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हिंसा विषय पर अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन को सन्त पापा फ्राँसिस का सम्बोधन

In Church on February 2, 2018 at 1:49 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार 02 फरवरी को हिंसा पर आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को सम्बोधित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा कि हिंसा हर यथार्थ धार्मिक अभिव्यक्ति से इनकार करती है इसलिये हर प्रकार की हिंसा की निन्दा करना हम सब का दायित्व है।

मिस्र में विगत वर्ष अपनी यात्रा के दौरान कहे शब्दों को दुहराते हुए सन्त पापा ने कहा, “ईश्वर जीवन के प्रेमी है जो मनुष्य से निरन्तर प्रेम करते हैं और इसलिये हिंसा के मार्ग के परित्याग हेतु हमारा आह्वान करते तथा इसे अस्वीकार करने हेतु हमें प्रेरित करते हैं।”

उन्होंने कहा, “हमारे इस युग में यह सर्वोपरि है कि सभी धर्म इस अनिवार्यता का सम्मान करें तथा हिंसा को उचित ठहराने वाली समस्त दलीलों का बहिष्कार करें इसलिये कि हिंसा हर प्रामाणिक धार्मिक अभिव्यक्ति को नकारती है … हमारा दायित्व है कि हम मानव प्रतिष्ठा एवं मानवाधिकार के हर अतिक्रमण की निंदा करें तथा धर्म के नाम पर भड़काई जानेवाली घृणा का बहिष्कार करें।”

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, “धर्म के नाम पर भड़काई गई हिंसा धर्म को ही बदनाम करती है, इसलिये सभी के द्वारा हिंसा का खण्डन किया जाना चाहिये, विशेष रूप से, उन लोगों द्वारा जो धर्म के अध्यक्ष अथवा धार्मिक नेता हैं और जो यह भली प्रकार जानते हैं कि ईश्वर सदैव भलाई, दया एवं प्रेम हैं और उनमें घृणा, प्रतिशोध एवं विद्धेष के लिये कोई जगह नहीं है।”


(Juliet Genevive Christopher)

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विश्वास का कार्य है हमारा विकास, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on February 2, 2018 at 1:47 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि विश्वास का कार्य हमारा विकास होना चाहिये।

पहली फरवरी को अपने ट्वीट सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने लिखा, “ऐसा विश्वास जो हमें विचलित नहीं करता वह ख़ुद विचलित है; ऐसा विश्वास जो हमें विकसित होने नहीं देता उसे ख़ुद विकसित होने की आवश्यकता है।”


(Juliet Genevive Christopher)

भारत की विविधता पर केन्द्रित भारतीय धर्माध्यक्षों की आम सभा शुरु

In Church on February 2, 2018 at 1:45 pm

नई दिल्ली, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018 (ऊका समाचर): बैंगलोर में, 2 फरवरी से 09 फरवरी तक जारी रहनेवाली, भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 33 वीं द्विवार्षिक आम सभा शुक्रवार को शुरु हुई।

बैंगलोर स्थित स्वास्थ्य विज्ञान सम्बन्धी सेन्ट जॉन्स अकादमी में आयोजित सम्मेलन का उद्देश्य भारत की विविधता में एकता को दृष्टिगत रखते हुए काथलिक कलीसिया के मिशन को परिभाषित करना है। सम्मेलन की अध्यक्षता म्यानमार के कार्डिनल चार्ल्स बो कर रहे हैं तथा सम्मेलन का उदघाटन भारत में परमधर्मपीठ के प्रेरितिक राजदूत जियामबतिस्ता दिक्वात्रो ख्रीस्तयाग अर्पण से करेंगे। बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष बर्नार्ड मोरस धर्माध्यक्षों का स्वागत करेंगे।

भारतीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल बासेलियुस क्लेमिस तथा महासचिव महाधर्माध्यक्ष थेयोदोर मैसकारेनुस सम्मेलन के सत्रों की अध्यक्षता करेंगे तथा विगत दो वर्षों की रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

भारत के 174 काथलिक धर्मप्रान्तों में कार्यरत 204 काथलिक धर्माध्यक्षों तथा 64 सेवानिवृत्त धर्माध्यक्षों के साथ भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन विश्व का चौथा सर्वाधिक विशाल सम्मेलन है।

02 से 09 फरवरी तक जारी सम्मेलन का विषय सन्त मत्ती रचित सुसमाचार के वाक्य: “समय के अन्त तक भी मैं सदैव तुम्हारे साथ हूँ” से प्रेरित है।”

महासचिव महाधर्माध्यक्ष मैसकारेनुस ने धर्माध्यक्षीय आम सभा से पूर्व प्रकाशित एक विज्ञप्ति में कहा, “यह सम्मेलन उस समय हो रहा है जब भारत की काथलिक कलीसिया महान चुनौतियों का सामना कर रही है।”

उन्होंने कहा, “भारत के 29 राज्यों में से 19 राज्य भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा संचालित हैं और इस पृष्ठभूमि में उन दलों एवं संगठनों को बल मिला है जो सांस्कृतिक एवं धार्मिक राष्ट्रीयवाद को प्रश्रय दे रहे हैं।”

ख्रीस्तीय नेताओं का आरोप है कि विगत दो वर्षों में हिन्दू अतिवादी संगठनों ने भारत के अल्पसंख्यकों के विरुद्ध अपनी कार्यवाही को सघन कर दिया है।

ग़ौरतलब है कि इस समय  ख्रीस्तीय बहुल मेघालय एवं नागालैण्ड सहित भारत के आठ राज्यों में चुनाव होने वाले हैं तथा 2019 में राष्ट्रीय तौर पर चुनाव होने वाले हैं।

हाल के माहों में भारत में असम्मत पत्रकारों की हत्या तथा धर्म के नाम पर स्कूलों एवं संस्थाओं पर हमले देके गये हैं। महाधर्माध्यक्ष ने कहा, “ये सचमुच में हमारे पारम्परिक धर्मवनिरपेक्ष तथा शांतिपूर्ण समाज के लिये व्याकुल करनेवाले संकेत हैं।”

उन्होंने कहा कि उक्त सम्मेलन में इस बात पर विचार विमर्श किया जायेगा कि काथलिक धर्माध्यक्ष भारत की धर्मनिर्पेक्ष प्रकृति एवं उसके संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु क्या योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा, “भारत के लोगों की विविधता में एकता की स्थापना हेतु काथलिक कलीसिया आटे में ख़मीर का काम कर सकती है।”


(Juliet Genevive Christopher)

मेघालय ख्रीस्तीयों को वोट के बदले धन का लालच देने की राहुल गाँधी ने की निन्दा

In Church on February 2, 2018 at 1:43 pm

नई दिल्ली, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018 (ऊका समाचर): मेघालय में ख्रीस्तीयों को वोट के बदले धन का लालच देने के लिये काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भाजपा समर्थित एनडीए सरकार की की कड़ी निन्दा की।

जैन्तिया पहाड़ी ज़िले में अपनी पार्टी के सात अभ्यर्थियों के समर्थनमें बोलते हुए, राहुल गाँधी ने कहा, “आपने देखा होगा कि भाजपा के पास बहुत पैसा है, इन दिनों उनके नेतृत्व का मानना है कि सब कुछ खरीदा जा सकता है”।

उन्होंने कहा, “मुझे यह सुनकर बड़ा दुःख हुआ कि भाजपा ने हमारे गिरजाघरों को ललचाने के लिये पैसों की पेशकश की है, मेरी समझ से विशाल राशि है।”

मुख्य मंत्री मुकुल संगमा, राज्य में काँग्रेस पार्टी के अध्यक्ष सेलेस्टीन लिंगदोह तथा लोक सभा सदस्य विन्सेन्ट पाला राहुल गाँधी के साथ मेघालय का दौरा कर रहे थे।

07 जनवरी को केंद्रीय पर्यटन मंत्री के.जे. आल्फोन्स ने राज्य में धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को विकसित करने के लिए 70 करोड़ रुपये के पर्यटन पैकेज की घोषणा की थी। हालांकि प्रेस्बिटेरियन चर्च एवं काथलिक कलीसिया और साथ ही मेघालय की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस उदारता पर आशंका व्यक्त की है।

60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा का चुनाव 27 फरवरी को होगा।

काँग्रेस अध्यक्ष गाँधी ने कहा, “मेघालय के लोगों को धन से ख़रीदा नहीं जा सकता। भाजपा कुछेक नेताओं को अपनी ओर कर सकती है किन्तु लोगों को नहीं।”

उन्होंने मेघालय के लोगों से कहा कि काँग्रेस उनकी संस्कृति और उनकी परम्पराओं को कायम और साथ ही बहुलवादी एवं अखण्ड समाज के निर्माण हेतु हर सम्भव प्रयास करेगी।


(Juliet Genevive Christopher)

धर्मों के बीच मैत्री हेतु शिक्षा की भूमिका अहं, कार्डिनल ग्रेशियस

In Church on February 2, 2018 at 1:41 pm

मुम्बई, शुक्रवार, 2 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): एशियाई काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संघ (एफएबीसी) के अध्यक्ष तथा मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष, कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेशियस ने कहा है कि धर्मों के बीच मैत्री एवं धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने में शिक्षा की भूमिका अहं है।

मुम्बई के सेन्ट एन्ड्रूज़ कॉलेज में इस सप्ताह अन्तरधर्म सम्वाद एवं अन्तर-सांस्कृतिक आदान –प्रदान पर आयोजित विचार गोष्ठी में कार्डिनल महोदय ने कहा कि समाजशास्त्रीय और आर्थिक स्तर पर भारत विरोधाभासों से भरा देश है, एक ऐसा देश जहाँ विविधता के बावजूद एकता सम्भव है।”

शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कार्डिनल ग्रेशियस ने कहा, “शिक्षा के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक असहिष्णुता एवं पूर्वाग्रहों के अनावरण  का प्रयास किया जाना चाहिये।” हालांकि, उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, भारत के काथलिक स्कूलों पर हाल में हिन्दू चरमपंथियों ने हमले किये तथा स्कूल के कर्मचारियों एवं अधिकारियों को धमकियाँ दी।”

कार्डिनल ग्रेशियस ने कहा कि इन हमलों एवं धमकियों के बावजूद हमारे शैक्षणिक संस्थानों में हर धर्म के अध्यापकों एवं छात्रों को मैत्री एवं शांति की दिशा में आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा, “प्रत्येक में क्षमा करने की तत्परता होनी चाहिये तथा प्रत्येक को पुनर्मिलन के लिये तैयार रहना चाहिये तब ही हम मैत्री, शांति एवं न्याय पर आधारित समाज के निर्माण की आशा कर सकते हैं।”

कार्डिनल ग्रेशियस ने कहा, “विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच शांति के बिना विश्व में कभी भी शांति स्थापित नहीं हो सकती।”


(Juliet Genevive Christopher)

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