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पाकिस्तान में ख्रीस्तीय युवक मुहम्मद की निंदा के आरोप में गिरफ्तार

In Church on July 21, 2017 at 3:49 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार 21 जुलाई 2017 (वीआर) पाकिस्तान ने पैगम्बर मुहम्मद की निंदा के जुर्म में 16 वर्षीय एक ईसाई युवक शहजाद मसीह को गिरफ्तार किया है।

विदित हो कि पंजाब प्रान्त के दिंगा शहर में शामीम रियाज अस्पताल में झाडू लगाने का कार्य करने वाला शहजाद मसीह को पैगम्बर मुहम्मद की निंदा करने के जुर्म में एक इस्लामी चरमपंथी दल, तहरीक-ए-तहफज़ ने 14 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया है।

शहजाद के परिवार वालों ने बतलाया कि पिछले महीने अस्पताल के इस्तियाक कादरी एक चिकित्सक से उसकी बकझक हो गई थी जिसके चिकित्सक ने उसे शांत किया। 13 जुलाई को पुनः कादरी ने शहजाद को उकसाया और उस पर मुहम्मद को अपमानित करने का जुर्म लगाया। शाहजाद की माता ने कहा, “मैंने उसे एक अच्छे ख्रीस्तीय के रुप में बड़ा किया है। मैं उसे किसी धर्म या व्यक्ति के विरुद्ध घृणा करना नहीं सिखलाई। इसीलिए मैं कहती हूँ उस पर लगाया गया दोष गलत है।”

उसकी गिरफ्तारी के बाद परिवार वालों के जबरदस्ती भगाया गया क्योंकि उनके खिलाफ भी फतवा जारी किया गया था। संचार माध्यमों में नवयुवक की तस्वीर लानत के नाम से वायरल हो रही है। इस्लामी समुदाय की ओर से इम्माम गाजी साकिब शकील ने कहा, न्याय प्रणाली दोषीदार को इस तरह की कड़ी सजा दे कि और कोई कभी मुहम्मद की निन्दा करने का साहस न करे।

पाकिस्तान में पैगम्बर मुहम्मद की निंदा करने वालों को सजा-ए-मौत दी जाती है जबकि कुरान का अपमान करने वालों को आजीवन कारावास दिया जाता है। ब्रिटिश पाकिस्तान ख्रीस्तीय संगठन के अध्यक्ष विल्सन चौधरी ने शहजाद की गिरफ्तारी पर दुःख जताते हुए कहा कि इस कठोर नियम को एक तरह से भेदभाव उत्पन्न करने हेतु किया जाता है जिससे लोगों का धर्मातरण जबरदस्ती कराया जा सके। जबकि विश्व ने विरुद्ध मूक बनी हुई है। उन्होंने कहा, “लड़के को अब अदालती दौर से हो कर गुजरना होगा और उसकी आधा से अधिक जिन्दगी सलाख़ों के पीछे गुजरेगी।

ज्ञात हो कि पाकिस्तान में ख्रीस्तीय महिला आसिया बीबी एक बहुचर्चित केस है जिस पर मुहम्मद को अपमानित करने का आरोप लगते हुए सन् 2010 में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई गयी थी लेकिन  उसके मृत्युदंड को सर्वोच्च न्यायालय ने विगत साल 13 सितम्बर को स्थगित कर दिया।

भूतपूर्व राज्यपाल सलमान तासीर और काथलिक मंत्री शाहबाज भट्टी को सन् 2011 में आसिया बीबी के केस की वकालत करने और ईश निंदा के नियम का दुरुपयोग करने के कारण मौत का शिकार होना पड़ा था।

आये दिन पाकिस्तान में ईश निंदा के मुक़दमों में इजाफा हुआ है। अप्रैल के महीने में एक मानसिक रुप से असंतुलित व्यक्ति को मस्जिद में अपमान जनक बातें कहने के जुर्म में चित्राल की भीड़ के हत्थे चढ़ना पड़ा था। इसके पहले मारदान के अब्दुल वाली खान महाविद्यालय के 24 वर्षीय एक युवा मशाल खान को ऑनलाईन में अपमान जनक चीज़ें पोस्ट करने के कारण भीड़ का शिकार होना पड़ा था।


(Dilip Sanjay Ekka)

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