Vatican Radio HIndi

Archive for February 13th, 2018|Daily archive page

एक ख्रीस्तयाग जिसमें संत पेत्रुस एवं ग्रीक मेलकाईट काथलिक कलीसिया दोनों एक साथ

In Church on February 13, 2018 at 3:43 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (रेई): मंगलवार 13 फरवरी को वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय ने संत पेत्रुस एवं ग्रीक मेलकाईट काथलिक कलीसिया के बीच एकता का साक्ष्य दिया, जब संत पापा फ्राँसिस ने अंतियोख के प्रधिधर्माध्यक्ष यूसेफ एबसी के साथ ख्रीस्तयाग अर्पित किया, जो महान भ्रातृ प्रेम के लिए आपस के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर था।

संत पापा ने ख्रीस्तयाग के दौरान प्रवचन के स्थान पर आज के समारोह के अर्थ की व्याख्या की।

संत पापा ने कहा, “हमारे भाई प्राधिधर्माध्यक्ष यूसेफ के साथ यह मिस्सा प्रेरितिक एकता प्रदान करेगा। वे एक प्रचीन कलीसिया के धर्मपिता हैं तथा संत पेत्रुस का आलिंगन करने एवं उनसे कहने आये हैं कि मैं पेत्रुस के साथ हूँ।” आज के समारोह का अर्थ है, कलीसिया के धर्माचार्य का संत पेत्रुस के साथ आलिंगन। यह काथलिक धर्मशिक्षा के अन्दर, अपनी धर्मशिक्षा के साथ एक समृद्ध कलीसिया है, जिसकी अपनी अनोखी धर्मविधि और अपना विश्वासी समुदाय हैं। इस समय कलीसिया के बहुत सारे विश्वासियों को येसु के समान क्रूसित होना पड़ा है अतः हम इस ख्रीस्तयाग को मध्यपूर्व में पीड़ित एवं अत्याचार के शिकार लोगों के लिए करें जिन्हें अपना जीवन और अपनी धन-सम्पति छोड़ना पड़ रहा है क्योंकि उन्हें भगाया जाता है। संत पापा ने प्राधिधर्माध्यक्ष यूसेफ की प्रेरिताई के लिए भी प्रार्थना करने का आह्वान किया।

ख्रीस्तयाग के अंत में मेलकाईट कलीसिया के प्राधिधर्माध्यक्ष यूसेफ ने सामूहिक ख्रीस्तयाग के लिए ग्रीक मेलकाईट कलीसिया के सिनॉड की ओर से संत पापा फ्राँसिस को धन्यवाद। उन्होंने कहा, “मैं मिस्सा के दौरान हमारी कलीसिया के प्रति इस भ्रातृ प्रेम, भाईचारा के भाव एवं एकता से बहुत अधिक प्रभावित हूँ।” मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि इस ऐतिहासिक घटना को हम सदा अपने हृदय में संजोये रखेंगे। मैं इसका वर्णन नहीं कर सकता कि यह भाईचारा एवं एकता कितना सुन्दर है जो हम सभी ख्रीस्त के शिष्यों को एकता में बाँध कर रखता है।


(Usha Tirkey)

Advertisements

मानव तस्करी, मानवता के खिलाफ अपराध, संत पापा

In Church on February 13, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेन्टीन सभागार में मानव तस्करी के विरूद्ध विश्व प्रार्थना एवं चिंतन दिवस के प्रतिभागियों से मुलाकात की।

इतिहास में यह पहली बार था जब संत पापा ने मानव तस्करी के चंगुल से बचे लोगों अथवा मानव तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना एवं चिंतन दिवस के कुल 110 प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस वर्ष इस प्रार्थना सभा की विषयवस्तु युवाओं की आगामी धर्माध्यक्षीय धर्मसभा को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है।

मुलाकात में संत पापा ने प्रतिनिधियों के चार सवालों का उत्तर दिया। उन सवालों में दो मानव तस्करी के शिकार लोगों एवं दो युवाओं की ओर से थे। मानव तस्करी के शिकार लोगों की ओर से किये गये सवालों में संत पापा से प्रश्न किया गया था कि क्या समाज में आधुनिक युग की दासता को बढ़ावा देने वाली समस्याओं के सामने गहरे मौन का कारण अज्ञानता, वास्तविकता को स्वीकार नहीं करना एवं पाखंड हैं?

सवाल के उत्तर में संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि उन्होंने मानव तस्करी को मानवता के प्रति अपराध के रूप में, उसकी निंदा करने के किसी भी अवसर को जाने नहीं दिया है। संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि यह हर किसी की जिम्मेदारी है कि हम इन समस्याओं से जूझने का प्रयास करें और मानव तस्करी के शिकार लोगों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा एवं उनके परिवारों की रक्षा करें। इन बुराइयों को दूर करने में अपनी सहायता दें। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहन दिया कि वे मानव तस्करी के शिकार लोगों से मुलाकात करें।

क्या सुदूर क्षेत्रों के युवाओं की आवाज सिनॉड में सुनी जा सकती है इस सवाल के उत्तर में संत पापा ने कहा कि कलीसिया धोखे एवं लालच से हर किसी की रक्षा करना चाहती है। वह उन्हें मुक्त करना चाहती है और स्वतंत्र होने में उनकी सहायता करना चाहती है। अकसर देखा जाता है जो लोग धोखे में पड़ते हैं वे दूसरों पर विश्वास करने में कठिनाई महसूस करते हैं और इस तरह कलीसिया मुक्ति का अंतिम उपाय बनकर रह जाती है। संत पापा ने कहा कि मानव तस्करी के शिकार लोगों की मदद ठोस रूप में उनका साथ देते हुए एवं उन्हें कलीसिया में सुरक्षित स्थान देकर करनी चाहिए। संत पापा ने कहा कि सिनॉड धर्मसभा स्थानीय कलीसियाओं के लिए मिलकर काम करने हेतु एक अवसर है।

मुलाकात के अंत में संत बकिता की मध्यस्थता द्वारा मानव तस्करी के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना अर्पित की गयी।


(Usha Tirkey)

मौनसून से 60,000 रोहिंग्याई बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में

In Church on February 13, 2018 at 3:39 pm

बंगलादेश, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (रेई): संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि बँगला देश के कोक्स बाजार में जब मौनसून आयेगा, तब वहाँ रह रहे रोहिंग्याई बच्चों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति बदतर हो जायेगी। वर्षा ऋतु में बाढ़ और भूस्खलन के कारण करीब 1 लाख रोहिंग्याई शरणार्थियों का जीवन खतरे में होगा, जिनमें 60,000 बच्चे होंगे।

सबसे अधिक प्रभाव पेयजल एवं स्वच्छता पर पड़ेगा। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कोक्स बाजार के 3,000 से अधिक शौचालय एवं 4,000 पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ेगा। शौचालय का अभाव प्रदूषण में वृद्धि करेगा। इन मामलों में आवश्यकता है कि तुरंत पानी की जाँच की जाए और उसमें क्लोरीन डाली जाए। पानी एवं स्वास्थ्य संबंधी खतरों का बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि वे डायरिया एवं कोलेरा जैसी पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के संम्पर्क में आसानी से आ सकते हैं।

छोटे बच्चों को पानी में डूब कर मरने का भी खतरा बढ़ेगा, खासकर, जब वे अकेले खेल रहे होंगे। यूनिसेफ इस पर जागरूकता लाने की कोशिश कर रहा है।

बच्चों के लिए रोगाणुओं के सम्पर्क में आने का अधिक खतरा चक्रवात और मौनसून के समय में होता है। 7 जनवरी 2018 को, संदिग्ध डिप्थीरिया के 5,511 मामले पाए गए थे और जिसमें 38 लोगों की मौत हो गयी। इस बीमारी से प्रभावित होने वालों में 75 प्रतिशत बच्चे हैं जिनकी उम्र 15 वर्ष से कम है। फरवरी के पहले सप्ताह की जाँच में पाया गया है कि खसरा अब भी समाप्त नहीं हुआ है। जाँच में केवल 2018 में ही खसरा से पीड़ित 601 लोग मिले हैं।

इस तरह यूनिसेफ का कहना है कि समय कम है किन्तु काम बहुत अधिक। बच्चों की सुरक्षा के लिए यूनिसेफ मोबाईल मेडिकल टीम को प्रशिक्षण दे रही है ताकि जहां बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त है और जहाँ लोग सुदूर क्षेत्रों में रहते हैं वहाँ भी चिकित्सा सहायता प्रदान किया जा सके। बांग्लादेश में डायरिया बीमारी अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र डायरिया चिकित्सा केंद्र तैयार कर रहा है ताकि बीमारी का तत्काल सामना किया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस आबादी का करीब 60 फ़ीसदी हिस्सा बच्चे हैं यानि 5 लाख से ज़्यादा। ये शरणार्थी कैंप ठसाठस भरे हुए हैं जहां अब डिप्थीरिया जैसी ख़तरनाक बीमारी फैल रही है।


(Usha Tirkey)

बाल यौन शोषण के शिकार लोगों की चंगाई हेतु प्रार्थना एवं उपवास

In Church on February 13, 2018 at 3:37 pm

ऑस्ट्रेलिया, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): ऑस्ट्रेलिया के काथलिक, बाल यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों की चंगाई हेतु चार दिनों का उपवास करते हुए, बाल यौन शोषण के लिए पश्चाताप करेंगे।

ऑस्ट्रेलिया के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने काथलिक समुदाय से आह्वान किया है कि चालीसा के प्रथम चार दिन, कलीसिया में बाल यौन उत्पीड़न की ‘त्रासदी’ के लिए खेद व्यक्त करते हुए उपवास एवं सुधार कार्यों में व्यतीत किये जाएँ।

धर्माध्यक्षों द्वारा प्रकाशित धर्मपत्र में कहा गया है कि काथलिकों को अपने ही घरों एवं पल्लियों  में प्रार्थना करने हेतु प्रोत्साहन दिया जाता है कि वे व्यक्तिगत एवं सार्वजनिक दोनों रूपों में पीड़ित लोगों की चंगाई के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने 14 से 17 फरवरी तक विशेष प्रार्थना एवं धर्मविधि की भी घोषणा की है जिनमें पवित्र घड़ी, बेनेदिक्शन, पश्चाताप की धर्मविधि और कलीसिया की संध्या वंदना शामिल है।

धर्मपत्र में कहा गया है कि “उपवास के द्वारा हम पीड़ितों एवं यौन शोषण के शिकार लोगों के साथ एकात्मता व्यक्त करते हैं जिन्हें अपने जीवन में चंगाई एवं शांति की तलाश है। सुधार के द्वारा हम कलीसिया के पापों के लिए क्षतिपूर्ति करना चाहते हैं जिसने बच्चों का शोषण किया अथवा उन्हें सुनने और उनकी मदद करने में असफल रही।” आगे कहा गया है कि ये आध्यात्मिक अभ्यास, ईश्वर के साथ मेल-मिलाप करने एवं चंगाई की कृपा की अभिलाषा को व्यक्त करते हैं।

धर्माध्यक्षों ने पत्र में स्वीकार किया है कि कलीसिया के धर्मगुरूओं द्वारा क्षमा मांगना काफी नहीं है इसलिए नहीं कि उन्होंने ईमानदार पूर्वक क्षमा नहीं मांगी बल्कि इसलिए कि भरोसा तोड़ दिया गया है। हम अपने दृढ़-संकल्प के साथ यह सुनिश्चित करते हैं कि काथलिक कलीसिया में बच्चों का शोषण फिर कभी नहीं होगा तथा भरोसा का नया संबंध स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि “हम अतीत को पूर्ववत नहीं कर सकते बल्कि ईश्वर की सहायता से भविष्य को बेहतर अवश्य बना सकते हैं।”


(Usha Tirkey)

ख्रीस्तीयों एवं हिन्दूओं ने मिलकर करुणा के मिशनरी फा. मेरियन की याद की

In Church on February 13, 2018 at 3:36 pm

ओडिशा, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): ओडिशा के हजारों ख्रीस्तीयों एवं हिन्दूओं ने पोलैंड के मिशनरी फादर मरियन ज़ेलाजेक का जन्म दिवस मनाया जिन्होंने अपना जीवन ग़रीबों, हाशिये पर जीवन यापन करने वाले लोगों, कुष्ठ रोगियों, बच्चों एवं आदिवासियों के लिए समर्पित किया था।

कटक भुनेश्वर के महाधर्माध्यक्ष जॉन बरवा ने कहा कि फादर मरियन के 56 सालों के उत्साही मिशन ने विश्व को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि कोई भी समाज तभी उन्नति कर सकता है जब उस समाज के बीमार अथवा स्वस्थ, धनी अथवा गरीब, शिक्षित या अशिक्षित सभी का ख्याल रखा जाता है।

स्मृति दिवस का उत्सव पुरी के निष्कलंक गर्भागमन गिराजघर में मनाया गया जहाँ फादर मरियन ने अपने जीवन के अंतिम समय को व्यतीत किया था। उनकी मृत्यु 20 अप्रैल 2006 को हुई थी।

करीब 2,500 श्रद्धालुओं के साथ महाधर्माध्यक्ष बरवा ने ख्रीस्तयाग का अनुष्ठान किया जिसमें 45 पुरोहितों एवं 20 धर्मबहनों के साथ-साथ ख्रीस्तीय एवं हिन्दू भी उपस्थित थे।

समारोह में कई राजनीतिक नेता एवं कलीसियाई धर्मगुरू भी उपस्थित हुए जिनमें पोलैंड के राजदूत अदम बुराकोस्की प्रमुख थे।

समारोह के अंत में महाधर्माध्यक्ष ने फादर मेरियन की संत घोषणा प्रक्रिया की शुरूआत की भी घोषणा की। फादर मरियन ओडिशा में “बापा” (पिता) पुकारे जाते हैं। उनका सम्मान सभी लोग करते हैं।

पुरी के कुष्ठ रोग केंद्र ‘करुणालय’ जिसकी स्थापना फादर मेरियन ने की है, उसके महानिदेशक फा. बपतिस्त डीसूजा ने कहा, “अपने प्रयासों एवं कार्यों के द्वारा ‘बापा’ हमें अब भी प्रेरित करते हैं। वे उन सभी लोगों के हृदयों में बसते हैं जिन्हें वे प्यार करते। उनकी विरासत अमर है।”

इस महान मिशनरी का जन्म 30 जनवरी 1918 को पोलैंड में हुआ था।


(Usha Tirkey)

पवित्र आत्मा से प्रार्थना

In Church on February 13, 2018 at 3:34 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (रेई): पवित्र आत्मा ही हमें वह शक्ति एवं साहस प्रदान करता है जिसके द्वारा हम अपने जीवन में बुराइयों, प्रलोभनों एवं कठिनाईयों का सामना करते हुए आगे बढ़ सकते हैं। इतना ही नहीं वह हमें अपने विश्वास को दृढ़ता से जीने एवं उसे दूसरों को हस्तांतरित करने का भी सामर्थ्य प्रदान करता है।

संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र आत्मा से प्रार्थना करने का प्रोत्साहन देते हुए, 13 फरवरी के ट्वीट संदेश में लिखा, “हमारे विश्वास को हस्तांतरित करने के लिए हमें पवित्र आत्मा की आवश्यकता है। हम अकेले इसे नहीं कर सकते।”


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: