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एशिया के परिवार महिलाएँ एवं युवा सुसमाचार के साक्षी

In Church on July 4, 2017 at 3:18 pm

एशिया, मंगलवार, 4 जुलाई 2017 (रेई): एशिया में महिलाएँ एवं परिवार चुनौतियों और कठिनाईयों के बावजूद सुसमाचार का साक्ष्य देते हैं। यह बात ढाका के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल पैट्रिक डी रोजारियो सी. एस. सी. ने फिदेस को बतलाया।

उन्होंने कहा, ″एशियाई देशों जैसे- बंगलादेश, कम्बोडिया, भारत, मलेशिया, दक्षिण कोरिया एवं सिंगापुर के परिवार तथा महिलाएँ अपने विश्वासी जीवन में भय एवं शोषण के शिकार होते हैं किन्तु वे सुसमाचार का साहसपूर्वक साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, युवा जिसमें जीवन के अर्थ को देखते तथा ख्रीस्त में आनन्द को प्रकट करते हैं।

कार्डिनल ने फिदेस को लिखा कि छोटे ख्रीस्तीय समुदाय के लोकधर्मी प्रेरिताई के स्तर पर भी काफी मदद पहुँचाते हैं। उन्होंने कहा, ″हम एशिया के ख्रीस्तीय समुदाय में पवित्र आत्मा की प्रेरणा एवं कार्य को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं।

गौरतलब है कि फेडेरेशन ऑफ एशियन विशप्स कॉन्फेरेंस में प्रतिनिधियों ने संत पापा के प्रेरितिक विश्व पत्र अमोरिस लेतित्सिया की पृष्टभूमि पर ″परिवार″ विषय पर विचार-विमर्श किया था।

उन्होंने कहा कि फेडेरेशन ऑफ एशियन विषप्स कॉन्फेरेंस का लोकधर्मी एवं परिवार विभाग, एशिया के विभिन्न देशों के बीच एक नजदीकी सहयोग द्वारा विभिन्न कार्यों को अधिक प्रभावशाली ढंग से करने का प्रोत्साहन देने का प्रयास कर रही है। वियेतनाम में आयोजित कार्यशाला में उन्होंने विश्वासियों के लिए नये अवसरों की खोज करने तथा आगामी आम सभा की तैयारी पर विचार करने की आशा व्यक्त की थी। वाटिकन में 2018 में युवाओं पर आयोजित की जाने वाली सिनॉड की तैयारी पर भी विशेष ध्यान दिया गया था। जो एशिया के युवाओं को कलीसिया की मुख्य धारा से जोड़ने का अवसर भी होगा।

कार्डिनल डी रोजारियो ने अगस्त 2017 में इंडोनेशिया के योग्यकार्ता में होने वाले एशियाई युवा दिवस के महत्व पर गौर किया तथा कहा, ″इसका मुख्य उद्देश्य है विश्वास पर चिंतन करने एवं युवाओं के अनुभवों को बांटने हेतु एशिया के युवाओं का साथ देना जो संस्कृति की विविधताओं के साथ स्थानीय कलीसियाओं में जीते हैं। कलीसिया में युवाओं की सहभागिता को बढ़ावा देना ताकि वे भी ईश्वर के राज्य के मूल्यों को आपस में बांट सकें तथा सुसमाचार के प्रसन्नचित साक्षी बन सकें तथा अपने देश में सामाजिक न्याय एवं शांति के लिए कार्य कर सकें।

कार्डिनल ने कहा कि एशिया के संदर्भ में सुसमाचार को जीने का अर्थ है सभी के प्रति खुला हृदय रखना तथा एशिया के युवाओं के बीच विश्वास, प्रेम एवं आशा के संदेश का प्रचार करना जिसे इस आशा से पूरा करना चाहिए कि पवित्र आत्मा की सहायता तथा ईश्वर की इच्छा द्वारा हम भाईचारा पूर्ण विश्व का निर्माण कर सकेंगे जो सभी जीवों का निवास स्थान हैं।

 

 


(Usha Tirkey)

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