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संत मार्था समुदाय को संत पापा का संबोधन

In Church on February 9, 2018 at 2:29 pm

वाटिकन रेडियो, शुक्रवार, 9 फरवरी 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने संत मार्था समुदाय के सदस्यों को मानव व्यापार और आधुनिक गुलामी के परिप्रेक्ष्य में आयोजित एक विश्वव्यापी सम्मेलन के अंतिम दिन संबोधित किया और उनके कार्यों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन, अनुसंधान और सार्वजनिक निति निर्धारण के साथ प्रेरितिक कार्य में सहायक नेताओं के तौर पर आप ने वर्तमान समय के संकट और कारणों के निराकरण में एक  महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।

मैं आशा करता हूँ कि आप के विचार-मंथन और अनुभवों का एक दूसरे के साथ आदान-प्रदान मानव तस्करी में स्थानीय और वैश्विक पहलुओं को और अधिक गहराई से समझने में मददगार सिद्ध रहा होगा। अपने अनुभवों के द्वारा हमें इस बात का एहसास होता है कि वर्तमान की यह आधुनिक समस्या पहले की तुलना में, आज के विकसित समाज में और भी अधिक विस्तृत हो गई है-जो हमारे लिए शर्म और घृणा की बात है।

संत पापा ने कहा, “धर्मग्रंथ बाईबल के प्रथम पन्ने में ईश्वर काईन को पुकारते हुए कहते हैं, तुम्हारा भाई कहाँ हैॽ यह मानव समाज में व्याप्त जटिल चुनौतियों की ओर दृष्टि फेरने हेतु हमारा आह्वान करता है विशेष रुप से देह व्यापार के संदर्भ में जहाँ हम अति संवेदनशील स्त्री, पुरुष और बच्चों को शोषित होता हुआ पाते हैं। मानव व्यापार के विरुद हमारे संघर्ष की पहल हमें औद्योगिकी और आधुनिक संचार माध्यमों के उपयोग द्वारा अपराधिक मामलों के प्रति ठोस कदम उठाने की माँग करती है।

उन्होंने कहा कि मैं विश्वास करता हूँ कि इस सम्मेलन के विचार-मंथन आपको अपने प्रेरिताई कार्य में मदद करेंगे जिसके फलस्वरूप आप देह व्यापार के शिकार हुए लोगों की सहायता कर सकें जिससे वे अपने को समाज में पुनर्स्थापित करते हुए मानव गरिमा को प्राप्त कर सकें। देह व्यापार  पीडितों की सहायता हेतु आप के करुणामय कार्यों के लिए कलीसिया आप सभों का आभार व्यक्त करती है क्योंकि यह मानव समाज के नवीनीकरण हेतु एक महत्वपूर्ण कदम है।


(Dilip Sanjay Ekka)

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ज़रूरतमन्दों के प्रति कलीसिया का मातृत्व कार्य जारी रहे, सन्त पापा फ्राँसिस

In Church on February 9, 2018 at 1:55 pm


वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 9 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा है कि ज़रूरतमन्दों के प्रति कलीसिया की प्रेरिताई को अनवरत जारी रखा जाना चाहिये।

26 वें विश्व रोगी दिवस के उपलक्ष्य में जारी अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने स्मरण दिलाया कि विगत दो हज़ार वर्षों के अन्तराल में ज़रूरतमन्दों के प्रति कलीसिया की उदारता रोगियों की ठोस सेवा में अभिव्यक्त हुई है।

प्रति वर्ष 11 फरवरी को, लूर्द की रानी मरियम के पर्व दिवस पर, सार्वभौमिक काथलिक कलीसिया विश्व रोगी दिवस मनाती है।

सन्त पापा ने कहा कि विश्व के विभिन्न राष्ट्रों में किये गये समर्पण और उदारता के इतिहास को कायम रखा जाना ज़रूरी है जिसके अन्तर्गत काथलिक धर्मसमाजियों एवं धर्मप्रान्तों द्वारा संचालित अस्पतालों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ख्रीस्तीय मूल्यों पर आधारित वैज्ञानिक अनुसन्धानों को भी जारी रखा जाना चाहिये।

सन्त पापा ने समस्त काथलिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे काथलिक अस्पतालों एवं चिकित्सालयों के संस्थापकों के आदर्शों पर चल कर रोगियों का उपचार करें तथा व्यावसायिकता की मानसिकता से नहीं अपितु प्रत्येक रोगी की प्रतिष्ठा का सम्मान करते हुए उदारता एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वाह करें।

सन्त पापा फ्राँसिस ने स्मरण दिलाया कि प्रभु येसु ख्रीस्त ने कलीसिया को चंगाई का वरदान दिया है इसलिये रोगियों के पक्ष में काथलिक कलीसिया का मिशन येसु ख्रीस्त के वरदान का प्रत्युत्तर है। उन्होंने कहा, “कलीसिया इस तथ्य से परिचित है कि उसे येसु की दया एवं करुणा को रोगी तक पहुँचाना है।”

सन्त पापा ने उन परिवारों की भी सराहना की जो धैर्यपूर्वक अपने परिवारों के असाध्य रोगियों एवं  विकलांगो की सेवा करते हैं। उन्होंने कहा, “परिवारों के भीतर अर्पित सेवा मानव व्यक्ति एवं मानव जीवन के प्रति प्रेम का अनमोल साक्ष्य है।”

सभी रोगियों एवं पीड़ितों को माँ मरियम के संरक्षण के सिपुर्द करते हुए सन्त पापा ने प्रार्थना की कि इन ज़रूरतमन्दों की सेवा करनेवाले समस्त लोग सुसमाचार से सम्बल प्राप्त करते हुए प्रेम एवं सेवा के भाव से परिपूरित होकर अपनी बुलाहट का निर्वाह करें।


(Juliet Genevive Christopher)

भारत सरकार ने स्वीकार किया धर्म पर आधारित घृणा में वृद्धि

In Church on February 9, 2018 at 1:53 pm


नई दिल्ली, शुक्रवार, 9 फरवरी 2018 (ऊका समाचार): भारत सरकार ने यह स्वीकार किया है कि चार वर्ष पूर्व भाजपा नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आ जाने के बाद से राष्ट्र में धर्म पर आधारित हिंसा में हिज़ाफा हुआ है तथा घृणा को प्रश्रय मिला है।

छः फरवरी को भारत सरकार द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार मानवाधिकार संगठनों का यह आरोप सही है कि धर्म पर आधारित हिंसा और घृणा को प्रश्रय मिला है तथा स्थिति बदत्तर होती जा रही है।

प्रकाशित आँकड़ों  के अनुसार 2017 में 111 व्यक्तियों की हत्या की गई तथा साम्प्रदायिक हिंसा के 822 मामलों में कम से कम 2,384 लोग घायल हुए हैं, यह संख्या विगत तीन वर्षों में सबसे ऊँची रही है।

2016 में 86 लोगों की हत्या हुई तथा धर्म पर आधारित हिंसा के 703 मामलों में 2,321 व्यक्ति घायल हुए।

भारतीय संसद के समक्ष प्रस्तुत आँकड़ों में बताया गया कि धर्म पर आधारित हिंसा के मामले सबसे अधिक उत्तर प्रदेश में पाये गये जहाँ की 20 करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या चार करोड़ है।

इसके अतिरिक्त, जिन राज्यों में विगत वर्ष के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी विजयी रही है उन राज्यों में 2017 में धर्म पर आधारित हिंसा के 195 मामले सामने आये। इनमें 44 व्यक्तियों की हत्या हो गई तथा 452 लोग घायल हुए।

भारत के मानवाधिकार एवं नागर अधिकार सम्बन्धी संगठन भारतीय जनता पार्टी पर हिन्दू चरमपंथियों का समर्थन करने का आरोप लगाते रहे हैं। उनका आरोप है कि भारत के कई राज्यों में प्रशासन मुसलमानों एवं ख्रीस्तीयों के विरुद्ध हिन्दू चरमपंथियों की हिंसा को समर्थन देता रहा है। उनका कहना है कि अपराधियों को सज़ा न देने के कारण हिंसा को प्रश्रय मिला है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील तथा मानमवाधिकार कानून नेटवर्क के अध्यक्ष कॉलिन गोन्ज़ाल्वेज़ ने कहा, “आतंकवाद की तरह ही साम्प्रदायिक हिंसा को केवल कानून और व्यवस्था की समस्या नहीं माना जाना चाहिये तथा राष्ट्र के एक छोटे से कोने में हुई हिंसा को भी राष्ट्रीय समस्या समझा जाना चाहिये।”


(Juliet Genevive Christopher)

यमन में बन्धक रखे गये पुरोहित फादर टॉम ने प्रकाशित की पुस्तक

In Church on February 9, 2018 at 1:51 pm

बैंगलोर, शुक्रवार, 9 फरवरी 2018 (ऊका समाचार): यमन में 18 माहों तक बन्धक रखे गये भारत के काथलिक पुरोहित फादर टॉम उज़ुननलिल ने “बाय द ग्रेस ऑफ गॉड” शीर्षक से अपनी आत्मकथा जारी की है।

फादर टॉम को सितम्बर 2017 में रिहा किया गया था।

58 वर्षीय पुरोहित फादर टॉम ने 2 फरवरी को भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की बैठक के दौरान अपनी पुस्तक का विमोचन किया।

साईलिशियन धर्मसमाजी सम्प्रेषण माध्यम एजेन्सी (एएनएस) ने बताया कि पुस्तक में फादर टॉम के बाल्यकाल, साईलिशियन धर्मसमाज में उनके प्रशिक्षण काल, यमन में उनकी मिशनरी सेवाओं तथा उनके अपहरण से लेकर 18 माहों तक उनके बन्धक रखे जाने का विवरण है।

अपने अपहरण से पूर्व केरल के मूल निवासी फादर टॉम ने 14 वर्षों तक यमन में उदारता के मिशनरी धर्मसंघ की धर्मबहनों के साथ मिलकर रोगियों, पीड़ितों एवं बेघर लोगों को सेवाएँ अर्पित की थी। 04 मार्च 2016 को एडन में उनका अपहरण कर लिया गया था। अज्ञात बन्दूकचियों ने उस अवसर पर धर्मबहनों के आश्रम में सेवारत चार धर्मबहनों, दो यमनी महिलाओं, आठ वयोवृद्धों तथा एक चौकीदार को मार डाला था।


(Juliet Genevive Christopher)

ढाका गिरजाघर में लूटमार, पुरोहित की पिटाई और मौत की धमकी

In Church on February 9, 2018 at 1:49 pm

बंगलादेश, ढाका, शुक्रवार, 9 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): बंगलादेश की राजधानी ढाका के एक काथलिक गिरजाघर पर गुरुवार, आठ फरवरी को तीन नकाबपोश उग्रवादियों ने हमला कर, गिरजाघर में लूट मचाई, पुरोहित की पिटाई की तथा मौत की धमकियाँ देकर धन एवं अन्य मूल्यवान वस्तुएँ उनके सिपुर्द करने की मांग की।

ढाका के टॉन्गी इलाके में कैनटरबरी सेन्ट अगस्टीन गिरजाघर स्थित है। बताया जाता है कि डकैती के समय कम से कम पाँच व्यक्ति मौजूद थे जिनमें तीन नकाबपोश थे।

आठ फरवरी की प्रातः लगभग चार बजे चोर पल्ली पुरोहित फादर चंचल हूबेर्ट परेरा के कमरे में उस समय घुस आये जब फादर गहरी नींद में सो रहे थे। फादर के कमरे के बगल में ही पल्ली का माली एवं रसोइया भी सो रहे थे।

फादर ने बताया कि आवाज़ें सुनकर वे जाग गये और उन्होंने चोरों को खिड़की से उनपर बन्दूक का निशाना लगाते देखा। फादर ने बताया कि चोरों ने उनसे कहा, “यदि दरवाज़ा नहीं खुला तो मार डाले जाओगे। मैं दरवाज़ा खोलने के लिये बाध्य हो गया।”

अन्दर आते ही चोरों ने फादर की पिटाई शुरु कर दी और उन्हें धमकियाँ देने लगे। फादर ने बताया कि अपनी प्राण रक्षा के लिये उन्होंने चोरों को 35,000 टका यानि लगभग 430 अमरीकी डॉलर, मोबाईल फोन तथा लैपटॉप दे दिया किन्तु उससे वे शान्त नहीं हुए। गिरजाघर में घुसकर उन्होंने वहाँ तोड़-फोड़ मचाई, वेदी से पुस्तक और परिधानों को तितर-बितर कर दिया तथा चन्दे की पेटी को तोड़कर उसमें से पैसे चुरा ले गये।

स्थानीय ख्रीस्तीयों एवं मुसलमानों ने भी इस घटना की निन्दा की है। ग्रामीण परिषद के पूर्वाध्यक्ष मुहम्मद सहीदुल्लाह ने एशियान्यूज़ से कहा, “यह एक लज्जास्पद कृत्य है। गिरजाघर एक पवित्र स्थल होता है। जो कुछ हुआ उसके लिये हम दुःखी हैं।”

स्थानीय पुलिस अध्यक्ष हेलल उद्दीन में गिरजाघर का दौरा करने के उपरान्त कहा है कि अधिकारी “घटना की जाँचपड़ताल कर अपराधियों की तलाश करेंगे।”

इसी बीच, बंगलादेश ख्रीस्तीय संगठन के महासचिव हेमान्तो कोराया ने मांग की है कि पुलिस शीघ्रातिशीघ्र चोरों का पता लगाकर उन्हें न्यायोचित दण्ड प्रदान करे।


(Juliet Genevive Christopher)

पापी संत बन सकते हैं किन्तु भ्रष्ट नहीं

In Church on February 9, 2018 at 1:47 pm


वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 8 फरवरी 18 (रेई): हर दिन जागते रहें ताकि प्रभु से दूर न चले जाएँ। यह बात संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 8 फरवरी को, वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही। संत पापा ने प्रवचन में उस जोखिम पर प्रकाश डाला जो हम सभी के हृदय को दुर्बल बना देता है।

संत पापा ने कहा, “दाऊद पवित्र हैं यद्यपि वे पापी थे जबकि महान एवं विवेकी सुलेमान प्रभु द्वारा त्याग दिया गया क्योंकि वह भ्रष्ट था।”

राजाओं के पहले ग्रंथ से लिए गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने राजा सुलेमान एवं उसकी अवज्ञ पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमने एक अनोखी बात सुनी कि सुलेमान का हृदय, अपने पिता दाऊद के विपरीत, पूर्ण रूप से प्रभु के साथ संयुक्त नहीं रहा।”

हृदय के दुर्बल होने की समस्या

संत पापा ने कहा कि यह एक अजीब बात है क्योंकि हम नहीं जानते कि सुलेमान ने बड़ा पाप किया था जबकि राजा दाऊद के बारे जानते हैं कि उनका जीवन कष्टमय था और वे एक पापी थे। संत पापा ने कहा कि इसके बावजूद दाऊद पवित्र हैं जबकि सुलेमान का हृदय प्रभु से विमुख हो गया। प्रभु ने जिन्हें महान बनाया और जिन्होंने धन के बदले प्रभु से प्रज्ञा की मांग की थी, वे प्रभु से विमुख कैसे हो गये? संत पापा ने कहा कि दाऊद एवं सुलेमान में अंतर इस बात की है कि दाऊद ने अपने पापों को स्वीकार किया और उनके लिए ईश्वर से क्षमा मांगी। वहीँ सुलेमान जिनकी प्रशंसा सारा संसार करता था और शेबा की रानी भी उनसे मिलने आयी थी, प्रभु से विमुख हो गया एवं दूसरे देवी-देवताओं की पूजा कर रहा था और इस पाप को उसने कभी महसूस नहीं किया।

संत पापा ने कहा कि यहीं हृदय के कमजोर हो जाने की समस्या है। जब हृदय दुर्बल हो जाता है तब केवल पाप की स्थिति नहीं रह जाती, जिसको तुरन्त महसूस किया जा सके बल्कि हृदय के कमजोर होने की प्रक्रिया धीमी होती है जो हमें धीरे-धीरे ईश्वर से दूर करता और सुलेमान के समान हम अपनी यश एवं कीर्ति में खो जाते हैं।

सुलेमान का अंत धीरे से भ्रष्टाचार में

हृदय के कमजोर हो जाने की अपेक्षा, अपने पापों को समझना बेहतर है। महान राजा सुलेमान का अंत चुपचाप भ्रष्टाचार में हो गया क्योंकि उसका हृदय कमजोर हो चुका था।

संत पापा ने विश्वासियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कमजोर हृदय के लोग हारे हुए लोग हैं। यही कई ख्रीस्तीयों की स्थिति है। हम सोचते हैं कि हमने बड़ा पाप नहीं किया है। संत पापा ने प्रश्न किया, “किन्तु हमारा हृदय कैसा है क्या यह मजबूत है? क्या यह प्रभु के प्रति वफादार है अथवा उनसे धीरे-धीरे दूर हो रहा है?”

अपने हृदय पर हर दिन निगरानी रखें

हृदय के कमजोर होने का मामला हम सभी के जीवन पर लागू हो सकता है। ऐसी स्थिति में हमें क्या करना चाहिए? उन्होंने कहा, “जागते रहें और अपने हृदय पर निगरानी रखें। हर दिन सावधानी पूर्वक अपने हृदय में क्या हो रहा है उसका अवलोकन करें।”

संत पापा ने कहा कि दाऊद पवित्र हैं यद्यपि वे पापी थे। एक पापी संत बन सकता है। सुलेमान विमुख हो गया क्योंकि वह पथभ्रष्ट था। एक पथभ्रष्ट संत नहीं बन सकता। अतः जागते हुए अपने हृदय की निगरानी करें। प्रभु के साथ अपने संबंध की जाँच करें तथा वफादार बने रहने के आनन्द एवं सौंदर्य का सुख प्राप्त करें।


(Usha Tirkey)

एकता और संविधान के लिए, केन्या के काथलिक धर्माध्यक्षों की अपील

In Church on February 9, 2018 at 1:45 pm

केन्या, बृहस्पतिवार, 8 फरवरी 2018 (रेई): केन्या के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने सरकार और विपक्षी दल द्वारा किए गए असंवैधानिक कृत्यों के लिए गहरी चिंता व्यक्त की है तथा उन्होंने एक घोषणा जारी करते हुए मीडिया की स्वतंत्रता के सम्मान को प्राथमिकता दिये जाने की मांग की है।

यह संदेश देश के तीन सबसे महत्वपूर्ण निजी टेलीविजन स्टेशनों के अचानक बंद होने के एक हफ्ते बाद आया, जब सरकार द्वारा रैला ओडिन्गा के शपथ ग्रहण समारोह के प्रसारण को रोकने हेतु दबाव डाला गया था। 26 अक्टूबर के चुनाव में राष्ट्रपति केन्याटा ने ओडिंगा को हराया, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त के चुनाव परिणामों को रद्द किया, जिसमें ओडिंगा की जीत हुई थी। जबकि ओडिंगा ने 26 अक्टूबर के वोट का बहिष्कार करते हुए शपथ ग्रहण किया।

केन्याई धर्माध्यक्षों के मुताबिक, मीडिया बंद करना “अपने आप में एक रूढ़िवाद है तथा संविधान में एक सामाजिक अनुबंध के रूप में देश और उसकी आबादी की स्थापना सकारात्मक कदमों को नष्ट करने के लिए जानबूझकर किया गया एक प्रयास है।” इसी के मद्देनजर धर्माध्यक्षों ने स्मरण दिलाया है कि अनुच्छेद 34 में मीडिया की स्वतंत्रता की गारंटी दी गयी है एवं विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय संधियों द्वारा केन्या सरकार ने इसे स्वीकृति प्रदान की है।

पिछले सोमवार को तीन बंद टीवी स्टेशनों को फिर से खोलने की मांग करते हुए लोगों ने नैरोबी शहर के सरकारी कार्यालयों पर प्रदर्शन किया, जिन्हें पुलिस ने आंसू गैस द्वारा तितर–बितर किया था।

धर्माध्यक्षों ने कहा, “सरकार एवं विपक्ष दोनों ही दल किसी भी प्रकार के भड़काव कार्य को रोकें जो केन्या के लोगों के बीच विभाजन लाता हो।” उन्होंने सिद्धांतों, संविधान की भावना, मानव अधिकार तथा मौलिक स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की साथ ही साथ, शनिवार 10 फरवरी को किसूमू महाधर्मप्रांत में चालीसा काल के लिए एक अभियान हेतु लोगों को एक सभा में भाग लेने का निमंत्रण दिया।

इस अभियान की विषयवस्तु होगी, “शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और राष्ट्रीय एकता के लिए मेल-मिलाप … सभी के लिए न्याय।”

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