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संत बेनेदिक्त के त्योहार पर संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on July 11, 2017 at 3:25 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार 11 जुलाई 2017 (रेई) : आज काथलिक कलीसिया यूरोप के संरक्षक संत बेनेदिक्त का त्योहार मनाती है। संत बेनेदिक्त की शिक्षा यूरोप की आध्यात्मिकता और संस्कृति को परिस्कृत करने में बहुत मदद की है। संत पापा ने संत बेनेदिक्त के नाम दिवस पर ट्वीट प्रेषित कर उनके आदर्शों और मूल्यों को नये उत्साह के साथ अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।

संत पापा ने संदेश में लिखा,″ यूरोप के पास आदर्शों और आध्यात्मिक मूल्यों की एक अद्वितीय विरासत है जिसे एक जुनून और उत्साह के साथ फिर से प्रस्तावित किया जाना चाहिए।″

संत बेनेदिक्त (480-547) ने बेनेदिक्ताईन धर्मसंघ की स्थापना की और मठवासी जीवन के लिये एक नियमावली लिखी जिसे यूरोप के प्राय: सभी मठों ने स्वीकार कर लिया। सन् 1964 ईस्वी में संत पापा पौल 6वें ने उन्हें पूरे यूरोप का संरक्षक संत घोषित किया और उनके कार्यों की मान्यता दी और कहा कि संत बेनेदिक्त की शिक्षा यूरोप की आध्यात्मिकता और संस्कृति को परिस्कृत करने में बहुत मदद की है।

उन्होंने अपने पीछे जो विरासत छोड़ दी वह हमें आमंत्रित करती है कि हम सदा ईश्वर को खोजें और ईश्वर के आज्ञाओं का पालन नम्रता पूर्वक करें, हर रोज अपनी जिम्मेदारियों को निभायें और जरुरतमंदों की मदद करें।


(Margaret Sumita Minj)

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भारतीय धर्माध्यक्षों द्वारा “शांति, सामंजस्य और भाईचारे” की अपील

In Church on July 11, 2017 at 3:23 pm

नई दिल्ली, मंगलवार 11 जुलाई 2017 (वीआर अंग्रेजी) : भारत की काथलिक कलीसिया ने देश में हो रहे सांप्रदायिक हिंसा, आतंकवादी हमलों, दंड और हत्या आदि बढ़ती घटनाओं की निंदा की है और लोगों से अपील की है कि वे धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र से ऊपर उठकर शांति, सामंजस्य और भाईचारे को बढ़ावा देने में एकजुट हो जाएं। भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों ने काश्मीर में सोमवार को अमरनाथ मंदिर से लौट रहे थके मांदे हिंदू तीर्थयात्रियों पर उग्रवादियों के आक्रमण को “नीचतापूर्ण और कायरता” का कृत्य कहा है। जिसमें 7 महिलाओं की मौत हो गई और 12 घायल हो गये थे। तीर्थयात्रियों की बस अनंतनाग के शहर के निकट उग्रवादियों और पुलिस के बीच सश्स्त्र लड़ाई में फँस गई।

“यह आखिरी हमला हिंसा की आग का एक और लक्षण है, जो दुर्भाग्य से देश को घेरने लगा है।” मंगलवार को एक बयान में भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मसकरेन्हास ने लिखा। देश की काथलिक कलीसिया के अधिकारियों ने “हाल के दिनों में देश में चरमपंथी हिंसा पर गहन दर्द और दुख” व्यक्त किया।

मुस्लिम बहुसंख्यक कश्मीर में आतंकवादी भारतीय शासन से जूझ रहे हैं। उनके 28 साल के सशस्त्र विद्रोह के सबसे हिंसक चरणों के दौरान भी उन्होंने काफी हद तक तीर्थयात्रियों को बचाया है। भारत इस क्षेत्र में सामान्य स्थिति को बहाल करने के लिए संघर्ष कर रहा है, जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस पर अपना दावा करते हैं।

अपने बयान में धर्माध्यक्ष मस्करेन्हास ने भी भारत में गाय की रक्षा के लिए, जिसे हिंदुओं ने पवित्र माना है एक जानवर के लिए लोगों की भीड़ पर हमला करने की निंदा की। उन्होंने कहा कि हम दहशत और उदास हैं कि अपने को गौरक्षक कहने वाले मनुष्यों पर हमला और हत्या तक कर देते हैं।”हिंसा चाहे किसी के नाम पर हो, यह जानवरों या भगवान या धर्म के नाम पर, इस तरह की हिंसा भयावह और अस्वीकार्य है।” “हम दलितों, आदिवासियों और अन्य कमजोर वर्गों के खिलाफ अत्याचारों की भी निंदा करते हैं। हम निर्दोष लोगों की मृत्यु पर शोक करते हैं और उनके परिवारों के लिए ईश्वर की सांत्वना हेतु की प्रार्थना करते हैं। ”

अपने बयान में धर्माध्यक्ष मस्करेन्हास ने भी “सांप्रदायिक हिंसा को लेकर पश्चिम बंगाल और देश के अन्य क्षेत्रों में फंसे होने पर चिंता व्यक्त की।” भारतीय धर्माध्यक्षों की ओर से उन्होंने सबों से “समाज में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बहाल करने हेतु अपील की।”

उन्होंने कहा,”यदि कोई जाति, पंथ और धर्म के आधार पर खुद को विभाजित करता है तो कोई राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता” हिंसा मृत्यु को लाती है और जीवन तथा परिवारों को नष्ट करती है। हम अपने बच्चों, युवाओं और हमारे देश के भविष्य को संकीर्ण राजनीतिक लाभों के लिए जोखिम में डाल नहीं सकते हैं।

“हमारे प्यारे देश को अपनी पारंपरिक शांति और सद्भाव के लिए जाना जाता है और यद्यपि हमने यहाँ कई बार अकल्पनीय हिंसा, मृत्यु और रक्तपात देखा है, पर हमारे समाज में फिर से शांति और भाईचारे की भावना वापस आ जाती है।”

उन्होंने लिखा कि हाल के दिनों में हत्या, आतंकवादी हमले बड़े ही भयावह और दुःखदायी हैं। “हम अपने सभी भारतीय भाई और बहनों को धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र से ऊपर उठने और शांति, सामंजस्य और भाईचारे को बढ़ावा देने में एकजुट करने की अपील करते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

फिलिपीन्स के धर्माध्यक्षों की अपील: “मारवाई में और कोई युद्ध नहीं”

In Church on July 11, 2017 at 3:22 pm

 

मनिला, मंगलवार 11 जुलाई 2017 (फीदेस) : ″मारवाई में और कोई युद्ध नहीं! हमारी मांगें है कि जल्द से जल्द मारवाई और आसपास के क्षेत्रों में शांति बहाल हो और सबकुछ सामान्य स्थिति में लौट जाए। हम मानते हैं कि मारवाई का युद्ध एक धर्म संघर्ष नहीं है। हमने सुना है और मुस्लिमों द्वारा ख्रीस्तीयों को मौत से बचाने की अनेक अद्भुत कहानियों को पढ़ा है और अब ख्रीस्तीय हजारों मुसलमानों की रक्षा कर रहे हैं जो मारवाई से अपनी जान बचाने के लिए भागे हैं। अतः ये निर्विवाद संकेत हैं कि कोई धार्मिक युद्ध नहीं है।” मनिला में चल रहे फिलीपींन्स के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आम सभा में उक्त अपील की गई तथा इसे फीदेस को भेजा गया।

धर्माध्यक्षों और मिंडानाओ इस्लामिक धार्मिक विद्वानों और नेताओं का कहना है कि मारवाई में म्यूट के हिंसक चरमपंथी समूह जो इस्लाम के प्रति निष्ठावान रहने का शपथ खाते है पर निर्दोष लोगों का अपहरण करते और उन्हें मार डालते हैं, वे इस्लाम के मूल सिद्धांतों का खंडन करते हैं। हिंसक उद्देश्यों के लिए धर्म के किसी भी साधन के उपयोग को हतोत्साहित करते हुए, धर्माध्यक्ष आग्रह करते हैं कि “माता-पिता, स्कूल, गिरजा और मस्जिद यह सुनिश्चित करे कि कोई भी आतंकवादियों द्वारा आकर्षित नहीं हो सकता है।” युवाओं को शिक्षा दें कि हम शांति में विश्वास करते हैं और कोई भी धर्म निर्दोष लोगों को मार डालने की शिक्षा नहीं देता,क्योंकि वे अन्य धर्म में विश्वास करते हैं।″

धर्माध्यक्षों का संदेश याद दिलाता है कि “दोनों धर्मों में पहले से ही शांति और समझ का आधार है। यह दोनों धर्मों के मौलिक सिद्धांतों का एक हिस्सा है, ″ एक मात्र ईश्वर को प्यार करो और अपने पड़ोसी को प्यार करो।″ अपने पड़ोसी को प्यार करने का अर्थ है, “मारवाई के संघर्ष से भाग रहे हजारों लोगों की मदद करने के लिए अपने संसाधनों को साझा करना।” धर्माध्यक्षों ने आतंकवादियों द्वारा बंधक बनाये गये नागरिकों की सुरक्षा हेतु प्रार्थना की अपील की।

अंत में उन्होंने सभी पीड़ितों और सभी मामलों को येसु की माँ मरियम के चरणों सें सुपूर्द किया। उन्होंने कहा, ″खीस्तीयों का विश्वास है कि 100 साल पहले येसु की माता मरियम ने फातिमा, जो पैगंबर मुहम्मद की बेटी का नाम है, के तीन बच्चों को दर्शन दिया। विभिन्न धर्मानुयाईयों के बीच शांति और एकता के लिए माता मरियम से प्रार्थना करें।


(Margaret Sumita Minj)

नाइजीरिया – करीब 5 लाख बच्चों के हैजा की चपेट में आने की आशंका

In Church on July 11, 2017 at 3:20 pm

 

अबूजा, मंगलवार 11 जुलाई 2017 (फीदेस) :  बरसात को मौसम आते ही नाइजीरिया के चाड लेक क्षेत्र में करीब 5 लाख बच्चों के हैजा या हेपेटाइटिस की चपेट में आने की आशंका है। बोको हाराम की हिंसा के कारण, मानवतावादी सहायता लगभग असंभव है। पश्चिम और मध्य अफ्रीका के लिए यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशकों के मुताबिक पहले से ही भयानक मानवीय स्थिति को बारिश और भी भयानक बना देगी। चूंकि संघर्ष ने लाखों बच्चों को कमजोर बना दिया है अब वे फैलते हुए हैजा जैसे रोगों का सामना कर रहे हैं।

भूख और भोजन की कमी से प्रभावित क्षेत्रों में असुरक्षा मानवतावादी सहायता के वितरण को और अधिक कठिन बना देती है। गंदे पानी, अपर्याप्त स्वच्छता और गंदगी की स्थिति में हैजा के प्रकोप पैदा हो सकते हैं। हैजा प्रदूषित जल और भोजन के माध्यम से फैलता है। यह विशेष रूप से बच्चों को प्रभावित करता है, जिससे दस्त और उल्टी हो सकती है शरीर में जल की कमी के कारण मृत्यु हो सकती है। हेपेटाइटिस ई यकृत को प्रभावित करता है और गर्भवती महिलाओं के लिए घातक है। 2017 की शुरुआत से अब तक, नाइजीरिया के डिफा क्षेत्र में 33 महिलाओं की मृत्यु हो गई है। नाइजीरिया की सीमा के निकट नाइजर के दक्षिण का यह डीफा क्षेत्र दोनों देशों के करीब 250 हजार शरणार्थियों और विस्थापितों को शरण दिये हुए है। पूर्वोत्तर नाइजीरिया में सबसे अधिक आतंकवाद से प्रभावित 5 लाख से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की बहुत ही आवश्यकता होती है।


(Margaret Sumita Minj)

इराक के प्रधानमंत्री द्वारा मोसुल की आज़ादी की घोषणा

In Church on July 11, 2017 at 3:19 pm

मोसुल, मंगलवार 11 जुलाई 2017 (एशिया न्यूज) : रविवार 9 जुलाई को इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने मोसुल के मुक्त क्षेत्रों का दौरा किया और कहा, ″बहुत जल्द मोसुल पूरी तरह से आजाद हो जाएगा।″ मोसुल को चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट के कब्ज़े से आज़ाद करने के लिए इराक़ी सेना को मुबारकबाद दी। पर इराकी सरकार ने अभी तक इस्लामिक स्टेट की हार की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

मोसुल के पुराने शहर में रविवार 9 जुलाई को दिनभर रुक-रुक कर संघर्ष की खबरें आती रही। यहाँ एक छोटे से इलाके में अब भी आईएस लड़ाके डटे हुए हैं और इराक़ी सेनाएं उनसे संघर्ष कर रही हैं।

प्रधानमंत्री हैदर ने कहा कि मोसुल शहर को आजाद कर लिया गया है हालांकि पुराने शहर के निकट पश्चिमी क्षेत्र के “एक या दो छोटे भागों में” प्रतिरोध जारी है, पर विजय निश्चित है। जो भी इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी बाकी बचे हैं वे इराकी सेनाओं से घिरे हैं। हमारे लोगों की महान जीत की घोषणा करने से पहले, यह महज समय की बात है।

प्रधानमंत्री के शब्दों को पश्चिमी चांसलरियों में उल्लिखित किया गया और दुनिया के विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों द्वारा खुशी के इसका स्वागत किया गया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रॉन ने एक ट्वीट प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है कि “मोसुल को दाएस से मुक्ति मिली। उन्होंने आईएस के लिए एक अरबी संक्षिप्त शब्द का उपयोग करके ट्वीट किया। “फ्रांस से श्रद्धांजलि हमारे सैनिकों के साथ, उन सभी को जिन्होंने इस जीत में योगदान दिया।” मिस्र के काथलिक कलीसिया के प्रवक्ता फादर ग्रिक राफिक ने भी संतोष व्यक्त किया। अपने फेसबुक प्रोफाइल में उन्होंने उन सभी को बधाई दी है जिन्होंने 9 महीनों के बाद मोसुल को मुक्त किया है।

इराक़ी सेनाएं पिछले साल 17 अक्टूबर से मूसल में कथित इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों के ख़िलाफ़ लड़ रही थी, उनकी इस लड़ाई में अमरीकी वायुसेना उन्हें मदद कर रही थी।

मोसुल पर जून 2014 से कथित इस्लामिक स्टेट का कब्ज़ा था। इराक़ी सेना के हज़ारों सैनिक, कुर्दिश पेशमर्गा लड़ाके, सुन्नी अरब आदिवासी और शिया विद्रोही लड़ाके मोसुल को नियंत्रण में लेने के लिए आईएस लड़ाकों से लड़ रहे थे।

मोसुल में 2014 के बाद से बड़ी संख्या में लोगों पलायन हुआ है और सहायता एजेंसियों का कहना है कि करीब 9 लाख लोग यहाँ से पलायन कर गए हैं।


(Margaret Sumita Minj)

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