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मिस्सा बलिदान में सुसमाचार और प्रवचन का महत्व

In Church on February 8, 2018 at 9:30 am


वाटिकन सिटी, बुधवार, 07 फरवरी 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पापा पौल षष्टम् के सभागार में, विश्व के विभिन्न देशों से आये हुए तीर्थयात्रियों को पवित्र यूखारिस्त बलिदान के दौरान शब्द समारोह और प्रवचन पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ते हुए कहा,

प्रिय भाइओ एवं बहनों, सुप्रभात।

यूखारिस्तीय धर्मविधि में शब्द समारोह के दौरान, सुसमाचार पाठन के समय, ईश्वर और उनके लोगों के बीच वार्ता अपनी पराकाष्ठा को पहुँचती है। यह जयघोष गान, अल्लेलूया द्वारा आगे बढ़ती है या चालीसा के समय अन्य उद्घोषणा जिसमें विश्वासीगण येसु का अभिवादन और स्वागत करते हैं जो सुसमाचार के वचनों द्वारा अपने भक्तों के जीवन में आते हैं। संत पापा ने कहा कि जिस तरह येसु ख्रीस्त का रहस्य पूरे धर्मग्रंथ में प्रकाशित किया गया है उसी भांति यह शब्द समारोह में होता है। हमारे लिए सुसमाचार वह ज्योति बनती है जो धर्मग्रंथ में घटित होने वाले, नये और पुराने दोनों विधान की बातों को समझने में मदद करता है। उन्होंने कहा, “धर्मग्रंथ की भांति सम्पूर्ण यूखारिस्त समारोह का केन्द्र-विन्दु और उसका शीर्ष येसु ख्रीस्त होते हैं।

यही का कारण है कि धर्मविधि के सुसमाचार अन्य पाठों से भिन्न होते जो हमारे लिए येसु ख्रीस्त के विशिष्ट संदेश को प्रस्तुत करते हैं जिसे हम आदर और सम्मान अर्पित करते हैं। वास्तव में सुसमाचार अभिषिक्त सेवक के द्वारा पढ़े जाने हेतु अरक्षित रखे जाते हैं जो इसकी घोषणा के उपरान्त चुंबन के द्वारा इसकी समाप्ति करता है। ईश वचन के श्रोता खड़े हो कर अपने माथे, मुंह और छाती पर क्रूस का चिन्ह अंकित करते हैं। सुसमाचार पठन के पहले मोमबत्ती और धुवन ख्रीस्त को महिमा देने हेतु उपयोग किये जाते हैं जो प्रभु वचनों को प्रभावकारी बनाते हैं। इस सारी निशानियों के द्वारा हम ख्रीस्त प्रभु की उपस्थिति को घोषित करते हैं जो हमारे लिए “सुसमाचार” प्रदान करते जो हमारा मन-दिल परिवर्तित करता है। यह ईश वचनों का प्रत्यक्ष उद्घोषणा है जिसे हम प्रत्येक “ईश्वर की महिमा हो” और “ईश्वर की स्तुति हो” उच्चरित करते हुए घोषित करते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि यूखारिस्त में हम सुसमाचार के पठन-पाठन द्वारा यह जानने की कोशिश नहीं करते की कौन-सी घटना घटित हुई वरन हम इसके द्वारा अपने को इस बात से सचेत करते हैं कि येसु ख्रीस्त ने क्या किया और क्या कहा। वे आज भी निरंतर हमारे लिए भी उन सारी बातों को कहते और अपने कार्यों को करते हैं। संत अगुस्टीन हमें लिखते हैं, “सुसमाचार ईश्वर का मुख है। वे आसमान पर रहते लेकिन पृथ्वी पर हमारे संग बातें करना बंद नहीं करते हैं। यदि यह सत्य है कि येसु ख्रीस्त यूखारिस्तीय धर्मविधि के दौरान “पुनः अपने वचनों को हमारे लिए घोषित करते हैं” तो इसमें सहभागी होते हुए हमें उनके वचनों का जवाब देने की आवश्यकता है।

येसु ख्रीस्त हमें अपना संदेश देने हेतु पुरोहितों के मुख से अपने शब्दों का उपयोग करते हैं जो कि प्रवचन का अंश है। द्वितीय वाटिकन महासभा के अनुसार यूखारिस्तीय धर्मविधि में प्रवचन कोई एक सामान्य परिस्थिति नहीं है और न ही सम्मेलन या एक पाठ पढ़ाने का समय वरन यह उस “वार्ता का पुनरारंभ है जो ईश्वर और उनके विश्वासियों में चलता आ रहा है, जिससे वे जीवन की पूर्णतः को प्राप्त कर सकें। यह हमारे पवित्र जीवन में ईश्वर के वचनों की व्याख्या है। ईश्वरीय वचनों की यात्रा हमारे शारीर के अंगों में परिवर्तित होते हुए पूरी होती है। यह हमारे कार्यों में परिलक्षित होता है जैसा कि यह माता मरियम और अन्य संतों के साथ हुआ।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि मैंने प्रवचन के बारे में अपनी व्याख्या पहले ही प्रेरितिक प्रबोधन एभंजेली गौदियुम के संदर्भ में दी है जहाँ मैंने इस बात पर जोर दिया, “प्रवचन विश्वसियों समुदाय के अनुरूप हो जो उन्हें ख्रीस्त से संयुक्त करे, जो जीवन में परिवर्तन लाये।”

संत पापा ने इस बात पर जोर दिया कि जो ईश वचन की व्याख्या देते हैं उन्हें अपने प्रेरितिक कार्य को उचित रुप में करने की जरूर है क्योंकि वे ख्रीस्त बलिदान में सहभागी होने वालों को अपनी सच्ची सहायता प्रदान करते हैं, साथ ही वचन के श्रोताओं को भी इसमें सहभागी होने की आवश्यकता है। इसके लिए हमें सबसे पहले वचनों पर ध्यान देने की जरूरत है, हमारे अंतरिक मनोभावों का उचित होना तथा हमें व्यक्तिपरक मनोभावों से बाहर निकलने की आवश्यकता है क्योंकि किसी भी उपदेशकों में गुण और अवगुण दोनों होते हैं। यदि किसी कारण से प्रवचन हमारे लिए लम्बा, उबाऊ और समझ के परे होता तो दूसरी बार हम पूर्वाग्रह के शिकार हो जाते हैं। यह उपदेश का उत्तरदायित्व और कर्तव्य है कि वह अपने प्रवचनों को सही रुप में तैयार करे जिससे वह विश्वासी समुदाय की माँग के अनुरूप खरा उतर सके। उन्होंने कहा कि याजकों पर दोषारोपण नहीं वरन उनके लिए एक सहायता है। पुरोहितों की मदद उनके निकट रहने वाले निष्ठावान विश्वासियों की अपेक्षा और दूसरे कौन कर सकते हैंॽ संत पापा ने कहा कि धर्मग्रंथ का ज्ञान धर्मविधि में बहुत बड़ा सहायक है। संक्षेप में हम कह सकते हैं कि मिस्सा बलिदान के दौरान शब्द समारोह, सुसमाचार और प्रवचन के द्वारा ईश्वर हम से बातें करते हैं। यदि हम “सुसमाचार” का श्रवण अच्छी तरह करते तो हमारे जीवन में परिवर्तन आता और इसके द्वारा हम अपने को और दुनिया को बदल सकते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, रोगग्रस्त और नव विवाहितों का अभिवादन करते हुए कहा कि हम आने वाला सप्ताह लूर्द की धन्य कुंवारी मरियम का त्योहार मनायेंगे जो विश्व रोगी दिवस के रुप में मनाया जाता है। प्रिय युवाओ आप बीमारों की सेवा करें, रोगग्रस्त विश्वासियों आप  कलीसिया की निरंतर प्रार्थनाओं का अनुभव करें और नव विवाहितों आप वैवाहिक जीवन से प्रेम करें यहाँ तक की जीवन की कठिन परिस्थितियों और बीमारियों से भी क्योंकि हमारा यह जीवन पवित्र है। इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने सभी परिवारों पर येसु ख्रीस्त की शांति और खुशी की कामना की और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

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“मैं प्यार और भलाई से घिरा अपने घर की तीर्थयात्रा पर हूँ,” संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें

In Church on February 8, 2018 at 9:27 am

वाटिकन सिटी, बुधवार 7 फरवरी 2018 (रेई) : सेवानिवृत संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने ‘कोरियेरे देला सेरा के कई पाठकों को उत्तर दिया, जिन्होंने रोमन कार्यालय द्वारा भेजे हाथ से लिखे गये पत्र में उनके स्वास्थ्य के बारे पूछा था। उन्होंने लिखा कि वे “शारीरिक शक्तियाँ धीमी गति से कम” और स्नेह की कृपा से घिरे हुए महसूस करते हैं।”

मातेर एक्लेसिया मठ से कल सुबह, कोरियेरे देला सेरा के रोमन मुख्यालय में मैसिनो फ्रैंको को संबोधित, “हाथ से तत्काल” पत्र पहुंचा।  सेवानिवृत्त होने के बाद संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें पांच साल से वेटिकन के अंदर मातेर एक्लेसिया मठ में रहते हैं।

संत पापा ने लिखा,” प्रिय डॉ फ्रांको, मुझे पता चला है कि आपके अखबार के कई पाठक यह जानना चाहते हैं कि मैं अपने जीवन का आखिरी समय कैसे बिता रहा हूँ। इस संबंध में मैं केवल यह कह सकता हूँ कि, शारीरिक शक्तियाँ धीरे से कम हो रही हैं और आंतरिक रूप से मैं स्थायी घर की तीर्थयात्रा पर हूँ।

मैं प्रभु के प्रेम और भलाई से इस तरह घिरा हुआ हूँ कि मैं कल्पना नहीं कर सकता। यात्रा के इस अंतिम भाग में कभी-कभी थोड़ा थकान महसूस करता हूँ। इस मायने में, मैं अपने पाठकों के प्रश्न को यात्रा के लिए एक सहयोगी के रूप में भी मानता हूँ।

अंत में संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें लिखते हैं, “यही कारण है कि मैं धन्यवाद देने के अलावे और कुछ भी नहीं कर सकता हूँ। आप सभी को मेरी प्रार्थनाओं का आश्वासन देता हूँ।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने मानव व्यापार के विरोध में विश्व दिवस पर प्रार्थना की अपील की

In Church on February 8, 2018 at 9:25 am

वाटिकन सिटी, बुधवार 7 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पापा पौल छठे सभागार में बुधवारीय आमदर्शन समारोह में हजारों की संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों से मानव व्यापार के विरोध में विश्व दिवस पर प्रार्थना की अपील की।

संत पापा ने कहा,” कल 8 फरवरी को कलीसिया संत जोसफिन बखिता की याद करती है इस दिन मानव व्यापार के विरोध में विश्व दिवस पर उनके लिए प्रार्थना की जाती है। इस साल विश्व दिवस की विषय-वस्तु है, “तस्करी के बिना प्रवासन, आजादी के लिए हां! तस्करी के लिए नहीं! ”

“नियमित प्रणालियों में काम मिलने की कुछ ही संभावनाओं की वजह से, कई प्रवासी अन्य तरीकों से काम करने का फैसला करते है, जहां उनका सभी प्रकार के दुर्व्यवहार, शोषण और गुलामी अक्सर प्रतीक्षा करते हैं। मानव तस्करी के लिए समर्पित आपराधिक संगठन, इन प्रवासी मार्गों का उपयोग अपने प्रवासियों और शरणार्थियों को छिपाने के लिए करते हैं। इसलिए मैं सभी नागरिकों और संस्थानों को आमंत्रित करता हूँ कि मानव  तस्करी को रोकने में और पीड़ितों के लिए संरक्षण और सहायता की गारंटी देने हेतु शामिल होवें।

संत पापा ने कहा, “आइये, हम प्रार्थना करें कि ईश्वर तस्करों का हृदय परिवर्तन कर दें और इस शर्मनाक विपत्ति से पीड़ित लोगों को स्वतंत्रता पाने की आशा दें।”


(Margaret Sumita Minj)

प्योंगचैंग शीतकालीन ओलंपिक के लिए संत पापा की अपील

In Church on February 8, 2018 at 9:23 am

वाटिकन सिटी, बुधवार 7 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पापा पौल छठे सभागार में बुधवारीय आमदर्शन समारोह में हजारों की संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों से प्योंगचैंग में चलने वाले शीतकालीन ओलंपिक के लिए प्रार्थना की अपील की।

संत पापा ने कहा,” परसों शुक्रवार 9 फरवरी से दक्षिण कोरिया के प्योंगचैंग शहर में 23वां शीतकालीन ओलंपिक खेल की शुरुआत होगी जिसमें 92 देश के खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। पारंपरिक ओलंपिक खेल इस वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण  है क्योंकि दो कोरियाई देशों के प्रतिनिधियों ने एक झंडे के नीचे एक टीम के रूप में खेलने का निर्णय लिया है।

यह तथ्य दुनिया के लिए आशा देता है जिसमें विवादों को बातचीत और आपसी सम्मान के माध्यम से शांतिपूर्वक हल किया जा सकता है। खेल भी यह करना सिखाता है।

संत पापा ने कहा,” मैं अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, और प्योंगचैंग शीतकालीन ओलंपिक में हिस्सा लेने वाले सभी एथलीटों, कोरिया प्रायद्वीप के अधिकारियों और सभी लोगों का अभिवादन करता हूँ। सभी प्रार्थना के जरिए आपका साथ देते हैं। मैं शांति के पक्ष में और लोगों के बीच वार्तालाप के लिए हर उपयोगी पहल का समर्थन करते हुए परमधर्मपीठ की प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करता हूँ। इस ओलंपिक को आप दोस्ती और खेल का एक बड़ा उत्सव बनायें! ईशवर आपको आशीर्वाद दे और आप की रक्षा करे!”

विदित हो कि प्योंगचैंग शीतकालीन ओलंपिक दक्षिण कोरिया के प्योंगचैंग शहर में 9 से 27 फ़रवरी तक खेले जाएंगे।

पममुंजम में हुई बैठक के बाद दोनों देश इस बात पर भी सहमत हुए हैं कि वे महिलाओं की आइस हॉकी टीम एक साथ उतारेंगे। लगभग दो साल के अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्च स्तरीय बैठक हुई है।


(Margaret Sumita Minj)

कंधमाल शहीदों के लिए प्रार्थना शुरू की गई

In Church on February 8, 2018 at 9:21 am

भुवनेश्वर, बुधवार 7 फरवरी 2018 (एशियान्यूज) :  कटक-भुवनेश्वर महाधर्मप्रांत ने कंधमाल के शहीदों के संत प्रकरण हेतु प्रार्थना शुरु की। सात सदस्यों के दल ने कटक-भुवनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बारवा और ओडिशा के धर्माध्यक्षों से परामर्श लेने के बाद अंग्रेजी और ओड़िया भाषा में प्रार्थना तैयार की है।

2007-2008 में कंधमाल में ख्रीस्तीय-विरोधी हिंसा लगभग चार महीने तक चली थी और लगभग 100 ख्रीस्तीयों को मार दिया गया था, 300 गिरजाघरों और 6,000 घरों को लूटा गया और बर्बाद किया गया था जिसमें 56,000 लोग बेघर हो गये थे।

हिंसा के गवाह अनकलेतो नायक ने कहा,”येसु ने हमें पिता ईश्वर से प्रार्थना करना सिखाया है हम प्रार्थना करते हैं जिससे कि कंधमाल की हिंसा में मरे लोगो शहीद घोषित किये जा सकें। हमारे भाई साहसी थे और येसु मसीह में विश्वास करने के लिए मरने को भी तैयार थे। अंत में मौत के स्वीकार कर उन्होंने अपने विश्वास की गवाही दी।”

महाधर्माध्यक्ष बारवा 24 अप्रैल 2016 को संत प्रकरण हेतु एक दल का संगठन किया जिसके समन्वयक प्रतिधर्माध्यक्ष फादर प्रदोश तन्द्र नायक हैं। दल के अन्य सदस्य हैं, फादर अजय सिंह, फादर जुगल किशोर डिंगल, फादर रविन्द्र कुमार रानासिंह, फादर मदन साउलसिंह और फादर दिबाकर पारिच्चा।

महाधर्माध्यक्ष बारवा ने संत प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए 3 दिसंबर 2016 को फादर पुरुषोत्तम नायक को कंधमाल शहीदों की प्रक्रिया के लिए दस्तावेज तैयार करने का कार्य सौंपा। फादर नायक महाधर्माध्यक्ष के सचिव और ओडिशा काथलिक धर्माध्यक्षीय परिषद  के उप-सचिव हैं।

कंधमाल के शहीदों के लिए प्रार्थना आधिकारिक तौर पर ओडिशा के सभी धर्मप्रांतों में वितरित किया गया।

कटक-भुवनेश्वर के पूर्व प्रतिधर्माध्यक्ष फादर जोसेफ कलथिल ने कहा,” “कंधमाल के ख्रीस्तीय मसीह पर विश्वास के खातिर ख्रीस्तीय-विरोधी हिंसा के पीड़ितों ने विश्वास की सच्चाई का सर्वोच्च गवाह प्रकट किया। इसका मतलब है कि वे उस मसीह के गवाह हैं जो मर गये और जी उठे।”

फादर कलथिल ने कहा, “शहीदों के लिए प्रार्थना करना, धर्मप्रांत और ओडिशा के हर कोने में निश्चित रूप से मसीह में हमारे विश्वास और पीड़ितों के लिए आदर और सम्मान को बढ़ा देगा। उनका उदाहरण हमें मसीह के मिशन में समर्पित होने और प्रतिबद्धता के साथ  करने के लिए प्रेरित करेगा। ”


(Margaret Sumita Minj)

ईश्वर के अनुग्रह को दूसरों के साथ साझा करें, संत पापा फ्राँसिस

In Church on February 8, 2018 at 9:20 am


वाटिकन सिटी, बुधवार 7 फरवरी 2018 (रेई) : आध्यात्मिक जीवन में प्रौढ़ता को पाना ईश्वर की बहुत बड़ी कृपा है। इस कृपा को साझा करने हेतु संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रोषित कर सभी विश्वसियों को प्रेरित किया।

संदेश में उन्होंने लिखा,”जैसे-जैसे हम अपने आध्यात्मिक जीवन में आगे बढ़ते हैं, हम यह महसूस करते हैं कि ईश्वर का अनुग्रह हमारे और दूसरों के जीवन में आता है और इसे हमें दूसरों के साथ साझा करनी चाहिए।”


(Margaret Sumita Minj)

दक्षिण अफ्रीका के धर्माध्यक्षों की जूमा से अपीलः ‘देश की भलाई को प्रथम स्थान दे’

In Church on February 8, 2018 at 9:18 am

वाटिकन रेडियो, बुधवार 7 फरवरी 2018 (वीआर) : एक अप्रत्याशित कदम में, दक्षिण अफ्रीकी संसद के अध्यक्ष ने मंगलवार को घोषणा की कि राष्ट्रवाद का राज्य स्थगित कर दिया गया है और सत्ताधारी अफ़्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस ने बुधवार को बैठक बुलाया है क्योंकि दबाव के कारण राष्ट्रपति ज़ुमा को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया है।

दक्षिण अफ्रीका के जेसुइट संस्थान निदेशक फादर रसेल पोलीट ने वाटिकन रेडियो की लिंडा बोर्डो को बताया कि ज़ूमा ने अपने उपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण पद छोड़ने के लिए कई बार किये गये मांग का विरोध किया है।

पोलित ने बताया कि ज़ूमा ने बार-बार पद छोड़ने के बारे में कई बार देश को निराश किया है और दिसम्बर में नए अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस नेतृत्व के चुनाव के लिए उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा गया है, जिसका उन्होंने हमेशा विरोध किया।

उन्होंने कहा कि दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है और रविवार रात ज़ूमा को एएनसी कार्यकारिणी के एक समूह ने इस्तीफा देने के लिए कहा था।

“लेकिन जूमा निरंकुश है और उसका कहना है कि वह यह नहीं देखता है कि उसे क्यों पद छोड़ना चाहिए क्योंकि उसने अदालत के निर्देश अनुसार सारा रकम भुगतान कर दिया है।”

इसने एएनसी के विभिन्न गुटों को पुनर्मूल्यांकन करने का कारण बना दिया है, जबकि विपक्षी दलों ने राष्ट्र राज्य को स्थगित होने के लिए संसद पर बहुत दबाव डाला।

“उन्होंने 22 फरवरी को राष्ट्रपति में अविश्वास का वोट भी लगाया” और अब इस घोषणा के साथ राष्ट्र की राज्य अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई है। वास्तविकता यह है कि ज़ूमा के इस्तीफे के लिए दबाव बढ़ रहा है”।

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे समूह भी हैं जो उनका समर्थन करते हैं और कहते हैं कि “अगर वह जाता है तो वहां एक गृहयुद्ध होगा, लेकिन यह केवल एक अल्पसंख्यक दल है।”

दक्षिण अफ़्रीका के लोग ज़ूमा के भ्रष्ट शासन से परेशान हैं वे चाहते हैं कि जूमा पद से हटे जिससे कि देश की अर्थव्यवस्था और अन्य सभी मुद्दों से निपटा जा सके।

फादर पोलित ने कहा कि सोमवार को दक्षिणी अफ्रीकी काथोलिक धर्माध्यक्षों ने जोहान्सबर्ग शहर में एक मार्च के दौरान संघर्ष और पुलिस बलों के हस्तक्षेप के बाद एक बयान जारी किया जिसमें धर्माध्यक्षों ने “नए और खतरनाक तनावों की चेतावनी दी है, क्योंकि सत्तारूढ़ पार्टी संक्रमण के दौर से गुज़र रही है और उन्होंने हर किसी से कहा कि” ऐसा करने के लिए संलग्न रहें ताकि चीजें शांत और शांति में हो सकें।”

“इस बयान में धर्माध्यक्षों ने राष्ट्रपति जुमा को ‘वयोवृद्ध राजनेता’ के रूप में और देश की भलाई को पहले देखते हुए कार्य करने को कहा।

फादर पोलित ने कहा कि धर्माध्यक्षों ने लोगों को शांति और न्याय के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया और “वे आशा करते हैं कि सत्ताधारी पार्टी हमारे गरीब और बेरोज़गार लोगों के लिए सत्ता के संक्रमण का जल्द समाधान ढूँढ़ निकालें।”


(Margaret Sumita Minj)

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