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अर्स में कार्डिलन फीलोनी का मिस्सा

In Church on August 4, 2017 at 4:18 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 अगस्त 2017 (रेई) सुसमाचार प्रचार हेतु गठित परमधर्मपीठ के अध्यक्ष कार्डिलन फीलोनी ने फ्रांस के अर्स में संत जोन मेरी विय्येनी के पर्व दिवस पर ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

मिस्सा बलिदान के दौरान उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि अर्स का त्योहार मुझे उत्साह और जोश से भर देता है। यह जोन मेरी विय्येनी का पल्ली रहा है जहाँ उन्होंने चालीस वर्षों तक ईश्वर की करुणा का माध्यम बनते हुए ईश प्रजा की प्रेम पूर्ण सेवा की। एक पुरोहित के रुप में उन्होंने इस स्थान पर अपने जीवन को प्रार्थना, त्याग, तपस्या और नम्रता में बलिदान कर दिया। असंख्यों लोगों ने उनमें ईश्वरीय शांति को पाया और इसी लिए पुरोहित यहां उनसे प्रेरणा प्राप्त करने आते हैं।

कार्डिनल ने संत योहन मेरी विय्येनी के जीवन वृतान्त की चर्चा करते हुए कहा कि हम उनके जीवन से वाकिफ हैं। वे एक अत्यन्त गरीब खेतीहार परिवार से थे। फ्राँस क्रांति के कारण उनका बचपना बहुत कठिन रहा और वे अपनी प्रारम्भिक शिक्षा से वंचित रहे। वे विद्य़ार्जन के क्षेत्र में बहुत कमजोर थे। लेकिन उनकी सादगी और धार्मिकता उनकी अनमोल संपत्ति रही जिसके कारण उनके आध्यात्मिक सलाहकार ने उन्हें ईश्वरीय बुलाहट में बढ़ने हेतु सदैव प्रेरित किया। कार्डिनल ने कहा कि योहन मेरी विय्येनी कौन थे। यदि हमें संत अगुस्टीन हिप्पो के महान धर्माध्यक्ष के शब्दों में इसका उत्तर दें जिन्होंने अपने धर्माध्यक्षीय अभिषेक के दौरान कहा था, “क्योंकि यह मेरे काँधों में भार के समान रखा गया है, यह मुझे चिंतित और व्यथित करती है और मैं विचलित हो जाता हूँ लेकिन यह मेरे लिए सांत्वना का कारण बनता है कि मैं आप का चरवाहा नियुक्त किया गया हूँ मैं आप सभों की तरह एक ख्रीस्तीय हूँ।” वे आगे कहते हैं, “एक भले चरवाहे के रुप में यह जरूरी है कि मैं ईश्वर से आपकी मुक्ति हेतु प्रार्थना करुँ जिससे आप भी मेरे लिए प्रार्थना करें।”

कार्डिनल ने कहा कि उत्तर हमारे लिए स्पष्ट है आप सबों के साथ मैं भी एक ख्रीस्तीय हूँ और मैं आप का चरवाहा हूँ। उन्होंने पुरोहिताई जीवन के बारे में दो बातों पर जोर देते हुए कहा कि पुरोहिताई जीवन एक अच्छे ख्रीस्तीय के रुप में अपनी आध्यात्मिकता का परित्याग नहीं करता है। मेरी विय्येनी को यह बात अच्छी तरह मालूम थी एक भला चरवाहा बनने हेतु उन्हें अपने को ईश्वरीय कृपादानों से प्रोषित करना था। अतः उनका जीवन चार मजबूत स्तंभों पर खड़ा थाः नम्रता, दरिद्रता, आज्ञापालन और शुद्धता। ये चार गुण सदैव उनके जीवन के मित्र रहें जिसके साथ उन्होंने मानवता की सेवा हेतु 73 साल की यात्रा की। अपने इन गुणों को जीवन में धारण करने कारण वे अति विशिष्ट फलदायक प्रेरित बने। अपने इन्हीं गुणों से गहरी मित्रता का कारण उन्होंने लोगों को अपने जीवन की ओर आकर्षित किया और वे शांति की खोज हेतु उनके पास आये। वे प्रार्थना के द्वारा येसु ख्रीस्त की मित्रता में बन रहें जिसके कारण विश्वासियों ने उनमें ईश्वर के प्रतिरूप को देखा।

कार्डिनल फीलोनी ने कहा कि उनकी आध्यात्मिकता आज भी हम सबों को मोहित और प्रेरित करती है। जोन मेरी विय्येनी का कार्य स्थल आज भी हमारे लिए प्रार्थना और ईश्वर की कृपा को प्राप्त करने का स्थल है। यहाँ वे सभी करुणा का दीदार करते जो उसे पाने की चाह रखते हैं। उन्होंने कहा कि अर्स वह वेदी है जहाँ हमारे लिए जोन मेरी विय्येनी की आध्यात्मिक सुगंध प्रवाहित होती है, उनका करुणा का लोबान कभी समाप्त होता और उनकी पवित्रता का सोना ईश्वर की महिमा करती है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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