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मानव तस्करी, मानवता के खिलाफ अपराध, संत पापा

In Church on February 13, 2018 at 3:41 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 12 फरवरी को वाटिकन स्थित क्लेमेन्टीन सभागार में मानव तस्करी के विरूद्ध विश्व प्रार्थना एवं चिंतन दिवस के प्रतिभागियों से मुलाकात की।

इतिहास में यह पहली बार था जब संत पापा ने मानव तस्करी के चंगुल से बचे लोगों अथवा मानव तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रार्थना एवं चिंतन दिवस के कुल 110 प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस वर्ष इस प्रार्थना सभा की विषयवस्तु युवाओं की आगामी धर्माध्यक्षीय धर्मसभा को ध्यान में रखते हुए रखी गयी है।

मुलाकात में संत पापा ने प्रतिनिधियों के चार सवालों का उत्तर दिया। उन सवालों में दो मानव तस्करी के शिकार लोगों एवं दो युवाओं की ओर से थे। मानव तस्करी के शिकार लोगों की ओर से किये गये सवालों में संत पापा से प्रश्न किया गया था कि क्या समाज में आधुनिक युग की दासता को बढ़ावा देने वाली समस्याओं के सामने गहरे मौन का कारण अज्ञानता, वास्तविकता को स्वीकार नहीं करना एवं पाखंड हैं?

सवाल के उत्तर में संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि उन्होंने मानव तस्करी को मानवता के प्रति अपराध के रूप में, उसकी निंदा करने के किसी भी अवसर को जाने नहीं दिया है। संत पापा ने प्रोत्साहन दिया कि यह हर किसी की जिम्मेदारी है कि हम इन समस्याओं से जूझने का प्रयास करें और मानव तस्करी के शिकार लोगों के अधिकारों, उनकी सुरक्षा एवं उनके परिवारों की रक्षा करें। इन बुराइयों को दूर करने में अपनी सहायता दें। उन्होंने युवाओं को प्रोत्साहन दिया कि वे मानव तस्करी के शिकार लोगों से मुलाकात करें।

क्या सुदूर क्षेत्रों के युवाओं की आवाज सिनॉड में सुनी जा सकती है इस सवाल के उत्तर में संत पापा ने कहा कि कलीसिया धोखे एवं लालच से हर किसी की रक्षा करना चाहती है। वह उन्हें मुक्त करना चाहती है और स्वतंत्र होने में उनकी सहायता करना चाहती है। अकसर देखा जाता है जो लोग धोखे में पड़ते हैं वे दूसरों पर विश्वास करने में कठिनाई महसूस करते हैं और इस तरह कलीसिया मुक्ति का अंतिम उपाय बनकर रह जाती है। संत पापा ने कहा कि मानव तस्करी के शिकार लोगों की मदद ठोस रूप में उनका साथ देते हुए एवं उन्हें कलीसिया में सुरक्षित स्थान देकर करनी चाहिए। संत पापा ने कहा कि सिनॉड धर्मसभा स्थानीय कलीसियाओं के लिए मिलकर काम करने हेतु एक अवसर है।

मुलाकात के अंत में संत बकिता की मध्यस्थता द्वारा मानव तस्करी के शिकार लोगों के लिए प्रार्थना अर्पित की गयी।


(Usha Tirkey)

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