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कोलम्बिया के 135वें वार्षिक राजनयिकों के मिलन हेतु संत पापा का संदेश

In Church on August 3, 2017 at 4:05 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 03 अगस्त 2017 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने कोलम्बिया के राजनयिक आधिकारिकों की 1-3 अगस्त तक चलने वाली 135वें वार्षिक मिलन हेतु अपना संदेश भेजा।

संत पापा ने नाम अपने भेजे गये संदेश में वाटिकन राज्य के सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलीन ने लिखा कि सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया के धर्मगुरु संत पापा फ्राँसिस, संत लुईस मिसूरी में होने वाली 135वें वार्षिक मिलन पर आप सबों को अपनी शुभकामनाएं और प्रार्थनाओं का सामीप्य प्रेषित करते हैं।

उन्होंने कि अपने संदेश में लिखा कि संत पापा फ्रांसिस कोलम्बिया के राजनयिक अधिकारियों के प्रयासों की प्रशंसा करते हैं जिन्होंने अपने देश में वैवाहिक जीवन की पवित्रता को बनाये रखने और पारिवारिक जीवन की सुन्दरता को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास किया है। यह हमारा परिवार है जहाँ हम एक साथ मिलकर रहते जो हमें पूरे विश्व को एक बृहद् परिवार के रुप में देखने हेतु प्रेरित करता है। हम अपने परिवार में एक दूसरे के निकट रहते, एक दूसरे का आदर और सम्मान करते हुए ईश्वर से मिले मूल्यों को उपहारों के रुप में देखने के योग्य बनते हैं। उन्होंने कहा कि हम अपने परिवार में पारिवारिक गुणों में बढ़ते हैं जो हमें अपने उत्तदायित्वों को परिष्कृत नज़रिये से देखने में मदद करता है जिसके द्वारा हम समाज के ताने-बाने को मजबूती प्रदान करते हैं।

संत पापा ने कोलम्बिया के राजनयिकों को, ख्रीस्तीय समुदाय के प्रति उनके समर्पण हेतु धन्यवाद अदा करते हुए कहा कि हम धार्मिक कट्टरता के शिकार हुए अपने भाई-बहनों के दुःख-कष्टों को नजरंदाज नहीं कर सकते हैं जिन्हें अपनी सरज़मी से बेदखल होना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में कोलम्बिया शरणार्थी राहत कोष राजनयिकों की एकजुटता और ईसाइयों के प्रति प्रतिबद्धता का एक उचित संकेत है।

उन्होंने राजनयिकों और उनके परिवारों को अपनी शुभकामनाएँ अर्पित करते हुए कहा कि आइए हम उनकी याद करें जिन्हें हमारी प्रार्थना की जरूरत है जिससे वे हिंसा, घृणा और अन्याय के मार्ग का परित्याग कर सकें।


(Dilip Sanjay Ekka)

बुर्किना फ़ासो में कारितास द्वारा भुखमरी के खिलाफ अभियान

In Church on August 3, 2017 at 4:03 pm

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 03 अगस्त 2017 (रेई) “कोम साया” या “भूख का अंत” इस परियोजना के तहत स्पेन में स्थित अपने समकक्ष की साझेदारी के साथ  पश्चिमी अफ्रीका के स्थानीय कारितास ने बुर्किना फासो में भुखमरी के खिलाफ एक अभियान की शुरूआत की है।

इस परियोजना में पश्चिमी अफ्रीका के तीन आकाल प्रभावित धर्माप्रन्तों ओवाहीगोया, काया और डोरी में विशेष कार्य करने का निर्णय लिया है। अपने दो वर्षीय कार्यक्रम के तहत इस परियोजना में खेती-बारी, घरेलू मवेशी पालन, पर्यावरण, ऊर्जा, भोजन, पीने के पानी और शौचालय जैसे कई क्षेत्रों में कार्य करने की योजना तैयार की गई है जिसकी लागत करीबन 12 लाख फ़्रैंक होगी।
ज्ञात हो कि परियोजना में शामिल बुर्किना फासो का यह भौगोलिक क्षेत्र सबसे गरीब प्रान्तों में से एक है। आकाल के अलावा, पिछले कुछ महीनों में, विनाशकारी आंधी ने लोगों की वनस्पति और घरों को नष्ट कर दिया।

डोरी के सूबा में महिलाओं को पांच किलोमीटर की दूरी की तय कर अपने घरेलू ज़रूरतों हेतु पानी लाना पड़ा है।

परियोजना की प्रस्तुति समारोह के दौरान काया धर्माप्रान्त के धर्माध्यक्ष थोमस कोवोरे ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि हमारे लिए लोगों के बीच से भुखमरी का निवारण सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “परियोजना की सफल इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपनी पहल का कार्यान्वयन समाज के विभिन्न घटकों के साथ मिलकर किस रुप में करते हैं।” उन्होंने सभों से अनुरोध करते हुए कहा कि इस परियोजना की सफलता हेतु सभी प्रांतीय, सांप्रदायिक दलों और धार्मिक संस्थानों को एकजुट हो कर कार्य करने की जरूरत है।


(Dilip Sanjay Ekka)

मोरानाईट धर्माध्यक्षयों द्वारा सीरिया शरणार्थियों की वापसी हेतु अपील

In Church on August 3, 2017 at 4:01 pm

 

लेबनान, गुरुवार, 3 अगस्त 2017 (फिदेस) मरोनाईट धर्माध्यक्षयों ने अपनी एक संगोष्ठी के दौरान इस बात का निर्णय लिया है कि वे सीरिया शरणार्थियों की वापसी हेतु अपील की।

लेबनान के नागरिक संस्थानों ने “वैश्विक योजना” के तहत इस बात का निर्णय लिया है कि देश में शरणार्थियों के रुप में निवास कर रहे सीरिया के लोगों हेतु घर वापसी की योजना अतिशीघ्र तैयार किया जायेगा।

मरोनाईट के धर्माध्यशक्षों ने अपनी मासिक बैठक के अंत में एक व्यापक संवाद में इसकी मांग की, जो कि विगत दिनों में डिमान के कुलपति और  प्रधानमंत्री बेकर बटरस राय की अध्यक्षता में संपन्न हुई थी। उनके मुताबिक, प्रवासी आपातकाल को संभालने के लिए एक व्यापक योजना का अभाव पहले ही लेबनान को भारी नुकसान पहुंचा रहा है।

फीदेस समाचार सूत्रों के अनुसार लेबनान में सीरियाई शरणार्थियों की संख्या करीब एक लाख से अधिक है। यह केवल एक संभावित आकड़ा बतलाया जाता है क्योंकि इसके आलावे और भी कितने हैं जिन्होंने अन्तराष्ट्रीय संस्थानों या लेबनान की संस्थानों में अपना पंजीयन कराये बिना देश में शरण लिये हुए हैं।
मेरानाईट के कुलपति ने भी लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल ओउन से विगत रविवार, 16 जुलाई को इस बात की अपील की थी।

आचार्य राय ने कहा, “शरणार्थियों के साथ हमारी सहानुभूति है”, अतः हमें उम्मीद है कि इस प्रक्रिया के अनुरूप विभिन्न राजनीतिक मामलों को दूर करते हुए,जो वांछित समाधानों में बाधा डालती है, सीरियाइयों को अपने देश में लौटने की सुरक्षा सुनिश्चित की जायेगी।


(Dilip Sanjay Ekka)

योग्याकार्ता में 7वीं एशियन युवा दिवस की शुरूआत मिस्सा बलिदान से

In Church on August 3, 2017 at 3:58 pm

इन्डोनेशिया, गुरुवार, 02 जुलाई 2017 (वी आऱ) इन्डोनेशिया के योग्याकार्ता में 7वीं एशियन युवा सम्मेलन की शुरूआत धूम-धाम ख्रीस्तयाग से हुई।

30 जुलाई से 02 अगस्त तक इन्डोनेशिया के 11 विभिन्न धर्माप्रान्तों में रहने के बाद 21 देशों के  करीबन 2000 युवाओं का दल इन्डोनेशिया की संस्कृति और बौद्धिक केन्द्र योग्याकार्ता शहर में जमा हुआ। “‎आनंदित एशिया के युवा, बहुसंस्कृतिक एशिया में सुसमचार के वाहक” विषयवस्तु से आयोजित 7वीं एशियन युवा सम्मेलन में सहभागी होने वाले युवाओं की भीड़ 02 अगस्त से ही योग्याकार्ता सरकार द्वारा उपलब्ध सेवा-सुविधाओं का लुफ्त उठाते हुए देखी गयी।

7वीं एशियन युवा सम्मेलन की शुरूआत बँगला देश के कार्डिनल पैट्रिक डी रोजारियो के द्वारा मिस्सा बलिदान के अनुष्ठान से शुरू हुई। कार्डिनल रोजारियों ने मिस्सा बलिदान के दौरान अपने प्रवचन की शुरूआत “येसु में आनंदित हो” गीत की कड़ी को गाते हुए की। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपके जीवन में खुशी का कारण येसु ख्रीस्त हैं जो आपको पापों, बुराइयों और खामियों के बावजूद प्रेम करते हैं। जब हम अपने जीवन में उदास और अपने को खुशी विहीन पाते तो वैसे समय में वे हमें और भी अधिक प्रेम करते हैं।

उन्होंने कहा कि येसु हमें बुलाते हैं, वे हमें चुनते हैं और अपने कार्यों को पूरा करने को भेजते हैं जिससे हम उनके प्रेम, करुणा, दया और चंगाई को अन्यों के साथ साझा कर सकें। उन्होंने कहा कि पवित्र आत्मा हमें अपने कृपादानों से विभूषित करते हैं जिससे हम अपने विश्वास, जीवन और विश्व युवा प्रेरिताई की घोषणा कर सकें।

उद्घाटन समारोही मिस्सा में कार्डिनल रोजारियो के संग अन्य 6 कार्डिनलों, 52 धर्माध्यक्षों और 158 पुरोहितों ने युवाओं की अगुवाई की। मिस्सा बलिदान के दौरान रेमरांग महाधर्माप्रान्त के महाधर्माध्य़क्ष और इन्डोनेशिया धर्माध्यक्षों से सभापति रोबेरतुस रुबीयातमोको, जकार्ता के महाधर्माध्यक्ष इग्नसियुस सुहारयो, इन्डोनेशिया युवा सम्मेलन के सभापति धर्माध्यक्ष पीयुस रियाना प्राप्तदी उपस्थित थे।

इस युवा सम्मेलन का समापन 06 अगस्त को होगा।


(Dilip Sanjay Ekka)

झारखंड में धर्म परिवर्तन कानून, कार्डिनल टोप्पोः कलीसिया द्वारा बलात धर्म परिवर्तन नहीं

In Church on August 3, 2017 at 3:56 pm

राँची, गुरुवार, 03 अगस्त 2017 (एशिया न्युज) भारत के झारखंड राज्य में भाजपा की सरकार ने धर्म परिवर्तन कानून पारित किया।

भाजपा द्वारा शासित झारखंड राज्य की सरकार ने धर्म परिवर्तन की रोकथाम हेतु धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक नया कानून पारित किया है। इस कानून का उल्लंघन करने वालों को तीन साल की सज़ा और 50,000 रुपया या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है।

इस कानून के तहत नाबालिग लड़कियों और आदिवासी महिलाओं (अनुसूचित जनजाति) का धर्म परिवर्तन करने वाले पर और अधिक कठोर दंड का प्रावधान है। इस मामले में, अपराधी को 1,00,000 रुपये जुर्माना के आलवे चार साल की सजा सुनाई जा सकती है।

विदित हो कि अगर कानून 8 अगस्त को स्थानीय संसद द्वारा अनुमोदित किया जाता है तो झारखंड राज्य बल पूर्वक धर्म परिवर्तन कानून को पारित करने वाला भारत का सातवां राज्य बन जायेगा। धर्म परिवर्तन के खिलाफ क़ानून पहले से ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में लागू हैं।

इस संदर्भ में राँची महाधर्माप्रन्त के महाधर्माध्य कार्डिलन तेलेस्फोर पी. टोप्पो ने अपने विचार व्यक्त करते हुए एशिया न्युज से कहा, “यह नियम धर्म परिवर्तन के खिलाफ नहीं वरन बलात धर्म परिवर्तन के बारे में है जबकि कलीसिया में यह कभी नहीं हुआ है। हम अपने में स्वतंत्र हैं और अपनी स्वतंत्रता में अपनी अन्तरात्मा की बात सुनते हैं। कोई किसी का बल पूर्वक धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है।”

उन्होंने संवाददाताओं से बातें करते हुए कहा कि वर्षों से हमने स्कूल, महाविद्लायों और स्वास्थ्य संस्थानों का संचलन करते हुए राज्य के गरीबों, असहायों और परित्यक्त लोगों की सेवा की है। हमने लाखों लोगों में से किसी पर भी ख्रीस्तीय धर्म को स्वीकार करने हेतु दबाव नहीं डाला।

टाईम आफ इंडिया के अनुसार झारखंड सरकार ने 2011 की जनसंख्या को देखते हुए इस मुद्दे को उठा है, जिसके अनुसार राज्य के 35 लाख आबादी में 27 प्रतिशत आदिवासियों की संख्या है जिसमें 4.3 प्रतिशत ख्रीस्तीय, 14.53 प्रतिशत मुस्लिम है। विगत 10 वर्षों के आँकड़ों से मुताबिक हिन्दुओं की संख्या में 21 प्रतिशत की वृद्धि, मुसलमानों में 28.4 प्रतिशत जबकि ईसाई की जनसंख्या में 29.7 प्रतिशत की वृद्धि बतलाई गयी है।

झारखंड राज्य के सचिव दीपक प्रकाश ने कहा कि आदिवासियों का धर्मातरण बृहद रुप से कराया गया है जिससे कारण वे अपनी संस्कृति और पारंपरिक रिवाजों से अलग हो गये हैं।

भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शहदेव ने कहा, “दलित और आदिवासियों का धर्म परिवर्तन करने वालों के लिए यह एक सबक है।”

स्थानीय दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता ने कहा कि धर्म परिवर्तन कानून सरकार की एक चाल है जिसके द्वारा वह आदिवासी समाज में एक तरह का विभाजन लाना चाहती है जिसे वह अपना उल्लू सीधा कर सकें।


(Dilip Sanjay Ekka)

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