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विश्व पर्यटन दिवस 2017 पर वाटिकन द्वारा संदेश प्रकाशित

In Church on August 2, 2017 at 3:22 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 2 अगस्त 2017 (वा रेडियो) : संपूर्ण मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने विश्व पर्यटन दिवस 2017 के अवसर पर पहली बार अपना संदेश प्रकाशित किया है। विश्व पर्यटन दिवस 27 सितम्बर को मनाया जाएगा।

इस साल के लिए चुना गया विषय है, “बढता पर्यटन : विकास का एक उपकरण”

कार्डिनल पीटर टर्कसन ने अपने संदेश में लिखा कि प्रतिवर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। नागर समाज के साथ कलीसिया भी इस दिवस को मनाती है क्योंकि सही मायने में मसीह के चेलों के दिलों में हर मानवीय गतिविधि को जगह मिलनी चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2017 को पर्यटन को विकास का एक उपकरण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया है और संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने भी इस वर्ष का विषय “बढता पर्यटन : विकास का एक उपकरण” का चुनाव किया है।

कार्डिनल के अनुसार जब हम पर्यटन की बात करते हैं तो हम पर्यटकों और कार्यकर्ताओं दोनों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं। देश-विदेश भ्रमण से पर्यटकों को सांस्कृतिक और सामाजिक लाभ तो होता ही है साथ ही कई लोगों को नौकरियाँ मिलती है पर यह जोखिमों और खतरों भरा काम है।

विश्व पर्यटन संगठन की नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन की संख्या 1.2 अरब के आसपास थी। इसके अलावा विश्व के 11 नौकरियों में से एक नौकरी पर्यटन क्षेत्र से है।

पर्यटन विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण और गरीबी उन्मूलन का साधन हो सकता है। कलीसिया के सामाजिक शिक्षा सिद्धांत के अनुसार, सही विकास “सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं किया जा सकता।” हर व्यक्ति के संपूर्ण विकास को बढ़ावा मिलनी चाहिए। (पोपुलोरुम प्रोग्रेसियो 2)

विश्व पर्यटन संगठन स्थायी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन विचारों को लागू किया है कि पर्यटन पर्यावरण के लिए विनाशकारी न हो और न ही इलाके के सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ के लिए हानिकारक हो। बल्कि स्थानीय लोगों और उनकी विरासत, व्यक्तिगत गरिमा, श्रम अधिकारों का विशेष रूप से सम्मान किया जाना चाहिए।

कार्डिनल टर्कसन ने संत पापा फ्राँसिस द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा को दिये संदेश को दुहराते हुए कहा कि “सभी पुरुषों और महिलाओं के आम घर वैश्विक भाईचारे के एक सही समझ की नींव पर, हर मानव जीवन की पवित्रता और सम्मान की वृद्धि करने के लिए जारी की जानी चाहिए।…. सभी पुरुषों और महिलाओं का यह आम घर भी प्रकृति की एक निश्चित पवित्रता की समझ पर बनाया जाना चाहिए।”

इन शब्दों और इन इरादों के प्रकाश में हम हमारी प्रतिबद्धता को आधार पर जी सकें।


(Margaret Sumita Minj)

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