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कार्डिलन लियोन्डो सैंद्री की उक्रेन यात्रा

In Church on July 13, 2017 at 3:03 pm

वाटिकन रेडियो, गुरुवार, 13 जुलाई 2017 (रेई) पूर्वी कलीसियाई सम्मेलन हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष कार्डिनल लियोनर्दो सैंद्री ने उक्रेन की यात्रा की।

जूलियन कैलेन्डर के अनुसार उन्होंने उक्रेन के पुनरुत्थान महागिरजाघर में संत पेत्रुस और पौलुस की शहादत का ख्रीस्तीयाग अर्पित करते हुए अपने प्रवचन में कहा कि हमारी एकता कलीसियाई नियम या कानून के आधार पर परिभाषित नहीं की जा सकती है वरन यह येसु ख्रीस्त का जीवित शरीर है जिसे संत पौलुस यह कहते हुए हमारे समक्ष घोषित करते हैं कि यदि शरीर का एक अंग पीड़ित है तो पूरे शरीर को कष्ट झेलना पड़ता है। संत पापा के संदेश को उक्रेनियन कलीसिया के लिए व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने प्रेम के रुप में आप सभों के पीड़ित हृदय हेतु मरहम भेजते हैं। हम यहाँ एक साथ मिलकर पूर्वी कलीसिया के अपने भाई-बहनों के लिए प्रार्थना करते हैं जो येसु ख्रीस्त के अंग हैं लेकिन हम उन्हें एक ही बलि वेदी से ग्रहण नहीं कर सकते हैं। संत पेत्रुस और पौलुस का त्योहार हमें संत पापा फ्रांसिस से संयुक्त करता है जहाँ हम उनके सामीप्य और स्नेह का अनुभव करते हैं।

मिस्सा बलिदान के अंत में विश्वासी भक्तों के समुदाय एक साथ मिलकर उन्होंने महागिरजाघर से तीर्थ यात्रा करते हुए कार्डिनल लुबोमिर हुसर की कब्रगाह पर जा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जहाँ बैजेनाटईन रीति से प्रार्थना किया गया।
इसके बाद कार्डिनल सैंद्री प्राधिधर्माध्यक्ष के अधिकारिक भवन में दूरदर्शन को एक साक्षात्कार देते हुए पूर्वी और पश्चिमी रीति की कलीसियाओं के मध्य आपसी एकता पर पूछे गये सवालों का उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि कलीसिया जो येसु में विश्वास करती और उसे भले सामारी के रुप में जीती है तो वह झुककर अपने लोगों के दुखों में सांत्वना के तेल उड़ेलती है। हम एक साथ मिलकर भविष्य में आशा, शांति और मेल-मिलाप में रहने हेतु बुलाये गये हैं।

कार्डिलन सैंद्री ने उक्रेन की अपनी भेंट के दौरान हाल ही में दिवंगत कार्डिनल लुबोमिर हुसर के निवास की भी भेंट की जहाँ वे अपने साक्ष्यों को एक संग्रहालय का रूप देने की बात सोचते थे।

(Dilip Sanjay Ekka)

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विवाह के पक्ष में कलीसिया की प्रतिबद्धता

In Church on July 13, 2017 at 3:01 pm

वाटिकन रेडियो, गुरुवार, 13 जुलाई 2017 (रेई) माल्टा की संसद ने बुधवार को अपने एक निर्णय के मुताबिक कलीसिया में विवाह और अन्य नियमों की प्रतिबद्धता को दोहराई।

इस कानूनी निर्णय के द्वारा विवाह हमेशा से स्त्री और पुरुष के बीच एक अनन्य बंधन है, जो  संतान उत्पत्ति के प्रति खुला है। विवाह स्त्री और पुरुष के बीच एक ऐसा आदर्श संबंध है जो मानवता के द्वारा सदैव अंगीकृत किया गया जो केवल ख्रीस्तीय वैवाहिक जीवन की दृष्टि नहीं है।

समाज में सामाजिक विवाह के संबंध में एक तटस्थ अवधारण का संलग्न जो समाज में किसी भी दम्पति के लिए खुला है जिसके द्वारा कानून नर और नारी के बीच प्राकृतिक और पारस्परिकता के अंतर को दूर करता है। इस अन्तर के फलस्वरूप परिवार में मानव विज्ञान की जड़ों दूर होती है। इस तरह विविधता को स्वीकार करने के बदले समाज में एकरूपता को लागू करना समाज को दरिद्र बनाता है।

कलीसिया हर मानव का सम्मान करती है क्योंकि वह हर व्यक्ति को सभी ईश्वर के प्रति रुप में देखती है। कलीसिया आशा करती है यह नियम बच्चों के जीवन का हनन न करें। कलीसिया समाज को इस बात हेतु आहृवान करती है कि वह बच्चों को ईश्वर के उपहार स्वरूप देखे जिन्हें दुनिया में जन्म लेने हेतु एक उचित वातावरण की आवश्यकता है जो वे जन्म, बढ़ते और समाज में विकास करते हैं जहाँ प्रेम उनके जीवन का एक महापूर्ण अंग होता है।

इस सच्चाई संदर्भ में कलीसिया येसु ख्रीस्त के वचनों के द्वारा निर्देशित की जाती है जहाँ विवाह और परिवार में बच्चे समाज के एक महत्वपूर्ण अंग बनते हैं। वह अपने में उन माता-पिता के कार्यों की प्रशंसा करती है जो अपने में एक-दूसरे के प्रति वफादार बने रहते और अपने अद्वितीय जीवन को अपने बच्चों के लिए निछावर कर देते हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

ब्राजील के भूतपूर्व राष्ट्रपति लूला को जेल की सजा

In Church on July 13, 2017 at 2:56 pm

ब्राजील गुरुवार, 13 जुलाई 2017 (वीआर) ब्राजील के भूतपूर्व राष्ट्रपति लुइज़ इनासिओ लुला दा सिल्वा को भ्रष्टाचार के आरोप में साढ़े नौ साल की सज़ा सुनाई गई है।

न्यायाधीश सेरजो मोरो ने ब्राजील के दो बार राष्ट्रपति पद में रह चुके लुइज इनासिओ लुला को मुख्य रूप से राज्य में पेट्रोलियम कंपनी पेट्रोब्रास के संचालन के बदले लक्जरी अपार्टमेंट के रूप में 1.2 मिलियन घूस लेने के जुर्म में दोषी करार देते हुए साढ़े नौ साल की कारावास की सज़ा सुनाई है। भूतपूर्व राष्ट्रपति अपने गुनाह को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई भी जुर्म नहीं किया है बल्कि यह राजनीति दाँवपेंच है। उन्होंने कहा, “वे अपनी ओर से मुकदमा लड़ाते रहेंगे।”

विदित हो एक अत्यन्त गरीब परिवार में जन्में लुला संघ के नेता बने और दो बार देश के राष्ट्रपति नियुक्त किये गये। वे देश के लाखों लोगों में गरीबी उन्मूलन हेतु कार्य करने के लिए प्रसिद्ध है। अपने  उत्तराधिकारी के रुप में उनके द्वारा चुने गये दिलमा रोसेफ को बैंकों के माध्यम से अर्थव्यवस्था में कथित रुप से हेरा-फेरी का दोषारोपण करते हुए राष्ट्रपति पद से पदच्युत कि दिया है, जबकि वर्तमान राष्ट्रपति माइकल टेमर पर भी औपचारिक रूप से रिश्वतखोरी के आरोप लगाये गये हैं।


(Dilip Sanjay Ekka)

यूरोपीय संघ शांति स्थापना को महत्व दे

In Church on July 13, 2017 at 2:55 pm

 

वाटिकन रेडियो, गुरुवार (13 जुलाई 2017) यूरोपीय कलीसिया ने यूरोपीय संघ से अनुरोध किया कि वे सैन्यीकरण में वित्तीय खर्च की अपेक्षा शांति और सुलाह हेतु मसौदे तैयार करे।

यूरोपीय कलीसियाई सम्मेलन ने गुरुवार को शांति बढ़ावा और मेल-मिलाप की संगोष्ठी के दौरान  वक्तव्य जारी करते हुए उन नीतियों का विरोध किया जो यूरोपीय संघ को एक सैन्य गठबंधन में परिवर्तित करेगा।

यूरोपीय आयोग के वक्तव्य का निर्माण वर्तमान सुरक्षा नीतियों के तीन काग़ज़ातों के आधार पर किया है जिसके तहत वे सैन्य खोज हेतु वित्त व्यय और सुरक्षा उद्योग हेतु आर्थिक सहायता प्रदान करेंगे। दस्तवेज में कहा गया है कि सैन्य मद खर्च में वृद्धि सुरक्षा पर एक दुष्परिणाम उत्पन्न करेगा जबकि इसी मद को और किसी दूसरे क्षेत्रों में व्यय करना मेल-मिलाप, स्थायित्व और विकास को बढ़ावा देगा जो सुरक्षा का आधार है।

सीईसी के प्रधान सचिव पुरोहित हियेक्की  हुटुनेन  ने कहा,“कलीसिया सुसमाचार के मूल्यों को प्रसारित करती है, अतः हम यूरोपीय संघ से आग्रह करते हैं कि वे सभी मानव और वित्तीय संभावनाओं को शांति बहाल करने हेतु एक संयुक्त सुरक्षा के रुप में एकत्रित करे। यूरोपीय परियोजना अपने विभिन्न अभिव्यक्तियों में गैर-सैन्य माध्यमों के द्वारा यूरोप में शांति, स्थायित्व और समृद्धि का एक उदाहरण पेश करता है।


(Dilip Sanjay Ekka)

धर्मों में आशा की किरणें हैं

In Church on July 13, 2017 at 2:53 pm

दक्षिणी सूडान, गुरुवार (13 जुलाई 2017) देश में मानवीय अधिकारों के हनन और क्रूर गृह युद्धों के कारण आजादी के छः वर्षो बाद दक्षिणी सूडान में मानवीय संकट की स्थिति पहले से भी बदतर हो गई है, उक्त बातें तंबूरा-यमबियो के धर्माध्यक्ष और सूडान काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सभापति धर्माध्यक्ष एडवर्ड हाइबोरो कुसाला ने कही।

दक्षिणी सूडान की 6वीं स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने वाटिकन के फिदेस समाचार को दिये गये अपने संदेश में उन्होंने कहा, “मैं एक देशभक्त हूँ और मैं अपने में कृतज्ञता का अनुभव करता हूँ कि मैं गणतंत्र दक्षिणी सूडान का एक नागरिक हूँ। मैं ईश्वर का शुक्रिया अदा करता हूँ क्योंकि उन्हें मुझे इस सुन्दर देश में जन्म दिया है। मैं इन छः वर्षों में समय के साथ दक्षिणी सूडान में हुए विकास को लेकर गौरवान्वित अनुभव करता हूँ जिसका जन्म 9 जुलाई 2011 को हुआ।”

देश के प्रति अपने समर्पण और प्रेम को भावना को प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि मैं अपने देश की एकता हेतु कार्य करने की चाह रखता हूँ, अपने जीवन को देश में अनंत शांति बहाल करने हेतु देना चाहता हूँ जिसे कुछ लोगों ने चुरा लिया है। मेरे समान बहुत से और भी हैं जो विभिन्न धर्मों से ताल्लुक़ात रखते हैं जिन्होंने आशा का परित्याग नहीं किया है। उन्होंने देश की विकट स्थिति को देखते हुए कहा कि मैं सोचता हूँ कि वर्तमान स्थिति हमारे देश का मात्र एक अस्थायी दौर है। “स्वतंत्रता और शांति हमारे लिए ईश्वर का उपहार है जिसे वे अपने बच्चों के लिए देते हैं। यह हमें एक दिन में प्राप्त नहीं होती वरन इसके लिए हमें रोज दिन मेहनत करना होता है।”

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने चार मुख्य बिन्दुओं पर जोर देते हुए कहा कि देश में हिंसा व्याप्त है लेकिन अपने सुन्दर देश के प्रेम खातिर हमें अपने हथियारों का परित्याग कर युद्ध विराम करने की जरूरत है। देश में शांति बहाल करने हेतु हमें सभी स्तरों पर वार्ता करने की आवश्यकता है। तीसरा देश में राष्ट्रीय दिवालियापन की घोषणा करना आवश्यक है और चौथा हमें एक साथ मिलकर निरंतर प्रार्थना करने की जरूरत है। “दक्षिणी सूडान के प्रिय लोगों हमें सच्चे मन-दिल से प्रार्थना करने की जरूरत है जिससे हम विभिन्न मज़हबों के अनुनायियों को प्रभावित कर सकें जिससे हमारे देश का जीवन खुशहाल और अर्थपूर्ण हो सकें।”


(Dilip Sanjay Ekka)

पवित्र धर्मग्रन्थ बाईबिल एक परिचय स्तोत्र ग्रन्थ भजन 86 (भाग-4)

In Church on July 13, 2017 at 2:51 pm

पवित्र धर्मग्रन्थ बाईबिल एक परिचय कार्यक्रम के अन्तर्गत इस समय हम बाईबिल के प्राचीन व्यवस्थान के स्तोत्र ग्रन्थ की व्याख्या में संलग्न हैं।

स्तोत्र ग्रन्थ 150 भजनों का संग्रह है। हम स्तोत्र ग्रंथ के छियासिवें भजन की व्याख्या में संलग्न हैं छियासिवां भजन राजा दाउद के द्वारा लिखी गई विपत्ति से उबरने हेतु प्रार्थना थी। दाऊद के हृदय से निकली जीवन के हताश और निराश घड़ी की उस प्रभु से प्रार्थना थी जिसे वह अच्छी तरह जानता था। राजा दाउद ने प्रभु से उसकी विनय सुनने और पूरा करने की गुहार लगाई थी।

राजा दाऊद के इस विनय प्रार्थना में हम हमारे आध्यात्मिक जीवन में उठने वाले सवालों और उनके जवाब पाते हैं। वे सवाल हैं 1. हमें क्यों प्रार्थना करनी चाहिए। हमें प्रार्थना करनी चाहिए क्योंकि हमें प्रार्थना की बहुत आवश्यकता है।

2.हमें किससे प्रार्थना करनी चाहिए? हमें सर्वशक्तिमान, सर्वव्यापी दयालु, कृपावान, सबके रक्षक और प्रेमी ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए।

3. हमें कैसे प्रार्थना करनी चहिए? विगत सप्ताह हमने इसी प्रश्न पर गौर किया था कि हमें ईमानदारी से, लगातार, कृतज्ञतापूर्वक, नम्रता और पूरे विश्वास एवं भरोसे के साथ विश्वास के साथ प्रार्थना करनी चाहिए।

दाऊद ने प्रभु पर भरोसा किया। वह कहता है,″प्रभु तुझपर भरोसा है अपने दास का उद्धार कर।″ (पद संख्या 2) दाऊद इस बात को भी जानता है कि जब कभी भी उसने संकट की धड़ी में उसे पुकारा प्रभु ने उसकी सुनी। दाउद को इस बात का भी भरोसा है कि प्रभु उसे अधोलोक की गहराईयों से उसका उद्धार करेगा। पद संख्या 17 में हम पढ़ते हैं, ″मुझे अपनी कृपादृष्टि का प्रमाण दे। तब मेरे शत्रु, यह देखकर,हताश होंगे कि प्रभु, तू मुझे सहायता और सांत्वना प्रदान करता है।″ यहाँ दाउद का प्रभु से कृपादृष्टि का प्रमाण मांगना संदेह से पैदा नहीं होता। वह यह नहीं कहता है कि “हे प्रभु, यदि तू मुझे अच्छाई का प्रमाण दे, तभी मैं तुझ पर भरोसा रखूंगा।” बल्कि दाऊद को कुछ लम्बे समय से उसके शत्रुओं ने आक्रमण कर रखा था और उसके दुश्मन यह कहते हुए दाऊद की हँसी उड़ा रहे थे कि ″हा.. देखो, दाऊद ने अपने ईश्वर पर भरोसा किया पर कहाँ उसका ईश्वर उसे बचाने आता है।″ वास्तव में दाऊद के शत्रु खुद ईश्वर का मजाक कर रहे थे। अतः दाऊद ने अपने शत्रुओं को शर्मिंदा करने के लिए प्रभु से एक उत्साहजनक संकेत पूछता है जिससे उसके शत्रु यह देखकर हताश हो जाऐंगे कि दाऊद का प्रभु उसकी सहायता और सांत्वना प्रदान करता है।

श्रोताओ, विश्वास वास्तविकता से अपनी आँखों को बंद करने और अंधेरे में कूदने वाली बात नहीं है। बल्कि,  हमारी प्रार्थना के प्रत्युत्तर के माध्यम से ईश्वर स्वयं को प्रकट करता है। ईश्वर में विश्वास करने का मतलब यह नहीं कि हम जो भी मांगते हैं उसे ईश्वर को देना ही है। संत लूकस के सुसमाचार में हम पाते हैं येसु ने पिता ईश्वर से इसतरह प्रार्थना की थी। ″हे पिता यदि तू चाहे, तो यह प्याला मझसे हटा ले। फिर भी मेरी इच्छा नहीं, बल्कि तेरी ही इच्छा पूरी हो।″ और उन्होंने क्रूस पर मरना स्वीकार करते हुए अपने ईश्वर में विश्वास को अंत तक बनाये रखा। विश्वास ईश्वर की कृपा और प्रेम पर निर्भर है।

4)  अंत में प्रश्न यह उठता है कि हमें क्या के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। प्रार्थना करे भी तो क्यों करें?

दाऊद ने प्रभु से प्रार्थना मुक्ति के लिए, परीक्षा की घड़ी में आनंद के लिए; सीखने के लिए, आज्ञाकारी बने रहने के लिए, एकाग्रता के लिए, श्रद्धालु हृदय के लिए; और सभी पर ईश्वर की महिमा और प्रभुता के लिए प्रार्थना की थी।

मुक्ति के लिए प्रार्थना

दाऊद ने प्रभु से अपने शत्रुओं से बचाने के लिए प्रार्थना की थी। (पद संख्या 2 & 16 ) नये व्यवस्थान में हम मुक्ति शब्द विभिन्न अर्थों में पाते हैं। येसु मसीह दुनिया के मुकितुदाता के रुप में प्रकट हुए। लूकस 19, 10 में हम पढ़ते है,″जो खो गया था मानव पुत्र उसी को खोजने और बचाने आये हैं।″ जबकि संत मत्ती के सुसमाचार के अध्याय 1 पद संख्या 21 में हम पढ़ते हैं ″ वे पुत्र प्रसव करेंगी और आप उसका नाम ईसा रखेंगे, क्योंकि वो अपने लोगों को उनके पापों से मुक्त करेगा।″ तिमथी के नाम पहले पत्र में संत पौलुस कहते हैं कि यह कथन सुनिश्चित और नितांत विश्वसनीय है कि येसु मसीह पापियों को बचाने के लिए संसार में आये।″ (1तिम,1:15). येसु हमें हमारे पापों से मुक्त करते हैं वे चाहते हैं कि हम पापा के बंधन में न रहें पर पाप मुक्त स्वतंत्र ईश्वर के बेटे-बेटियों का जीवन जीयें। अतः हमें बिता ईश्वर से उदारता पूर्वक अपने पापों से मुक्ति पाने हेतु प्रार्थना करनी चाहिए।

परीक्षा की घड़ी में आनंद के लिए प्रार्थना

दाऊद ने इस तरह से प्रार्थना की, ″प्रभु, अपने दास को आनंद प्रदान कर, क्योंकि मैं अपनी आत्मा को तेरी ओर उन्मुख करता हूँ।″ (पद 4)  दाउद को प्रभु का दास बनकर रहना अधिक आनंदकर था क्योंकि उसने अनुभव कर लिया था कि प्रभु ही सभी आनंद के श्रोत हैं। दाउद की खुशी उसका आनंद देने वाले सिर्फ और सिर्फ प्रभु ही हैं इस लिए दाउद सब समय परीक्षा का घड़ी में भी प्रभु से आनंद के लिए प्रार्थना की।

दाऊद ने प्रभु से सीखने के लिए, आज्ञाकारी बने रहने के लिए, एकाग्रता के लिए और श्रद्धा के लिए प्रार्थना की। पदसंख्या 11 में हम पढ़ते हैं, ″ प्रभु, मुझे अपना मार्ग दिखा, जिससे मैं तेरे सत्य के प्रति ईमानदार रहूँ। मेरे मन को प्रेरणा दे, जिससे मैं तेरे नाम पर श्रद्धा रखूँ।″ किसी भी परीक्षण के लिए सीखने वाला मन और हृदय आवश्यक है कठिन परिस्थितियों के माध्यम से ईश्वर अपने बारे में प्रकट करता, साथ ही हम अपने बारे में भी सीखते हैं। हममें से अधिकांश सहज उद्धार के लिए प्रार्थना करते हैं जिससे कि जितनी जल्दी हो सके कठिनाईयों से बाहर आ जायें। परंतु संत पौलुस मसीह के दुःखभोग का सहभागी होना चाहते थे जिससे वे पुनरुत्थान के सामर्थ्य का अनुभव कर सके।(फिली 3:10)। दाऊद ने प्रार्थना की कि वह परमेश्वर के मार्ग सीखें ताकि वह परमेश्वर की सच्चाई का पालन में चल सके। उसने प्रार्थना की कि ईश्वर पर से उसकी निष्ठा न बिखरे और न ही विभाजित हो। बल्कि एकजुट तथा एक मन एक हृदय बना रहे। वे प्रभु में पूर्णरुपेण समर्पित होना चाहते थे। दाउद ने प्रभु से सच्ची श्रद्धा के लिए प्रार्थना की।

सभी पर ईश्वर की महिमा और प्रभुता के लिए के लिए प्रार्थना

पदसंख्या 9 में राजा दाऊद भविष्यवाणी करते हैं,″प्रभु तूने राष्ट्रों का निर्माण किया, वे सब आकर तेरी आराधना करेंगे और तेरे नाम की महिमा करेंगे।″ और दाऊद यह भी पुष्टि की है कि ″मेरे प्रभु ईश्वर, मैं सारे हृदय से तुझे धन्यवाद दूँगा, मैं सदा तेरे नाम की महिमा करुँगा।″ ईश्वर हमारे जीवन में कठीनाईयों और दुःख विपत्तियों को आने देता है जिससे कि हम प्रभु के चरणों में जाएँ उससे मिन्नतें करें और जब प्रभु हमें विपत्तियों से उबारे तो हम महिमा गायें। 50 वे भजन के15 में  प्रभु कहते हैं, ″संकट के समय मेरी दुहाई दो। में तुम्हारा उद्धार करुँगा और तुम मेरा सम्मान करोगे।″ श्रोताओ संकट के समय तो हम अनायास ही प्रभु की याद करते है हमें हर समय प्रभु की याद करनी चाहिए और हर बात के लिए प्रभु को धन्यवाद के गीत महिमा के गीत गाना चाहिए जैसा कि राजा दाउद ने किया था। प्रभु तू भला है, तू दयालु है और अपने पुकारने वालों के लिए प्रेममय।  अब हम छियासिवें भजन की व्याख्या को यहीं विराम देते हैं।

 


(Margaret Sumita Minj)

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