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Archive for July 10th, 2017|Daily archive page

सागर रविवार के दिन संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on July 10, 2017 at 2:38 pm

वाटिकन सिटी,सोमवार 10 जुलाई 2017 (रेई) : रविवार, 9 जुलाई को समुद्र दिवस मनाया गया। इस दिवस के अवसर पर संत पापा ने ट्वीट प्रेषित कर समुद्री जहाजों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं, नाविकों, और मच्छुआरों के लिए प्रार्थना की।

संदेश में उन्होंने लिखा,″ अपने घरों से दूर समूद्र में कठिनाईयों के बीच काम करने वाले नाविकों और मछुआरों को मैं, सागर का तारा मरियम के ममतामयी संरक्षण में सुपूर्द करता हूँ।″

विदित हो कि विश्व के ख्रीस्तीय कलीसियाओं दवारा हर वर्ष जुलाई महीने का दूसरा रविवार ‘समुद्र रविवार’ के रुप में मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य समुद्र में काम करने वालों के दैनिक चुनौतियों पर प्रकाश डालना है और समुद्र में रहकर काम करने वालों तथा उनके परिवारों के लिए प्रार्थना करने का विशेष दिन है।


(Margaret Sumita Minj)

भवन के टूटने की दुःखद घटना पर शोक तार संदेश

In Church on July 10, 2017 at 2:36 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 10 जुलाई (रेई) : संत पापा फ्राँसिस रविवार 9 जुलाई को तार संदेश प्रेषितकर भवन के टूटने से हताहत लोगों के लिए विशेष प्रार्थना और उनके परिवार के लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान किया।

संत पापा की ओर से वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन ने नेपल्स के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल क्रेसंसियो सेपे को भेजे तार संदेश में नेपल्स शहर के बाहर ‘तोर्रे अनुन्जाता’ भवन के एक पूरे अपार्टमेंट के गिरने से मरे लोगों के प्रति गहन संवेदना प्रकट की।

शुक्रवार 7 जुलाई को घटे इस त्रासदी में दो बच्चों सहित आठ लोगों के मरने और कुछ लोगों के घायल होने की खबर मिली थी।

तार संदेश में कहा गया कि संत पापा फ्राँसिस ‘करुणमय ईश्वर’ से प्रार्थना करते हैं कि वे दुर्घटना के शिकार लोगों को अनंत शांति प्रदान करें। उनके परिवार के लोगों को आध्यात्मिक सांत्वना मिले तथा इस त्रासदी में धायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो।


(Margaret Sumita Minj)

वाटिकन ने धर्माध्यक्षों को अपने धर्मप्रांत में यूखरीस्तीय दुष्प्रयोग को रोकने हेतु पत्र भेजा

In Church on July 10, 2017 at 2:35 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 10 जुलाई (रेई) : वाटिकन में दिव्य भक्ति एवं संस्कार संबंधी परमधर्मपीठीय धर्मसंध के अध्यक्ष कार्डिनल रॉबर्ट साराह ने विश्व के धर्माध्यक्षों के नाम पत्र में यूखरीस्तीय समारोह के दौरान पवित्रता एवं सम्मान की कमी को इंगित किया और पवित्र यूखरिस्त के मौजूदा नियमों को याद दिलाया।

संत पापा के अनुरोध पर जारी पत्र में परमधर्मपीठीय धर्मसंध ने धर्माध्यक्षों को याद दिलाया कि वे यूखरिस्त के पूजन विधि से संबंधित निर्देश को कलीसिया के कानून संहिता अनुच्छेद, रोमन मिस्सा ग्रंथ और 25 मार्च, 2004 में इस धर्मसंध द्वारा ‘रिडेम्पटिस साक्रामेंटुम’ में दिये गये निर्देशों की व्याख्या देखें।

उन निर्देशों के अनुसार पवित्र यूखरिस्त पूजन-विधि में प्रयोग लाई जाने वाली रोटी (होस्तिया) केवल गेहूं की और हाल ही में बनाई हुई बेखमीर होनी चाहिए जिससे कि खराब होने का कोई खतरा न हो। अतः गेहूं को छोड़ अन्य अनाजों से बनी रोटी का प्रयोग पवित्र यूखरिस्त में उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूखरीस्तीय रोटी में फल, चीनी या शहद जैसे अन्य पदार्थों को मिलाना एक गंभीर दुष्प्रयोग है।”

उन्होंने कहा कि पूजन विधि के लिए दाखरस अंगूर के फल से तैयार, शुद्ध और बिना किसी अन्य पदार्थों या फलों के मिश्रण से बनी होनी चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि पूजन विधि के लिए दाखरस को छोड़ किसी भी प्रकार के पेय किसी भी कारण से स्वीकार नहीं किया जा सकता है। अन्य पेय पदार्थ वैध नहीं हैं।

पत्र में आंटे के लस मुक्त होस्तिया के संबंध में नियमों को भी संबोधित किया गया।

यूखरिस्त पूजन विधि में पूर्ण रुप से लस मुक्त आंटे से बना होस्तिया मान्य नहीं है। आंशिक रुप से लस मुक्त आंटे से बना होस्तिया मान्य है बर्शते कि इसमें दूसरे अनाज का आटा मिला हुआ न हो।

उन्होंने ने कहा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित पौधों से तैयार रोटी और दाखरस वैध माना जा सकता है।

पत्र में परमधर्मपीठीय धर्मसंध ने इस बात पर जोर देकर कहा कि मुख्य रूप से धर्माध्यक्षों की जिम्मेदारी है कि वे अपने धर्मप्रांत की पल्लियों का निरीक्षण करें कि वहाँ पूजन विधि के सभी नियमों को सही तरीके से पालन हो।

अंत में समिति धर्माध्यक्षों को सुझाव देती है कि वे एक साथ मिलकर अपने देश में रोटी और दाखरस के उत्पादन, संरक्षण और बिक्री पर आवश्यक जांच करें। यह भी शिफारिश की जाती है कि यूखारिस्तीय रोटी (होस्तिया) और दाखरस का उचित तरीके से रख-रखाव हो जहाँ इसे बेचा जाता है।

“सतर्कता” आवश्यक हो गई है, क्योंकि पहले कुछ धर्मसमाजों द्वारा मिस्सा बलिदान हेतु प्रयोग में लाई जाने वाली होस्तिया और दाखरस बनाया जाता था पर  आज इन चीजों को सुपरमार्केट एवं अन्य दुकानों में और इंटरनेट माध्यम से बेचा जाता है, इसी कारण “पदार्थों की वैधता” पर संदेह है।


(Margaret Sumita Minj)

दवाओ के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वेल्स फिलीपीन्स काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन से नये अध्यक्ष नियुक्त

In Church on July 10, 2017 at 2:33 pm

फिलीपींस के( सीबीसीपी) काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन – RV

10/07/2017 15:08

फिलीपीन्स, शनिवार, 10 जुलाई 2017 (वीआर) दवाओ के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वेल्स फिलीपीन्स काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के नये सभापति ने गये।

शनिवार को फिलीपीन्स काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने महाधर्माध्यक्ष रोमुलो वेल्स को अपने नये सभापति के रुप में नियुक्त किया जो लिंगायेन-दगुपन के महाधर्माध्यक्ष सुकरात विलेगास का पद भार संभालेंगे जिन्होंने विगत दो सालों से सीबीसीपी की अगुवाई की है। इसके साथ ही कलुकान के धर्माध्यक्ष पाल्को वर्जिनिलो डेविड को सीबीसीपी का उप-सभापति नियुक्त किया गया है।

सेवानिवृत्त हो रहे महाधर्माध्यक्ष विलेगास ने धर्माध्क्षीय सम्मेलन की शुरुआती संबोधन में कहा कि कलीसिया को विश्वासियों के बीच खुले हाथों से पहुँचने की जरूरत है न कि बंद हाथों से। उन्होंने कहा “बंद हस्त प्रेम नहीं करते वरन उन्हें चोट पहुंचाते हैं। बंद हाथ विश्वासियों का स्पर्श नहीं करता वरन उन पर प्रहार करता और लोगों को घायल करता है।” लोगों के लिए हाथ खुला रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे ख्रीस्तीय विश्वास की उत्तम निशानी है क्योंकि “देना प्रेम करने की सर्वोतम अभिव्यक्ति है।”

सीबीसीपी के सभापति कार्यकाल के दौरान सीखी बातों और अपने अनुभवों को साक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों की बातों को ध्यान से सुनना, विपत्ति के समय धैर्य में बने रहना और वर्तमान परिस्थिति में कलीसिया की चुनौतियों का सामना करना प्रमुख है। “खुले हाथ, धैर्य और लोगों को सुनना हमारे लिए प्रेरितिक कार्य के औजार हैं जिसके द्वारा हम ईश्वर के लोगों की देखभाल करते हैं। धर्माध्यक्ष ने कहा कि अपने चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने बहुत सारी चीजों को सीखा है जिन्हें वे अपने “हृदय में खजाने”  के समान संजो कर रखेंगे।

शनिवार को हुए धर्माध्यक्षीय उद्घाटन सभा में 85 धर्माध्यक्षों ने भाग लिया जिनमें 74 सक्रिय रुप से कार्यरत, 5 धर्माध्यक्षीय संचालक और 6 सेवानिवृत्त धर्माध्यक्षों शामिल थे। वर्तमान में सीबीसीपी की सदस्यता 131 है जिसमें 83 सक्रिय कार्यशील, 5 संचालक और 43 सेवानिवृत्त सदस्य हैं जो 86 कलीसियाई अधिकार क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

थाईलैंड, पहला थाई मिशनरी, एक “छोटा बीज”, ” एक पेड़ बनने में सक्षम”

In Church on July 10, 2017 at 2:31 pm

 

बैंकॉक, सोमवार 10 जुलाई 2017 (एशिया न्यूज) : थाईलैंड के उबोनाचाथानी धर्मप्रांत स्थित ‘बान नैग खू’ के ‘पवित्र परिवार’ पल्ली के काथलिक समुदाय के लिए शनिवार 8 जुलाई और रविवार 9 जुलाई बहुत ही विशेष दिन थे और पीमे मिशनरी’ याने विदेशी मिशनों के लिए परमधर्मपीठीय संस्थान के पुरोहितों के लिए भी विशेष दिन था, जो अपनी संस्था के लंबे इतिहास में पहली बार, एक युवा थाई के पुरोहिताभिषेक में शरीक हुए।

शनिवार 8 जुलाई को फादर जोन फोंग्फान वोंगारसा का पुरोहिताभिषेक समारोह बड़े धूमधाम से हुआ। पुरोहिताभिषेक समारोह में दो धर्माध्यक्षों, 80 पुरोहितों, 100 धर्मबहनों और एक हजार से अधिक लोकधर्मियों ने भाग लिया। उत्तरी थाईलैंड में पीमे मिशनरी चालीस से भी अधिक वर्षों काम कर रहे हैं।

पुरोहिताभिषेक समारोह के लिए पूर्वोत्तर थाईलैंड की विशिष्ट 80 नर्तकियों ने नृत्य करते हुए नये पुरोहित को अपने घर से एक असाधारण जुलूस के साथ पल्ली तक पहुँचाया। दूसरे दिन एक नए भिक्षु के सम्मान में बौद्ध परंपरा के अनुसार नये पुरोहित फादर जोन को फूलों से सुसज्जित वाहन में बैठाकर अपने परिजनों और दोस्तों के साथ जुलूस करते हुए पल्ली गिरजाघर लाया गया था। वहाँ उन्होंने प्रथम यूखरीस्तीय बलिदान अर्पित किया।

थाईलैंड के नये धर्मप्रांत उबोनाचाथानी में स्थानीय धर्मप्रांतीय पुरोहित और धर्मबहनें कार्यरत हैं। मिशनरी अब बहुत पहले के समय की याद दिलाते हैं। फादर जोन अपने पल्ली के तेरहवें पीमें पुरोहित हैं। 120 साल पहले पीमें मिशन की स्थापना धर्मप्रांत में हुई थी। फादर जोन के मिशनरी पुरोहित बनने का निर्णय इस छोटी कलीसिया द्वारा अन्य कलीसियाओं को सेवा प्रदान करने का एक संकेत है। संभवतः फादर जोन चीन के हॉगकॉग में मिशनरी बनकर अपनी सेवा देंगे। उनके बड़े भाई एक धर्मप्रांतीय पुरोहित और बड़ी बहन ‘क्रूस के प्रेमी’ नामक स्थानीय धर्मसमाज की धर्मबहन है।


(Margaret Sumita Minj)

येसु में हम सच्चा आराम पाते हैं

In Church on July 10, 2017 at 2:30 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 10 जुलाई 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजा घर के प्रांगण में जमा हुए हजारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को अपने रविवारीय देवदूत प्रार्थना के पूर्व संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाई और बहनों, सुप्रभात

आज के सुसमाचार में येसु हमें अपने पास यह कहते हुए बुलाते हैं, “थके माँदे और बोझ से दबे हुए लोगों तुम सब के सब मेरे पास आओ मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।” (मत्ती. 11.28) येसु के ये वचन उनके कुछेक शिष्यों के लिए नहीं है वरन यह हम सभों के लिए कहा गया है, हम जो अपने जीवन में थका-मंदा और अपने को बोझ से दबा हुआ पाते हैं। कौन उनके इस निमंत्रण से अपने को अछूता महसूस कर सकता हैॽ येसु जानते हैं कि जीवन हमारे लिए कितना कठिन है।

अपने जीवन की मुसीबतों से बाहर निकलना ही हमारे लिए पर्याप्त नहीं है वरन हमें यह जाने की आवश्यकता है कि हमें कहाँ जाना है। यह हमारे लिए एक निमंत्रण है जहाँ हम अपने जीवन को येसु के लिए खोलते हैं।

अपने जीवन के तकलीफ भरे क्षणों या मुश्किल की घड़ी जो हमें विचलित करती है, संत पापा ने कहा कि हमें उसे अपने किसी मित्र, किसी विशेषज्ञ के साथ साक्षा करने की जरूरत है जो हमारे लिए एक बड़े सहायक बनते हैं, लेकिन इसके साथ ही हमें यह नहीं भूल है कि येसु ख्रीस्त हमारे जीवन में हमारे साथ हैं।

संत पापा ने कहा, “हम अपने जीवन में यह न भूलें की हमें अपने जीवन को उनके सामने लाने और अपने को खोलने की जरूरत है। हमें अपने जीवन के सभी परिस्थितियों और लोगों को उन्हें सुपुर्द करने की जरूरत है। शायद हमने अपने जीवन की कुछ घटनाओं को उन्हें कभी नहीं बतलाया  है क्योंकि हमने अपने जीवन की उन परिस्थितियों को ईश्वर की ज्योति से कभी प्रकाशित होने नहीं दिया। हम सभों की अपनी एक कहनी है। हमें अपने जीवन के अंधकार भरे क्षणों में ईश्वर की ओर आने की जरूरत है। हमें करुणा के कार्यकर्ता एक पुरोहित के पास जाने की आवश्यकता है, येसु के पास आने की जरूरत है जिससे हम उन्हें अपने जीवन के बारे में बता सकें। संत पापा ने कहा, “वे आज हम प्रत्येक जन से कहते हैं धैर्य रखो। जीवन की मुसीबतों और तकलीफों से हताश और निराश न हो, लेकिन तुम मेरे पास आओ।”

हमारे जीवन में जब चीज़ें ठीक नहीं चलती तो हम अपने जीवन में विचलित हो जाते हैं, लेकिन हमें उन परिस्थितियों से भागने की अपेक्षा उनमें बने रहने की जरूरत है। यह कहने और देखने में सहज लगता है लेकिन ऐसी स्थिति में अपने को खोलना और अपने जीवन को देखना हमारे लिए कठिन होता है। यह सहज नहीं है। हम अपने जीवन की कठिन परिस्थितियों में स्वाभाविक रुप से अपने को बंद कर लेते हैं। इस तरह हम अपने जीवन को एक अन्याय के रुप में देखते हैं, हम अपने में यह सोचने लगते हैं कि दूसरे कितने कृतघ्न हैं, दुनिया कितनी खराब है इत्यादि। हम इस तथ्य से वाकिफ हैं और हम सभों ने अपने जीवन में ऐसे बुरे दौर से होकर गुजरा है। लेकिन जब हम अपने में बंद हो जाते तो हमारे लिए सारी चीज़ें काली दिखाई देने लगती हैं। अपनी इसी बदहाली के कारण हम परिवार में होनी वाली दुखदायी घटनाओं से अभ्यस्त हो जाते हैं। हम बुराई का शिकार हो जाते और ये बुरी चीज़ें हमारे लिए बुराई लेकर आती हैं। येसु हम से चाहते हैं कि हम अपने जीवन की ऐसी परिस्थिति से बाहर निकले और इसीलिए वे हमें कहते हैं, “आओ… कौन…ॽ तुम… तुम…तुम…।”  हमें अपने हाथों को ईश्वर की ओर फैलाने की आवश्यकता है जिसके द्वारा हम उनके साथ एक संबंध स्थापित करते हैं जो हमें प्रेम करते हैं।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमारी “प्रतीक्षा” करते हैं। वे हमारे जीवन की कठिनाइयों को जादुई रुप से हल नहीं करते,  वरन हमें उन परिस्थितियों में मजबूत बन रहने की कृपा प्रदान करते हैं। वे हमारे जीवन से बोझ को नहीं हटाते लेकिन वे हमारे हृदय को मजबूत करते हैं। वे हमारे जीवन के क्रूस को हम से दूर नहीं करते लेकिन वे हमारे साथ रहते हैं। उनके साथ हम अपने जीवन के हर भार को हलका महसूस करते हैं क्योंकि वे हमारी शरण हैं जहाँ हम अपने जीवन के लिए ताजगी प्राप्त करते हैं।

येसु हमारे जीवन में जब प्रवेश करते तो हम उनकी शांति का एहसास अपने में करते हैं। संत पापा ने कहा कि आइए हम येसु के पास चले, उन्हें अपना समय दें, अपने प्रतिदिन की प्रार्थना में उनसे मिलें, हम विश्वास के साथ उनसे व्यक्तिगत रुप में वार्ता करें। हम अपने को उनके वचनों से वाकिफ होने दें, जो हमारे लिए प्रेम लेकर आता है। हम उन्हें अपने जीवन की रोटी के रुप में स्वीकार करें। ऐसा करने के द्वारा ही हम अपने जीवन में उनके प्रेम और उनकी सांत्वना का अनुभव कर करेंगे।

हम येसु के पास आना सीखें और जिस तरह गर्मी के मौसम में हम अपने शरीर हेतु आराम की चाह रखते हैं, हम यह भूलें की येसु में ही हम अपने जीवन की सच्ची ताजगी को प्राप्त करते हैं। माता मरियम जो हर दुःख और थकान की घड़ी में हमारे साथ रहती है हम में येसु के निकट आने में सहायता करे। इतना कहने के पास संत पापा ने विश्वासी भक्तों और तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

देवदूत प्रार्थना के उपरान्त संत पापा ने चिलचिलाती गर्मी में भी संत प्रेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए विभिन्न देशों के विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया विशेष कर पोलैण्ड रेडियो मरिया परिवार के तीर्थयात्रियों का और निष्कलंक धन्य कुंवारी मरियम धर्मसमाज के सामान्य संगोष्ठी हेतु जमा हुई धर्मबहनों तथा पुरोहितों के प्रशिक्षण सम्मेलन में विभिन्न देशों से रोम आये पुरोहितों को अपनी शुभकामनाएँ अर्पित की। संत पापा ने ताईवान बच्चों के संगीत समुदाय “पूसांगालन” जिसका अर्थ “आशा” है उसके सुन्दर गान के लिए भी शुक्रिया अदा करते हुए सभों को रविवारीय मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Dilip Sanjay Ekka)

गोवा के लोग विध्वंसकारी हमले में विभाजन की योजना देखते हैं

In Church on July 10, 2017 at 2:28 pm

पणजी, सोमवार 10 जुलाई (उकान) : ख्रीस्तीय बहुल क्षेत्र के गाँवों में 1 से 7 जुलाई के बीच पांच क्रूस और कृष्ण मंदिर के अंदर एक मूर्ति को नष्ट कर दिये जाने पर लोगों का गुस्सा चढ़ गया।

गोवा के मुख्यमंत्री ने इस संदेह की पुष्टि की है कि पश्चिमी भारतीय राज्य, पूर्व पोर्तुगीज कॉलोनी में कम से कम सात धार्मिक प्रतीकों का बर्बरतापूर्ण विध्वंस हिंदुओं और ख्रीस्तीयों के बीच “किसी तरह का तनाव” बनाने की योजना का हिस्सा हो सकता है।

मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने 4 जुलाई को एक मीडिया सम्मेलन में कहा कि ख्रीस्तीय-बहुमत वाले क्षेत्रों में होने वाली घटनाएं एक ही समूह का काम हो सकता है।

अनेक समुदाय के नेताओं ने भी अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है कि विध्वंस करने वालों का उद्देश्य राज्य में हिंदू-ख्रीस्तीय मित्रता को नष्ट करना है। गोवा में 1.8 मिलियन लोगों की जनसंख्या का 25 प्रतिशत ख्रीस्तीय हैं और लगभग सभी काथलिक हैं।

गोवा काथलिक संघ के अध्यक्ष एडविन फोन्सेका ने कहा, “गोवा में सांप्रदायिक सद्भाव नष्ट करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ मजबूत कार्रवाई की जानी चाहिए।”

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता, दत्ताप्रसाद नाइक ने कहा, गोवा में “हम सब सद्भाव में रहते हैं” और “यदि कोई शांति और सांप्रदायिक सद्भाव में बाधा डालता है, तो उन्हें सख्त सजा दी जानी चाहिए।”

एक ग्राम निवासी और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी जोस कारमिनो ने सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा, “सरकार का भरोसा दिलाना नाम मात्र के लिए है। वे पिछली बार भी क्रूस के तोड़फोड़ में शामिल लोगों को पकड़ने में नाकाम रहे हैं।”

स्थानीय मीडिया के रिपोर्ट अनुसार दक्षिण गोवा के ख्रीस्तीय बहुल कुर्चोम शहर में 6 जुलाई को अज्ञात लोगों ने दो क्रूस को तोड़ दिया।

3 जुलाई को भी दक्षिण गोवा के कुर्टोरिम गाँव में दो क्रूस तोड़ दिये गये थे और उसी दिन माग्रो गांव में कृष्ण मंदिर के अंदर एक मूर्ति को नष्ट कर दिया गया था।

2 जुलाई सुबह को चन्दोर और पारोदा गांव के क्रूस टूटे मिले। पारंपरिक रुप में ख्रीस्तीय सड़कों के किनारे क्रूस की स्थापना करते हैं।

भाजपा विधायक निलेश काब्राल ने भी घटनाओं की निंदा की और कहा कि सामाजिक-विरोधी तत्व शांति को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। “गोवा के लोग एकजुट हैं और हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं। हम शांति और सांप्रदायिक सद्भाव में रहते हैं, लेकिन यदि कोई भी विरोधी-सामाजिक तत्व इसे परेशान करने की कोशिश करता है, तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”


(Margaret Sumita Minj)

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