Vatican Radio HIndi

Archive for January, 2018|Monthly archive page

शब्द समारोहः ईश्वर और मनुष्य के बीच वार्ता

In Church on January 31, 2018 at 4:08 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 24 जनवरी 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों को पवित्र यूखारिस्त बलिदान पर अपनी धर्मशिक्षा माला के दौरान संबोधित करते हुए कहा,

प्रिय भाई एवं बहनों, सुप्रभात।

यूखारिस्त धर्मविधि के बारे में परिचय उपरान्त आइए हम धर्मविधि में “शब्द समारोह” के बारे चिंतन करें क्योंकि इसमें हम ईश्वर के किये गये कार्यों की चर्चा सुनते हैं जिसे ईश्वर पुनः हमारे जीवन में करने की चाह रखते हैं। यह हमारे लिए सुनी सुनाई बात नहीं वरन एक “जीवंत” उदाहरण होता है क्योंकि गिरजाघर में ईश वचनों के पठन-पाठन द्वारा ईश्वर अपने पुत्र के वचनों, सुसमाचार द्वारा हम सभों से बातें करते हैं।

शब्द समारोह में हम वास्तव में ईश्वर के वचनों को सुनते हैं जिसके माध्यम से ईश्वर स्वयं हम से बातें करते और हमें अपने वचनों पर विश्वास करने हेतु निमंत्रण देते हैं। आत्मा जो प्रेरितों के माध्यम से बोला और सुसमाचार लेखकों को इसे लिखने हेतु प्रेरित किया “वे वचन हमारे हृदयों और कानों में गुंजित होते हैं।”  वचनों के माध्यम ईश्वर हम से बातें करते, हम उन्हें सुनते और उन वचनों को अपने जीवन में जीने का प्रयास करते हैं।

संत पापा ने कहा कि हमें वचनों को सुनने की जरूरत है। वे वास्तव में हमारे लिए जीवन के स्रोत हैं। इसके बारे हमें विशिष्ट रुप से कहा गया है, “मनुष्य रोटी से ही नहीं जीता वरन ईश्वर के मुख से निकलने वाले हर एक शब्द से जीता है।(मत्ती. 4.4) इस अर्थ में हम शब्द समारोह को एक “मेज” के समान देखते हैं जिसे ईश्वर हमारे आध्यात्मिक जीवन को प्रोषित करने हेतु सजाते हैं। शब्द समारोह की मेज धर्मग्रंथ के मूल्यवान चीजों से भरा-पूरी एक मेज है जहाँ हम पुराने और नये दोनों विधानों में येसु ख्रीस्त के अद्वितीय और महान रहस्य के प्रकटीकरण को पाते हैं। संत पापा ने कहा कि यहाँ मैं स्तोत्र के महत्व की चर्चा करना चाहूँगा जो हमें प्रथम पाठ पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। यह हमारे लिए उचित है कि हम इसे गायें, कम से कम स्थायी को। उन्होंने कहा कि दैनिक साप्ताहिक पाठ भी हमारे ख्रीस्त जीवन को प्रोषित करने हेतु अति महत्वपूर्ण होते हैं।

यूखारिस्त बलिदान के पाठों को हम पूर्वी और पश्चिम विभिन्न रीतियों के अनुसार पाठ संग्रहों में पाते हैं। धर्मविधि के दौरान इन पाठों का पठन जो कि धर्मग्रंथ के स्तोत्र से संयोजित है हमारे लिए कलीसिया की एकता को प्रकट करता और हम प्रत्येक को अपने दैनिक जीवन में प्रोषित करता है। यही कारण है कि हम धर्मविधि में व्यक्तिनिष्ठ या गैर-धर्मग्रंथों से पाठों के निषेध को पाते हैं क्योंकि वे ईश्वर और विश्वासियों के मध्य वार्ता को कमजोर करती हैं। वही दूसरी ओर मंच और पाठ संग्रह से लिये गये पाठ, पाठों और स्तोत्र के सही उद्घोषक, शांतिपूर्ण माहौल हमें ईश्वर और विश्वासियों की सामुदायिक वार्ता को अर्थपूर्ण बनाता है।

संत पापा ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि ईश्वर का वचन हमारे लिए अपरिहार्य सहायता है जिसके द्वारा हम अपने को जानते और समझ पाते हैं जैसे कि स्तोत्र रचयिता कहा है, “ईश्वर का वचन मेरे पैरों, मेरे मार्ग की ज्योति है।” (स्तो.119.105) हम अपने भौतिक जीवन में कठिनइयों और मुश्किलों का सामना कैसे कर सकते हैं यदि ईश्वर का वचन हमारे प्रतिदिन के जीवन को प्रोषित और ज्योतिमय न करेंॽ

संत पापा ने कहा कि ईश्वर के वचनों का श्रवण करना हमारे लिए पर्याप्त नहीं है बल्कि हमें ईश्वरीय दिव्य वचनों को अपने हृदय में ग्रहण करते हुए उसके द्वारा फल उत्पन्न करने की जरूरत है। उन्होंने बोने वाले के दृष्टांत को उद्धत करते हुए कहा कि हम उन बीजों की याद करें जो विभिन्न तरह की भूमियों में गिरे।(मत्ती. 4.14-20) हमारे जीवन और हमारे हृदयों में पवित्र आत्मा की क्रियाशीलता जरूरी है जिससे जिन बातों को हम मिस्सा बलिदान में सुनते हैं वे हमारे दैनिक जीवन का अंग बन सकें, जैसे की प्रेरित संत याकूब कहते हैं, “आप वचन के श्रोता ही नहीं, बल्कि उसके पालनकर्ता भी बनें।” (याकू.1.22)

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रासिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। संत पापा ने कहा कि आज हम सभी संत योहन बास्को का त्योहार मनाते हैं जो युवाओं के पिता और शिक्षक रहे। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आप अपने शिक्षकों की ओर निगाहें फेरें। आप बुजुर्ग और बीमार से पीड़ितों, आप क्रूसित येसु पर अपना विश्वास बनाये रखें। और नव विवाहितों आप वैवाहिक जीवन की प्रेरिताई को उदारतापूर्वक जीने हेतु येसु से निवेदन करें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने सभी परिवारों पर येसु ख्रीस्त की शांति और खुशी की कामना की और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

Advertisements

मानवीय गलियारा : शरणार्थियों का एक और समूह रोम पहुँचा

In Church on January 31, 2018 at 4:06 pm

रोम, बुधवार 31 जनवरी 2018 (वीआर,रेई) : मानवतावादी गलियारा कार्यक्रम के तहत मंगलवार 30 जनवरी को रोम के फ्यूमिचिनो हवाई अड्डे पर सीरिया के शरणार्थियों के एक समूह का स्वागत किया गया। यह पहल संत इजीदियो समुदाय द्वारा प्रोत्साहित की जा रही है और इटली के विदेश मामलों के मंत्रालय और आंतरिक मंत्रालय द्वारा सहायता प्रदान की जा रही है।

मंगलवार की सुबह इटली के संत इजीदियो समुदाय के अध्यक्ष मार्को इंपालिआज्जो, इटली के इवांजेलिकल कलीसियाओं के संघ के अध्यक्ष लूका मारिया नेग्रो और इटली के विदेशी मामलों के अधिकारी मारियो गियर ने मंगलवार की सुबह सीरिया के शरणार्थियों का स्वागत किया।

मानवतावादी गलियारों की पहल, कमजोर प्रवासियों के लिए एक स्वागत कार्यक्रम, इटली में दो साल पहले शुरू किया गया था।

यह पहल उन लोगों के लिए की गई थी जो विभिन्न कारणों से अपने देशों को छोड़ खतरनाक यात्रा करते और प्रायः भूमध्यसागरीय समुद्र में मर जाते है।

किफाह जिसने अपनी बहन नवराज और माँ सल्वा के साथ मंगलवार को लेबनॉन होते हुए रोम की  हवाई यात्रा की, वाटिकन रेडियो की संवाददाता फ्राँसिसका को अपने देश सीरिया को छोड़ने के बारे में बताया कि वह और उसके परिवार को दमिस्क में संघर्ष के कारण देश छोड़ना पड़ा। बहन नवराज ने कहा, “आज सीरिया में कोई जगह नहीं है जो आतंकवाद से दूर है, आप जानते हैं कि यह आतंकवाद और हिंसा से घिरा है।”

किफाह ने कहा कि उन्होंने लेबनान में संत ईजीदियो समुदाय के बारे में सुना और उनके साथ संपर्क में आये। नवराज ने कहा, “लेबनान में रहना अरामियों के लिए बहुत कठिन है; बहुत सारी समस्याएं और कठिन परिस्थितियां हैं।”

किफाह ने कहा कि जो लोग लेबनान से भाग गए हैं और रोम के फ्यूमिचिनो में जिन लोगों को स्वागत किया गया है, वे “आतंकवाद, हिंसा के शिकार और सीरियाई संघर्ष के शिकार हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

राष्ट्रीय परिदृश्य की समीक्षा करने हेतु काथालिक धर्माध्यक्षों की आमसभा

In Church on January 31, 2018 at 4:03 pm


नई दिल्ली, बुधवार 31 जनवरी 2018 (मैटर्स इंडिया) : फरवरी की शुरुआत में, भारत के लगभग 200 काथालिक धर्माध्यक्ष, बेंगलुरु में देश की वर्तमान स्थिति में कलीसिया के दया के कार्यों और ख्रीस्तीय विश्वास के साक्ष्य की समीक्षा करेंगे।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की द्विवार्षिक 33वीं आमसभा कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु के संत जॉन राष्ट्रीय अकादमी स्वास्थ्य विज्ञान केंद्र में 2 से 9 फरवरी तक होगी। इस वर्ष आमसभा की विषय-वस्तु है, “मैं संसार के अंत तक सदा तुम्हारे साथ हूँ, (मत्ती 28:20) दया और साक्षी के मिशन के लिए विविधता में संयुक्त”

2 फरवरी को महासभा के उद्घाटन समारोही मिस्सा का अनुष्ठान प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जॉनबप्तिस्ता दिक्वातरो करेंगे।

सीबीसीआई मुख्यालय से एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि द्विवार्षिक आमसभा ऐसे समय में हो रही है जब भारत में कलीसिया “सेवा और साक्ष्य की भारी चुनौतियों का सामना कर रही है।”

सीबीसीआई के महासचिव धर्माध्यक्ष थेओदोर मस्केरनहास ने कहा,” “विविधता में एकता को बढावा देने वाले प्रवर्तकों में से एक कलीसिया है। लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के इच्छुक समूहों और संगठनों की गतिविधियाँ बढ़ रही है। ”

धर्माध्यक्षों का कहना है कि गाय तस्करी, गाय-बलि या गोमांस खाने के बहाने लोगों को प्रताड़ना देने वाले समूहों ने आबादी के कुछ हिस्सों में एक मनोवैज्ञानिक भय पैदा कर दिया है।”पत्रकारों की हत्या, एक फिल्म के खिलाफ विरोध में बच्चों से भरे स्कूल बस पर हमले बड़े पैमाने पर हमारे पारंपरिक रूप से धर्मनिरपेक्ष और शांतिपूर्ण समाज को परेशान कर रहे हैं।” ख्रीस्तीयो के खिलाफ हिंसा जैसे, मध्य प्रदेश के सतना शहर में कैरोल गाने वालो पर हमला, और राज्य में ही एक और शहर विदिशा में एक काथलिक कॉलेज में राष्ट्रवाद के नाम पर कट्टरपंथी समूहों द्वारा जबरन हिंदू प्रार्थना कराने का प्रयास।

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, धर्माध्यक्ष  इन घटनाओं से चिंतित और परेशान हैं। साथ ही उनका कहना है कि नई दिल्ली और मध्य प्रदेश के सरकारी अधिकारियों का समर्थन प्राप्त है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके। “हालांकि, जिस तरह से सांप्रदायिकता, जातिवाद, धार्मिक कट्टतता और नफरत का जहर देश में फैल रहा है, वह परेशान करने वाला और चिंताजनक है।”

आमसभा में धर्माध्यक्ष इस बात पर चर्चा करेंगे कि कलीसिया समाज रुपी आटा में खमीर कैसे बन सकती है ताकि सभी लोग देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को संरक्षित करने और संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए एकजुट हो सकें।

धर्माध्यक्ष इसपर भी विचार करेंगे कि कैसे कलीसिया येसु मसीह के प्यार के साक्ष्य को जारी रख सकती है और निस्वार्थ राष्ट्र की सेवा कर सकती है। राष्ट्र निर्माण और विकास संबंधी परियोजनाओं में राज्य और केंद्रीय स्तर पर दलितों, आदिवासियों और हाशिए पर जावन यापन कर रहे लोगों के लिए सरकारों के सहयोग के नए तरीकों की खोज पर विचार किया जाएगा।

कलीसिया सभी धर्मों और विचारधाराओं के अनुयायियों के साथ खुली वार्ता में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहती है ताकि एक साथ हम शांति और सामंजस्यपूर्ण जीवन को बढ़ावा दे सकें।

आमसभा में द्विवर्षीय कार्यकाल हेतु सम्मेलन के अध्यक्ष और दो उपाध्यक्षों का चुनाव होगा। वर्तमान में सम्मेलन के अध्यक्ष सीरो-मलंकरा कलीसिया के प्रधान कार्डिनल बसेलिओस क्लीमिस हैं।

 


(Margaret Sumita Minj)

वेनेजुएला धर्माध्यक्षों ने लोगों के सम्मान की मांग की

In Church on January 31, 2018 at 4:01 pm


वाटिकन रेडियो, बुधवार 31 जनवरी 2018 (वीआर,रेई) : वेनेजुएला के धर्माध्यक्षों ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के सरकार की निंदा की है। उन्होंने इसे एक अधिनायकवादी प्रणाली कहा है जिसका उद्देश्य अपने लोगों को दबाने और अनिश्चित काल तक सत्ता में बने रहना है।

धार्मिक सूचना सेवा (एसआईआर) के साथ एक साक्षात्कार में वेनेजुएला  काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष ने कहा,” भ्रष्ट और निरंकुश सरकार के सामने “हम लोगों की जरूरतों के प्रति सम्मान की मांग करते हैं।”

बैरिनास के धर्माध्यक्ष कास्टोर ओस्वाल्दो एज़ुएह पेरेज़ ने वेनेजुएला के नेताओं की राजनीतिक स्थिति की निंदा की है वे सरकार और सैन्य शक्तियों को भ्रष्ट व्यापारियों के रूप में वर्णित करते हैं।

उन्होंने बताया कि धर्माध्यक्षों ने बार-बार भूख और कुपोषण के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है जो देश की बड़ी आबादी को प्रभावित किया है और इससे बच्चों और वयस्कों की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में कमी आई है, साथ ही 2 मिलियन से अधिक युवा लोगों का पलायन हुआ है। देश में लगातार मानव अधिकार उल्लंघन और एक सामान्य लोकतंत्र की कमी है।

धर्माध्यक्ष ओस्वाल्दो ने कहा “हम तत्काल स्वास्थ्य देखभाल की कमी के मुद्दों से निपटने के लिए सरकार से अपील करते हैं और हम एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग करते हैं जिसमें सभी नागरिकों की भागीदारी रहती है।” उन्होंने कहा,”हमारा काम, लोगों के जीवन की रक्षा करना है। हम इसे सरकार और विपक्षी दलों दोनों के लिए लगातार दोहराते हैं।”

धर्माध्यक्ष ओस्वाल्दो ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि देश में लोकतंत्र की कमी और मानवतावादी आपातकाल से उत्पन्न होने वाली गंभीर और नाजुक स्थिति को समाप्त करने के लिए कलीसिया “हमेशा वार्तालाप के लिए खुली है।”


(Margaret Sumita Minj)

दूतेरते के संवैधानिक परिवर्तनों के खिलाफ फिलीपींस के धर्माध्यक्ष

In Church on January 31, 2018 at 3:59 pm


मनिला, बुधवार 31 जनवरी 2018 (एशियान्यूज) : फिलीपींस के राष्ट्रपति दूतेरते द्वारा 1987 के संविधान में परिवर्तन लाने हेतु दिये गये सुझाव से सभी धर्माध्यक्ष असहमत हैं।

मन्दाव शहर में  27 से 29 जनवरी तक चल रहे फिलीपींस काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन(सीबीसीपी) की 116वीं द्विवर्षीय आमसभा ने एक संघीय सरकार की ओर राष्ट्रपति के कदम की और राज्य के कुछ उच्चतम कार्यालयों के कार्यों का विस्तार करने के लिए उनकी आलोचना की है।

“कलीसिया के सामाजिक सिद्धांत द्वारा प्रोत्साहित”, धर्माध्यक्षों का कहना है, “हम स्पष्ट और साफ दिल से अपनी नैतिकता के लिए खड़ा होना चाहते हैं”

सीबीसीसी अध्यक्ष और दावाओ के महाधर्माध्यक्ष रोमुलो जी वैलेगस द्वारा हस्ताक्षरित पत्र, “चार सिद्धांतों” की पहचान करता है, जो इस प्रकार है, “चार्टर परिवर्तन की दिशा में वर्तमान कार्यवाही पर नैतिक आधार के तहत निर्णय”, अर्थात् गरिमा और मानवाधिकार, अखंडता और सच्चाई, भागीदारी और एकता, और सार्वजनिक भलाई। धर्माध्यक्षों के लिए, “एक नए संविधान हेतु जल्दीबाजी में लिया गया यह कदम” इन मूलभूत मूल्यों को लुप्तप्राय कर सकता है।

एक सत्तावादी मोर्चा और पारदर्शिता की कमी के भय का हवाला देते हुए, पत्र में मांग की गई है कि विधायक व्यक्तिगत हितों के बजाय “सार्वजनिक हितों” को बढ़ावा देने का प्रयास करें।

वास्तव में, “जब चार्टर परिवर्तन स्वयं के फायदे लिए बन जाती है, जैसे कि ‘नो-एलेक्शन’ (कोई चुनाव नहीं) के लिए कहती है तो राष्ट्रपति का कार्यकाल स्वतः बढ़ जाता है जिससे देश के नागरिक शक, विस्मय और उत्पीड़न के साथ प्रतिक्रिया दिखायेंगे। ”

पत्र में इस बात को भी लिखा गया है कि “पिछले अनुभव के आधार पर यह तानाशाह की भावना लगती है और “राजनीतिक राजवंश वास्तव में हमारे देश के राजनीतिक जीवन में हावी हो रहे हैं।”

धर्माध्यक्षों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित संघीय व्यवस्था और सत्ता के विकेंद्रीकरण के बारे में भी सवाल उठाया है।

एक “संघीय प्रणाली जो एक समान आधार पर संघीय राज्यों को शक्ति प्रदान करती है, वह मिनदानाओ के लुमाड्स और मुस्लिमों की स्वतंत्रता और पैतृक अधिकारों के लिए सम्मान की उम्मीदों को संतुष्ट नहीं कर पायेगी।”

संविधान को बदलने के बजाय, 1987 के चार्टर के “पूर्ण कार्यान्वयन” की आवश्यकता है, जो हालांकि अपूर्ण है “पर सुसमाचार के अनुरूप”है। इसे ध्यान में रखते हुए, धर्माध्यक्ष काथलिकों से आग्रह करते हैं कि वे सचेत रहें। वे बारंबार कहते हैं कि सहभागिता ही लोकतंत्र का दिल है।

“हम आपसे आग्रह करते हैं, “ईश्वर के प्रिय लोगो,  आप अपनी बुद्धि, तर्क और स्तंत्रता का सही प्रयोग करें। आप आपस में चर्चा और बहस करें और सुसमाचार के प्रकाश में अपना निर्णय लें। हमारे लिए अभी आवश्यक है कि हमारे विधायकों को केवल चार्टर के उस मुद्दे पर सभी की भलाई के लिए वास्तव में जो कुछ करना है, उसके लिए राजी करें।”

अंत में, “हम इस महत्वपूर्ण नैतिक कार्य को, हमारे देश के भविष्य को कुंवारी माता मरियम, फिलीपींस की रानी को सौंप देते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

पिता और एक-दूसरे से मिलाने वाले मध्यस्थ मसीह हैं, संत पापा

In Church on January 31, 2018 at 3:58 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 31 जनवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर सभी विश्वासियों को येसु के साथ संबंध जोड़े रखने की प्रेरणा दी। येसु ही पिता ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग हैं। वे कहते हैं, “मार्ग सत्य और जीवन मैं हूँ। मुझसे होकर गये बिना कोई पिता के पास नहीं आ सकता।” (योहन, 14:6)

उन्होंने संदेश में लिखा, “येसु हमारे मध्यस्थ है, जो हमें न केवल पिता के साथ बल्कि एक-दूसरे के साथ भी मेल-मिलाप कराते हैं।”


(Margaret Sumita Minj)

रोहिंग्या शरणार्थियों के समर्थन में विडोडो ने गारंटी दी

In Church on January 31, 2018 at 3:56 pm

जकार्ता, बुधवार 31 जनवरी 2018 (एशियान्यूज) : राष्ट्रपति जोको विडोडो ने बांग्लादेश के कॉक्स बाजार जिले की यात्रा के दौरान म्यांमार में जातीय हिंसा में फंसे रोहिंग्यों की मदद के लिए इंडोनेशिया की सरकार की प्रतिबद्धता की दोबारा पुष्टि की है।

28 जनवरी को उक्शीया उपजला में जामटोली शरणार्थी शिविर की यात्रा के दौरान, उन्होंने इंडोनेशियाई मानवतावादी गठबंधन (आईएचए) के समन्वयक डॉ कोरोना रिंटवान सहित रोहंग्यों की मदद करने वाले इंडोनेशियावासियों से मुलाकात की।

आईएएचए ड्रीमर्स मेडिकल कैम्प (डीएमसी) के साथ काम करती है, जो एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन है।

आईएएचए-डीएमसी इंडोनेशिया की सरकार और कई गैर-सरकारी संगठनों के बीच एक सहयोग समझौते से उत्पन्न स्वास्थ्य सुविधाओं में से एक है, जिसमें देश के दो सबसे बड़े इस्लामी संगठनों नहदललाल उलमा और मुहमदीयाह  और साथ ही करितास इंडोनेशिया भी शामिल हैं।

विडोडो ने कहा, “मैं यहां अपने समुदायों, एनजीओ और सरकार की गतिविधियों को देखने के लिए आया हूँ।”

“शुरुआत से ही, हमारी सरकार समन्वय प्रयासों में भाग लेने के लिए हमेशा तैयार रही है और हम इस मानवीय सहायता देना जारी करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि इंडोनेशिया जल्द ही अस्पतालों, आश्रयों, शैक्षिक केंद्रों, आघात उपचार, चिकित्सा सेवाओं के लिए तीन एम्बुलेंस, सौर पैनलों और जल शुद्धिकारक यंत्र प्रदान करेगा।

25 अगस्त के बाद से, रोहिंग्या उग्रवादियों द्वारा सशस्त्र बलों पर कुछ हमलों के बाद से देश की सेना ने गंभीर अभियान चलाया जिसमें सैंकड़ो लोग मारे गये और साढ़े पाँच लाख से भी अधिक रोहिंग्या मुसलमानों को बांग्लादेश की शरण लेनी पड़ी।


(Margaret Sumita Minj)

कलीसिया के चरवाहे कठोर नहीं वरन् कोमल एवं लोगों के करीब होते हैं

In Church on January 30, 2018 at 4:28 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 जनवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में मंगलवार 30 जनवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में सच्चे चरवाहे की विशेषताओं को प्रस्तुत किया।

उन्होंने कहा कि एक सच्चा चरवाहा का मनोभाव येसु के समान होना चाहिए जो ठोस सामीप्य एवं कोमलता के साथ अपने लोगों का साथ देता है न कि कठोरता एवं न्याय के साथ पेश आता।

संत पापा ने संत मारकुस रचित सुसमाचार के उस पाठ पर चिंतन किया जिसमें येसु द्वारा चंगाई की दो घटनाओं का जिक्र है। संत पापा ने कहा कि यह येसु के जीवन के एक दिन को दर्शाता है जो कि एक पुरोहित अथवा धर्माध्यक्ष के लिए उत्तम उदाहरण है कि उन्हें लोगों के साथ चलना, उनके बीच रहना एवं उनकी देखभाल करना है।

सुसमाचार लेखक वर्णन करता है कि येसु लोगों की भीड़ से घिरे थे जो उनके साथ चल रही थी। यह ईश्वर की उस प्रतिज्ञा को दर्शाता है जिसमें उन्होंने अपने लोगों का साथ देने का वचन दिया था।

संत पापा ने कहा कि येसु एक प्रतीक के साथ आध्यात्मिक सलाह हेतु कार्यालय नहीं खोलते और न ही एक डॉक्टर के प्रतीक के साथ वे कोई संस्था चलाते हैं बल्कि वे खुद को लोगों की भीड़ में डाल देते हैं।

उन्होंने कहा कि यही सच्चे चरवाहे की छवि है जिसे येसु हमें प्रदान करते हैं। जब लोग उनसे आग्रह करते हैं तो येसु बाहर जाना और कठिनाई में पड़े लोगों से मुलाकात करना चाहते हैं। एक पवित्र पुरोहित जो अपने लोगों का साथ देता वह शाम तक सचमुच थक जाता है। उसकी थकान वास्तविक होती न कि काल्पनिक।

आज का सुसमाचार हमें इस बात से भी अवगत कराता है कि भीड़ के बीच येसु छू लिए गये। संत मारकुस रचित सुसमाचार में यह शब्द पाँच बार आता है। संत पापा ने गौर किया कि प्रेरितिक यात्रा के दौरान लोग ऐसा ही करते हैं। वे कृपा पाने के लिए ऐसा करते हैं जिसको येसु ने भी महसूस किया था। उन्होंने इसे वापस लेने का प्रयास कभी नहीं किया चाहे इसके लिए उन्हें लज्जा अथवा उपहास का पात्र ही क्यों न बनना पड़ा। ये येसु के चिन्ह हैं अतः उनमें एक सच्चे चरवाहे का मनोभाव है।

संत पापा ने कहा कि एक याजक जो अपने अभिषेक के दिन धर्माध्यक्ष द्वारा पवित्र तेल से अभियंजित किया जाता है, उसे एक सच्चे, आंतरिक, सामीप्य एवं कोमलता के तेल से अभियंजित होना चाहिए। पुरोहित जो अपने लोगों के करीब आना नहीं जानता वह कुछ खो रहा है, शायद वह उस क्षेत्र का मालिक बन रहा है न कि चरवाहा। एक पुरोहित जिसमें कोमलता का अभाव है वह कठोर होता तथा अपनी रेवड़ को पीटता है।

संत पापा ने कहा कि यदि येसु की तरह एक पुरोहित अपना दिन भले कार्यों को करते हुए थकान के साथ समाप्त करता है तब लोग उनमें ईश्वर की उपस्थिति महसूस करेंगे।

संत पापा ने विश्वासियों से आग्रह किया कि वे अपने पुरोहितों एवं धर्माध्यक्षों के लिए प्रार्थना करें ताकि ईश्वर ने कोमलता एवं नजदीकी के साथ लोगों के बीच रहने की जो कृपा उन्हें प्रदान की है उसे वे साकार कर सकें जिससे कि लोग उनमें ईश्वर की उपस्थिति महसूस कर सकें।


(Usha Tirkey)

हमारे समय में उदासीनता एक संक्रामक विषाणु के समान है

In Church on January 30, 2018 at 4:26 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 जनवरी 2018 (रेई): यूरोप में सेमाईट-विरोधी के खिलाफ संघर्ष में राज्यों, संस्थाओं और व्यक्तियों की सुरक्षा एवं सहयोग हेतु जिम्मेदारी पर रोम में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संत पापा ने उत्तरदायित्व, उदासीनता एवं स्मृति इन तीन शब्दों पर प्रकाश डाला।

उत्तरदायित्व के संबंध में संत पापा ने कहा, “हम तभी जिम्मेदार हैं जब हम उत्तर देने में सक्षम हैं। यह केवल हिंसा के कारणों का पता लगाने एवं उनके प्रतिकूल तर्क का खंडन करने का सवाल नहीं है किन्तु उसका उत्तर देने के लिए सक्रिय रूप से तैयार रहना।

उन्होंने कहा कि शत्रु जिसके विरूद्ध हम लड़ते हैं वह न केवल घृणा है किन्तु उससे भी बढ़कर है उदासीनता क्योंकि उदासीनता ही है जो हमें सही चीज को करने से रोकता एवं हमें पंगु बनाता है यद्यपि हम जानते हैं कि वह सही है।

संत पापा ने कहा कि मैं इस बात को दोहराने से नहीं थकता कि उदासीनता एक विषाणु है जो कि हमारे समय का एक खतरनाक संक्रामक है, ऐसे समय में जब हम दूसरों के साथ अधिक जुड़े हुए हैं किन्तु दूसरों के लिए कम सक्रिय।

स्मृति पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि हाल ही में हमने अंतरराष्ट्रीय आहुति दिवस मनाया, ताकि मानवता में सुधार लाया जा सके, सच्चाई के बारे हमारी मानव समझ को बेहतर करने तथा हमारे पड़ोसियों के प्रति उदासीनता को दूर करने के लिए, जिसके लिए हमें स्मृति की आवश्यकता है।

संत पापा ने कहा कि स्मृति एक कुँजी के समान है जिसके माध्यम से भविष्य को प्राप्त किया जा सकता है तथा उसे अपने बाद आने वाली पीढ़ी को प्रतिष्ठित ढंग से हस्तांतरित किया जा सकता है जो कि हमारा कर्तव्य है।

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संत पापा ने उत्तरदायित्व, स्मृति एवं सामीप्य की संस्कृति को प्रोत्साहन देने हेतु अच्छे प्रशिक्षण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हमें युवा पीढ़ी को शिक्षा देने की आवश्यकता है ताकि वे घृणा एवं भेदभाव के विरूद्ध संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। साथ ही साथ, विगत दिनों के तनावपूर्ण स्थिति से बाहर आ सकें।


(Usha Tirkey)

प्रभु के समर्पण महापर्व के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग की सूचना

In Church on January 30, 2018 at 4:23 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 जनवरी 2018 (रेई): 2 फरवरी, प्रभु के समर्पण महापर्व के उपलक्ष्य में, संत पापा फ्राँसिस शुक्रवार संध्या 17.30 बजे, वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में समर्पित लोगों के लिए समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

संत पापा के धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था करने वाली परमधर्मपीठीय कार्यालय ने सूचना जारी करते हुए कहा है कि संत पापा के साथ इस समारोह में भाग लेने वाले कार्डिनलों, प्राधिधर्माध्यक्षों, महाधर्माध्यक्षों एवं धर्माध्यक्षों को शाम 4.45 बजे महागिरजाघर के संत सेबास्तियन प्रार्थनालय में जमा होना है। कार्डिनलों एवं प्राधिधर्माध्यक्षों को अपने साथ हल्की गुलाबी मैटर (सर ताज) तथा महाधर्माध्यक्षों एवं धर्माध्यक्षों को श्वेत मैटर के साथ आना है।

पुरोहित जो धर्मसमाजी हैं और जिन्हें संत पापा के साथ समारोह का अनुष्ठान करना है वे विशेष टिकट के साथ अपने सफेद धर्मसंघी परिधान में आयें।

उनके लिए धर्मसमाजियों एवं समर्पित लोगों के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा 30 और 31 जनवरी को प्रातः 8.30 से दोपहर 1.00 तक टिकट वितरण किया जाएगा।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: