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भारतीय धर्मप्रांत की ओर से कश्मीर के स्कूली छात्रों के लिए शांति कार्यक्रम

In Church on July 25, 2017 at 2:34 pm

श्रीनगर, मंगलवार 25 जुलाई 2017 (वाटिकन रेडियो) : जम्मू-कश्मीर धर्मप्रांत ने भारत-पाकिस्तान सीमा के भारतीय पक्ष पर शांति की आवश्यकता पर युवा लोगों को शिक्षित करने के लिए एक परियोजना शुरू की है जहां दोनों देशों के बीच शत्रुता ने सैकड़ों लोगों को मार डाला है।

इस धर्मप्रांत के अंतर्गत भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर दोनों पड़ोसी देशों के बीच के विवादित क्षेत्र आता है। भारत और पाकिस्तान दोनों ही इस क्षेत्र का दावा करते हैं और प्रत्येक भाग का प्रशासन करते हैं।

दो परमाणु शक्ति प्रतिद्वंद्वियों ने कश्मीर पर कम से कम तीन बड़े युद्ध लड़े हैं। सीमा क्षेत्र में भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच सामयिक गोलाबारी का आदान-प्रदान होता रहता है। अक्सर वहां रहने वाले स्थानीय लोगों को प्रतिकूल प्रभाव झेलने पड़ते हैं। जब से ब्रिटिश शासन उपमहाद्वीप में समाप्त हुआ और 1947 में भारत और पाकिस्तान दो अलग-अलग राष्ट्र बन गए तभी से यह क्षेत्र दोनों के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

जम्मू-श्रीनगर धर्मप्रांत की सामाजिक सेवा शाखा के काथलिक समाज सेवा संघ के निदेशक फादर साजू चाको ने कहा, “धर्मप्रांत का शांति कार्यक्रम दोस्ती और एकता को बढ़ावा देने का प्रयास है। उन्हें इस बात को स्वीकार करने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है कि हम सभी एक मानव परिवार के सदस्य हैं।” कारितास इंडिया द्वारा वित्त पोषित परियोजना को “मैत्री अभियान” (शांति आंदोलन) कहा जाता है, यह स्कूल के बच्चों पर केंद्रित है। परियोजना संयोजक एम तोंगपांग ने कहा कि अब तक, वे जम्मू और सीमा क्षेत्रों के 12 स्कूल में इस परियोजना के तहत काम कर रहे हैं।

आरएस पोरा के सीमा क्षेत्र के होली क्रॉस कॉन्वेंट स्कूल की नौवीं कक्षा की छात्रा अनीता शर्मा ने ऊका समाचार से कहा कि उसने और उसकी सहेलियों ने कार्यक्रम के तहत विभिन्न लेख-रचना प्रतियोगिताओं में भाग लेती आ रही हैं “देश में क्या हो रहा है, इसके बारे सोचने में मदद मिलती है।”

शर्मा ने कहा, “शत्रुता के कारण सिर्फ विनाश ही हुआ है। अगर हमें प्रगति करना है, तो शांति अपरिहार्य है। हम छात्र शांति के इच्छुक हैं और शांतिपूर्ण कल की आशा करते हैं।”

समाज सेवा शाखा के उपनिदेशक फादर प्रफुल्ल तिग्गा ने बताया विभिन्न स्कूलों के बच्चों को 30-35 के दल में विभाजित किया जाता है और शिक्षकों की मदद से उन्हें शांति के बारे अपने ज्ञान और अनुभव को साझा करने के लिए अवसर दिया जाता है।


(Margaret Sumita Minj)

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