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संत पापा ने बांग्लादेश की प्रधानमंत्री से मुलाकात की

In Church on February 12, 2018 at 4:25 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 फरवरी को प्रेरितिक सभागार में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री श्रीमति शेख हसीना से मुलाकात की।

प्रेस विज्ञप्ति अनुसार सौहार्दपूर्ण विचार-विमर्श के दौरान, द्विपक्षीय अच्छे संबंधों को उजागर किया गया  और बांग्लादेश में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा में देश के गैर-काथलिकों सहित बड़ी संख्या में देशवासियों की भागीदारी के लिए संतुष्टि व्यक्त की गई।

काथलिक कलीसिया द्वारा देश के योगदान पर भी चर्चा की गई, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में और विभिन्न धार्मिक समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में राज्य के प्रयास तथा अल्पसंख्यकों और शरणार्थियों की रक्षा,  रोहिंग्या लोगों को शरण देने हेतु प्रशंसा व्यक्त करते हुए और उनके उचित और स्थायी समाधान की उम्मीद की गई।

प्रधानमंत्री श्रीमति शेख हसीना ने संत पापा ने मुलाकात करने के पश्चात वाटिकन सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन और विदेश उप-सचिव मोन्सिन्योर अंतोनी कमिल्लेरी से मुलाकात की।


(Margaret Sumita Minj)

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संत पापा फ्राँसिस ने ग्रीक-मेल्काइट धर्मसभा के सदस्यों को संबोधित किया

In Church on February 12, 2018 at 4:23 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में ग्रीक-मेल्काइट धर्माध्यक्षों धर्मसभा के सदस्यों से मुलाकात कर तीर्थयात्रा हेतु रोम आने के लिए धन्यवाद दिया। मुझे खुशी है कि कल प्रकट रुप में कलीसियाई एकता को पवित्र युखारिस्त समारोह में एकसाथ भाग लेकर सार्वजनिक रुप में प्रकट की जाएगी। इस सुन्दर अवसर के लिए मैंने बीते वर्ष धर्माध्यक्षों की धर्मसभा में प्राधिधर्माध्यक्ष के चुनाव के बाद 22 जून के पत्र में स्वीकार की थी।

संत पापा ने कहा,” मैं आप सभी को अपनी प्रार्थना का आश्वासन देता हूँ। प्रभु येसु आपको सौंपे मिशन में आपके साथ रहें। आप सीरिया और मध्य पूर्व देशों की कलीसिया की सेवा में समर्पित हैं। ग्रीक-मेल्काइट कलीसिया बेहतर जीवन की खोज में अन्य देशों में फैल गई है। मैं दियासपोरा के उन सभी विश्वासियों और पुरोहितों को सस्नेह प्रार्थना में याद करता हूँ।

इस कठिन ऐतिहासिक काल में मध्य पूर्व के कई ख्रीस्तीय समुदायों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रीक-मेल्काईट धर्माध्यक्ष और पुरोहित अपने जीवन साक्ष्य द्वारा विश्वासियों को अपने विश्वास में मजबूत रहने हेतु प्रोत्साहित करें। जैसा कि मैंने इस वर्ष 23 फरवरी को शांति के लिए प्रार्थना और उपवास का दिन निर्धारित किया है, इस दिन सीरिया के विश्वासियों के लिए विशेष रुप से प्रार्थना की जाएगी जिन्होंने हाल के वर्षों में अकथनीय पीड़ा सही है।

संत पापा ने कहा,”आपने इस महीने के पहले सप्ताह में अपने धर्माध्यक्षीय धर्मसभा लेबनान में शुरु की और इसके समापन हेतु तार्थयात्रा कर संत पेत्रुस की कब्र के पास पहुँचे है। धर्मसभा में आपने विश्वासियों की भलाई और उनके विश्वास को प्रगाढ़ बनाने हेतु महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आपने धर्मसभा में धर्माध्यक्षों का चुनाव किया है। मैं आपके द्वारा चुने गये धर्माध्यक्षों का परमाध्यक्ष की स्वीकृति प्रदान करते हुए अपार खुशी का अनुभव करता हूँ।

संत पापा ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा,”जब आप अपने धर्मप्रांत लौटें तो वहाँ अपने पुरोहितों, धर्मसंघियों और विश्वासियों को मेरी ओर से अभिवादन करें और उनसें कहें कि वे सभी संत पापा के हृदय में हैं और संत पापा उनके लिए प्रार्थना करते हैं। अंत में संत पापा ने ईश्वर की माता, शांति की महारानी के सिपुर्द करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

परीक्षा में डाला गया विश्वास धैर्य उत्पन्न करता है, संत पापा फ्राँसिस

In Church on February 12, 2018 at 4:21 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई): “परीक्षा में डाला गया आपका विश्वास आपमें धैर्य उत्पन्न करता है।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 फरवरी को प्रेरितिक आवास संत मार्था के प्रार्थनालय में पवित्र यूखारिस्त समारोह का अनुष्ठान करते वक्त अपने प्रवचन में कही।

संत पापा ने संत याकूब के पत्र से लिये गये पाठ पर चिंतन करते हुए कहा, “हमारे जीवन की कठिनाईयों और परीक्षाओं में धैर्य रखने का क्या अर्थ हो सकता है? यह समझना आसान नहीं है। जो ख्रीस्तीय विश्वास पर जीवन जीता है उसके लिए धैर्य परित्याग या हार नहीं है परंतु यह एक सद्गुण है।

जीवन के सफर में हमेशा अच्छी चीजें नहीं मिलती है। संत पापा ने एक दम्पति का उदाहरण देते हुए कहा कि जब एक माता-पिता के लिए विकलांग बच्चे का जन्म होता है तो सर्वप्रथम उन्हें अपने बच्चे को विकलांगता के साथ स्वीकार करना और सालों-साल उसकी देखभाल करना आसान नहीं है। परंतु माता पिता ईश्वर को उस बच्चे के लिए धन्यवाद देते हैं। उनका बच्चा जीवित है और उनके साथ है। यह उनके धैर्यता का एक गुण है।

ख्रीस्तीय धैर्य हार के मार्ग पर नहीं जाता।

संत पापा ने कहा कि मुक्ति के इतिहास में अपने लोगों के प्रति पिता ईश्वर के धैर्य को पाते हैं। इस्राएली जिद्दी थे। वे बार बार अपने ईश्वर को छोड़ देते थे। उन्होंने सोने का बछड़ा बनाकर उसकी पूजा की। फिरभी ईश्वर ने धैर्य के साथ उन्हें वापस ले आया। पिता ईश्वर ने अपने मिशन को पूरा करने के लिए अपने बेटे को इस दुनिया में भेजा। प्रभु येसु ने बड़े धीरज के साथ हमें पिता ईश्वर से मिलाया।

संत पापा ने कहा कि मध्य पूर्व ख्रीस्तीयों को अपने विश्वास के खातिर अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। वे धैर्य पूर्वक दुख सहते हैं और इस तरह वे ईश्वर के धैर्य में सहभागी होते हैं। प्रवचन के अंत में संत पापा ने कहा, “आइये हम प्रभु से अपने लिए और दुख-कष्ट सहने वाले सभी विश्वासियों के लिए इस सुंदर गुण के लिए प्रार्थना करें।”


(Margaret Sumita Minj)

मानव की सेवा ईश्वर की सेवा है,संत पापा फ्राँसिस

In Church on February 12, 2018 at 4:20 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को विश्व रोगी दिवस के अवसर पर सभी लोगों को अपनी बीमारियों से जूझते हुए बीमार लोगों के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने प्रेरणा दी। संत पापा ने लूर्द की माता मरियम की मध्यस्ता से सभी बीमारों के लिए प्रार्थना की कि वे “शरीर और आत्मा में आराम प्राप्त कर सकें। रविवार को संत पापा ने दो ट्वीट प्रेषित किया।

उन्होंने पहले संदेश में लिखा, “बीमार लोग हमेशा अपनी बीमारी की नाजुक स्थिति में प्यार, आदर और अलंधनीय सम्मान पायें।”

और दूसरे संदेश में उन्होंने लिखा,”मानव की सेवा ईश्वर की सेवा है जीवन के हर चरण : माता के गर्भ से लेकर, दुख और बुढ़ापे की बीमारी में मानव जीवन की सेवा करनी है।

संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 फरवरी को बाल सैनिकों के उपयोग के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर ऐसे बच्चों के लिए अपने दुख को प्रकट किया जो खिलौनों के बदले बंदूको से खेलने के लिए बलपूर्वक मजबूर किये जाते हैं।

अपने संदेश में संत पापा ने लिखा,” मुझे उन बच्चों के लिए गहरा दुख होता है जिन्हें अपने परिवारों से भगाकर बाल सैनिक बनने के लिए मजबूर किया जाता है। यह एक त्रासदी है!”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने 2019 विश्व युवा दिवस के लिए नाम दर्ज किया

In Church on February 12, 2018 at 4:18 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के सामने एक टाबलेट पर खुद को दर्ज करके विश्व युवा दिवस 2019 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की शुरुआत की।

संत पापा फ्राँसिस ने प्राँगण में रविवारीय धर्मशिक्षा और देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत उपस्थित समुदाय के सामने विश्व युवा दिवस के नामांकन की घोषणा इन शब्दों में की,”विश्व युवा दिवस के लिए आज पंजीकरण शुरू होता है, जो जनवरी 2019 में पनामा में होगा। अभी, दो युवाओं के साथ, मैं भी इंटरनेट पर पंजीकरण करूंगा।”

दो युवाओं की मदद से संत पापा ने अपना नाम दर्ज किया और कहा, “अब मैंने विश्व युवा दिवस के लिए एक तीर्थयात्री के रूप में नामांकित किया है। मैं दुनिया भर के सभी युवाओं को विश्वास और उत्साह के साथ अनुग्रह और भाईचारे के इस आंदोलन में भाग लेने हेतु आमंत्रित करता हूँ, आप पनामा जाकर या अपने समुदायों में भाग लें।”

पानामा में 22 से 27 जनवरी 2019 तक विश्व युवा दिवस का आयोजन किया जाएगा। इसमें भाग लेने के लिए विश्व के युवा ओनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।

विदित हो कि विश्व युवा दिवस प्रतिवर्ष धर्मप्रांतीय स्तर पर पवित्र खजूर रविवार को मनाया जाता है और हर तीसरे वर्ष, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। 31वाँ अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस अगस्त 2016 में पोलैंड के क्राकोव शहर में मनाया गया था। अंतिम दिन संत पापा ने अगले अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस समारोह पानामा में होने का एलान किया था।  संत पापा फ्राँसिस ने “तीन साल के लिए विश्व युवा दिवस की विषय-वस्तुओं को चुना है इन तीन वर्षों की यात्रा 2019 में पनामा में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय उत्सव के साथ समाप्त हो जाएगी।

आगामी विश्व युवा दिवसों की विषय-वस्तुएँ धन्य कुवारी मरिया पर केन्द्रित है जो संत लूकस रचित सुसमाचार से ली गई हैं।

32वाँ विश्व युवा दिवस 2017 : ″सर्वशक्तिमान् ने मेरे लिए महान कार्य किये हैं। पवित्र है उसका नाम !″  (लूक.1:49)

33वाँ विश्व युवा दिवस 2018 : ″मरियम! डरिए नहीं। आपको ईश्वर की कृपा प्राप्त है।″ (लूक. 1:30)

34वाँ विश्व युवा दिवस  2019 : ″ मैं प्रभु की दासी हूँ। आपका कथन मुझमें पूरा हो जाये।″ (लूक.1:38)

आगामी विश्व युवा दिवसों की विषय-वस्तुओं को संत पापा फ्राँसिस ने धन्यताओं पर ध्यान केन्द्रित किया है। क्राकोव में संत पापा फ्रांसिस ने ‘अतीत की स्मृति’, ‘वर्तमान के लिए साहस’ और ‘भविष्य के लिए आशा’ रखने हेतु युवाओं को आमंत्रित किया था।”

अगले तीन विश्व युवा दिवसों की विषय-वस्तुएँ युवाओं को मरियम के साथ आध्यात्मिक यात्रा हेतु एक स्पष्ट इरादे से दिये गये हैं,  साथ दिये गये विषय-वस्तु के आधार पर युवा अतीत (2017), वर्तमान (2018) और भविष्य (2019) की यात्रा करेंगे जो तीन ईश्वरीय सदगुण विश्वास, प्रेम और आशा से प्रेरित है।”


(Margaret Sumita Minj)

कार्डिनल पारोलिन ने संत ईजीडियो समुदाय के 50 वर्षगाँठ पर ख्रीस्तयाग अर्पित किया

In Church on February 12, 2018 at 4:16 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार 12 फरवरी 2018 (रेई) : वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलिन ने संत ईजीडियो समुदाय के अंतरराष्ट्रीय आंदोलन के 50वीं वर्षगाँठ पर धन्यवादी ख्रीस्तयाग अर्पित किया और सदस्यों से आग्रह किया कि वे दूर दराज क्षेत्रों में ईश्वर के वचन का प्रचार जारी रखें।

संत ईजीदियो समुदाय “प्रार्थना, एकता, सार्वभौमिकता और वार्ता के आधार पर, लोकधर्मियों का एक विश्वव्यापी आंदोलन” है। वर्तमान में यह 70 देशों में कार्यरत है और इस के करीब 50,000 सदस्य हैं।

रोम स्थित सांता मरिया इन त्रासतेवेरे महागिरजाघर में शनिवार को संत इजीदियो समुदाय ने कार्डिनल पियेत्रो परोलिन की अध्यक्षता में 50 वर्षों के कार्यों के लिए धन्यवादी ख्रीस्तयाग समारोह मनाया।

कार्डिनल ने अपने प्रवचन में संत मारकुस के सुसमाचार से लिये गये पाठ येसु द्वारा कोढ़ी को चंगा किये जाने पर चिंतन किया। येसु ने कोढ़ी को शारीरिक रुप से उसे चंगा करने के साथ-साथ समाज से बहिष्कृत किये जाने और अकेलेपन की मानसिकता से भी उसे स्वतंत्र किया। कार्डिनल पारोलिन ने संत इजीदियो के कार्यों की तुलना करते हुए कहा कि कभी कभी उस कोढ़ी के समान बच्चे, महिलाएँ, वयोवृद्ध और बीमार समाज से निष्कासित महसूस करते हैं। पर इजीदियो समुदाय अपने उदार कार्यों द्वारा समाज में व्याप्त सभी तरह के कोढ़ों से लोगों को स्वतंत्र कर उनके उपने सम्मान को वापस लौटाते हैं।  ईश्वर के वचन और उनके प्रेम को दूर दराज लोगों तक पहुँचाते हैं।

कार्डिनल पारोलिन ने कहा कि इजीदियो समुदाय यूरोप, अफ्रीका,एशिया और अमेरिका में अपने मिशन कार्य में लगा हुआ है। विशेष रुप से अफ्रीका में वे एड्स बीमारों की सेवा कर रहे हैं। सीरिया में शरणार्थियों की सेवा में लगे हुए हैं।

उन्होंने शांति की पहल के लिए उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की: “आप मानते हैं कि शांति संभव है, लोगों को हिंसा का बंधक नहीं बनाया जा सकता है और आप संघर्ष से मुक्ति दिलाने का ठोस प्रयास करने की कोशिश और आशा दिलाते हैं।”

कार्डिनल ने अपने प्रवचन के अंत में कहा कि संत इजीदियो समुदाय “असीसी की भावना” में, ख्रीस्तीयों और अन्य धर्म के लोगों के साथ प्रेम और भाईचारे की भावना को स्थापित करने में अहम् भूमिका निभाती है।”


(Margaret Sumita Minj)

विश्व रोगी दिवस पर येसु पर चिंतन

In Church on February 12, 2018 at 4:14 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार, 12 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 11 फरवरी को, विश्व रोगी दिवस के अवसर पर, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा विश्वासियों को अपना संदेश दिया। उन्होंने उन्हें सम्बोधित कर कहा, “अति प्रिय भाइयो एव बहनो, सुप्रभात।”

इन रविवारों को, संत मारकुस रचित सुसमाचार पाठ येसु द्वारा सभी प्रकार के रोगियों की चंगाई को प्रस्तुत करते हैं। इस संदर्भ में विश्व रोगी दिवस को सही स्थान मिला है जो 11 फरवरी को पड़ता है, जब लूर्द की माता मरियम का पर्व मनाया जाता है। इसलिए हमारा ध्यान मस्साबिल्ले की गुफा की ओर जाता है। हम येसु को शरीर और आत्मा के सच्चे चिकित्सक के रूप में चिंतन करें, जिनको पिता ईश्वर ने इस दुनिया में मानवता की चंगाई करने भेजा, जो पाप और पाप के परिणामों से त्रस्त थी।

सुसमाचार पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा, “आज का सुसमाचार पाठ कोढ़ की बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति की चंगाई को प्रस्तुत करता है जिसको पुराने व्यवस्थान में गंभीर अशुद्धता माना जाता था तथा कोढ़ी व्यक्ति को समुदाय से अलग कर दिया जाता था। इस प्रकार उन्हें अकेले जीना पड़ता था।” उनकी स्थिति सचमुच दर्दनाक होती थी क्योंकि उस समय की मानसिकता उन्हें ईश्वर एवं लोगों के सामने अशुद्ध होने का एहसास दिलाता था। अतः सुसमाचार पाठ का वह कोढ़ी येसु से अर्जी करता है, “आप चाहें, तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।” जिसको सुनने के बाद येसु को उस पर तरस आता है।

संत पापा ने कहा, “येसु के इस आंतरिक प्रतिध्वनि पर ध्यान देना अत्यन्त महत्वपूर्ण है जैसा कि हमने करुण की जयन्ती वर्ष के दौरान लम्बे समय तक किया। हम तब तक ख्रीस्त और उनके  कार्यों को नहीं समझ सकते, जब तक कि हम उनके हृदय में प्रवेश न कर लें जो कि दया और करुणा से पूर्ण है।”  इसी भावना ने उन्हें पीड़ित कोढ़ी तक पहुँचने हेतु प्रेरित किया, उनका स्पर्श करने एवं उनसे यह कहने, “मैं यही चाहता हूँ शुद्ध हो जाओ।” यहाँ सबसे अधिक प्रभावित करने वाली बात यह है कि येसु ने उसका स्पर्श किया क्योंकि ऐसा करना मूसा की संहिता के अनुसार पूरी तरह वर्जित था। एक कोढ़ी को छूने का मतलब था अंदर से संक्रमित होना, आत्मा की अशुद्धता अर्थात् पूरी तरह अशुद्ध हो जाना किन्तु इस मामले में कोढ़ी का संक्रामण येसु को प्रभावित नहीं कर सका बल्कि येसु ने उन्हें शुद्ध कर दिया। इस चंगाई में हम येसु की सहानुभूति, दया एवं साहस को देखते हैं जो न तो संक्रमण की चिंता करते और न ही उससे बचने के उपाय की बल्कि उस व्यक्ति के अभिशाप से उसके मुक्त होने की लालसा से प्रभावित होते जिसने उसे अपने कब्जे में कर लिया था।

संत पापा ने कहा, “कोई भी बीमारी अशुद्धता का कारण नहीं होता। बीमारी सम्पूर्ण व्यक्तित्व को अवश्य प्रभावित करता है किन्तु यह किसी भी तरह से ईश्वर के साथ हमारे संबंध को नहीं तोड़ सकता। इसके विपरीत, हो सकता है कि बीमार व्यक्ति ईश्वर से अधिक संयुक्त हो। हमें जो सचमुच अशुद्ध कर सकते हैं वे हैं, स्वार्थ, घमंड और भ्रष्टाचार। ये हृदय की बीमारियाँ हैं जिनसे हमें शुद्ध किये जाने की आवश्यकता है। हम उस कोढ़ी की तरह येसु की ओर मुड़ें और प्रार्थना करें, “आप चाहें, तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।”

संत पापा ने मौन प्रार्थना का निमंत्रण देते हुए कहा, अब हम कुछ देर मौन रहकर अपने हृदय पर गौर करें, अपने अंदर झांक कर देखें और अपनी अशुद्धियों एवं पापों को देखने का प्रयास करें तथा मन ही मन प्रभु से कहें, “आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं।” जब कभी हम पश्चातापी हृदय से पाप-स्वीकार संस्कार में भाग लेते हैं तब प्रभु यही दुहराते हैं, “मैं यही चाहता हूँ, शुद्ध हो जाओ।” संत पापा ने कहा कि इसमें अपार खुशी है। इस तरह कोढ़ रूपी हमारे पाप मिट जाते हैं और हम ईश्वर के साथ एवं समुदाय में पुनः वापस लौटते हुए आनन्द के साथ जाने लगते हैं।

धन्य कुँवारी मरियम हमारी निष्कलंक माता की मध्यस्थता द्वारा, हम प्रभु से प्रार्थना करें कि जिन्हें रोगी को चंगा किया वे अपनी असीम करुणा से हमारे आंतरिक घावों को चंगा कर दे, हमें आशा एवं हृदय की शांति को पुनः वापस कर दे।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न जानकारियाँ प्रस्तुत कीं। उन्होंने पनामा में होने वाले आगामी विश्व युवा दिवस में सहभागी होने हेतु अपना नाम दर्ज कराते हुए कहा कि मैंने विश्व युवा दिवस के लिए एक तीर्थयात्री के रूप में अपना नामांकन किया। उन्होंने सभी युवाओं को निमंत्रण दिया कि वे इस अवसर को विश्वास एवं उत्साह के साथ मनायें।

संत पापा ने चंद्र नव वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “15 फरवरी को पूर्व एवं विश्व के विभिन्न हिस्सों में मिलियन लोग चन्द्र नव वर्ष मनाते हैं। मैं उनके सभी परिवारों को अपना हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान करता हूँ इस आशा के साथ कि वे सौहार्द, भाईचारा एवं भलाई तथा उस समाज के निर्माण हेतु सहयोग दे सकेंगे जिसमें हर व्यक्ति को स्वीकृति, सुरक्षा, प्रोत्साहन एवं एकीकरण प्राप्त हो सके। मैं शांति के बहुमूल्य वरदान के लिए प्रार्थना करने हेतु निमंत्रण देता हूँ जिसको सहानुभूति, दूरदर्शिता एवं साहस के द्वारा अपनाया जा सके।

उसके उपरांत संत पापा ने परिवारों, पल्लियों, संगठनों एवं उन सभी लोगों का अभिवादन किया जो इटली तथा विश्व के विभिन्न हिस्सों से संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित थे। जिनमें उन्हें विशेषकर, स्पेन के मूर्चा के तीर्थयात्रियों एवं पुर्तगाल के गुमारास के बच्चों का अभिवादन किया।

संत पापा ने रोम स्थित कोंगो समुदाय के लोगों का अभिवादन करते हुए शांति हेतु उनकी प्रार्थना में सहभागी होने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “मैं याद करता हूँ कि विशेष रूप से 23 फरवरी को इस निवेदन हेतु प्रार्थना एवं उपवास किया जाएगा।”

संत पापा ने इटली की पल्लियों के उन युवाओं की याद की जो दृढ़ीकरण संस्कार प्राप्त कर चुके हैं तथा जो अपने विश्वास को प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा, “मैं उन सभी दलों का नाम नहीं ले सकता किन्तु मैं आपकी उपस्थिति के लिए धन्यवाद देता हूँ तथा आप सभी को प्रोत्साहन देता हूँ कि आप आनन्द, उदारता, भलाई के साक्ष्य एवं प्रभु की करुणा में बढ़ें।”

तदुपरांत, विश्व रोगी दिवस का स्मरण करते हुए संत पापा ने कहा, “मैं विशेषकर, विश्व के हर भाग के बीमार लोगों को सम्बोधित करता हूँ जो शारीरिक बीमारी के साथ-साथ, बहुधा अकेलापन एवं हाशिये पर जीवन यापन करने के लिए बाध्य हैं। धन्य कुँवारी मरियम रोगियों की स्वास्थ्य हरेक को अपने शरीर एवं आत्मा में आराम पाने में मदद करे।” संत पापा ने रोगियों की मदद करने वाले सभी लोगों के प्रति भी अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

अंततः संत पापा ने प्रार्थना का आग्रह करते हुए सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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