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‘इंफोमैग्रेन्टस’ वेबसाइट के लिए संत पापा का संदेश

In Church on July 4, 2017 at 3:23 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 4 जुलाई 2017 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने आप्रवासियों को मदद करने वाली यूरोपीय संस्थाओं, तथा संगठनों को प्रोत्साहन दिया है कि वे क़ानूनों का सम्मान करते हुए आप्रवासियों को अपने साथ जोड़ें। संस्कृतियों के बीच सभा एवं वार्ता करते हुए वे लोगों के बीच भाईचारा बढ़ायें।

″इनफोमाग्रेन्ट″ वेबसाईट के माध्यम से ‘यूरोप आप्रवासी सहायता’ को दिये अपने एक संदेश में संत पापा ने कहा कि जटिल आप्रवासी परिस्थिति में उपयुक्त समर्थन कार्यों द्वारा यूरोपीय सभ्यता की बुनियाद पर वे मानवीय एवं ख्रीस्तीय मूल्यों का साक्ष्य दें।

उन्होंने कहा, ″मैं इस महत्वपूर्ण पहल के लिए सच्चाई से सराहना व्यक्त करता हूँ तथा आशा करता हूँ कि एक ओर यह इन लोगों के एकीकरण को प्रोत्साहन देगा एवं राष्ट्र जो उनका स्वागत करते हैं उनके क़ानूनों को उचित सम्मान प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर, स्वीकृति एवं एकात्मता हेतु सच्ची संस्कृति के लिए समाज के प्रति एक नई प्रतिबद्धता को बढावा देगा। उन्होंने कहा कि कई भाई-बहनों की उपस्थिति जो आप्रवास की त्रासदी में जीवन व्यतीत करते हैं, मानवीय विकास तथा विभिन्न संस्कृतियों के आपसी मुलाकात एवं वार्ता का अवसर है जो लोगों को शांति एवं भाईचारा हेतु प्रोत्साहन देगा।

संत पापा ने उन्हें अपनी प्रार्थना का आश्वासन देते हुए कहा, ″मैं अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देता हूँ तथा ईश्वर की सुरक्षा की कामना करता हूँ जो सबके पिता हैं।″ संत पापा ने इस बात पर जोर दिया कि वे युद्ध, आतंकवाद, आक्रमण, अकाल, शोषण एवं दमनकारी शासन के कारण अपनी मातृभूमि छोड़कर भागने हेतु मजबूर लोगों का साथ दें। भोजन एवं आशा प्रदान करने वालों में वे अपने भाई बहनों को पा सकें।


(Usha Tirkey)

लेसबोस के भुकम्प पीड़ितों को संत पापा की सहायता

In Church on July 4, 2017 at 3:21 pm

ग्रीस, मंगलवार, 4 जुलाई 17 (रेई): ग्रीस के प्रेरितिक राजदूतावास की रिपोर्ट अनुसार संत पापा फ्राँसिस ने ग्रीस के लेसबोस द्वीप में 12 जून को हुए भुकम्प के शिकार लोगों की मदद हेतु 50,000 यूरो राशि अनुदान किया है।

नुन्ज़िंग के कारोबार प्रबंधक, मोनसिन्योर मास्सिमो कैटरिन के अनुसार, अनपेक्षित अनुदान, भुकम्प से पीड़ित जनता के लिए संत पापा फ्राँसिस के सामीप्य एवं स्नेह का एक ठोस चिन्ह है।

उन्होंने कहा कि अनुदान राशि खासकर, ऑर्थोडॉक्स कलीसिया के व्रिसा गाँव के लिए दिया जाएगा। एथेंस एवं समस्त ग्रीस के ऑर्थोडॉक्स महाधर्माध्यक्ष एरोलेमुस द्वितीय ने भुकम्प के तीन दिनों बाद भुकम्प प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। भुकम्प के कारण एक 43 वर्षीय महिला की मौत मलबे में दबकर हो गयी थी।

मोनसिन्योर मास्सिमो कैटरिन ने कहा, ″संत पापा के अनुदान में ख्रीस्तीय एकता के दृष्टिकोण से भी एक महान मूल्य है क्योंकि इस अनुदान से ऑर्थोडॉक्स बहुल क्षेत्र के लोगों को मदद मिलेगी। वास्तव में, लेसबोस में मात्र 50 काथलिक हैं।

उन्होंने बतलाया कि अगले सप्ताह मंगलवार को मोंसिन्योर निकोलोस के साथ वे व्रिसा का दौरा करेंगे तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ सभा में तय करेंगे कि संत पापा द्वारा प्रदत्त अनुदान का वितरण किस तरह किया जाएगा।

उन्होंने संत पापा के अनुदान के लिए कृतज्ञता व्यक्त की।

ज्ञात हो कि 12 जून को 6.2 की तीव्रता से आये भुकम्प के कारण एक की मृत्यु हो गयी थी तथा लगभग 10 लोग घायल हो गये हैं साथ ही साथ कई घर ध्वस्त हो गये हैं और मलबों के कारण सड़क बाधित है।


(Usha Tirkey)

एशिया के परिवार महिलाएँ एवं युवा सुसमाचार के साक्षी

In Church on July 4, 2017 at 3:18 pm

एशिया, मंगलवार, 4 जुलाई 2017 (रेई): एशिया में महिलाएँ एवं परिवार चुनौतियों और कठिनाईयों के बावजूद सुसमाचार का साक्ष्य देते हैं। यह बात ढाका के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल पैट्रिक डी रोजारियो सी. एस. सी. ने फिदेस को बतलाया।

उन्होंने कहा, ″एशियाई देशों जैसे- बंगलादेश, कम्बोडिया, भारत, मलेशिया, दक्षिण कोरिया एवं सिंगापुर के परिवार तथा महिलाएँ अपने विश्वासी जीवन में भय एवं शोषण के शिकार होते हैं किन्तु वे सुसमाचार का साहसपूर्वक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, युवा जिसमें जीवन के अर्थ को देखते तथा ख्रीस्त में आनन्द को प्रकट करते हैं।

कार्डिनल ने फिदेस को लिखा कि छोटे ख्रीस्तीय समुदाय के लोकधर्मी प्रेरिताई के स्तर पर भी काफी मदद पहुँचाते हैं। उन्होंने कहा, ″हम एशिया के ख्रीस्तीय समुदाय में पवित्र आत्मा की प्रेरणा एवं कार्य को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।

गौरतलब है कि फेडेरेशन ऑफ एशियन विशप्स कॉन्फेरेंस में प्रतिनिधियों ने संत पापा के प्रेरितिक विश्व पत्र अमोरिस लेतित्सिया की पृष्टभूमि पर ″परिवार″ विषय पर विचार-विमर्श किया था।

उन्होंने कहा कि फेडेरेशन ऑफ एशियन विषप्स कॉन्फेरेंस का लोकधर्मी एवं परिवार विभाग, एशिया के विभिन्न देशों के बीच एक नजदीकी सहयोग द्वारा विभिन्न कार्यों को अधिक प्रभावशाली ढंग से करने का प्रोत्साहन देने का प्रयास कर रही है। वियेतनाम में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने विश्वासियों के लिए नये अवसरों की खोज करने तथा आगामी आम सभा की तैयारी पर विचार करने की आशा व्यक्त की थी। वाटिकन में 2018 में युवाओं पर आयोजित की जाने वाली सिनॉड की तैयारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया था। जो एशिया के युवाओं को कलीसिया की मुख्य धारा से जोड़ने का अवसर भी होगा।

कार्डिनल डी रोजारियो ने अगस्त 2017 में इंडोनेशिया के योग्यकार्ता में होने वाले एशियाई युवा दिवस के महत्व पर गौर किया तथा कहा, ″इसका मुख्य उद्देश्य है विश्वास पर चिंतन करने एवं युवाओं के अनुभवों को बांटने हेतु एशिया के युवाओं का साथ देना जो संस्कृति की विविधताओं के साथ स्थानीय कलीसियाओं में जीते हैं। कलीसिया में युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देना ताकि वे भी ईश्वर के राज्य के मूल्यों को आपस में बांट सकें तथा सुसमाचार के प्रसन्नचित साक्षी बन सकें तथा अपने देश में सामाजिक न्याय एवं शांति के लिए कार्य कर सकें।

कार्डिनल ने कहा कि एशिया के संदर्भ में सुसमाचार को जीने का अर्थ है सभी के प्रति खुला हृदय रखना तथा एशिया के युवाओं के बीच विश्वास, प्रेम एवं आशा के संदेश का प्रचार करना जिसे इस आशा से पूरा करना चाहिए कि पवित्र आत्मा की सहायता तथा ईश्वर की इच्छा द्वारा हम भाईचारा पूर्ण विश्व का निर्माण कर सकेंगे जो सभी जीवों का निवास स्थान हैं।

 

 


(Usha Tirkey)

सीबीसीआई द्वारा भारत की काथलिक कलीसिया के लिए दलित नीति

In Church on July 4, 2017 at 3:17 pm

बेंगलूरू, मंगलवार, 4 जुलाई 2017 (रेई): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) ने दक्षिणी भारत में दलितों के अधिकारों की रक्षा हेतु काम करने वाले सभी पुरोहितों को एक साथ लाने का प्रयास किया है ताकि सीबीसीआई द्वारा जारी दलित नीति के प्रसार और उसके कार्यान्वयन हेतु तरीके तलाशे जा सकें।

आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, केरल, पोंडिचेरी, तमिलनाडु तथा तेलांगना के प्रतिनिधियों ने 2 जुलाई को बैंगलोर के भारतीय समाज सेवा संस्थान में आयोजित एक कार्यशाला में भाग लिया।

भारत की काथलिक कलीसिया के लिए सीबीसीआई ने एक दलित नीति प्रकाशित की है जिसका उद्देश्य है कि एक साल में पूरे भारत के धर्मप्रांतों में एक कार्य योजना तैयार किया जाए।

दलित नीति को प्रकाशित करते हुए अधिकारियों ने कहा कि हरेक प्रांत, पल्लियों एवं धर्मप्रांतों के साथ विचार-विमार्श के बाद दिसम्बर 2017 तक एक कार्य योजना के साथ, नीति में व्यक्त सिद्धांतों पर काथलिक दलितों की मदद हेतु वह आगे आयेगा।

इस बात पर भी विचार किया गया कि इस काम को आगे बढ़ाने हेतु लोगों को प्रशिक्षण दिये जायेंगे ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों में जाकर पुरोहितों एवं लोकधर्मियों को इस नीति के कार्यान्वयन, इसके महत्व तथा इसे किस तरह लागू करना होगा उसकी जानकारी देंगे।

कार्यशाला में क्षेत्रीय एवं धर्मप्रांतीय एस.सी/ एस.टी/ बी.सी आयोग के सचिव तथा सदस्यों ने भाग लिया।

सीबीसीआई के एस.सी एवं बी.सी विभाग के सचिव फादर कोसमोस अरोक्य राज ने चेतावनी दी कि कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा करते हुए कार्य योजना बनाते समय धर्मप्रांतों एवं क्षेत्रों को टुकड़ों में विभक्त नहीं होना चाहिए।


(Usha Tirkey)

भारतीय कलीसिया में जनजातीय मामलों के लिए नये सचिव की नियुक्ति

In Church on July 4, 2017 at 3:15 pm

नई दिल्ली, मंगलवार, 4 जुलाई 2017 (मैटर्स इंडिया): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने दिव्य वचन (डिवाईन वॉड) को समर्पित धर्मसमाज के सदस्य फादर निकोलास बारला को जनजातीय मामलों के लिए कार्यालय का नया सचिव नियुक्त किया।

सीबीसीआई के उप सचिव मोन्सिग्नोर जोसेफ चिनेयायन द्वारा जारी प्रेस विज्ञाप्ति में कहा गया है कि 55 वर्षीय पुरोहित को, जिस्विट फादर स्तानिसलास तिर्की के स्थान पर नियुक्त किया गया है जिन्होंने इस पद पर विगत 8 सालों तक सेवा प्रदान की है।

फादर बारला को कानून में स्नातक तथा व्यवसाय प्रबंध की डिग्री प्राप्त है वे उड़ीसा के सम्बलपुर के निवासी हैं। विगत 24 सालों से वे उड़ीसा, खासकर, राऊरकेला एवं सम्बलपुर में आदिवासियों के जीवन से संबंधित कई मुद्दों पर काम किये हैं।

सीबीसीआई ने मई महीने में आयोजित बेंगलूरू की एक सभा में उनकी नियुक्ति को स्वीकृति दी। उन्होंने 3 जुलाई को नई दिल्ली में अपना कार्यभार स्वीकार किया।

येसु समाजी फादर स्तानिसलास तिर्की को, अपनी कार्य अवधि समाप्त करने पर येसु समाजी समुदाय के सुपीरियर एवं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संत जेवियर सामाजिक सेवा संस्थान का निदेशक नियुक्त किया गया है।


(Usha Tirkey)

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