Vatican Radio HIndi

Archive for February 1st, 2018|Daily archive page

मृत्यु की राह पर चलने का एहसास हमारे लिए हितकर

In Church on February 1, 2018 at 5:14 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 18 (रेई): मृत्यु का विचार हमें समय के मालिक बनने की भ्रांति से बचाता है। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

उन्होंने मृत्यु पर प्रवचन देते हुए कहा, “मृत्यु एक सच्चाई है, मृत्यु एक विरासत है और मृत्यु एक स्मृति है।”

संत पापा ने कहा, “हम न तो अनन्त है और न ही अल्पकालिक : हम ऐसे स्त्री और पुरूष हैं जो समय के अंतराल में जीते हैं जो आरम्भ होता और अंत भी हो जाता है।”

राजाओं के पहले ग्रंथ से लिए गये पाठ जिसमें राजा दाऊद की मृत्यु का उल्लेख है, उसपर अपने चिंतन को आधारित करते हुए उन्होंने सभी को निमंत्रण दिया कि हम समय के महत्व को समझने की कृपा हेतु प्रार्थना करें ताकि हम अपने आप में बंद होकर वर्तमान समय के कैदी न बन जाएँ।

मृत्यु एक सच्चाई है

संत पापा ने कहा, “मृत्यु एक ऐसी सच्चाई है जो हर किसी को प्रभावित करती है। देर अथवा शीघ्र किन्तु यह सभी के लिए आती है किन्तु जीवन को पकड़कर रखने का प्रलोभन हमेशा बना रहता है जो बिना भविष्य को गोल घूमने के स्वार्थी उलझन की ओर ले चलता है। यह यात्रा मृत्यु के द्वारा समाप्त हो जाती है अतः कलीसिया की हमेशा से कोशिश रही है कि हम अपने अंत पर चिंतन करें।

मृत्यु एक विरासत है

संत पापा ने कहा कि इस भावना से हमें सहायता मिलती है कि हम समय के मालिक नहीं हैं, क्योंकि भ्रम के क्षणों में यह हमारी सहायता करती हैं ताकि हम बिना उद्देश्य के जीवन को न गवाँ दें। हम रास्ते पर हैं और आगे देखते हैं किन्तु हम यह भी याद करते हैं कि मृत्यु एक विरासत है एक भौतिक विरासत नहीं किन्तु साक्ष्य के रूप में।

संत पापा ने चिंतन हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि ईश्वर हमसे पूछेंगे कि मेरे पास कौन सी विरासत है? जीवन के साक्ष्य के लिए मैं कौन सी विरासत छोड़ने वाला हूँ?

संत पापा ने पुनः स्मरण दिलाया कि हम में से कोई इससे बच नहीं सकता, हरेक को इस रास्ते से होकर गुजरना है अतः हमें तैयारी करनी चाहिए।

मृत्यु एक स्मृति है

संत पापा ने कहा कि मृत्यु एक याद है। यह याद दिलाती है कि मरने से पहले, आज हमें क्या करना है। मृत्यु की वास्तविकता हमें हर दिन निश्चय करने की प्रेरणा देती है।

अतः मृत्यु की राह पर चलने का एहसास हम सभी के लिए हितकर है।


(Usha Tirkey)

Advertisements

समर्पित व्यक्ति प्रेम के प्रवर्तक हैं

In Church on February 1, 2018 at 5:13 pm

पोलैंड, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (रेई): “आज के विश्व में समर्पित व्यक्ति प्रेम के प्रवर्तक हैं।” यह बात धर्माध्यक्ष जेकब किचिनस्की सी. एम. एफ ने 31 जनवरी को, पोलैंड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के मुख्य आवास पर, एक प्रेस सम्मेलन में 32वीं विश्व समर्पित दिवस के पूर्व कही।

2 फरवरी को प्रभु के समर्पण महापर्व पर विश्व समर्पित दिवस मनाया जाता है।

पौलेंड के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के समर्पित एवं धर्मसमाजी संस्थाओं के लिए बने विभाग के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष जेकब किचिनस्की ने प्रेस सम्मेलन में इस बात को रेखांकित किया कि विश्व समर्पित दिवस संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा स्थापित की गयी है, जो प्रभु के मंदिर में समर्पण के दिन 2 फऱवरी को पड़ता है। उन्होंने कहा कि समर्पित जीवन का मूल है ईश्वर के प्रेम को प्रकट करना। अतः समर्पित व्यक्ति आज के विश्व में प्रेम के प्रवर्तक हैं। वे यह भी प्रकट करते हैं कि ईश्वर के प्रति निष्ठा एवं लोगों के प्रति निष्ठा क्या है। ईश्वर के प्रति प्रेम एवं निष्ठा के संदेश को अमल करते हुए वे एकता की संस्कृति का निर्माण करते हैं जिसकी आज हमें आवश्यकता है।

इस वर्ष के प्रेस सम्मेलन में मुख्य रूप से अक्तूबर 2018 में होने वाली युवाओं को समर्पित धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की पृष्ठभूमि पर, समर्पित व्यक्तियों द्वारा युवाओं के सहयोग पर जोर दिया गया।

पौलेंड में 56 धर्मसमाजी संस्थाओं में करीब 9,302 पुरोहित एवं 1,313 धर्मबंधु हैं। 105 धर्मसंघों में कुल 18 हजार धर्मबहनें हैं, 1,281 मठवासी धर्मबहनें 83 विभिन्न मठों में रहती हैं तथा 1 हजार से ज्यादा लोकधर्मी संगठन हैं, 267 समर्पित कुँवारी, 305 समर्पित विधवे एवं 2 समर्पित विधुर हैं वहाँ दो एकांत मठवासी भी हैं।


(Usha Tirkey)

महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने के लिए एक महिला राजनीतिक आंदोलन

In Church on February 1, 2018 at 5:10 pm

नई दिल्ली, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के नारी उत्थान विभाग के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष जेकब मार बरनाबस ने एशिया न्यूज़ को बतलाया कि महिलाओं के उत्थान के लिए उन्होंने कई कदम उठाये हैं जिनमें से एक है “भारत में महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करने तथा नारी मूल्य के प्रति जागरूकता लाने के लिए सामाजिक एवं राजनीतिक आंदोलन को बढ़ावा देना। धर्माध्यक्ष के अनुसार पुरूष और नारी की प्रतिष्ठा एक समान है।”

भारत की कलीसिया द्वारा महिलाओं के पक्ष में इस प्रयास का उद्देश्य है प्रधानता की मानसिकता में परिवर्तन लाना, खासकर, उस मानसिकता से जिसमें महिलाएँ अपने को पुरूषों से नीचे समझती हैं। यह एक लम्बी प्रक्रिया है जिसके द्वारा कलीसिया उनके लिए संघर्ष कर रही है।

धर्माध्यक्ष बरनाबस ने यह बात भारत के वितमंत्री के उस रिपोर्ट के बाद कही, जिसमें उन्होंने बतलाया है कि 21 मिलियन ‘अवांछित लड़कियाँ’ हैं जिनके माता-पिता बच्चों को तब तक जन्म देना जारी रखते हैं जब तक कि पुत्र पैदा न हो जाए। अधिकारियों की रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि लिंग चयनात्मक गर्भपात, मृत्यु या बहिष्कार के कारण 63 मिलियन महिलाएँ भारत की आबादी से गायब हैं।

इस पृष्ठभूमि के बावजूद धर्माध्यक्ष के लिए “यह सोचना गलत है कि देश में महिलाएँ हमेशा नीच समझी जाती हैं। केवल कुछ संजातीय दल हैं जिनमें महिलाएँ प्रधान होती हैं और जिसमें सम्पति पुत्रों को नहीं बल्कि पुत्रियों को दी जाती हैं।”

उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा देश में अब भी काफी मजबूत है जिसके द्वारा कई समस्याएँ खासकर, गरीब परिवारों के लिए उत्पन्न हो जाती हैं। जब माता-पिता सम्पति का बटवारा अपने बच्चों के बीच करते हैं तब भी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। लड़कियों को आर्थिक बोझ के रूप में देखा जाता है और जिसके कारण इधर कुछ सालों से महिला गर्भपात में वृद्धि हुई है यद्यपि लिंग परीक्षण को अवैध घोषित किया गया है।

धर्माध्यक्ष ने कहा किन्तु धीरे-धीरे मानसिकता बदल रही है। लड़कियों के लिए काम की खोज करना आसान है और काथलिक कलीसिया भी कई तरह से इसमें मदद दे रही है।

महिला उत्थान विभाग के अध्यक्ष ने कहा कि हर पल्ली में महिलाओं की मदद करने हेतु दलों का निर्माण किया गया है।

उदाहरण के लिए 8 सितम्बर को माता मरियम के जन्म दिवस पर सभी कलीसियाओं को एक चिट्ठी दे गयी है जिसमें महिलाओं की भूमिका एवं महत्व का जिक्र किया गया है। कई ऐसे केंद्र भी खोले गये हैं जिसमें परित्यक्त महिलाओं को अध्ययन करने एवं काम पाने में सहायता दी जाती है।


(Usha Tirkey)

अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की स्थिति से राहुल गाँधी हुए अवगत

In Church on February 1, 2018 at 5:09 pm


शिलोंग, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (ऊकान): मेघालय में कलीसिया के प्रतिनिधियों एवं आदिवासी नेताओं ने कॉन्ग्रेस दल के अध्यक्ष राहुल गाँधी को जानकारी दी कि देशभर में अल्पसंख्यक संस्थाओं पर हमले की खबरों ने उनमें असुरक्षा की गहरी भावना भर दी है।

27 फरवरी को 60 सदस्यों की मेघालय विधानसभा चुनावों के प्रचार हेतु राहुल गांधी दो दिवसीय यात्रा पर थे।

कलीसिया के प्रतिनिधियों एवं आदिवासियों और अन्य अल्पसंख्यक नेताओं ने मुलाकात में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को बतलाया कि वे खासकर, भोजन, भाषा एवं संस्कृति के प्रति असहिष्णुता की भावना से चिंतित हैं।

मुलाकात के उपरांत उत्तरी भारत के धर्माध्यक्ष माइकेल ने पीटीआई को बतलाया, “हमने उस विचारधारा के प्रति चिंता व्यक्त की जो थोपा जा रहा है जो कि खतरनाक है। हमें एक साथ बढ़ना एवं सभी का सम्मान करना है।”

यूनिटेरियन कलीसिया के नेता डेर्रिक पी. पारियात ने कहा कि उन्होंने राहुल के साथ परस्पर संवादात्मक मुलाकात की जिसमें उन्होंने कई मुद्दों पर असहमति व्यक्त की।

उन्होंने बतलाया कि राहुल ने विविधता में एकता पर प्रकाश डाला तथा कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी देश में समावेशी भावना के सिद्धांत को नहीं बदलेगी वरन् राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हित की रक्षा करेगी।

कलीसिया के धर्मगुरूओं ने देश में धार्मिक असुरक्षा के बढ़ते प्रभाव के बारे भी चिंता व्यक्त की।

भारत की प्रेसबितेरियन कलीसिया के नेता जी. एस. लैट्टान ने कहा, “अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों के रूप में हमने देश की वर्तमान स्थिति के मद्देनजर अपनी असुरक्षा की भावना को व्यक्त किया।”

उन्होंने कहा कि पूरे देश में बड़े पैमाने पर गिरजाघरों, कलीसिया के नेताओं और अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के बाद उन्हें लगता है कि केंद्र और राज्यों में राजनीतिक संरक्षण की आवश्यकता है।

कॉन्ग्रेस प्रमुख ने ग़ैरसरकारी संगठन, स्वयं सहायता समूह, कॉलेज के प्राध्यापकों एवं आदिवासी संस्थाओं समेत कई दलों के लोगों से मुलाकात की। उन्होंने संत एडमंड कॉलेज में महिलाओं से भी मुलाकात किया।


(Usha Tirkey)

महिलाओं की तस्करी के खिलाफ, नेपाल का काथलिक स्कूल

In Church on February 1, 2018 at 5:07 pm


नेपाल, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (रेई): यूनिसेफ के अनुसार हरेक साल नेपाल की 7,000 लड़कियाँ अवैध रूप से भारत भेजी जाती हैं तथा वर्तमान में करीब 200,000 लड़कियाँ वेश्यालयों की शिकार हैं। कुछ ग़ैरसरकारी संगठनों के मुताबिक यह संख्या और भी बड़ी है। यही कारण है कि नेपाल में मानव तस्करी खासकर, महिलाओं की तस्करी को रोकने के लिए नारी शिक्षा एवं रोजगार को बढ़ाना प्रभावशाली रास्ता है।

फिदेस को मिला जानकारी के अनुसार येसु धर्मसमाज की धर्मबहन मरिस्सा वायालिल समाज में नेपाली महिलाओं के उत्थान हेतु सेवारत हैं। उनका कहना है कि “परिवारों में जागृति लाने की आवश्यक है, शिक्षा एवं समाज में महिलाओं के उत्थान को सुनिश्चित करना तथा कानूनों के एक अधिक सख्त याचिका को बढ़ावा देना। इस तरह मानव तस्करी को रोकने के लिए बहुत कुछ किया जा सकता है।”

समाज सेवा से जुड़ी ये धर्मबहन एक शिक्षिका तथा काथमाण्डु सेंट मैरीस सेकेंडरी स्कूल की प्रबंधक हैं। उस स्कूल में सभी समुदायों के लोग विद्या अर्जित कर सकते हैं वहां जाति-धर्म एवं धनी-गरीब का कोई भेदभाव नहीं है। लड़कियों को न केवल शैक्षणिक ज्ञान दी जाती है लेकिन उन्हें अपने व्यक्तित्व को व्यापक अर्थों में विकसित करने, चरित्रों की ताकत और मूल्यों जैसे सच्चाई, सम्मान, वफादारी, न्याय की भावना, ईमानदारी से काम करने की ज़रूरत को बढ़ावा देने में मदद दी जाती है।

नेपाल विश्व में विकासशील देशों में से एक है जिसकी एक चौथाई आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करती है।


(Usha Tirkey)

संत डॉन बोस्को एक आदर्श शिक्षक

In Church on February 1, 2018 at 5:05 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (जेनित): संत पापा फ्राँसिस ने 31 जनवरी को संत डॉन बोस्को के आदर्शों पर चलने का प्रोत्साहन दिया।

31 जनवरी को सलेशियन धर्मसमाज के संस्थापक डॉन बोस्को की याद की जाती है जो एक आदर्श शिक्षक माने जाते हैं।

बुधवारीय आमदर्शन समारोह में युवाओं, रोगियों एवं नवविवाहित दम्पतियों को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने इटली के संत डॉन बोस्को की याद की जो युवाओं के पिता एवं गुरु माने जाते हैं।

संत पापा ने कहा, “प्रिय युवाओ, उन्हें एक आदर्श गुरु के रूप में देखें। आप जो बीमार हैं उन्हें एक आदर्श के रूप ने देखें जिन्हें क्रूसित येसु पर दृढ़ विश्वास था और आप जो नवविवाहित हैं उनकी मध्यस्थता द्वारा दम्पत्य प्रेम के मिशन में उदारता पूर्वक समर्पित हों।


(Usha Tirkey)

सच्चा विश्वास

In Church on February 1, 2018 at 5:03 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा ने 1 फरवरी के ट्वीट संदेश में विश्वास को परखने की सलाह दी क्योंकि सच्चा विश्वास एक ऐसा तथ्य है जो व्यक्ति को उदासीनता से दूर रहने और अधिक उदार बनने हेतु प्रेरित करता है।

उन्होंने संदेश में लिखा, “एक विश्वास जो हमें तंग नहीं करता तो वह एक परेशान करने वाला विश्वास है। एक विश्वास जो हमें बढ़ने हेतु प्रेरित नहीं करता तो उसे बढ़ने की आवश्यकता है।”


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: