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बोरुसिया मोनख़ेन्गनबक के फुटबॉल सोसाइटी को संत पापा का संदेश

In Church on August 2, 2017 at 3:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 2 अगस्त 2017 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 2 अगस्त को वाटिकन के संत पापा पौल छठे सभागार में बोरुसिया मोनख़ेन्गनबक के फुटबॉल सोसाइटी के खिलाड़ियों और अधिकारियों से मुलाकात की।

संत पापा ने वाटिकन में उनका सहर्ष स्वागत करते हुए कहा कि आपकी वाटिकन यात्रा हमारे बीच दोस्ती के रिश्ते के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अवसर देता है। हाल के वर्षों में आपकी फुटबॉल टीम और विशेष रूप से आपकी पुरानी गौरवमयी टीम और वाटिकन कर्मचारियों के खेल संघ के बीच रोम और मोनख़ेन्गनबक में अनेक बार बैठक आयोजित किये गये थे।  ख्याति प्राप्त ‘फोह्लन-एल्फ’ अन्य टीमों से अलग है। यह हमेशा से “दर्जियों द्वारा बनाई गई” टीम है और यह टीम परिवारों के सेवार्थ समर्पित है। यह देखना कितना अच्छा लगता है कि बोरुसिया पार्क परिवारों से भरा रहता है। जहाँ विभिन्न खेल और शैक्षिक कार्यक्रम चलाए जाते हैं। यह पहल युवा लोगों के लिए, विशेष रूप से वंचित लोगों को बढ़ावा देने के लिए किया गया है।

अंत में संत पापा ने कहा,″ मैं आपलोगों को “अच्छा और शांति के एथलीटों” के रूप में अपने कार्यों को जारी रखने के लिए आमंत्रित करता हूँ जिसकी आज दुनिया को जरुरत है।


(Margaret Sumita Minj)

″असीसी की क्षमा″ समारोह में कार्डिनल परोलिन का संदेश

In Church on August 2, 2017 at 3:24 pm

असीसी, बुधवार 2 अगस्त 2017 (रेई) : 2 अगस्त को इटली के असीसी पोरचुंगुला में सांता मरिया देली अंजेली महागिरजाघर में ″असीसी की क्षमा″ के 800वी वर्षगांठ के समापन समारोह में ख्रीस्तयाग के मुख्य अनुष्ठाता वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन थे।

समारोह के दौरान कार्डिनल पारोलिन के संत पापा फ्राँसिस द्वारा अपने विशेष दूत के रुप में भेजे जाने हेतु अपना आभार प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि ″असीसी की क्षमा″ का अनुमोदन संत पापा होनोरियुस तृतीया ने संत फ्राँसिस असीसी के निवेदन पर 2 अगस्त सन् 1216 ई. में दी थी। ‘असीसी की क्षमा’ पर्व का अर्थ है कि यह ईश्वर द्वारा अपने पापों की क्षमा हेतु खुद फाँसिस असीसी की खोज थी जब उन्होंने अपने आप को क्षमा किया एवं ईश्वर द्वारा क्षमा किये जाने हेतु तैयार हुए तब उन्होंने एहसास किया था कि दूसरों को भी क्षमा दिया जाना चाहिए। जिसको उन्होंने सभी के लिए देने का निश्चय किया, यहाँ तक कि अपने दुशमनों के लिए भी।

कार्डिनल पारोलिन ने कहा कि क्षमा का यह संदेश जो पोरचुंगोला से निकल रही है प्रत्येक को निमंत्रण दे रही है कि हम रूक जाएँ, छोड़ा वक्त निकालें, ईश्वर की आवाज सुनें जो हमसे कह रहे हैं ″मैं तुम्हें क्षमा प्रदान करता हूँ और तुमसे प्रेम करता हूँ, तुम मेरे पास लौट आओ।″

विदित हो कि गत वर्ष 4 अगस्त को संत पापा फ्राँसिस ने भी करुणा की जयन्ती वर्ष में असीसी की व्यक्तिगत तीर्थयात्रा की थी और क्षमा की महत्ता पर विश्वासियों को अपना संदेश देते हुए कहा,″जिस क्षमा का स्रोत संत फ्राँसिस ने अपने को यहाँ पोरचुंगुला हेतु बनाया, आठ दशकों के बाद आज भी स्वर्ग को हमारे बीच लेकर आता है। करुणा के इस जयन्ती वर्ष में यह स्पष्ट रुप से झलकता है कि क्षमाशीलता सचमुच में कलीसिया और दुनिया को नया बना सकती है। दुनिया को क्षमा का साक्ष्य देने से हम अछूता न रहे। आज दुनिया को क्षमा की जरूरत है, बहुत सारे लोग हैं जो घृणा और क्रोध को अपने में वहन किये हुए हैं क्योंकि वे क्षमा करने में अपने को असमर्थ पाते हैं। वे अपना जीवन तो बर्बाद करते ही हैं अपने इर्दगिर्द रहने वालों का जीवन भी शांति और खुशी में भरने के बदले अशांत कर देते हैं। आइए हम संत फ्रांसिस से निवेदन करें कि वे हमारे लिए विनय करें जिससे हम क्षमा और करुणा का दीन मध्य बन सकें।″


(Margaret Sumita Minj)

विश्व पर्यटन दिवस 2017 पर वाटिकन द्वारा संदेश प्रकाशित

In Church on August 2, 2017 at 3:22 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 2 अगस्त 2017 (वा रेडियो) : संपूर्ण मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने विश्व पर्यटन दिवस 2017 के अवसर पर पहली बार अपना संदेश प्रकाशित किया है। विश्व पर्यटन दिवस 27 सितम्बर को मनाया जाएगा।

इस साल के लिए चुना गया विषय है, “बढता पर्यटन : विकास का एक उपकरण”

कार्डिनल पीटर टर्कसन ने अपने संदेश में लिखा कि प्रतिवर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। नागर समाज के साथ कलीसिया भी इस दिवस को मनाती है क्योंकि सही मायने में मसीह के चेलों के दिलों में हर मानवीय गतिविधि को जगह मिलनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2017 को पर्यटन को विकास का एक उपकरण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है और संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने भी इस वर्ष का विषय “बढता पर्यटन : विकास का एक उपकरण” का चुनाव किया है।

कार्डिनल के अनुसार जब हम पर्यटन की बात करते हैं तो हम पर्यटकों और कार्यकर्ताओं दोनों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। देश-विदेश भ्रमण से पर्यटकों को सांस्कृतिक और सामाजिक लाभ तो होता ही है साथ ही कई लोगों को नौकरियाँ मिलती है पर यह जोखिमों और खतरों भरा काम है।

विश्व पर्यटन संगठन की नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन की संख्या 1.2 अरब के आसपास थी। इसके अलावा विश्व के 11 नौकरियों में से एक नौकरी पर्यटन क्षेत्र से है।

पर्यटन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण और गरीबी उन्मूलन का साधन हो सकता है। कलीसिया के सामाजिक शिक्षा सिद्धांत के अनुसार, सही विकास “सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।” हर व्यक्ति के संपूर्ण विकास को बढ़ावा मिलनी चाहिए। (पोपुलोरुम प्रोग्रेसियो 2)

विश्व पर्यटन संगठन स्थायी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन विचारों को लागू किया है कि पर्यटन पर्यावरण के लिए विनाशकारी न हो और न ही इलाके के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ के लिए हानिकारक हो। बल्कि स्थानीय लोगों और उनकी विरासत, व्यक्तिगत गरिमा, श्रम अधिकारों का विशेष रूप से सम्मान किया जाना चाहिए।

कार्डिनल टर्कसन ने संत पापा फ्राँसिस द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा को दिये संदेश को दुहराते हुए कहा कि “सभी पुरुषों और महिलाओं के आम घर वैश्विक भाईचारे के एक सही समझ की नींव पर, हर मानव जीवन की पवित्रता और सम्मान की वृद्धि करने के लिए जारी की जानी चाहिए।…. सभी पुरुषों और महिलाओं का यह आम घर भी प्रकृति की एक निश्चित पवित्रता की समझ पर बनाया जाना चाहिए।”

इन शब्दों और इन इरादों के प्रकाश में हम हमारी प्रतिबद्धता को आधार पर जी सकें।


(Margaret Sumita Minj)

श्रीलंका – 30 साल तक चले संघर्ष में विधवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित हैं

In Church on August 2, 2017 at 3:20 pm

कोलोम्बो, बुधवार 2 अगस्त 2017 (फीदेस) :  श्रीलंका में 30 वर्षों के गृहयुद्ध का सबसे बुरा असर तमिल महिलाओं को भुगतना पड़ा है। अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह ने फीदेस एजेंसी को रिपोर्ट देते हुए यह दावा किया कि श्रीलंका में गृहयुद्ध के समाप्त होने के आठ साल बाद भी युद्ध उल्लंघन के लिए तमिल महिलाओं द्वारा न्याय और सच्चाई की मांग पूरी नहीं की गई है।” अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह के अनुसार दस्तावेज में सन् 2015 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने श्रीलंका सरकार ने वादा किया था कि एक योग्य कमीशन, एक विशेष अदालत, लापता लोगों की जांच करने के लिए कार्यालय और घरों की मरम्मत हेतु सहायता प्रदान की जाएगी पर सरकार आज तक अपने वादों को कार्य रुप नहीं दे सकी। यहाँ तक कि संघर्ष-प्रभावित समूहों की जरूरी आर्थिक और मनोसामाजिक जरूरतों को भी अनदेखा कर दिया।

शरणार्थी शिविरों में अनेको महिलाए यौन हिंसा का शिकार बनीं। पितृसत्तात्मक समाज में महिलाओं की बहुत बड़ी समस्या विधवापन है। रिपोर्ट के अनुसार उतरी प्रांतों में 40 हजार महिलाएँ और पूर्वी प्रांतों में 50 हजार महिलाएँ युद्ध के दौरान विधवा बनी। इसमें खोये हुए या लापता पुरुषों की पत्नियों को सम्मिलित नहीं किया गया है। “एक अनुमान के मुताबिक, उत्तरी प्रांत के 58,000 घरों में जनसंख्या का एक चौथाई हिस्सा महिलाओं का है। इन विधवाओं को युद्ध के गहरे मनोवैज्ञानिक घावों के साथ साथ आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विधवाएँ समाज के लिए कलंक बन जाती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संकट समूह की रिपोर्ट श्रीलंका सरकार और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को सन् 2015 में किये गये बादों को कार्यरुप करने हेतु याद दिलाती है कि पति के बिना वाले परिवारों के सदस्यों को शिक्षा स्वास्थ्य और आर्थिक सहायता मिले।


(Margaret Sumita Minj)

बैंगलोर के लोगों ने नेपाल में भूकंप क्षतिग्रस्त स्कूल को फिर से बनाने में मदद की

In Church on August 2, 2017 at 3:18 pm

बैंगलोर, बुधवार 2 अगस्त 2017 (उकान) : नेपाल में अप्रैल 2015 में हुए भूकंप से क्षतिग्रस्त स्कूल को फिर से बैंगलोर वासियों ने नया बनाकर दिया।

समाज सेवी फादर जोर्ज कन्नाथानम के नेतृत्व में नये स्कूल के लिए फंड जमा किये गये। इसके लिए अनेक गैर सरकारी संस्थाएं, फंडिंग एजेंसीस, और कुछ उदार लोगों ने अपना सहयोग दिया था।

स्कूल परिसर में एक समारोह के दौरान 21 जुलाई को चार नए कक्षा के कमरों का उद्घाटन किया गया।

नामबुद्धा नगरपालिका के महापौर टी.पी. शर्मा और फादर कन्नाथानम ने स्कूल का उद्घाटन किया। उनके साथ फादर अंतोनी सेबास्टियन और जोस भी उपस्थित थे।

नेपाल की राजधानी काठमांडू से 50 किलो मीटर दूर कावरे जिला के मदूरापति गाँव में जल कल्याण विद्यालय है। यह माध्यमिक और उच्च विद्यालय है जिसमें पड़ोस से 300 छात्र विद्यार्जन करते हैं। भूकंप में स्कूल भवन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था और विद्यार्थी अस्थायी क्लास रुम में अध्ययन कर रहे थे।

चार क्लास रुम को बनाने में सात लाख नेपाली रुपये खर्च हुए। स्पेन के क्लारिशियन मिशन सोसाइटी प्रोक्लेड ने स्कूल भवन निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की। परियोजना को काठमांडू के ‘नेपाल वाच्छ’ संगठन, स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने मिलकर कार्यान्वित किया।

‘बैंगलोर को नेपाल की परवाह’ नामक  संगठन ने करीब 1000 छात्रों को फिर से स्कूल जाने में मदद की। उनकी आवश्कताओं की वस्तुएँ जैसे कॉपी, किताब, बैग वगैरह दी। पिछले साल जल कल्याण विद्यालय में एक पुस्तकालय और प्रयोगशाला बनाए थे। 15 छात्रों के दो बैचों को होटल प्रबंधन प्रशिक्षण के लिए  इसीएछओ बैंगलोर में ले जाया गया है।


(Margaret Sumita Minj)

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