Vatican Radio HIndi

Archive for February 6th, 2018|Daily archive page

संत पापा फ्राँसिस का चालीसा संदेश

In Church on February 6, 2018 at 5:02 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 2018 के चालीसा काल के लिए अपने संदेश को 6 फरवरी को प्रकाशित किया। चालीसा काल चालीस दिनों का एक ऐसा समय है जब ख्रीस्तीय विश्वासी मानव जाति की मुक्ति हेतु येसु ख्रीस्त के दुखभोग, मृत्यु एवं पुनरुत्थान की याद करते तथा अपने पापों एवं कमजोरियों से ऊपर उठने का प्रयास करते हैं। चालीसा काल के अंत में पास्का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष चालीसा काल का शुभारम्भ 14 फरवरी को होगा।

संत पापा ने संदेश में कहा, “फिर एक बार, प्रभु का पास्का निकट आ गया है। पास्का के लिए हमारी तैयारी में, ईश्वर हरेक साल चालीसे के इस काल में, हमारे मन-परिवर्तन के संस्कारीय चिन्ह के रूप में अपनी कृपा प्रदान करते हैं। चालीसा काल हमारा आह्वान करता एवं हमें प्रोत्साहन देता है कि हम प्रभु के पास पूर्ण हृदय एवं जीवन के हर आयामों से लौट आयें।

संत पापा के चालीसा काल के संदेश का आधार है, “अधर्म बढ़ने से लोगों में प्रेम भाव घट जाएगा।” (मती.24:12)

संत पापा ने संदेश में कहा, “ये शब्द अंतिम दिनों के संबंध में ख्रीस्त की शिक्षा में प्रकट होते हैं। उन्होंने इन शब्दों को येरूसालेम के जैतून पहाड़ पर उच्चरित किया था जहाँ से येसु का दुःखभोग शुरू हुआ था। यह शिष्यों के एक सवाल का उत्तर था। येसु ने एक बड़ी व्यथा और विकट परिस्थिति जो विश्वासी समुदाय पर आने वाला था उसकी भविष्यवाणी की थी। “बहुत से झूठे नबी प्रकट होंगे और बहुतों को बहकायेंगे। अधर्म बढ़ने से लोगों में प्रेम भाव घट जाएगा।”

झूठे नबी

संत पापा ने कहा कि झूठे नबी “संपेरा” के समान होते हैं जो मानवीय भावनाओं में हेरफेर करते ताकि व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लें और उन्हें जहाँ चाहें वहां ले जाएँ। ईश्वर के कितने संतान क्षणिक सुख से मंत्रमुग्ध होकर, उन्हें ही सच्ची खुशी समझ बैठते हैं। कितने पुरुष और महिलाएं धन के ख्वाब में जीते, जो उन्हें केवल क्षुद्र लाभ और हितों के गुलाम बना देता है! कितने लोग सोचते हैं कि वे अपने आप में पूर्ण हैं और अकेलेपन में फंसे रहते हैं!

संत पापा ने झूठे नबी की तुलना “माया” (भ्रांन्ति) से की जो दुःख का आसान एवं तत्काल समाधान प्रस्तुत करता है जो थोड़ी देर में ही व्यर्थ सिद्ध हो जाता। कितने युवा नशीली पदार्थों की लत में पड़ जाते, बेईमानी के प्राप्त करने के लिए मतलबी संबंधों में फंस जाते, कितने लोग उन काल्पनिक संबंधों के गिरफ्त में आ जाते हैं जो कुछ ही समय बाद अर्थहीन साबित होती है। ये झूठ बोलने वाले, उन चीजों द्वारा जिनका कोई वास्तविक मूल्य नहीं, उन्हें प्रस्तुत कर, लोगों से उन सारी चीजों को छीन लेते जो मूल्यवान हैं, अर्थात् उनकी प्रतिष्ठा, स्वतंत्रता एवं प्रेम करने की क्षमता को उनसे छीन लेते हैं। वे व्यक्ति के अभिमान और दिखावे पर भरोसा से खुश होते हैं किन्तु अंत में उन्हें मूर्ख बनाकर छोड़ते। मानव हृदय में उलझन उत्पन्न करने के लिए शैतान जो झूठ का पिता है बुराई को अच्छाई के रूप में तथा झूठ को सच के रूप में प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि हम सभी को अपने हृदय को झांककर देखने की आवश्यकता है कि हम झूठे नबियों के झूठ के शिकार न फंसें। हमें अपने अंतःस्थल में प्रवेशकर यह जानने का प्रयास चाहिए कि कौन ऐसी चीज है जो मेरे हृदय में उत्तम एवं स्थायी चिन्ह बनाता है क्योंकि वह चिनह ईश्वर की ओर से आता है और इसमें सचमुच हमारी भलाई है।

एक शिथिल हृदय

संत पापा ने अपने हृदय पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करते हुए कहा, “हम अपने आप से पूछ सकते हैं कि किस तरह मेरी उदारता ठंढी पड़ गयी? वह कौन सा चिन्ह है जिससे पता चले कि हमारा प्रेम शिथिल पड़ रहा है?

उन्होंने कहा, “उदारता को नष्ट करने वाली सबसे बड़ी वस्तु है, धन का लोभ, “जो हर बुराई की जड़ है।” (1 तिम. 6:10) ईश्वर एवं उनकी शांति का त्याग, हमें शीघ्र अकेला दूर ले जाता और हम ईशवचन एवं संस्कारों में सांत्वना खोजने के बदले अपने आप में ही चैन महसूस करते हैं। यह उसे  हिंसा की ओर ले जाता और उन सबको नष्ट कराता जो उसके आत्मकेंद्रण के लिए भय प्रतीत होते हैं: गर्भ में पल रहा बच्चा, वृद्ध, दुर्बल, परदेशी, विस्थापित अथवा अपना पड़ोसी वह सबको अपना दुश्मन समझने लगता है।

उदारता के प्रति इस शिथिलता का, खुद सृष्टि भी एक मौन दर्शक बन जाती है। लापरवाही एवं अपनी रूचि पर ध्यान देने के कारण पृथ्वी उपेक्षा के विष से विषाक्त हो जाती है। आप्रवासियों को निगल कर समुद्र दूषित हो जाती है। आकाश जो ईश्वर की योजना है जो उनकी महिमा गाने के लिए निर्मित है मृत्यु बरसा रही है।

संत पापा ने कहा, “हमारे समुदायों में प्रेम भी ठंढा पड़ सकता है।” उन्होंने अपने प्रेरितिक प्रबोधन एवनजेली गौदियुम में प्रेम के अभाव के चिन्ह को प्रकट करने का प्रयास किया है। स्वार्थ और आध्यात्मिक आलस्य, फलहीन निराशावाद, आत्म-अवशोषण के लिए प्रलोभन, मानसिक संघर्ष और सांसारिक मानसिकता जो हमें केवल देखावे पर ध्यान देने हेतु प्रेरित करते, हमारे प्रेरितिक उत्साह को कम कर देते हैं।

हमें क्या करना चाहिए?

संत पापा ने कहा कि इसके लिए जैसा कि मैंने ऊपर कहा है हमें अपने अंतःस्थल पर दृष्टि डालना और अपने आप को हर दृष्टिकोण से देखना चाहिए। कलीसिया जो हमारी माता है हमें शिक्षा देती है कि हम प्रार्थना, दान एवं उपवास की सच्ची अवधि को अपनाएँ।

प्रार्थना में अधिक समय व्यतीत करने के द्वारा हम अपने हृदय की गहराई में निहित झूठ एवं आत्ममोह को उखाड़ फेंकने में समर्थ हो सकते और उसके बाद उस सांत्वना को प्राप्त करते जिसे ईश्वर हमें प्रदान करते हैं। वे हमारे पिता हैं और चाहते हैं कि हम एक अच्छा जीवन जीयें।

दान देना हमें लालच से मुक्त करता एवं हमारे पड़ोसियों की मदद करने हेतु प्रेरित करता है। जो मेरे पास है वह केवल मेरा नहीं है। किस तरह दान देना हम प्रत्येक के लिए एक सच्ची जीवन शैली बन जाए? किस तरह मैं एक ख्रीस्तीय के रूप में, प्रेरितों का अनुसरण कर सकता हूँ जो अपनी सम्पति आपस में बांटते थे? जब हम दान देते हैं तब हम ईश्वर की कृपा को उनके बच्चों के बीच बांटते हैं। यदि ईश्वर आज मेरे द्वारा किसी को मदद करते हैं तो क्या वे कल मेरी आवश्यकताओं को प्रदान क्यों नहीं करेंगे?  क्योंकि ईश्वर से अधिक उदार कोई भी नहीं हैं।

उपवास हिंसा की ओर हमारे झुकाव को कमजोर करता है, हमें निहत्था बनाता तथा बढ़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर देता है। एक ओर यह हमें बेसहारा और भूख का अनुभव कराता, दूसरी ओर ईश्वर में जीवन की आध्यात्मिक भूख एवं प्यास को जागृत करता है। उपवास हमें उठाता है। यह हमें ईश्वर एवं पड़ोसियों की ओर अधिक ध्यान देने की प्रेरणा देता है। हम में ईश्वर की आज्ञा मानने की इच्छा जागृत करता क्योंकि केवल वे ही हमारी भूख को तृप्त कर सकते हैं।

संत पापा ने काथलिक कलीसिया के साथ-साथ भली इच्छा रखने वाले सभी लोगों को ईश्वर की आवाज सुनने हेतु निमंत्रण दिया।

पास्का की आग

संत पापा ने कलीसिया के सदस्यों से आग्रह किया कि वे चालीसा काल की यात्रा को उत्साह से शुरू करें और दान, प्रार्थना एवं उपवास द्वारा उसे पोषित करें। यदि हमारे हृदय में उदारता की आग बूझती प्रतीत हो रही हो, तो याद रखें कि ईश्वर के हृदय में यह कभी समाप्त नहीं होती। वे हमें लगातार अवसर देते हैं कि हम प्रेम पूर्वक नयी शुरूआत करें।

संत पापा ने प्रार्थना हेतु इस वर्ष भी “प्रभु के लिए 24 घंटे” पहल के लिए प्रोत्साहन दिया, जब ख्रीस्तीय समुदाय मेल-मिलाप संस्कार में भाग लेते हुए, यूखरिस्त संस्कार की आराधना करता है। यह 9–10 मार्च को रखा जाएगा। हर धर्मप्रांत में कम से कम एक गिरजाघर 24 घंटों के लिए खुला रखा जाए।

पास्का जागरण के समय, ख्रीस्त का प्रकाश सभी के मन एवं हृदय के अंधकार को दूर कर दे तथा शक्ति दे कि हम एम्माउस के शिष्यों के अनुभव को पुनः प्राप्त कर सकें। ईशवचन सुनने तथा यूखरिस्त संस्कार में भाग लेने के द्वारा हमारा हृदय विश्वास, आशा एवं प्रेम में उत्साही बना रहे।

संत पापा ने अपना स्नेह एवं प्रार्थना का आश्वासन देते हुए सभी को अपना आशीर्वाद प्रदान किया तथा अपने लिए भी प्रार्थना की मांग की।


(Usha Tirkey)

Advertisements

डिजिटल जगत में नाबालिगों की रक्षा करने हेतु प्रतिबद्धता

In Church on February 6, 2018 at 5:00 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (रेई): संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपातनिधि (यूनिसेफ) के अनुसार प्रत्येक दिन करीब 175,000 से ज्यादा बच्चे पहली बार इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। हर आधा सेकेंड में एक नया बच्चा इंटरनेट से जुड़ रहा है और विश्व में हर 3 इंटरनेट प्रयोग करने वालों में चौथा बच्चा है। इंटरनेट प्रयोग करने वालों में सबसे अधिक संख्या है युवाओं की।

विभिन्न समाचार पत्रों के अनुसार इंटरनेट के प्रयोग ने कई बच्चों की जान तक ले ली है।

रिपोर्ट से स्पष्ट पता चलता है कि डिजिटल दुनिया में बच्चों की रक्षा करना हरेक का कर्तव्य है। सरकारों, परिवारों, स्कूलों, अन्य संस्थाओं और निजी क्षेत्र खासकर, तकनीकी एवं दूरसंचार उद्योगों को बच्चों पर डिजिटल के दुष्प्रभावों को रोकने की बड़ी जिम्मेदारी है।

यूनिसेफ ने सरकारों, नागरिक समाज, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी एवं अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच बच्चों के लिए सहयोग करने की तत्काल अपील की है, विशेषकर, निजी क्षेत्रों से कि वे डिजिटल नीतियों के निर्माण में बच्चों को प्राथमिकता दें।

संत पापा फ्राँसिस ने भी एक ट्वीट प्रेषित कर डिजिटल जगत से बच्चों की रक्षा हेतु प्रतिबद्ध होने का आग्रह किया। उन्होंने संदेश में लिखा, “हम सभी डिजिटल जगत में नाबालिगों की रक्षा करने हेतु प्रतिबद्ध होने के लिए बुलाये गये हैं।”


(Usha Tirkey)

शांति हेतु प्रार्थना एवं उपवास दिवस पर सुझाव

In Church on February 6, 2018 at 4:58 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन प्रेस कार्यालय ने एक विज्ञाप्ति जारी कर कहा है कि अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति ने संत पापा फ्राँसिस द्वारा कोंगो एवं दक्षिणी सूडान में शांति हेतु 23 फरवरी को प्रार्थना एवं उपवास के अह्वान पर जोर देते हुए विभिन्न धार्मिक समुदायों से आग्रह किया है कि वे भी इस अभियान में भाग लें।

याद दिला दें कि रविवार 4 फरवरी को संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना के दौरान कोंगो एवं दक्षिणी सूडान की गंभीर परिस्थिति की याद करते हुए उनमें शांति हेतु 23 फरवरी को विशेष प्रार्थना एवं उपवास दिवस की घोषणा की थी।

अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति ने कहा कि संत पापा ने इस पहल में भाग लेने हेतु अन्य धर्मों के सदस्यों को भी निमंत्रण दिया है कि वे उन्हीं रूपों में, जिन्हें वे सबसे उपयुक्त मानते हैं भाग लें। सम्मेलन इस बात के प्रति सचेत है कि शांति प्राप्ति हेतु विभिन्न धर्मानुयायी अपना बड़ा योगदान दे सकते हैं। उन्होंने उन भाई-बहनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है जो इस आह्वान का स्वागत करते हुए प्रार्थना, उपवास एवं चिंतन का अभ्यास अपनी परम्परा के अनुसार अपने पूजा स्थलों पर करने के लिए तैयार हैं।


(Usha Tirkey)

प्राकृतिक आपदाओं से बचने हेतु करीतास द्वारा प्रशिक्षण

In Church on February 6, 2018 at 4:56 pm

श्रीनगर, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (ऊकान): भारत के काश्मीर में काथलिक उदारता संगठन की भारतीय शाखा ‘कारीतास इंडिया’, स्वयंसेवक को प्रशिक्षण दे रही है ताकि प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों की जान बचायी जा सके।

जम्मू एवं कश्मीर राज्य सरकार तथा कारितास संयुक्त रूप से 10 गांवों में आपदा जोखिम कम करने के लिए परियोजना चला रहे हैं।

कारितस इंडिया के कार्यक्रम समन्वयक अल्ताफ लोन ने कहा कि कश्मीर घाटी में बाढ़, भूकंप, भूस्खलन और हिमस्खलन के साथ-साथ उच्च वेग हवाओं जैसे आपदाओं की संभावनाएँ है। रहिला हसन इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर द्वारा किए गए शोध से पता चला है कि सन् 1889 से सन् 1990 के बीच राज्य में कम से कम 170 भूकंप हुए हैं।

हाल के दशकों में भूकंप, हिमपात, बाढ़ और भारी बारिश ने इस क्षेत्र में हजारों लोगों को मारा है। उदाहरण के लिए, 2005 में 7.4 तीव्रता वाले भूकंप ने सीमा के भारतीय हिस्से पर 1,350 लोगों को मार डाला था और पाकिस्तान द्वारा नियंत्रित कश्मीर के दूसरे हिस्से में 79,000 लोग मारे गए थे।

2014 में, कश्मीर में बाढ़ से 460 लोगों की मृत्यु हो गयी थी।

इस प्रशिक्षण में मूल रूप से चिकित्सा प्रशिक्षण, बचाव तकनीक और राहत शिविर प्रबंधन, लोगों को आकस्मिक नियोजन में शामिल होने के लिए सिखाया जा रहा है।

निवासियों को व्यक्तिगत दस्तावेजों, पेयजल, आरक्षित भोजन, रस्सियों और रेडियो के साथ-साथ अतिरिक्त बैटरी, दवाओं एवं रोशनी की व्यवस्था करके भागने की तैयारी करने की सलाह दी जाती है। प्राकृतिक आपदाओं के विरुद्ध अपनी फसलों का बीमा करने के संबंध में भी स्थानीय लोगों को संपर्क और जानकारी दी जाती है।


(Usha Tirkey)

पूर्ण भारतीय एवं पूर्ण ख्रीस्तीय बनने में मदद करें, कार्डिनल ग्रेसियस

In Church on February 6, 2018 at 4:54 pm

बैंगलोर, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (मैटर्स इंडिया): कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस ने भारत के काथलिक धर्माध्यक्षों से अपील की है कि वे अपने विश्वासियों को पूर्ण भारतीय एवं पूर्ण ख्रीस्तीय बनने में मदद करें।

उन्होंने कहा, “काथलिक कलीसिया को हमारे देश की आवश्यकता है और देश को कलीसिया की।”

मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ग्रेसियस ने यह बात भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की 30वीं आमसभा में 4 फरवरी को कही।

उन्होंने कहा कि धर्माध्यक्षों को भारतीय ख्रीस्तीयों की भूमिका पर विचार-विमर्श करना तथा हमारे लोगों को बेहतर भारतीय ख्रीस्तीय बनने हेतु प्रेरित करना चाहिए। यह आज का निमंत्रण है कि हम पूर्ण भारतीय एवं पूर्ण ख्रीस्तीय बनें।

आमसभा में भारत में लातीनी काथलिक कलीसिया को प्रभावित करने वाले मामलों पर चर्चा हुई जिसमें 132 धर्मप्रांत एवं 183 धर्माध्यक्ष हैं। भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन एशिया में धर्माध्यक्षों का सबसे बड़ा एवं विश्व में चौथा बड़ा सम्मेलन है।

कार्डिनल ग्रेसियस ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में ख्रीस्तीयों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में सुसमाचार के मूल्यों को प्रस्तुत करें तथा भ्रष्टाचार, पूर्वाग्रह, आदिवासियों एवं दलित समुदायों के शोषण के निराकरण एवं सच्चाई, न्याय और निःस्वार्थ भावना को बढ़ाने में मदद दें।

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आमसभा 2-9 फरवरी तक जारी है जिसकी विषयवस्तु है, “मैं सदा तुम्हारे साथ हूँ, युगों के अंत तक।”


(Usha Tirkey)

बंगाल के आदिवासी क्षेत्र में नई पल्ली की स्थापना

In Church on February 6, 2018 at 4:52 pm

बंगलादेश, मंगलवार, 6 फरवरी 2018 (रेई): बंगलादेश के राजशाही धर्मप्रांत के खोंजानपुर गाँव में काथलिकों के लिए एक नई पल्ली का उद्घाटन किया गया।

बंगलादेश जो एक मुस्लिम बहुत राष्ट्र है, गिरजाघर के उद्घाटन समारोह में सैकड़ों विश्वासियों ने भाग लिया।

नये गिरजाघर के पल्ली पुरोहित सलेशियन फादर पौल जो एक पोलिश मिशनरी हैं उन्होंने एशियान्यूज़ को बतलाया कि “उस स्थान पर जहाँ कुछ बड़ी जगह थी हमने एक नया गिरजाघर, स्कूल घर एवं युवा केंद्र का निर्माण किया है। हमारी सेवा से हज़ारों लोगों को फायदा होगा।” उद्घाटन समारोह के मुख्य अनुष्ठाता राजशाही के धर्माध्यक्ष जेरवास रोजारियो ने नयी पल्ली के उद्घाटन पर खुशी व्यक्त की तथा कहा कि हमारा धर्मप्रांत बढ़ रहा है और आशा है कि भविष्य में दूसरी पल्लियों की भी स्थापना होगी।

धर्माध्यक्ष रोजारियो के अनुसार नई कलीसिया ईश्वर के संदेश का प्रचार करने का अवसर प्रदान करेगा। उनकी आशा है कि इसके द्वारा भविष्य में कई गैरख्रीस्तीय भी येसु ख्रीस्त को स्वीकार करेंगे। पल्ली पुरोहित ने जानकारी दी कि यह आदिवासियों का क्षेत्र है जहाँ ख्रीस्त की शिक्षा का प्रचार किया जाना है। नये स्कूल का उद्घाटन 1 जनवरी को किया गया था जहाँ पल्ली पुरोहित ने कहा था कि यह सभी के लिए है क्योंकि हम सभी धर्मों के लोगों के लिए कार्य करते हैं। हमारे कार्यों द्वारा हम ख्रीस्त के मूल्यों का अभ्यास करते हैं।

स्थानीय काथलिकों ने नये गिरजाघर को सहर्ष स्वीकार किया। उनमें से एक हैं बाबू राम जो एक संथाली आदिवासी हैं और चार सालों से एक प्रचारक का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने ख्रीस्तयाग के दौरान हमारे धर्माध्यक्ष एवं पुरोहित के वचनों को सुना है। हम ईश्वर से धन्य महसूस कर रहे हैं। हम पुरोहितों से अधिक गहरे आध्यात्मिक देखभाल की आशा कर रहे हैं।”

बंगलादेश में जहाँ मुसलमानों की संख्या 90 प्रतिशत है ख्रीस्तीयों की आबादी मात्र 0.3 फीसदी ही है। ख्रीस्तीयों में अधिकतर लोग आदिवासी हैं।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: