Vatican Radio HIndi

Archive for July 1st, 2017|Daily archive page

मानव जीवन की रक्षा हेतु संत पापा का आह्वान

In Church on July 1, 2017 at 3:09 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 1 जुलाई 2017 (रेई): आज विश्व में कई समस्याएँ हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक आपदा का प्रकोप है। जाति, धर्म और संस्कृति के कारण भेदभाव ने लोगों के बीच भेदभाव उत्पन्न कर दिया, परिणामतः हिंसा बहुत अधिक बढ़ गयी है। इन सबका दुष्प्रभाव मानव जीवन पर गंभीर रूप से पड़ रहा है।

संत पापा ने 30 जून को ट्वीट संदेश में मानव जीवन की रक्षा हेतु आह्वान करते हुए कहा, ″मानव जीवन की रक्षा हेतु सबसे बढ़कर, जब यह बीमारी से ग्रसित है, हमारा कर्तव्य है कि हम प्रेम करें, जिसकी जिम्मेदारी ईश्वर ने हम सभी को सौंप दी है।″

1 जुलाई को प्रेषित ट्वीट संदेश में उन्होंने कहा, ″विश्व में ख्रीस्तीय मिशन प्रभावशाली है, यह एक ऐसा मिशन है जो सभी के लिए है, यह सेवा का मिशन है जो किसी को उपेक्षित नहीं करता।″


(Usha Tirkey)

Advertisements

संत पापा द्वारा साप्ताहिक आमदर्शन समारोह जुलाई माह में स्थगित

In Church on July 1, 2017 at 3:06 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 1 जुलाई 2017 (रेई): वाटिकन ने संत पापा फ्राँसिस के साप्ताहिक आम दर्शन समारोह एवं वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था प्रार्थनालय में अर्पित उनके दैनिक ख्रीस्तयाग के संबंध में जानकारी दी कि यह जुलाई माह में स्थगित रहेगा।

1 जुलाई को प्रकाशित जानकारी के अनुसार बुधवारीय आमदर्शन समारोह, पूरे जुलाई माह में स्थगित है जो अगस्त महीने में वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में पुनः शुरू किया जायेगा।

संत मर्था के प्रार्थनालय में विश्वासियों के छोटे दल के साथ प्रतिदिन होने वाला ख्रीस्तयाग भी जुलाई एवं अगस्त महीनों में स्थगित रहेगा। यह अगले सितम्बर माह में पुनः चालू किया जायेगा।

रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ यथावत जारी रहेगा।


(Usha Tirkey)

संत पापा द्वारा प्राप्त अनुदान के प्रति सूडान के लोगों की कृतज्ञता

In Church on July 1, 2017 at 3:04 pm

दक्षिणी सुडान, शनिवार, 1 जुलाई 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस द्वारा दक्षिणी सूडान को दी गयी मदद के प्रति सूडान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने कृतज्ञता व्यक्त की है।

सूडान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष, धर्माध्यक्ष एडवर्ड हिबोरो कुसाला ने कहा, ″मेरी तथा सूडान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की ओर से मैं संत पापा फ्राँसिस को दक्षिणी सूडान की मदद करने हेतु कृतज्ञता व्यक्त करता तथा उनकी प्रशंसा करना चाहता हूँ।″

21 जून को समग्र मानवीय विकास हेतु बनी परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने घोषित किया था कि ″चूँकि संत पापा दक्षिणी सूडान की प्रेरितिक यात्रा नहीं कर पा रहे हैं वे ″दक्षिणी सूडान के लिए संत पापा″ की पहल द्वारा पीड़ित लोगों के लिए कलीसिया की ठोस उपस्थिति को व्यक्त करना चाहते हैं। यह एक ऐसी पहल है जो उस क्षेत्र स्थित विभिन्न धर्मसमाजियों एवं अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों के कार्यों को प्रोत्साहन एवं समर्थन देती है जो शांति एवं विकास को बढ़ावा देने एवं लोगों की मदद करने में अथक परिश्रम कर रहे हैं।

सूडान के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने फिदेस को लिखे पत्र में कहा, ″संत पापा व्यक्तिगत रूप से दक्षिणी सूडान आने में असमर्थ हैं किन्तु उनकी एकात्मता एवं देश के प्रति प्रतिबद्धता को, उनके समर्थन एवं अनुदान के द्वारा अनुभव किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि उनके योगदान द्वारा विस्थापितों एवं शरणार्थियों के लिए खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने एवं बृहद स्तर पर शांति निर्माण करने तथा हाशिये पर जीवन यापन करने वाले लोगों की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, ताकि सतत् विकास को प्रोत्साहित एवं शांति को स्थापित की जा सके।

धर्माध्यक्ष कुसाला ने याद किया कि दक्षिणी सूडान ने स्वतंत्रता के बाद से कई चुनौतियों का सामना किया है। कई लोगों ने अपना जीवन गवाँ दिया है। कई लोग विस्थापित हो गये हैं, कितने लोग पड़ोसी देशों में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं तथा राजनीतिक अस्थिरता ने देश के विकास को रोक दिया है। कलीसिया जीवन की पवित्रता एवं मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा की घोषणा नैतिकता के आधार एवं समाज के एक दर्शन के रूप में करती है।

उन्होंने कहा कि सूडान के काथलिक धर्माध्यक्ष के रूप में वे मानव जीवन के मूल्य को सार्वजनिक भलाई के सिद्धांत के रूप में बढ़ावा देते तथा विभिन्न आपदाओं (हिंसा, अकाल, सूखा, संसाधनों का असमान वितरण, राजनीतिक अस्थिरता, असुरक्षा…) द्वारा उत्पन्न मानव पीड़ा को दूर करना चाहते हैं।

धर्माध्यक्ष ने दक्षिणी सूडान के प्रति संत पापा के विशेष ध्यान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया जिन्होंने उनकी सहायता हेतु 5,00,000 डॉलर प्रदान किये हैं तथा प्रार्थनाओं द्वारा अपने सामीप्य का आश्वासन दिया है। उनकी आशा है कि इस अफ्रीकी देश में संत पापा की यात्रा जल्द ही आयोजित की जा सकेगी।


(Usha Tirkey)

माता मरियम की आखों में आँसू, दर्शन हेतु हज़ारों की भीड़

In Church on July 1, 2017 at 3:00 pm

वारांगल, शनिवार, 1 जुलाई 2017 (मैटर्स इंडिया): दक्षिण भारत के तेलांगना स्थित ″लूर्द माता″  गिरजाघर में स्थापित माता मरियम प्रतिमा की आँखों से 29 जून को, खून के रूप में आँसू बहने की घटना सामने आयी है।

माता मरियम की यह प्रतिमा 24 जून को वारंगल जिले के लूर्द माता गिरजाघर के अंदर स्थापित की गयी थी जिसके तीन दिनों बाद माता मरियम की आँखों से लाल रंग का तरल पदार्थ रिसना शुरू हुआ। घटना को हज़ारों लोग देखने आ रहे हैं।

″लूर्द माता″ गिरजाघर के पल्ली पुरोहित टी. मारेड्डी ने इस घटना को बुरी चीज़ घटित होने का पूर्व संकेत कहा तथा श्रद्धालुओं के साथ विशेष प्रार्थना अर्पित की।

विश्वासियों ने आँखों में लाल रंग के तरल पदार्थ को माता मरियम का आँसू माना जबकि अन्य लोगों का अनुमान है कि मूर्ति निर्माण में दोष के कारण लाल रंग का पानी बाहर निकल रहा है।

सिंगाराम पल्ली की स्थापना 1921 में हुई है जहाँ काथलिकों के कुछ ही परिवार हैं। आरम्भ में यह काजिपेत पल्ली के अंतर्गत आता था।

पिमे फा. ए. माजोला ने इसकी स्थापना एक छोटे प्रदर्शनालय के रूप में किया था जहाँ काथलिकों के एक समुदाय के निर्माण के बाद गिरजाघर की स्थापना की गयी।

लूर्द माता के तीर्थस्थल की स्थापना फा. जी. सुधाकर ने की है।


(Usha Tirkey)

धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ देशभर में रैली

In Church on July 1, 2017 at 2:59 pm

नई दिल्ली, शनिवार, 1 जुलाई 2107 (ऊकान): भारत में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ ख्रीस्तीयों सहित अन्य धर्मों के हज़ारों लोगों ने देशभर में रैली की तथा नफरत के कारण हिंसा के शिकार लोगों के प्रति एकात्मता व्यक्त की।

28 जून को भारत की राजधानी दिल्ली समेत भारत में कई जगह हिन्दूत्व एवं देशभक्ति के नाम पर भीड़ के हाथों लोगों की हत्या के बढ़ते मामलों के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए।

संयुक्त ख्रीस्तीय मंच के अध्यक्ष माईकेल विलियम ने ऊका समाचार से कहा, भारत का एक छोटा दल चाहता करता है कि हर भारतीय उनके द्वारा संचालित एक ही संस्कृति एवं जीवन शैली का अनुसरण करे″ जिसको वे भारतीय संस्कृति के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ″ऐसा नहीं हो सकता, न मेरे नाम पर और न ही संविधान के नाम पर। भारत और भारतीयों के नाम पर ऐसा युद्ध न किया जाए। निर्दोष लोगों की हत्या कर आप भारत के संविधान की रक्षा नहीं कर रहे हैं।″

हाथ में बैनर और राष्ट्रीय झंडे लेकर विद्यार्थियों, कलाकारों, राजनीति तथा धार्मिक नेताओं ने नई दिल्ली में मौन जूलुस में भाग लिया।

प्रदर्शन 17 साल के एक मुस्लिम युवक की ट्रेन में भीड़ द्वारा हत्या के छः दिनों बाद आयोजित की गयी थी। मुस्लिम युवक एवं उसके तीन भाई ईद त्योहार के लिए समान खरीदने के बाद नई दिल्ली से वापस गाँव लौट रहे थे।

पुलिस की रिपोर्ट अनुसार चारों भाइयों के लिए धर्म के नाम पर अपशब्द का प्रयोग किया गया एवं उन्हें मांस खाने वाले तथा हमलावर की संज्ञा दी गयी। नई दिल्ली से 20 किलो मीटर की दूरी पर  उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया।

भारत के मशहूर गायक रब्बी शेरगिल ने कहा, ″नफरत के कारण हत्याओं से असहिष्णुता को बढ़ावा मिलता है जो हुआ वह सचमुच बहुत परेशान करने वाला है।″

शेरगिल ने कहा कि सभी भारतीयों को इस क्रूरता के लिए चुनौती देना तथा इसके विरुद्ध खड़ा होना चाहिए।

2015 के बाद से, देश भर में कई लोग धार्मिक असहिष्णुता से संबंधित तमाम घटनाओं के शिकार हुए हैं, जो आमतौर पर मामूली मुद्दों के परिणाम हैं।

4 अप्रैल 2015 को एक मुस्लमान को इस संदेह पर इसलिए पीट-पीट कर मार डाला गया कि वह गायों का तस्करी करता था। 2015 में गाय जो हिन्दूओं द्वारा पवित्र माना जाता है उसके कारण हिन्दू चरमपंथियों द्वारा कम से कम बारह लोगों की हत्या हुई है।

झारखंड राज्य में 18 मई को, 20 युवकों की एक भीड़ ने चार लोगों की हत्या कर दी जिनपर अफवाह थी कि वे बाल तस्करी में शामिल थे। 2015 और 2016 में मुसलमानों और ईसाइयों के खिलाफ भीड़ द्वारा हिंसा की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं।

धर्मनिरपेक्ष नेताओं का कहना है कि हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए काम कर रहे हिंदू चरमपंथी समूह तब से बढ़ी है जब से हिंदुत्ववादी भारतीय जनता पार्टी 2014 में बहुमत के साथ सत्ता में आई थी।

नई दिल्ली के एक विद्यार्थी मोहम्मद अमीर ने ऊका समाचार से कहा, ″देश में अशांति बढ़ रही है अतः इस तरह के विरोध प्रदर्शन में भी वृद्धि होनी चाहिए ताकि देश के हर हिस्से से लोग यह प्रकट कर सकें कि वे एकजुट हैं।

इसी तरह के विरोध प्रदर्शन मुम्बई, कलकत्ता, हैदराबाद, बैंगलोर, तिरुवनंतपुरम, कोची, पटना तथा लखनाऊ में भी आयोजित किये गये थे। आने वाले दिनों में देश के अन्य हिस्सों में भी विरोध प्रदर्शन होने की संभावना है।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: