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धर्मसार और विश्वासियों के निवेदन प्रार्थना पर धर्मशिक्षा

In Church on February 14, 2018 at 4:33 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार,14  फरवरी 2018 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में विश्व के विभिन्न देशों से एकत्रित हुए तीर्थयात्रियों और विश्वासियों को पवित्र यूखारिस्त बलिदान के दौरान शब्द समारोह के उपरान्त धर्मसार और विश्वासियों के निवेदन प्रार्थना पर अपनी धर्मशिक्षा देते हुए कहा,

प्रिय भाइओ एवं बहनों, सुप्रभात।

बाईबल पाठ उपरान्त उपदेश हमारे लिए ईश्वर के वचनों को एक अमोल निधि स्वरूप लेकर आता है। ईश्वर अपने वचनों के द्वारा हम पुरोहितों और विश्वासियों, सभों के लिए अपना संदेश देते हैं। हम जो यूखारिस्त में सम्मिलित होते हैं, हम किसी भी उम्र और अपने जीवन के किसी भी परिस्थिति में क्यों न हों ईश्वर हम सभों के हृदय द्वारा को खटखटाते हैं। ईश्वर के वचन हमें सांत्वना प्रदान करते हैं, हमारे जीवन को नया बनाते और हमें मेल-मिलाप हेतु निमंत्रण देते हैं जिससे हम नये जीवन की शुरूआत कर सकें।

इस भांति उपदेश के उपरान्त, संत पापा ने कहा कि हमारे लिए एक मौन धारण का समय होता है जो ईश्वर के वचनों को हमारे हृदयों में बीज की भाँति ग्रहण करने में मददगार सिद्ध होता है। यह इसीलिए कि इसके द्वारा पवित्र आत्मा हमारे हृदयों में अपने वरदानों को भरना चाहते हैं।

मौन धारण के बाद हम कलीसिया के विश्वास को हम सभी व्यक्तिगत रुप में व्यक्त करते हैं। हमारे विश्वास की यह अभिव्यक्ति “धर्मसार” के रुप में पूरे समुदाय द्वारा घोषित की जाती है जो सामुदायिक रुप में ईश्वर के सुनाये गये वचनों के प्रति हमारे प्रतिउत्तर को व्यक्त करता है। संत पापा ने कहा कि यह हमारे लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है जो सुनने और हमारे विश्वास को जोड़ने का कार्य करता है। वास्तव में यह हमारे मन की उपज नहीं है, लेकिन जैसे कि संत पौलुस करते हैं, “इसकी उत्पति ईश्वर के वचनों को सुनने से होती है और सुनना येसु ख्रीस्त के वचनों को सम्मान देना है।” इस तरह हमारा विश्वास ईश्वर के वचनों को सुनने के द्वारा पोषित होता है और यह हमें संस्कार की ओर अग्रसित करता है। अतः धर्मसार की अभिव्यक्ति का अर्थ विश्वासी समुदाय द्वारा विश्वास के रहस्य पर चिंतन करना है जो हमें मिस्सा बलिदान अर्पित करने हेतु तैयार करता है।

संत पापा ने कहा कि यूखारिस्तीय बलिदान हमें अपने बपतिस्मा संस्कार से संयुक्त करता है जिसे हमने पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा ईश्वर के नाम पर ग्रहण किया है, जो हमें इस बात कि याद दिलाती है कि संस्कारों को हम कलीसियाई विश्वास के आधार पर समझ सकते हैं।

ईश्वर के सुने वचनों का प्रतिउत्तर विश्वास में हमारे निवेदन प्रार्थनाओं द्वारा होती है जिसे हम “वैश्विक प्रार्थना” की संज्ञा देते हैं क्योंकि यह कलीसिया और विश्व के सभी आवश्यकताओं को अपने में अंगीकृत करता है। यह विश्वासियों की प्रार्थना भी कहलाती है।

वाटिकन द्वितीय महासभा के आचार्यों ने इस प्रार्थना को प्रवचन के उपरान्त यथावत रखना चाहा विशेषकर रविवार और महोत्सवों के अवसर पर जिससे विश्वासियों की सहभागिता द्वारा पवित्र कलीसिया के अलावे हमारा मार्गदर्शन करने वालों, विभिन्न आवश्यकताओं में पड़े लोगों, सभी विश्वासियों और विश्व की मुक्ति हेतु प्रार्थना अर्पित की जा सके। इस तरह पुरोहित इसकी अगवाई और इसकी समाप्ति करते हैं। वहीं विश्वासी बपतिस्मा द्वारा प्राप्त अपने पुरोहितिक अधिकार का उपयोग करते हुए सभों की मुक्ति हेतु ईश्वर को अपनी निवेदन प्रार्थनाएं अर्पित करते हैं। हर एक व्यक्तिगत निवेदन प्रार्थना के बाद जिसे उपयाजक या विश्वासी चढ़ता है, पूरा समुदाय एक स्वर में ईश्वर से निवेदन करते हुए कहता है, “हे प्रभु हमारी प्रार्थना सुन” या इसी के समरूप कोई अन्य प्रार्थना उच्चरित की जाती है। यह वह प्रार्थना है जिसे विश्वासी बड़े भरोसे के साथ ईश्वर को चढ़ाते हैं। संत पापा ने कहा कि हमें बड़े ही विश्वास के साथ इस प्रार्थना को करना चाहिए जैसे कि हम इसे सुसमाचार में सुनते हैं। हमारे विश्वास के कारण ईश्वर हमारी माँगों को पूरा करते हैं।
संत पापा ने कहा कि वास्तव में हम येसु के उन वचनों की याद करें, “यदि तुम मुझ में रहो और मेरी शिक्षा तुम में बनती रहती है, तो चाहे जो मांगो, वह तुम्हें दिया जायेगा।” (यो.15, 7) हमारी वे मांगें जो हमें स्वर्ग की ओर अग्रसर नहीं करती वरन हमारे व्यक्तिगत स्वार्थ हेतु होती हैं ईश्वर के द्वारा नहीं सुनी जाती हैं। विश्वासीगण जिन्हें प्रार्थना हेतु निमंत्रण दिया जाता है उन्हें कलीसिया की सामुदायिकता और विश्व हेतु प्रार्थना करने की आवश्यकता है। उन्हें परंपरागत सूत्र और संकीर्ण सोच की प्रार्थना से अपने को दूर रखने की जरूरत है। “वैश्विक” प्रार्थना जो शब्द समारोह का अंतिम भाग है हमें ईश्वर की इच्छा को अपनी इच्छा बनाने की मांग करता है, जो अपने बच्चों की सुधि लेते हैं।
इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। उन्होंने विशेष रुप से युवाओं, रोगग्रस्त और नव विवाहितों का अभिवादन किया। संत पापा ने कहा कि आज राख बुध के साथ हम चालीसा काल की शुरूआत करते हैं। प्रिय युवाओ मैं आप से निवेदन करता हूँ कि आप इस कृपा के समय पिता के प्रेम में लौटें जो अपनी बाहों को खुला रखते हुए आप का इंतजार करते हैं। रोगग्रस्त विश्वासियों आप अपने जीवन के दुःखों को उनके मन फिराव हेतु अर्पित करें जो विश्वास से दूर हो गये हैं। और नव विवाहितों मैं आप को निमंत्रण देता हूँ कि आप अपने वैवाहिक जीवन, नये परिवार की नींव ईश्वर के प्रेम में स्थापित करें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्राँसिस ने सभी परिवारों पर येसु ख्रीस्त की शांति और खुशी की कामना की और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।


(Dilip Sanjay Ekka)

ब्राजील में भाईचारे अभियान हेतु संत पापा का संदेश

In Church on February 14, 2018 at 4:31 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार, 14 फरवरी 2018 (रेई) : ब्राजील में आज राख बुधवार के दिन दक्षिण अमरीकी देश (सीएनबीबी) के धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने ″ परंपरागत भाईचारे का अभियान 2018″ का आयोजन किया है। इस सममेलन की विषय-वस्तु है,”भाईचारा और हिंसा पर काबू पाना”  और इसका आदर्श वाक्य है, “आप सब के सब भाई हैं।”(मत्ती 23,8)

इस अवसर पर संत पापा ने ब्राजील की कलीसिया के लिए संदेश भेजा। संदेश में उन्होंने चालिसा काल में,  हिंसा से उबरने के लिए क्रोद्ध को वश में करने हेतु प्रोत्साहित किया। संत पापा फ्राँसिस यह मानते हैं कि  माफ करना “कभी-कभी” बहुत “मुश्किल” होता है, लेकिन वे आग्रह करते है कि “गुस्सा, क्रोध और बदले की भावना को छोड़ दें”, क्योंकि ये सभी हिंसा को दूर करने की आवश्यक शर्तें हैं।

ईश्वर का प्रेम सभी क्षेत्रों और अभिव्यक्तियों में दिखाई देता है।

संत पापा ने कहा कि ईश्वर का प्रेम हमारे बीच, हमारे परिवारों, हमारे समुदायों और समाज में तब दृश्यमान होता है जब हम अपने क्रोद्ध पर काबू पाते हुए हिंसा को रोकते हैं और हम शांति के संदेशवाहक बनते हैं। समाज में सभी लोगों के समग्र विकास का फल शांति है। यह प्रकृति के सभी प्राणियों के साथ नये संबंध स्थापित करने से आता है। दिन प्रति दिन धैर्य और दया के साथ, परिवारों और समुदायों की गतिविधियों में प्रेमपूर्ण संबंध बनाने से शांति स्थापित की जाती है। दैनिक जीवन में छोटी-छोटी बातों में जैसे एक-दूसरे का सम्मान करना, दूसरे की बातों को सुनना, मौन रहना और एक दूसरे को स्वीकार करने से भाईचारे को विकसित करने के लिए उपयुक्त वातावरण मिलता है।

मसीह में एक ही परिवार-

संत पापा ने कहा कि प्रभु येसु मसीह में हम एक परिवार बनाते हैं। मसीह चाहते हैं कि हम सभी परिपूर्ण जीवन प्रात करें (योहन10,10) मसीह द्वारा क्रूस पर बहाये रक्त में हमारा जन्म और हमारा उद्धार हुआ है। संत पापा आशा करते हैं कि अपारसिदा की माता मरियम की धत्रछाया में ब्राजील की कलीसिया “हिंसा के बिना सह-अस्तित्व के लिए मनपरिवर्तन और मुक्ति के दिन” की घोषणा कर सके।

अंत में संत पापा ने ब्राजील के धर्माध्यक्षों और लोगों को चालीसा काल की आशामय और फलदायी यात्रा की शुभकामनाएँ दी और उन्हें अपारसिदा की माता मरियम के संरक्षण में रखते हुए अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।


(Margaret Sumita Minj)

राख बुधवार को संत पापा का ट्वीट संदेश

In Church on February 14, 2018 at 4:30 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 14 फरवरी 2018 (रेई) : विश्वव्यापी काथलिक कलीसिया धर्मविधि के पंचांग अनुसार चालिसे की अवधि आज राख बुधवार से शुरु होती है। आज के दिन संत पापा फ्राँसिस ने ट्वीट प्रेषित कर सभी विश्वासियों ईश्वर के पास वापस लौटने के लिए अपने पापों को स्वीकार करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने संदेश में लिखा, “जब हम सच्चे हृदय और दीन मन से अपने पापों को स्वीकार करते है तो हमें क्षमा प्राप्त होती है और हम ईश्वर और हमारे भाइयों एवं बहनों के साथ फिर से संबंध स्थापित करते हैं।”

विदित हो कि संत पापा फ्राँसिस येसु मसीह के दुःखभोग के चालीसाकाल की शुरुआत आज संध्या साढ़े चार बजे रोम स्थित अवेंतीनो के संत अनसेल्मो गिरजाघर से कार्डिनलों, महाधर्माध्यक्षों, धर्माध्यक्षों, संत अनसेल्मो के बेनेदिक्त मठवासियों, संत सबीना के पुरोहितों और कुछ लोकधर्मियों के साथ प्रायश्चित जुलूस करते हुए संत सबिना महागिरजाघर प्रस्थान करेंगे। जुलूस के अंत में शाम पाँच बजे संत पापा फ्राँसिस समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान राख की आशीष और विश्वासियों पर राख मलन की धर्मविधि का अनुष्ठान करेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा ने आमदर्शन समारोह से पहले बीमारों से मुलाकात की

In Church on February 14, 2018 at 4:28 pm

वाटिकन सिटी, बुधवार 14 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 14 फरवरी को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में आयोजित आमदर्शन समारोह में जाने से पहले वाटिकन के संत पौल छठे सभागार में बीमारों से मुलाकात की।

संत पापा ने उनसे कहा,” आप सभी यहाँ आमसभा में भाग लेने आये हैं इसलिए मैं आप सभी को धन्यवाद देता हूँ और संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में समारोह में जाने से पहले मैं आप लोगों को अपना प्ररितिक आशीर्वाद देता हूँ। आप यहाँ रहकर बड़े परदे में समारोह को देख सकते हैं और प्राँगण के लोग भी परदे में आप लोगों को देख सकेंगे। इस बारिस में आप लोगों के लिए यहाँ अच्छा है।” इतना कहकर संत पापा ने उनके साथ प्रणाम मरिया प्रार्थना का पाठ किया और उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

इसके बाद संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन समारोह हेतु संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण की ओर प्रस्थान किये।


(Margaret Sumita Minj)

कार्डिनल ज़ेनारी ने सीरिया के पीड़ितों को नहीं भूलने आग्रह किया

In Church on February 14, 2018 at 4:26 pm

वाटिकन रेडियो, बुधवार 14 फरवरी 2018 (वीआर,रेई) : वाटिकन के प्रतिनिधि कार्डिनल मारियो ज़ेनारी ने दमास्कुस में सीरिया के पीड़ितों को नहीं भूलने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है।

वाटिकन समाचार पत्र ‘ओसरवातोरे रोमानो’ के लिए पत्रकार नाथान मोरले ने राजदूत कार्डिनल मारियो ज़ेनारी के साथ हुए साक्षात्कार में बताया कि देश में बढ़ती स्वास्थ्य आपातकालीन और भोजन की कमी है। उन्होंने कहा कि 7 वर्षों से लगातार हिंसा का मतलब है कि लोग निरंतर डर के माहौल में रहते हैं, कई परिवार अपने घर छोड़ने या अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं।

दमास्कुस सरकार ने मंगलवार को कहा कि इजराइल अगर सीरिया के इलाके पर हमला करता है तो उसे “अधिक आश्चर्य” का सामना करना पड़ेगा। यह टिप्पणी उस समय की गई जब सीरिया के वायु सुरक्षा ने इस्राइली जेटफाईटर को गोली मार दी।

सीरिया की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने इसराइली कार्रवाई को उसकाने वाला पाया और एक से अधिक विमान को निशाना बनाया। सीरिया में इसराइली हमले असामान्य नहीं हैं। लेकिन इसराइली लड़ाकू जेट को मार गिराने जैसी गंभीर बात पहली बार हुई है।

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हिंसा को तत्काल रोकने को कहा क्योंकि इससे नागरिक लगातार पीड़ित हो रहे हैं। उन्होंने बिगड़ती मानवतावादी संकट की चेतावनी दी क्योंकि देश में संघर्ष का एक  क्रूर रुप देखा जा रहा है।

सीरिया में इस्लामिक राज्य के विरुद्ध प्रयासों के समर्थन में वॉशिंगटन ने $ 200 मिलियन का आश्वासन दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री रॉक्स टिल्लरसन ने कुवैत में मंगलवार को शुरू हुए मीटिंग में इस्लामी स्टेट के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में वित्तीय वृद्धि की घोषणा की।


(Margaret Sumita Minj)

पाकिस्तान, वलेंटाइन डे: मुसलमानों के लिए प्रतिबंध, ख्रीस्तीयों के बीच विभाजन

In Church on February 14, 2018 at 4:25 pm

लाहौर,बुधवार 14 फरवरी 2018 (एशियान्यूज) : पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथोरिटी (पीईएमआरए) ने टीवी चैनलों को वलेंटाइन डे के दिन से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा देने से प्रतिबंधित कर दिया है। आज 14 फरवरी वलेंटाइन डे है।

अधिकांश मुसलमानों के लिए यह इस्लामिक सिद्धांत के विपरीत है। क्योंकि इस घटना को दुनिया भर में रोमांटिक प्रेम का त्योहार से जाना जाता है। एशिया न्यूज से बात करते हुए, कलीसिया के नेताओं ने इस मामले पर विवादित राय व्यक्त की।

लाहौर के अंगलिकन धर्माध्यक्ष इरफान जमील के अनुसार इस त्योहार का ख्रीस्तीय धर्म से कोई संबंध नहीं है “इसलिए इसके प्रतिबंध से कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रेम को वर्ष में केवल एक ही बार नहीं मनाया जाना चाहिए।”

इस्लामाबाद-रावलपिंडी के धर्मप्रांत के सामाजिक संचार आयोग के निदेशक फादर नासिर विलियम्स के पास अन्य विचार हैं।”प्रतिबंध अज्ञानता का अंतिम [रूप] है, विचारधारा की स्वतंत्रता पहले ही हमारे देश में सीमित है।”

उन्होंने कहा, “प्रेम कहानियों के आधार पर मोबाइल फोन जब्त किये जा रहे हैं या टीवी पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। कोई भी इन उपहारों को खरीदने के लिए लोगों को मजबूर नहीं कर रहा है। लोगों को नियंत्रित करने के प्रयासों या मीडिया के एक भाग को ब्लैकआउट करने से भी इसमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

वलेंटाइन डे तीसरी शताब्दी के एक ख्रीस्तीय शहीद के नाम पर रखा गया है। इस उत्सव ने मुसलमानों को विभाजित कर दिया है। हर साल, इस्लामी कट्टरपंथियों के समूह विरोध का आयोजन करते हैं और लोगों को दिन का जश्न नहीं मनाने का आग्रह करते हुए पर्चे बांटते हैं।

सोशल मीडिया के साथ ही ऑनलाइन और प्रिंट मीडिया पर लगाये गये प्रतिबंध का यह दूसरा वर्ष है। पिछले साल इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि “आधिकारिक स्तर पर और किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई समारोह आयोजित नहीं की जाएगी।”

फादर विलियम ने कहा कि काथलिक कलीसिया वलेंटाइन डे को नहीं मनाएगी क्योंकि इस वर्ष इसी दिन ‘राख बुधवार’ चालिसा का पहला दिन पड़ता है। “हम अवैध संबंधों को प्रोत्साहित नहीं करते हैं, पर लोगों को प्यार की आध्यात्मिकता को सीखने की आवश्यकता है।”


(Margaret Sumita Minj)

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