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संत पापा फ्राँसिस ने राष्ट्रीय सूदखोर विरोधी संध के सदस्यों को संबोधित किया

In Church on February 3, 2018 at 4:06 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 3 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 फरवरी वाटिकन के क्लेमेंटीन सभागार में राष्ट्रीय सूदखोर विरोधी संध के करीब 300 सदस्यों से मुलाकात की। संत पापा ने उनसे मिलने की खुशी जाहिर करते हुए संध के अध्यक्ष को उनके कार्यकलापों से अवगत कराने हेतु धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा, “दुर्भाग्य से पूरे विश्व में व्याप्त इस समस्या के बारे आपके साथ मेरे विचारों को साझा करने के लिए प्रसन्नता हो रही है। मैं फादर मासीमो रास्त्रेली की भी याद करता हूँ जो अपनी बीमारी के कारण यहाँ उपस्थित नहीं हो सके। जिन्होंने 1991 में सूदखोर विरोधी फाउंडेशन की स्थापना की थी।

संत पापा ने कहा कि वे सूदखोरी के खिलाफ उनके संघर्षों के बारे में अवगत हैं और उनके कार्यों के बारे जानने के लिए उत्सुकता रखते हैं। उन्होंने सूदखोरी के खिलाफ ठोस कदम उठाया है। इसके खिलाफ देश के नये नियमों से लोगों को वाकिफ कराने और इस संघर्ष से निकलने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में ‘सुनवाई केंद्र’ खोला है।

संत पापा ने कहा,” सूदखोरी एक गंभीर पाप है। यह लोगों के जीवन को समाप्त कर देता है, लोगों की गरिमा को कुचल देता है। यह भ्रष्टाचार का एक वाहन है जो एक देश के सामाजिक और आर्थिक नींव को भी कमजोर करता है। वास्तव में, इतने सारे गरीब लोगों के साथ, कई ऋणी परिवार, गंभीर अपराधों और इतने भ्रष्ट लोगों के साथ, कोई भी देश गंभीर रुप आर्थिक सुधार की योजना नहीं बना सकता है।”

संत पापा ने कहा, “आपके 26 वर्षों की सेवा में आपने 25 हजार से अधिक परिवारों को ऋण की पकड़ से और सूदखोरी की जोखिम से बचा लिया है। उनका घर और छोटी कंपनी बचाने में मदद की, जिसे उनसे छीन लिया गया था। आपने उनकी गरिमा फिर से प्राप्त करने में उनकी मदद की और इस तरह के कार्य करने हेतु हम आपके प्रति आभारी हैं।

संत पापा ने कहा कि व्यक्तियों और संस्थानों में वैधता और ईमानदारी के आधार पर मानसिकता का विकास करना आवश्यक है। जरूरतमंदों के लिए स्वयंसेवकों की उपस्थिति बहुत जरुरी है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी अपमानित स्थिति से उपर उठने के लिए कोई उनकी सुने और उन्हें सलाह दें।

उन्होंने कहा, “धन और भ्रष्टाचार का सामना करके, आप पीड़ितों को आशा और शक्ति प्रदान करते हैं, ताकि वे विश्वास के साथ और जरूरत में खुद उन परिस्थितियों का सामना सकें।”

अंत में,संत पापा फ्राँसिस ने “एक नई आर्थिक मानवतावाद के लिए अपील की, जो बहिष्कार और अनुचित अर्थव्यवस्था का अंत करता है जो”कचरे की संस्कृति को समाप्त करता है। संत पापा ने उन्हें अपने कार्यों को जारी रखने हेतु शुभकामनायें दी।


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा द्वारा अलेस्सानो (लेच्चे) और मोलफेत्ता (बारी) का प्रेरितिक दौरा

In Church on February 3, 2018 at 4:03 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 3 फरवरी 2018 (रेई) : वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक ग्रेग बर्क ने शुक्रवार 2 फरवरी को अपने वक्तव्य में कहा कि संत पापा फ्राँसिस शुक्रवार 20 अप्रैल को सांता मारिया दी लेयूका धर्मप्रात के अलेस्सानो (लेच्चे) और मोन्सिन्योर तोनिनो बेल्लो की मृत्यु की 25वीं वर्षगांठ पर मोलफेत्ता रुवो-गियोविन्जा-टेरलीज़ी धर्मप्रांत के मोलफेत्ता (बारी) का दौरा करेंगे।

संत पापा 10 मई 2018 को ग्रोसेत्तो धर्मप्रांत के नोमाडेलफिया का प्रेरितिक दौरा करेंगे। वहां वे डॉन जेंनो साल्तिनी द्वारा स्थापित समुदाय से मुलाकात करेंगे। साथ ही संत पापा लोप्पीयानो (फ्लोरेंस) में फ़ोकोलारी अंतर्राष्ट्रीय आंदोलन के गढ़ का दौरा करेंगे।

संत पापा के प्रेरितिक दौरा का कार्यक्रम इस प्रकार हैः

शुक्रवार – 20 अप्रैल 2018- अलेस्सानो

संत पापा प्रातः 7 बजे वाटिकन से चंपीनो हवाईअड्डा के लिए रवाना होंगे। चंपीनो हवाई अड्डे से 7,30 बजे उड़ान भरेंगे। 8,20 बजे गलातीना के सैनिक हवाईअड्डे पर उतरेंगे। वहाँ से संत पापा हेलीकॉप्टर द्वारा 10 मिनट में अलेस्सानो के कब्रिस्थान पर उतरेंगे।

वहाँ संत पापा का स्वागत उजेन्तो के धर्माध्यक्ष वितो अनजुली तथा अलेसानो के मेयर फ्राँसिस्का तोरसेल्लो करेंगे। संत पापा धर्माध्यक्ष तोनिनो बेल्लो की कब्र के सामने कुछ देर मौन प्रार्थना करेंगे और धर्माध्यक्ष के परिजनों से मुलाकात करेंगे। कब्रस्थान के प्रांगण में ही विश्वासियों से मुलाकात करेंगे। धर्माध्यक्ष वितो अनजुली के स्वागत भाषण के बाद संत पापा अपना संदेश देंगे।

9,30 बजे संत पापा अलेस्सानो से बिदा देंगे और 10.15 बजे मोलफेत्ता महागिरजाघर के पास पोर्टो क्षेत्र में हेलीकॉप्टर उतरेगी। संत पापा का स्वागत मोलफेत्ता के धर्माध्यक्ष देमनिक कोरनाखिया और मोलफेत्ता के मेयर तोमासो मिनेरविनी करेंगे।

संत पापा 10.30 बजे पोर्तो दी मोलफेत्ता में पवित्र युखारिस्ट समारोह का अनुष्ठान करेंगे और 12 बजे पोर्तो दी मोलफेत्ता से प्रस्थान करेंगे और 13.30 बजे  वाटिकन के हेलिपैड में उतरेंगे।

बृहस्तपतिवार 10 मई 2018 को नोमाडेलफिया का दौरा

प्रातः 7.30 बजे संत पापा वाटिकन के हेलीपैड से उड़ान भरेंगे और 8 बजकर 5 मिनट पर संत पापा नोमाडेलफिया के खेल मैदान कैंम्पस में उतरेंगे।

संत पापा का स्वागत ग्रोसेत्तो के धर्माध्यक्ष रोडोल्फो चेतोलोनी, डोन फेरनींन्दो नेरी और समुदाय के अध्यक्ष फ्राँचेस्को मत्तेराज्जो करेंगे। संत पापा वहाँ कब्रिस्थान में डॉन जेलो साल्तिनी की कब्र के सामने कुछ देर मौन प्रार्थना करेंगे और उनके परिजनों से मुलाकात करेंगे तथा गिरजाघर में डॉन जेलो साल्तिनी द्वारा स्थापित समुदाय के कुछ सदस्यों से मुलाकात करेंगे। संत पापा युवाओ से मुलाकात कर उन्हें अपना संदेश देंगे।

9.30 बजे संत पापा नोमाडेलफिया के खेल मैदान कैंम्पस से उड़ान भरेंगे और 10 बजे लोप्पियानो खेल मैदान कैंम्पस में उतरेंगे। संत पापा का स्वागत फियेसोले के धर्माध्यक्ष मारियो मेनिनी और फोकोलारी आंदोलन के अध्यक्ष मरिया वोचे करेंगे।

10.15 बजे मरियम ईश्वर की माता तीर्थालय में कुछ देर प्रार्थना के लिए रुकेंगे। 10.30 बजे संत पापा तीर्थालय के अहाते में फोकोलारी समुदायके कुछ प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। अध्यक्ष मरिया वोचे के स्वागत भाषण के बाद संत पापा अपना संदेश देंगे।

11.45 बजे लोप्पियानो खेल मैदान कैंम्पस से उड़ान भरेंगे और 12.35 बजे वाटिकन के हेलीपैड में उतरेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

समर्पित जीवन येसु से मुलाकात द्वारा नवीकृत होता है, संत पापा

In Church on February 3, 2018 at 4:01 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 2 फरवरी को येसु के मंदिर में समर्पण महापर्व एवं विश्व समर्पित जीवन दिवस पर वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर में धर्मसमाजियों के साथ समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उन्होंने प्रवचन में कहा, “ख्रीस्त जयन्ती के चालीस दिनों बाद हम प्रभु का मंदिर में प्रवेश एवं अपने लोगों से मुलाकात का त्योहार मनाते हैं। पूर्वी ख्रीस्तीय इसे “मुलाकात का त्योहार” कहते हैं। यह ईश्वर का जिन्होंने एक बालक का रूप धारण किया एवं विश्व में नयापन लाया, उनका इंतजार करने वाले लोगों के साथ मुलाकात है, जिनका प्रतिनिधित्व मंदिर में वृद्ध महिला एवं पुरुष ने किया था।

मंदिर में, दो दम्पतियों के साथ उनकी मुलाकात हुई मरियम एवं योसेफ तथा वृद्ध सिमेयोन एवं अन्ना। मंदिर में वृद्धों ने युवा का स्वागत किया जबकि मरियम एवं योसेफ ने अपने लोगों के मूल को पाया। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि ईश्वर की प्रतिज्ञा व्यक्तिगत रूप से केवल एक बार पूरी नहीं होती किन्तु समुदाय में तथा सम्पूर्ण इतिहास के लिए पूरी होती है। वहाँ मरियम एवं जोसेफ ने अपने विश्वास के मूल को पाया क्योंकि विश्वास कोई ऐसी चीज नहीं है जिसको किताब से सीखा जा सकता है बल्कि यह ईश्वर के साथ जीने की एक कला है जिसको उन लोगों के द्वारा सीखा जा सकता है जो पहले ही उसे पार कर चुके हैं। दो युवाओं ने दो वृद्धों के साथ मुलाकात में अपने मूल को पाया एवं दो वृद्धों से येसु को ग्रहण करते हुए अपने जीवन के अर्थ को प्राप्त किया।

इस घटना में नबी योएल की भविष्यवाणी पूर्ण होती है, “तुम्हारे बड़े बूढ़े स्वप्न देखेंगे और तुम्हारे नवयुवकों कोदिव्य दर्शन होंगे। (3:1)

संत पापा ने कहा कि इस मुलाकात में युवा अपने मिशन एवं वयोवृद्ध अपने स्वप्न को देखते हैं क्योंकि मुलाकात के केंद्र में येसु हैं।

संत पापा ने धर्मसमाजियों को अपने व्यक्तिगत जीवन पर गौर करने का निमंत्रण देते हुए कहा, “आइये हम अपने जीवन पर गौर करें। सब कुछ की शुरूआत येसु से मुलाकात द्वारा हुई। समर्पित जीवन की हमारी यात्रा मुलाकात द्वारा आरम्भ हुई जो एक बुलाहट है। हमें इसे मन में रखना चाहिए और यदि हम उस गौर करेंगे तो पायेंगे कि उस मुलाकात में सिर्फ मैं और येसु नहीं थे। वहाँ ईश्वर की प्रजा अर्थात् कलीसिया थी जिसमें युवा एवं वयोवृद्ध दोनों थे जैसा कि आज के सुसमाचार में हम पाते हैं। यह हृदयस्पर्शी बात है कि युवा मरियम और जोसेफ ने निष्ठा पूर्वक संहिता का पालन किया जिसके बारे सुसमाचार में हम चार बार सुनते हैं जबकि वृद्ध सिमेयोन एवं अन्ना के बारे सुसमाचार नहीं कहता है कि वे दौड़ते हुए आकर भविष्यवाणी करने लगे क्योंकि आमतौर पर, युवा उत्साह के साथ भविष्य के बारे बोलते और वृद्ध भूत की रक्षा करते हैं।

उसी तरह धर्मसमाजी जीवन में भी होता है। हमें याद करना चाहिए कि हम दूसरों के बिना प्रभु के साथ हमारी मुलाकात को नवीकृत नहीं कर सकते हैं। हम दूसरों को पीछे नहीं छोड़ सकते और न ही पीढ़ियों के ऊपर जा सकते हैं किन्तु प्रभु को केंद्र में रखते हुए प्रतिदिन एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ते हैं क्योंकि यदि युवा नये द्वार खोलने के लिए बुलाये जाते हैं तो कुँजी वृद्धों के पास होती है। संत पापा ने कहा कि एक संस्था तभी जवान बना रहता है जब वह अपने वृद्धों को सुनकर अपने  मूल की ओर लौटता है। वृद्ध एवं युवा के बीच मुलाकात के बिना कोई भविष्य नहीं है ठीक उसी तरह जिस तरह जड़ के बिना पौधा का विकास नहीं हो सकता और न ही कली के बिना कोई फूल।

आज कट्टरपन ने भय के कारण एक दूसरे से मुलाकात के कई द्वारों को बंद कर दिया है। केवल दुकान एवं एंटरनेट ही हरदम खुला रहता है जो धर्मसमाजी जीवन के अनुकूल नहीं है। ईश्वर द्वारा प्रदान किये गये भाई-बहन मेरे इतिहास के हिस्से हैं, एक ऐसा वरदान जिसको पोषित किया जाना चाहिए। हम अपने भाई-बहनों की आँखों में नजर डालने से ज्यादा मोबाईल फोन पर नजर न डालें अथवा प्रभु से ज्यादा सोफ्टवेर पर समय न दें क्योंकि जब कभी हम अपनी योजनाओं को केंद्र में रखते हैं, समर्पित जीवन आकर्षक होने से रुक जाता है। जी हाँ, यह दूसरों के बारे नहीं बोलता क्योंकि अपने आधार, अपने मूल को ही भूला देता है।

संत पापा ने कहा कि समर्पित जीवन का जन्म एवं पुनर्जन्म गरीब, पवित्र एवं आज्ञाकारी येसु से मुलाकात के द्वारा होता है। हम दो रास्तों पर चलते हैं एक ओर ईश्वर के प्रेमी पहल जिसमें सब कुछ की शुरूआत होती है, दूसरी ओर, हमारा प्रत्युत्तर जो कि सचमुच सुखद होता है यदि इसमें कोई शर्त न हो और हम येसु को उनकी गरीबी, शुद्धता एवं आज्ञापालन में उनका अनुसरण करते हैं। इस संसार का जीवन स्वार्थी चाहतों एवं आनन्द के पीछे भागता है जबकि समर्पित जीवन हर तरह के भावनात्मक बंधन से पूरी तरह मुक्त करता है ताकि ईश्वर एवं लोगों को प्यार कर सकें।

सांसारिक जीवन का उद्देश्य उन सारी चीजों को पूरा करना है जिसको हम करना चाहते हैं जबकि समर्पित जीवन विनम्र आज्ञापालन का चुनाव महान स्वतंत्रता के रूप में करता है। सांसारिक जीवन जल्द ही हमारे हाथ एवं हृदय को खाली छोड़ देता जबकि येसु में जीवन हमें अंत तक शांति से भरता रहता है जैसा कि सुसमाचार में हम देखते हैं कि सिमेयोन एवं अन्ना ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में खुशी से प्रभु को अपने हाथों लिया तथा उनके आनन्द से परिपूर्ण हो गये।

संत पापा ने कहा कि येसु के साथ मुलाकात हमारे रूटीन जीवन के लकवा का इलाज है क्योंकि यह हमें प्रतिदिन ईश्वर की कृपा के लिए खोल देता है। हमारे आध्यात्मिक जीवन को प्रज्वलित रखने का राज है, येसु के साथ मुलाकात करने की तत्परता अन्यथा हम जीवन की कठोरता में पड़कर, असंतुष्टी, कड़वाहट और निराशा की भावना से भर जायेंगे।

यदि हम अपने जीवन की हर घटना में येसु एवं अपने भाई-बहनों से मुलाकात करते हैं तो हमारा हृदय न भूत और न ही भविष्य की ओर जाएगा, किन्तु “ईश्वर के आज” में सभी के साथ शांति से पूर्ण होगा।

संत पापा ने येसु की खोज करने कब्र की ओर जाती महिलाओं का उदाहरण देते हुए धर्मसमाजियों को धारा के विपरीत चलने हेतु प्रोत्साहन दिया। उन्होंने कहा, “येसु के साथ एक दूसरी मुलाकात हुई जो समर्पित लोगों को प्रेरित कर सकती है। कब्र के सामने खड़ी महिलाएँ। वे येसु के मृत शरीर को देखने गयीं थीं जिनकी यात्रा व्यर्थ प्रतीत हुई। आप भी धारा के विपरीत यात्रा कर रहे हैं। संसार का जीवन आसानी से निर्धनता, शुद्धता एवं आज्ञापालन का बहिष्कार करता किन्तु आप उन महिलाओं की तरह विशाल पत्थर को कैसे हटायें, की चिंता किये बिना आगे बढ़ते रहें और उन्हीं की तरह आप भी पुनर्जीवित प्रभु से मुलाकात करने में आगे होंगे। उनसे संयुक्त होकर आप अपने भाई-बहनों को अपने प्रसन्नचित नज़रों से उसे घोषित करें।”

संत पापा ने धर्मसमाजी भाई बहनों को कलीसिया की चिरस्थायी प्रातः बेला की संज्ञा देते हुए उन से आग्रह किया कि वे येसु के साथ इस मुलाकात द्वारा अपने समर्पण को नवीकृत करें ताकि उनके साथ चल सकें और वे उनकी आँखों को दृष्टि एवं पैरों को बल प्रदान करेगा।


(Usha Tirkey)

वाटिकन में कार्यरत धर्मसमाजियों को संत पापा की ओर से शुभकामनाएं

In Church on February 3, 2018 at 4:00 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 2 फरवरी समर्पित जीवन हेतु विश्व दिवस के अवसर पर वाटिकन में सेवारत धर्मसमाजियों को फूल अर्पित कर शुभकामनाएं दी।

इस बात की जानकारी महाधर्माध्यक्ष कोनराड क्राजेवस्की ने वाटिकन के पत्रकारों की दी। उन्होंने उस फूल को अपने कार्यालय के प्रार्थनालय में रखा जहाँ उन्होंने 2 फरवरी को अपने अन्य सहकर्मियों के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

हल्के पीले रंग का यह फूल ठंड के मौसम में खिलने वाला पहला फूल है जो जीवन एवं यौवन का प्रतीक है। महाधर्माध्यक्ष ने ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन में कहा कि यह फूल मुक्त रूप से सुन्दरता बिखेरता एवं इसका मुख ऊपर की ओर होता है जो प्रभु की ओर निहारने हेतु प्रेरित करता है। उन्होंने सभी धर्मसमाजियों को निमंत्रण दिया कि वे ईश्वर को अपना जीवन, परिवार, आनन्द एवं दुःख अर्पित करें जैसा कि मरियम और जोसेफ ने किया, जब वे सबसे बहुमूल्य खजाने अपने पुत्र येसु को मंदिर में चढ़ाया।

महाधर्माध्यक्ष ने प्रवचन में कहा, “जब हम अपने आप को प्रभु के लिए समर्पित करते हैं तो सब कुछ बदल जाता है क्योंकि तब प्रभु हमारे जीवन की चिंता करते हैं।”


(Usha Tirkey)

विश्वास में जीने का अर्थ है ईश्वर के साथ रहना, संत पापा फ्राँसिस

In Church on February 3, 2018 at 3:58 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार 3 फरवरी 2018 (रेई) :  काथलिक कलीसिया ने शुक्रवार 2 फरवरी को बालक येसु के मंदिर में समर्पण दिवस पर विश्व के सभी धर्मसंघियों धर्मसमाजियों और समर्पित लोगों का 22वाँ विश्व समर्पित जीवन दिवस मनाया जिसकी स्थापना संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने सन् 1997 में की थी। इस अवसर पर संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर पूरे विश्व को ख्रीस्त की ज्योति में न्याय और शांति के मार्ग में चलने की प्रेरणा दी।

संद्श में उन्होंने लिखा, “हर कोई सत्य के प्रकाश मसीह के पास आये जिससे कि दुनिया न्याय और शांति के पथ पर आगे बढ़े।”

संत पापा ने शनिवार 3 फरवरी के ट्वीट में लिखा,”विश्वास में जीवन व्यतीत करने का अर्थ है ईश्वर के साथ रहना अर्थात जिस स्थान में वह जीता है वहीं ईश्वर की खोज में लगे रहना।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने फादर कार्रोन से मुलाकात की

In Church on February 3, 2018 at 3:57 pm


वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 फरवरी को समन्वय एवं मुक्ति की बंधुता के अध्यक्ष फादर जुलियन कार्रोन से मुलाकात की।

समन्वय एवं मुक्ति की बंधुता की स्थापना फादर लुइजी जुसानी द्वारा द्वितीय वाटिकन महासभा के उपरांत इटली एवं विश्व में सेवा के लिए हुई थी।

फादर जुलियन कार्रोन ने संत पापा से मुलाकात के उपरांत वाटिकन न्यूज़ को बतलाया था कि वे विशेष ध्यान युवाओं पर दे रहे हैं।

उन्होंने बतलाया कि संत पापा ने मुलाकात में उन्होंने उनके विभिन्न कार्यों पर बातचीत करते हुए युवाओं के लिए सिनॉड पर प्रकाश डाला तथा कहा कि यह विषय उनके लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है क्योंकि संत पापा भी इस पर विशेष ध्यान देते हैं। युवाओं को सुनने तथा उनके साथ बातचीत करने के लिए सचमुच समय देना आवश्यक है।

समन्वय एवं मुक्ति की बंधुता के लिए क्या संत पापा ने कुछ सिफारिश की? इसके उत्तर में फादर ने कहा कि नहीं संत पापा ने कोई सिफारिश नहीं की बल्कि उन्होंने उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैंने प्रवासियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उठाये गये प्रयासों, बच्चों का साथ देने तथा युवाओं की शिक्षा में हमारी सहभागिता के बारे उन्हें बतलाया। संत पापा ने इन कार्यों में हमारे समर्पण को जारी रखने का प्रोत्साहन दिया क्योंकि वे इसे बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, खासकर, ऐसी परिस्थिति में जब युवा “लिक्वीड सोसाईटी” में जी रहे हैं, ताकि वे अपनी यात्रा में निर्देश पा सकें।

संत पापा की शिक्षा में समन्वय एवं मुक्ति की बंधुता का क्या योगदान है?

फादर जुलियन ने कहा, “मेरे सबसे बड़ा योगदान है समय के बदलाव को पहचानना, जो हम सभी को चुनौती देता है कि हम उन ठोस आधारों को देखें जिसपर आज कलीसिया दुनिया के सामने खड़ी है तथा चुनौतियाँ जो आज हमें प्रभावित करती हैं। ये सभी बाहर जाने और दूसरों के संबंध स्थापित करने तथा उस कोमलता एवं दया को प्रदान करने हेतु निरंतर प्रेरणा देते है जिसको ख्रीस्त ने उन लोगों को प्रदान किया जिन्हें इसकी आवश्यकता थी। हम महसूस करते हैं कि यह बात हमारे लिए भी महत्वपूर्ण है।”


(Usha Tirkey)

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