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संत पापा ने तुर्की के राष्ट्रपति से मुलाकात की

In Church on February 5, 2018 at 4:54 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 5 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 5 फरवरी को वाटिकन के प्रेरितिक भवन में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्डोगान से मुलाकात की। 59 वर्षों में यह पहला अवसर है जब तुर्की के राष्ट्रपति ने वाटिकन का दौरा किया है।

वाटिकन प्रेस ऑफिस से प्राप्त बयान में कहा गया कि उनकी बातचीत “सौहार्दपूर्ण” थी और दोनों नेताओं ने दो राज्यों के द्विपक्षीय संबंधों के बारे में बातें की।

संत पापा और राष्ट्रपति एर्डोगान ने “देश की स्थिति, काथलिक समुदाय की स्थिति, कई शरणार्थियों की मेजबानी में किये गये प्रयासों और इस से जुड़े चुनौतियों के बारे में बात की।”

उन्होंने मध्य पूर्व की स्थिति पर भी चर्चा की, “यरूशलेम की स्थिति” पर विशेष ध्यान दिया।

संत पापा फ्राँसिस और तुर्की के राष्ट्रपति ने मानव अधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून के संबंध में बातचीत की और इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

उनकी बैठक के अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने राष्ट्रपति एर्दोगान को एक कांस्य पदक दिया जो कि एक अजगर के विरोध पर काबू पाने के दौरान उत्तरी और दक्षिणी गोलार्धों को गले लगाते हुए एक स्वर्गदूत को दर्शाता है।

राष्ट्रपति एर्दोगान बाद में राज्य के सचिव कार्डिनल सचिव पियेत्रो परोलिन और विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पॉल रिचर्ड गलाघर से भी मुलाकात की।


(Margaret Sumita Minj)

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मौन रुप से आराधना करना सिखायें, संत पापा

In Church on February 5, 2018 at 4:52 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 5 फरवरी 2018 (रेई) : “सुनिये और माफ कीजिए” इतना ही कहते हुए, आइए हम आराधना में कुछ समय बितायें।” यह बात संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 5 फरवरी को अपने प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र मिस्सा के दौरान कही।

संत पापा ने राजाओं के ग्रंथ से लिये गये आज के पहले पाठ पर चिंतन किया जहाँ राजा सुलेमान ने अपने लोगों को प्रभु के विधान को सियोन से ले आने के लिए येरुसालेम मंदिर बुलाया था। संत पापा ने कहा,”हमें जीवन यात्रा में अपने दिल में ईश्वर के विधान और बुलावे की याद करते हुए एवं आराधना की प्रार्थना करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।”

संत पापा ने कहा कि समतल मार्ग के समान ढलान मार्ग पर यात्रा करना आसान नहीं है। विधान की मंजूषा को उपर लाने के लिए लोगों को और ईश्वर के विधान दो पत्थरों की पाटियों को याद करना पड़ेगा जिसमें लिखा था मैं तुमसे प्रेम करता हूँ तुम मुझसे प्रेम करते हो। पहला आदेश ईश्वर को प्यार करना और दूसरा अपने पड़ोसी को प्यार करना। इस्राएली लोगों ने संदूक को पवित्र स्थान में ले आये और जैसे ही पुरोहित बाहर निकले, बादल और यहोवा का तेज मंदिर में भर गया। लोग चढ़ाई पर यात्रा करते समय मौन रहकर आराधना करते हुए मंदिर में प्रवेश किये थे।

संत पापा ने कहा कि अक्सर हम लोगों को आराधना करना नहीं सिखाते हैं। हम लोगों को गीत गाते हुए और प्रार्थना करते हुए आराधना करना सिखाते हैं। ईश्वर की मौन आराधना हमें ईश्वर की महानता का अनुभव कराता है। संत पापा ने पल्ली पुरोहितों से आग्रह किया कि वे अपने लोगों को मौन रुप से आराधना करना सिखायों। ईश्वर की महनता को प्रकट करने के लिए अक्सर हमारे शब्द कम पड़ जाते हैं। उनकी आराधना हेतु उपयुक्त शब्द नहीं मिलते हैं।

संत पापा ने आने वाले कल के पाठ का जिक्र करते हुए कहा कि राजा सुलेमान प्रभु से सिर्फ दो शब्द ही कह पाते हैं “सुनिये और माफ कीजिए।” संत पापा ने उपस्थित समुदाय को ईश्वर की मौन रुप से आराधना करने हेतु आमंत्रित करते हुए कहा, “आइये हम भी कुछ देर मौन रहकर प्रभु की आराधना में समय बितायें।”


(Margaret Sumita Minj)

येसु को पाने के लिए हमें अपने स्थान से उठना और बाहर जाना होगा, संत पापा

In Church on February 5, 2018 at 4:51 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 5 फरवरी 2018 (रेई) : ईश्वर परम दयालु हैं। नम्रतापूर्वक और सच्चे दिल से ढूँढ़ने वालों को वे कभी हतास नहीं करते। संत पापा ने ट्वीट प्रेषित कर ईश्वर से मिलने के लिए खुद को जानने और अपने आप से बाहर निकलने की प्रेरणा दी।

उन्होंने सोमवार 5 फरवरी के संदेश में लिखा, “जो लोग अपने दुःखों से अवगत हैं और अपनी आंखों को नम्रता से झुकाते हैं, वे दयालु ईश्वर की निगाहों को महसूस करते हैं।”

संत पापा ने 4 फरवरी के संदेश में लिखा, “येसु चाहते हैं कि वे उन लोगों से मिलें जो उन्हें ढूँढ़ते हैं पर येसु को पाने के लिए हमें अपने स्थान से उठना और अपने आप से बाहर जाना होगा।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने डीसी कोंगो और दक्षिण सूडान में शांति हेतु प्रार्थना की अपील की

In Church on February 5, 2018 at 4:49 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 5 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सभी लोगो को लोकतांत्रिक गणराज्य कोंगो और दक्षिण सूडान में शांति और युद्धग्रस्त लोगों के लिए के विशेष दिन में प्रार्थना और उपवास में शामिल होने की अपील की।

संत पापा फ्राँसिस ने यह अपील रविवार 4 फरवरी को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत की। संत पापा ने कहा, “दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष के दुखद दीर्घ स्थितियों का सामना कर रहे लोगों के लिए, मैं सभी विश्वासियों को एक विशेष दिन चालिसा के पहले सप्ताह के शुक्रवार 23 फरवरी को शांति के लिए प्रार्थना और उपवास में भाग लेने हेतु आमंत्रित करता हूँ।”

उन्होंने कहा,”हमारी प्रार्थना विशेष रूप से लोकतांत्रिक गणराज्य कोंगो और दक्षिण सूडान में हिंसा से पीड़ित लोगों के लिए अर्पित की जाएगी और इसी तरह के अन्य अवसरों पर “मैं गैर-काथलिक एवं गैर-ख्रीस्तीय भाइयों और बहनों को भी इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूं वे जैसा भी उचित समझें अपने तरीके से इसमें शामिल होवें।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा की विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क अब ‘नवीनीकरण’ की प्रक्रिया में है

In Church on February 5, 2018 at 4:48 pm


वाटिकन रेडियो, सोमवार 5 फरवरी 2018 (वीआर) : फादर जगदीश परमार येसु समाजी ने संत पापा के विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क (पीडब्लूपीएन) और यूखारिस्तीय युवा आंदोलन (ईवायएम) के बारे में बताया।

संत पापा के विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क (पीडब्लूपीएन) और यूखारिस्टिक युवा आंदोलन (ईवायएम) के महादेशीय संयोजकों का एक सम्मेलन 23 से 30 जनवरी तक जेसुइट कुरिया, रोम में आयोजित किया गया था। भारत में येसु समाजी मिशन के दार्जिलिंग प्रांत से आये येसु समाजी फादर जगदीश परमार जो राष्ट्रीय निदेशक और दक्षिण एशियाई समन्वयक हैं, ने एसोसिएशन के बारे में वेटिकन रेडियो संवाददाता सिस्टर कार्मेल आन से बातें की।

“सन् 1844 में फ़्रांस में मिशन के लिए काम करने हेतु युवा सेमिनारियों की उत्सुकता प्रेरिताई प्रार्थना की शुरुआत हुई थी, बाद में 1896 में संत पापा लियो तेरहवीं ने इसे स्वयं से जोड़ा लेकिन उसे येसु समाजियों को सौंपा।”

तब से यह संत पापा की विश्वव्यापी प्रार्थना संध बन गई है। फिर 1929 से संत पापा ने मासिक प्रार्थना में दो निवेदन प्रस्तावित किया, विशेष रूप से एक कलीसिया के मिशनरी कार्य से संबंधित निवेदन प्रार्थना थी। जनवरी 2017 से संत पापा फ्राँसिस ने इसे फिर से प्रति माह एक निवेदन बनाया जो हर महीने की शुरुआत में अपने वीडियो संदेश के माध्यम से जारी किया जाता है।

फादर जगदीश ने बताया विश्वव्यापी प्रार्थना नेटवर्क (पीडब्लूपीएन) और यूखारिस्टिक युवा आंदोलन (ईवायएम) के महादेशीय संयोजको के सम्मेलन उद्देश्य पवित्र आत्मा के साहचर्य से प्रार्थना और चिंतनकर विश्वव्यापी प्रार्थना में नवीनीकरण लाना था जिससे संत पापा का प्रार्थना निवेदन हर काथलिक और हर काथलिक परिवार के लिए प्रासांगिक बन सके।


(Margaret Sumita Minj)

पीड़ित मानव के लिए येसु के मुक्ति कार्य

In Church on February 5, 2018 at 4:46 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 5 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 4 फरवरी को भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयों एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ कफरनाहूम में येसु के एक दिन के वर्णन को जारी रखता है, विश्राम दिवस, जो यहूदियों का साप्ताहिक त्योहार था। (मार.1:21-39) इस बार सुसमाचार लेखक मारकुस येसु की चंगाई के कार्य एवं लोगों से मुलाकात कर उनके विश्वास को जगाने की क्रिया के बीच संबंध पर प्रकाश डालते हैं। संत पापा ने कहा, “वास्तव में, चंगाई जिसको वे हर प्रकार के रोगियों के लिए करते हैं, प्रभु चाहते हैं कि वे उसके द्वारा विश्वास में बढ़ें।”

कफरनाहूम में येसु के दिन की शुरूआत चार उदाहरणों से होती है। पेत्रुस की सास की चंगाई, रोगी के शरीर पर ख्रीस्त की असाधारण शक्ति को केवल प्रकट नहीं करती बल्कि इस छोटे अंश में मारकुस, चमत्कार की एक सामान्य अर्थ को बतलाने की कोशिश करते हैं कि शरीर की चंगाई का उद्देश्य हृदय की चंगाई है। इस तरह, इस घटना में हर विश्वासी के लिए एक आह्वान है जो बुराई के चंगुल से मुक्त हुए हैं तथा येसु के द्वारा अपनी शक्ति को पुनः प्राप्त किया है। हमें पेत्रुस की सास के उदाहरणों का अनुकरण करना चाहिए जो तुरन्त मेहमानों की सेवा सत्कार में लग गयी।

कफरनाहूम में येसु का एक दिन, एक ऐसे दृश्य से समाप्त होता है जिसमें पूरे शहर के लोगों की भीड़ उस घर के सामने जमा हो गयी थी जहाँ येसु ठहरे हुए थे तथा हर प्रकार के रोगियों को उनके पास ला रहे थे। संत पापा ने कहा, “भीड़ शारीरिक पीड़ा एवं आध्यात्मिक अशांति का चिन्ह है, इस व्यापक परिस्थिति में येसु ने अपना मिशन पूरा किया, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने शब्दों एवं भावों का प्रयोग किया जिसके द्वारा उन्हें चंगाई एवं सांत्वना मिली।

संत पापा ने कहा, “येसु प्रयोगशाला को मुक्ति प्रदान करने नहीं आये, वे लोगों से अलग होकर शिक्षा नहीं देते बल्कि लोगों के बीच रहकर उन्हें शिक्षा देते हैं। हम कल्पना कर सकते हैं कि किस तरह येसु के जीवन का अधिकांश समय लोगों के बीच, सुसमाचार का प्रचार करने के लिए सड़क पर बीता, आध्यात्मिक और शारीरिक घावों को चंगा करने के लिए। मानव जो दुःखों से त्रस्त है, यहाँ भीड़ के रूप में हैं जिसका जिक्र सुसमाचार बारम्बार करता है। यह मानव दुःख, थकान एवं समस्याओं से व्यथित है। इसे येसु के मुक्तिदायी एवं नवीनीकरण के कार्य की शक्ति से संचालित होना है। इस तरह येसु विश्राम दिवस को भीड़ के बीच देर रात तक रहते हुए व्यतीत करते हैं। संत पापा न कहा, “और उसके बाद येसु क्या करते हैं?”

संत पापा ने कहा, “दूसरे दिन वे बहुत सबेरे उठकर घर से निकले और किसी एकान्त स्थान जा कर प्रार्थना करते रहे।” येसु प्रार्थना करते हैं। इस तरह वे अपने आपको तथा अपने मिशन को ईश्वर के साथ जोड़ते हैं। वास्तव में चमत्कार वे चिन्ह हैं जो एक व्यक्ति को निमंत्रण देते हैं कि वह विश्वास का प्रत्युत्तर दें। चिन्ह जो हमेशा शब्दों के साथ चलता, व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करता, इस प्रकार चिन्ह एवं शब्द दोनों एक साथ विश्वास का आह्वान करते हैं तथा ख्रीस्त की कृपा द्वारा दिव्य शक्ति से परिवर्तित होते हैं।

संत पापा ने पाठ के अंतिम अंश पर चिंतन करते हुए कहा, “आज के पाठ का अंतिम भाग दर्शाता है कि येसु स्वर्ग राज्य की घोषणा सड़कों पर ही अधिक करते है। शिष्य उनकी खोज कर रहे थे ताकि उन्हें शहर की ओर वापस ला सकें, वे उनके पास गये जहाँ वे प्रार्थना कर रहे थे तब येसु ने उन्हें क्या उत्तर दिया। उन्होंने कहा, “हम निकट के अन्य गाँवों में चलें ताकि मैं वहाँ भी सुसमाचार सुना सकूँ।” (पद. 38) यह था ईश्वर के पुत्र का रास्ता और उनके शिष्यों का रास्ता भी एवं यह सभी ख्रीस्तीयों का भी रास्ता है। रास्ता जो आनन्दमय सुसमाचार प्रचार का स्थान है, कलीसिया के मिशन का स्थान, जो एक यात्रा पर है आगे बढ़ रही है और कभी स्थिर नहीं रहती।

संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना की कि धन्य कुवाँरी मरियम हमें पवित्र आत्मा की आवाज सुनने हेतु खुला होने में मदद करे जो कलीसिया से आग्रह करती है कि वह लोगों के बीच रहे और सभी लोगों के लिए येसु के चंगाई को लाये, जो शरीर एवं आत्मा के डॉक्टर हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न लोगों की याद करते हुए विश्वासियों को सम्बोधित किया। उन्होंने नव धन्य घोषित तेरेसियो ओलिवेल्ली की याद कर कहा, “कल विजेवानो में युवा तेरेसियो ओलिवेल्ली की धन्य घोषणा हुई जो अपने ख्रीस्तीय विश्वास के लिए सन् 1945 में हेरस्कब्रुक के नजरबंद शिविर में शहीद हो गये थे। उन्होंने कमजोर लोगों के प्रति प्रेम द्वारा ख्रीस्त का साक्ष्य दिया तथा पिछली शताब्दी के शहीदों की लम्बी कतार में शामिल हुए। उनका साहसिक बलिदान आशा एवं भाईचारा का बीज है खासकर, युवाओं के लिए।”

संत पापा ने इटली में जीवन दिवस की याद दिलाते हुए कहा कि इसकी विषयवस्तु है “जीवन का सुसमाचार विश्व के लिए आनन्द।” मैं अपने आपको इटली के धर्माध्यक्षों के संदेश के साथ जोड़ते हुए, विभिन्न कलीसियाई संगठनों की सराहना करता एवं उन्हें प्रोत्साहन देता हूँ जो विभिन्न तरह से जीवन को प्रोत्साहित एवं पोषित कर रहे हैं, विशेषकर, जीवन के लिए आंदोलन। संत पापा ने उपस्थिति आंदोलन के सभी सदस्यों का अभिवाद किया। उन्होंने आंदोलन में सदस्यों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यही मेरी चिंता है कि विश्व में अधिक लोग नहीं हैं जो जीवन के लिए संघर्ष करें जहाँ हर दिन अधिक हथियारों का उत्पादन किया जा रहा है जहाँ जीवन के विरूद्ध अधिक नियम निर्मित किये जा रहे हैं, नष्ट करने की संस्कृति हर दिन बढ़ रही है, उन चीजों को नष्ट करने की जो व्यर्थ लगती, यह सचमुच चिंता का विषय है। संत पापा ने उन सभी लोगों के लिए प्रार्थना का आग्रह किया जो विनाश के ऐसे समय में जीवन की रक्षा के लिए जागरूक हैं।

संत पापा ने मडागास्कर के लोगों के प्रति अपना सामीप्य प्रकट किया जो हाल ही में चक्रवात से बुरी तरह प्रभावित हुए थे एवं उन्होंने विस्थापित होना पड़ा है। प्रभु उन्हें सांत्वना एवं समर्थन प्रदान करे।

इसके बाद संत पापा ने विश्व के विभिन्न हिस्सों में दुःखद परिस्थितियों की ओर विश्वासियों का ध्यान आकृष्ट करते हुए कोंगो एवं दक्षिणी सूडान के लिए एक दिन के प्रार्थना दिवस की घोषणा की तथा सभी गैरकाथलिक एवं गैर-ख्रीस्तीय भाई बहनों को निमंत्रण दिया कि वे एक जुट होकर दुआ करें। उन्होंने कहा कि हमारे स्वर्गीय पिता सदा अपने बच्चों की सुनते हैं जो दुःख और परेशानी में उनकी दुहाई देते हैं। टूटे हृदयों को चंगाई प्रदान करते तथा उनके घांवों पर पट्टी बांधते हैं। संत पापा ने रोम तथा विश्व के सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए कहा, “मैं आप सभी का अभिवादन करता हूँ जो रोम, इटली तथा विभिन्न देशों से तीर्थयात्री के रूप में आये हैं। मैं स्पेन के दलों, पेरिस के विद्यार्थियों, सेसत्री लेवान्ते एमपोली, मिलान एवं पालेर्मो तथा अग्रीजेनतो शहर के प्रतिनिधियों का अभिवादन करता हूँ। उन्होंने आप्रवासियों को स्वागत करने के उनके कार्यों की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। संत पापा ने “फ्रतेरना दोमुस” असोशियेशन के स्वयंसेवकों एवं संयोजकों का भी अभिवादन किया जो रोम में 50 सालों से स्वागत एवं सहयोग हेतु कार्यरत हैं।

अंत में उन्होंने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएं अर्पित की।


(Usha Tirkey)

गरीबी और अन्याय विरुद्ध विश्व युद्ध की जरूरत है: कार्डिनल बो

In Church on February 5, 2018 at 4:44 pm

 बैंगलोर,  सोमवार 5 जनवरी 2018 (मैटर्स इंडिया )  : “गरीबी सबसे बड़ा आतंकवाद और बुराई है जिसके विरुद्ध कलीसिया को लड़ने की आवश्यकता है।” उक्त बात म्यांमार, यांगून के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स बो ने कही।

2 फरवरी को बैंगलोर में संत जॉन मेडिकल कॉलेज की सभागार में शुरू हुए भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन (सीबीसीआई) की 33वीं आम सभा के उद्घाटन सत्र में सभा को संबोधित करते हुए सल्सियन कार्डिनल बो ने कहा कि “गरीबी आधुनिक समय का सबसे बड़ा पाप है।”

कार्डिनल ने कहा,”हमारे लिए युखारिस्त एक बहुत बड़ी चुनौती है।” हम अन्याय की दुनिया पर रोटी तोड़ते हैं, हमें तीसरे और अंतिम युद्ध की आवश्यकता है – गरीबी और अन्याय के खिलाफ एक विश्व युद्ध।”

सीबीसीआई 33वीं आम सभा की विषय वस्तु है ‘भारत की विविधता में एकता को ध्यान में रखते हुए भारतीय कलीसिया के मिशन को परिभाषित करना’। 2 फरवरी को नेपाल और भारत के प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष जामबपतिस्ता दिक्वात्रो ने पवित्र युखारिस्त समारोह के साथ सम्मेलन का उद्धाटन किया।

प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष दिक्वात्रो ने आम सभा का उद्घाटन करते हुए, हृदय खोलने और विस्तृत दृष्टिकोण का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “एक बड़ा हृदय अन्य लोगों के जीवन में उलझा हुआ नहीं रहता है, यह निंदा नहीं करता है, लेकिन माफ करता और भूल जाता है।”

महाधर्माध्यक्ष दिक्वात्रो ने कहा, “यह सच है कि विविधता बहुत मूल्यवान है, बहुत सुंदर है। लेकिन, वही पवित्र आत्मा एकता को स्थापित करता है और इस तरह कलीसिया में भी विविधता में एकता है।”

कार्डिनल बो के अनुसार, जब हमारे चारों ओर चुनौतियां होती हैं, तो एकता एक सुख का साधन नहीं बल्कि एक आवश्यकता बन जाती है

यहुदियों के मनपरिवत्तन के साथ शुरू हुई कलीसिया को कई संस्कृतियों का सामना करना पड़ा। पेत्रुस और पौलुस के समय भी एकता एक चुनौती थी। उन्होंने कहा कि भारतीय कलीसिया के इतिहास में दो असाधारण महिलाएँ संत मदर तेरेसा और धन्य सिस्टर रानी मारिया हैं उन्होंने कलीसिया को दया का अर्थ सिखाया।

दीप प्रज्वलन से उद्घाटन सत्र शुरु हुआ। सीबीसीआई के अध्यक्ष कार्डिनल बासेलिओस क्लेमीस ने कहा कि भारत में काथलिक कलीसिया देश में “खोए हुओं और कमजोरों” की सेवा करने के लिए सबसे आगे रहेगा।

बैंगलोर के महाधर्माध्यक्ष बर्नार्ड मोरास ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि ख्रीस्तीयों को संकीर्ण और अंतरमुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि असहिष्णुता का सामना कर देश में अपनी पकड़ मजबूत रखनी चाहिए।

सीबीसीआई के महासचिव धर्माध्यक्ष थियोदोर मस्केरनहास ने दो साल की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि निकट भविष्य में भारत में संत पापा फ्राँसिस की यात्रा की संभावना है।

सीबीसीआई के दूसरे उपाध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष फिलिप नेरी फेर्राओ ने भारत के राष्ट्रपति और वाटिकन के विभिन्न परमधर्मपीठीय विभागों के अध्यक्षों के संदेशों को पढ़ा।


(Margaret Sumita Minj)

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