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प्रभु के रूपांतरण की घटना हमें आशा का संदेश देता है

In Church on August 7, 2017 at 3:04 pm

 

वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 अगस्त 2017 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 अगस्त को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, ″अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।″

इस रविवार की धर्मविधि में प्रभु के रूपांतरण का पर्व मनाया जाता है। आज का सुसमाचार पाठ बतलाता है कि प्रेरित पेत्रुस, याकूब तथा योहन इस असाधारण घटना के साक्षी हैं। ″छः दिन बाद ईसा ने पेत्रुस, याकूब और उसके भाई योहन को अपने साथ ले लिया और वह उन्हें एक ऊँचे पहाड़ पर एकान्त में ले चले। जब वे प्रार्थना कर रहे थे उनका मुखमण्डल सूर्य की तरह दमक उठा और उनके वस्त्र प्रकाश के समान उज्ज्वल हो गये। शिष्यों को मूसा और एलियस उनके साथ बातचीत करते दिखाई दिये। तब पेत्रुस ने ईसा से कहा, प्रभु यहाँ होना हमारे लिए कितना अच्छा है। आप चाहें तो यहाँ मैं तीन तम्बू खड़ा कर दूँगा, एक आपके लिए, एक मूसा के लिए और एक एलियस के लिए। वह बोल ही रहा था कि उन पर एक चमकीला बादल छा गया।″ (मती. 17.1-5)

संत पापा ने कहा, ″प्रभु के रूपांतरण की घटना हमें आशा का संदेश देता है कि हम भी उनके साथ होंगे। वे हमें येसु के साथ मुलाकात करने हेतु निमंत्रण देते हैं ताकि हम भाई-बहनों की सेवा कर सकें।″

शिष्यों का तबोर पर्वत पर चढ़ना हमें अपने आपको सांसारिक वस्तुओं से विरक्त रखने, ऊपर की ओर देखने एवं येसु पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है।

संत पापा ने इसका अर्थ चौकसी एवं प्रार्थनामय तरीके से ख्रीस्त को सुनना बतलाया जो पिता के परम प्रिय पुत्र हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रार्थना हेतु समय निकालना हमें ईश्वर की वाणी को विनम्रता एवं आनन्द पूर्वक स्वीकार करने में मदद देता है। इस आध्यात्मिक चढ़ान में, सांसारिक वस्तुओं के त्याग में, हम सुसमाचार पर चिंतन करने, बाईबिल का पाठ करने तथा सौदर्य, वैभव एवं आनन्द प्राप्त करने के लिए हम शांत एवं प्रार्थनामय एकान्त वातावरण की खोज करते हैं।

जब हम हाथ में बाईबिल लेकर, एकान्त में ऐसा करते हैं तब हम इस आंतरिक सुन्दरता का एहसास करने लगते हैं। एक ऐसा आनन्द जो हमारे अंदर निहित ईश वचन के द्वारा उत्पन्न होता है। इस दृष्टिकोण से ग्रीष्म काल प्रभु के साथ मुलाकात करने एवं उनके प्रति समर्पण को प्रगाढ़ करने का एक अस्थायी अवसर है। इस अवधि में विद्यार्थी अपने अध्ययन के कार्यों से मुक्त होते हैं तथा कई परिवार छुट्टियों में जाते हैं। विश्राम की इस अवधि में तथा अपने दैनिक कार्यों से मुक्त रहने में यह महत्वपूर्ण है कि शरीर और आत्मा में हम सक्रिय रूप से आध्यात्मिक पथ को गहरा बनायें।

रूपांतरण के अनुठे अनुभव के बाद शिष्य प्रभु से मुलाकात कर हृदय से परिवर्तित होकर पर्वत से नीचे उतरे। संत पापा ने कहा कि यह एक ऐसा रास्ता है जिसपर हम भी चल सकते हैं। येसु के बारे जानने की कोई सीमा नहीं है किन्तु यह हमें पर्वत से नीचे ले चलता है, दिव्य आत्मा से संबल प्राप्त कर हम सच्चे रूपांतरण की ओर बढ़ने तथा दैनिक जीवन में उदारता का सतत साक्ष्य देने हेतु बल प्राप्त करते हैं।

ख्रीस्त की उपस्थिति एवं उनके वचनों के माध्यम से रूपांतरित होकर हम, हमारे सभी भाई बहनों खासकर, जो अकेले हैं, परित्यक्त अथवा बीमार हैं या दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अन्याय, दुष्टता एवं हिंसा द्वारा अपमानित किये जा रहे हैं उन लोगों के बीच ईश्वर के ठोस प्रेम के चिन्ह बनें।

रूपांतरण के दौरान स्वर्ग से पिता ईश्वर की वाणी यह कहते हुई सुनाई पड़ी, यह मेरा प्रिय पुत्र है मैं इस पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ, इसकी सुनो। “(पद.5).

संत पापा ने माता मरियम के माध्यम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, ″हम माता मरियम की ओर देखें जो हमें सुनती है। जो ईश पुत्र का स्वागत करने और उनके हरेक वचन को हृदय में संजोये रखने के लिए तत्पर रहती है। हमारी स्वर्गिक माता एवं ईश्वर की माता ईश्वर की वाणी को सुनने में सहायता दे ताकि ख्रीस्त हमारी ज्योति बनें एवं हमारे सम्पूर्ण जीवन की रक्षा करें। हम प्रभु को हम सभी के अवकाश को समर्पित करें, विशेषकर, जो वृद्धावस्था, बीमारी, काम, आर्थिक मामलों अथवा अन्य कारणों से छुट्टी लेने में असमर्थ हैं ताकि वे भी आराम का समय पा सकें, मित्रों का साथ एवं आनन्दमय क्षण को व्यतीत कर सकें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने देश-विदेश से एकत्रित सभी तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, ″रोम वासियो तथा विभिन्न देशों, परिवारों, संस्थाओं तथा सभी विश्वासियों का मैं अभिवादन करता हूँ।

संत पापा ने युवाओं का अभिवादन करते हुए कहा, ″आज लड़के-लड़कियों का कई दल यहाँ उपस्थित है। मैं बड़े स्नेह से आप सभी का अभिवादन करता हूँ, विशेषकर, वेरोना, अद्रिया, कमपोदारसेगो एवं ओफारेंगो के युवा दलों को।″

अंत में संत पापा ने सभी से प्रार्थना का आग्रह करते हुए शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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