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संत दोमनिक के पर्व पर संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on August 8, 2017 at 3:19 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (रेई): संत दोमनिक के पर्व दिवस के अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने अपने ट्वीट संदेश में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।

उन्होंने ट्वीट संदेश में लिखा, ″आज हम सुसमाचार की सेवा में संत दोमनिक के कार्यों के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें जिसको उन्होंने अपने वचनों एवं जीवन के माध्यम से प्रकट किया है।″

संत दोमनिक का जन्म 1170 ई. को स्पेन में हुआ था। उनके माता-पिता स्पेन के एक कुलीन परिवार के सदस्य थे।

दोमनिक ने पलेनसिया में शिक्षा प्राप्त की तथा उनके अध्ययन के मुख्य विषय थे ईशशास्त्र एवं कला। वे एक आदर्श विद्यार्थी माने जाते थे। सन् 1191 ई. में जब स्पेन में आकाल पड़ा तो कई लोग बेघर एवं अकेले हो गये। कहा जाता है कि दोमनिक ने उनकी मदद करने हेतु अपना सब कुछ बेच दिया। दो बार उन्होंने दूसरों को मुक्त करने के लिए खुद को ही बेचने की कोशिश की।

सन् 1194 ई. में दोमनिक ने बेनेडिक्टाईन धर्मसमाज में प्रवेश किया।


(Usha Tirkey)

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संत पापा ने पेरू की कलीसिया को संदेश भेजा

In Church on August 8, 2017 at 3:15 pm

पेरू, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने पेरू में अपनी प्रेरितिक यात्रा के पूर्व वहाँ की कलीसिया को एक संदेश भेजा। संत पापा का यह वीडियो संदेश लीमा महाधर्मप्रांत के वेबसाईट पर महाधर्माध्यक्ष जुवान लुईस सिप्रियानी थोरने द्वारा जारी किया गया है।

संदेश में संत पापा ने समृद्ध मानव संसाधन पर चर्चा की है जो दक्षिण अमरीकी राष्ट्र की कलीसिया के भूत एवं वर्तमान को चिह्नित करता है। उन्होंने कहा कि पेरू में कई महान संत हुए हैं जिन्होंने कलीसिया के निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है तथा विभाजन को दूर कर एकता में आने हेतु मदद दी है।

संत पापा ने कहा, ″एक संत वह है जो हमेशा एकता बनाये रखने के लिए कार्य करता है ठीक उसी तरह जिस तरह येसु ने किया। एक संत निरंतर उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करता है।″

वीडियो संदेश में संत पापा ने पेरू वासियों को निमंत्रण दिया है कि वे इसी राह पर आगे बढ़ें तथा एकता हेतु कार्य करें, कड़वाहट एवं संदेह की अपेक्षा भविष्य को आशा के साथ देखें। एक ख्रीस्तीय भविष्य को हमेशा आशा के साथ देखता है क्योंकि वह उन बातों को पूरा होते हुए देखने की आशा करता है जिसकी प्रतिज्ञा प्रभु ने की है।

ज्ञात हो कि संत पापा फ्राँसिस 15 से 21 जनवरी 2018 को पेरू की प्रेरितिक यात्रा करेंगे जिसमें वे खासकर, प्योर्टो मॉल्डोनाडो, त्रुजिल्लो एवं पेरू की राजधानी लीमा का दौरा करेंगे।


(Usha Tirkey)

नाइजीरिया के गिरजाघर में हमले के शिकार लोगों के प्रति संत पापा की संवेदना

In Church on August 8, 2017 at 3:14 pm

नाइजीरिया, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): संत पापा फ्राँसिस ने दक्षिण पूर्वी नाइजीरिया के एक गिरजाघर पर हुए हमले पर, वहाँ के विश्वासियों के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए एक संदेश भेजा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ओनिशा शहर के निकट ओजुबुलु स्थित संत फिलिप काथलिक गिरजाघर में रविवार को ख्रीस्तयाग अर्पित कर विश्वासियों पर हमले में 11 लोगों की मौत हो गयी है तथा 18 लोग घायल हो गये हैं।

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने संत पापा की ओर से प्रेषित एक तार संदेश में कहा कि ″मृत्यु एवं घायल होने की खबर सुन संत पापा अत्यन्त दुःखी हैं। वे निनवी धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष एवं विश्वासियों को अपनी हार्दिक संवेदना प्रकट करते हैं, विशेषकर, आक्रमण के शिकार लोगों के परिवार वालों के प्रति वे सहानुभूति प्रकट करते हैं।

अंमब्रा राज्य पुलिस कमिश्नर गरबा उमर ने कहा कि हिंसा नशीली पदार्थों की तस्करी से जुड़ी हो सकती है। पुलिस ने कहा कि शूटिंग ओज़ुबुलु से नाइजीरिया के बीच एक विवाद का परिणाम है जो विदेशों में रह रहे थे।

पल्ली पुरोहित जूड ओनुवासो ने कहा कि एक व्यक्ति ने गिरजाघर में प्रवेश किया और शूटिंग शुरू कर दी: “पहले दौर के बाद, दूसरा दौर था और मुझे लगता है कि दूसरे राउंड के दौरान लोगों को गोली मार दी गई थी। जब मैं वापस आया,  मुझे पता चला कि मेरे कुछ पुरोहित मारे गए थे, लगभग पांच या छह व्यक्तियों के शरीर से खून बह रहा था।″


(Usha Tirkey)

उत्तर तथा दक्षिण कोरिया के बीच शांतिपूर्ण समझौता की अपील

In Church on August 8, 2017 at 3:12 pm

कोरिया, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (रेई): युद्धविराम संधि की घोषणा की 64वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में सियोंग्जू में आयोजित एक अंतरधार्मिक समारोह में उत्तरी तथा दक्षिणी कोरिया में सच्ची शांति हेतु अपील की गयी।

एशियान्यूज़ के अनुसार काथलिक, प्रोटेस्टेंट एवं बौद्ध धर्मावलम्बियों ने 27 जुलाई 1953 की याद की जो युद्ध विराम के रूप में चिह्नित किया गया है किन्तु अब भी शांति का अभाव है।

कोरियाई धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष हेजिनुस किम ही जुंग ने कहा, ″अगर कोरियाई प्रायद्वीप में शांति निश्चित रूप से पुष्ट नहीं हुई तो यह समस्त उत्तर पूर्व एशिया में समाप्त हो जाएगी एवं कोरियाई प्रायद्वीप पाउडर की तरह हो जायगा जिससे विस्फोट एवं दूसरे युद्ध को बढ़ावा मिलेगा। हमें शांति समझौते की आवश्यकता है न कि युद्धविराम मात्र।″

धर्माध्यक्ष किम ने टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स, विरोधी मिसाइल रक्षा प्रणाली तथा प्योंगयांग पर किसी भी हमले के खिलाफ संयुक्त राज्य द्वारा तैनाती पर, धर्माध्यक्षों के विरोध को दोहराया तथा कहा कि वे हथियारों के द्वारा शांति स्थापित करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स, कोरिया में किसी तरह से भी शांति स्थापित नहीं कर सकता। महाधर्माध्यक्ष कौंगजू ने कहा कि टर्मिनल हाई आल्टिट्यूड एरिया डिफेन्स की तैनाती लागों की सहमति के बगैर हुई है, अतः इस पर फिर से विचार करने की आवश्यकता है। शांति के लिए, हमें एक संधि के मसौदे के साथ मिलकर काम करना चाहिए।”

इस बीच, उत्तर कोरिया के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा रविवार को कठोर प्रतिबंधों के बाद किम जोंग-उन और वाशिंगटन के शासन के बीच तनाव बढ़ना जारी है। प्योंगयांग ने प्रतिबंधों को उत्तर कोरिया को अलग करने और गला घोंटने के लिए घृणास्पद अमेरिकी षडयंत्र” के रूप में परिभाषित करते हुए “एक हजार गुना अधिक बड़े बदले” की धमकी दी। ”

रविवार को एक संयुक्त वक्तव्य में अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ड्रम्प तथा दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जाई इन ने कहा कि उत्तर कोरिया, जापान, दक्षिण कोरिया एवं अमरीका तथा विश्व के अन्य देशों के लिए एक बड़ा खतरा है।


(Usha Tirkey)

भारत करेगा 2020 में अगले एशियाई युवा दिवस की मेजबानी

In Church on August 8, 2017 at 3:11 pm

भारत, मंगलवार, 8 अगस्त 2017 (वीआर अंग्रेजी): आगामी एशियाई युवा दिवस 2020 को भारत में आयोजित किया जाएगा, इसकी घोषणा 7वें एशियाई युवा दिवस के समापन पर मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस ने रविवार को योग्यकार्ता में की। इस घोषणा के साथ ही भारत के कलीसियाई अधिकारी एवं युवा प्रतिनिधियों ने इंडोनेशिया के प्रतिनिधियों से, एशियाई युवा क्रूस को ग्रहण किया।

8वें एशियाई युवा दिवस के लिए स्थान का निर्धारण भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा किया जाएगा। यह दूसरी बार है जब भारत को एशियाई युवा दिवस की मेजबानी करने का अवसर मिला है।

एशियाई युवा दिवस हर तीन साल में आयोजित किया जाता है। इसकी शुरूआत थाईलैंड में 1999 ई. में हुई थी। उसके बाद 2001 में ताईवान ने इसकी मेजबानी की थी। 2003 में भारत ने, हॉंगकोंग ने 2006 में, फिलीपींस ने 2009 में तथा 2014 में दक्षिण कोरिया ने मेजबानी की जिम्मेदारी सम्भाली थी।

चार दिवसीय युवा दिवस का समापन रविवार 6 अगस्त को हुआ।

संत पापा ने अपने संदेश में युवाओं को निमंत्रण दिया कि वे आगामी विश्व युवा दिवस की तैयारी हेतु येसु की माता मरियम को आदर्श के रूप में देखें तथा उनके साथ एक माता की तरह बातें करें एवं उनकी ममतामय मध्यस्थता में भरोसा रखें।

उन्होंने कहा कि इस तरह वे येसु का करीबी से अनुसरण करने का प्रयास करते हुए नाजरेथ की बाला की तरह विश्व में नयापन ला सकेंगे तथा इतिहास में एक निशान अंकित कर सकेंगे।

अपने संदेश में संत पापा ने युवाओं को अपना प्रेरित आशीर्वाद प्रदान किया तथा प्रभु की शांति एवं आनन्द की शुभकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

एशियाई युवा दिवस में मुस्लिम युवाओं की सहभागिता

In Church on August 8, 2017 at 3:09 pm

योग्यकार्ता, मंगलवार, 8 अगस्त 17 (एशियान्यूज़): विभिन्न मुस्लिम संगठनों के सौ से अधिक स्वयंसेवकों ने 7वें एशियाई युवा दिवस (योग्यकार्ता 2-6 अगस्त) की सफलता हेतु अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें विभिन्न देशों के 2,000 से अधिक युवाओं ने भाग लिया।

चार दिवसीय इस अवसर पर अंतरधार्मिक वार्ता के महत्व एवं देश में शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर प्रकाश डाला गया। प्रतिभागियों ने सहअस्तित्व पर कई सभाओं में भाग लिया तथा विभिन्न धार्मिक मूल्यों को साक्षा किया। मुस्लिम स्वयंसेवकों ने इस अवसर पर सुरक्षा कार्यों सहित कई विभागों में उत्साहपूर्वक सहायता प्रदान की।

सभा में इंडोनेशिया की वर्तमान स्थित की चुनौतियों को प्रस्तुत किया गया। वास्तव में, दुनिया के सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता के कृत्यों में तेज से वृद्धि देखी गयी है।

शांतिपूर्ण सहअस्तित्व तथा इंडोनेशिया के बहुलवादी परंपरा में कुछ इस्लामिक चरमपंथी संगठनों द्वारा भय उत्पन्न करने के कारण सामाजिक तनाव उत्पन्न हो गया है।

एक मुस्लिम स्वयं सेवक रिफकी फैरूज़ ने कहा, ″ऐसी स्थिति में, इस अवसर को सफलता प्रदान कराने की जिम्मेदारी इंडोनेशिया तथा इसके मुसलमानों की बनती है।″

उन्होंने कहा, ″”हम मुस्लिम स्वयंसेवक हमारे समय को एआईडी प्रतिभागियों को ‘सीखने वाले साथी’ के रूप में समर्पित करने को तैयार हैं। हम विभिन्न मुस्लिम संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं जैसे- नहदलला उललाम और मुहम्मदिया।”

उनमें से कई योग्यकार्ता में इस्लामिक विश्वविद्यालयों के छात्र हैं जबकि कुछ स्थानीय इस्लामी बोर्डिंग स्कूल के छात्र। ए.वाई.डी अंतरधार्मिक एवं अंतर-संस्कृति के बीच आदान-प्रदान करने का एक अच्छा अवसर है। ताकि एशिया में विविधता, बहिष्कारवाद द्वारा नष्ट न किया जाए।

काथलिकों एवं मुसलमानों के बीच प्रमुख आदान-प्रदान सम्मेलन के तीसरे दिन के प्रदर्शनी सत्र में हुआ जिसकी विषयवस्तु थी ″विविधता में एकता″।

प्रतिभागियों ने विभिन्न दलों में विभक्त हो कर योग्यकार्ता के 25 प्रसिद्ध स्थलों का दौरा किया। इन अवसरों पर सुरक्षा का भार मुस्लिम स्वयंसेवकों ने लिया। सत्र के समय युवा मुसलमानों ने अपने विचार भी बांटें।


(Usha Tirkey)

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