमेरिकी महाद्वीप के मध्य आपसी तालमेल बनाते हुए एक न्याय और सहिष्णुता पूर्ण मानव समाज की स्थापना हेतु प्रयासरत रहें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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