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मौनसून से 60,000 रोहिंग्याई बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में

In Church on February 13, 2018 at 3:39 pm

बंगलादेश, मंगलवार, 13 फरवरी 2018 (रेई): संयुक्त राष्ट्र ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि बँगला देश के कोक्स बाजार में जब मौनसून आयेगा, तब वहाँ रह रहे रोहिंग्याई बच्चों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की स्थिति बदतर हो जायेगी। वर्षा ऋतु में बाढ़ और भूस्खलन के कारण करीब 1 लाख रोहिंग्याई शरणार्थियों का जीवन खतरे में होगा, जिनमें 60,000 बच्चे होंगे।

सबसे अधिक प्रभाव पेयजल एवं स्वच्छता पर पड़ेगा। बाढ़ और भूस्खलन के कारण कोक्स बाजार के 3,000 से अधिक शौचालय एवं 4,000 पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ेगा। शौचालय का अभाव प्रदूषण में वृद्धि करेगा। इन मामलों में आवश्यकता है कि तुरंत पानी की जाँच की जाए और उसमें क्लोरीन डाली जाए। पानी एवं स्वास्थ्य संबंधी खतरों का बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि वे डायरिया एवं कोलेरा जैसी पानी से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के संम्पर्क में आसानी से आ सकते हैं।

छोटे बच्चों को पानी में डूब कर मरने का भी खतरा बढ़ेगा, खासकर, जब वे अकेले खेल रहे होंगे। यूनिसेफ इस पर जागरूकता लाने की कोशिश कर रहा है।

बच्चों के लिए रोगाणुओं के सम्पर्क में आने का अधिक खतरा चक्रवात और मौनसून के समय में होता है। 7 जनवरी 2018 को, संदिग्ध डिप्थीरिया के 5,511 मामले पाए गए थे और जिसमें 38 लोगों की मौत हो गयी। इस बीमारी से प्रभावित होने वालों में 75 प्रतिशत बच्चे हैं जिनकी उम्र 15 वर्ष से कम है। फरवरी के पहले सप्ताह की जाँच में पाया गया है कि खसरा अब भी समाप्त नहीं हुआ है। जाँच में केवल 2018 में ही खसरा से पीड़ित 601 लोग मिले हैं।

इस तरह यूनिसेफ का कहना है कि समय कम है किन्तु काम बहुत अधिक। बच्चों की सुरक्षा के लिए यूनिसेफ मोबाईल मेडिकल टीम को प्रशिक्षण दे रही है ताकि जहां बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त है और जहाँ लोग सुदूर क्षेत्रों में रहते हैं वहाँ भी चिकित्सा सहायता प्रदान किया जा सके। बांग्लादेश में डायरिया बीमारी अनुसंधान के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र के साथ-साथ, संयुक्त राष्ट्र डायरिया चिकित्सा केंद्र तैयार कर रहा है ताकि बीमारी का तत्काल सामना किया जा सके।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार इस आबादी का करीब 60 फ़ीसदी हिस्सा बच्चे हैं यानि 5 लाख से ज़्यादा। ये शरणार्थी कैंप ठसाठस भरे हुए हैं जहां अब डिप्थीरिया जैसी ख़तरनाक बीमारी फैल रही है।


(Usha Tirkey)

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