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Archive for February 15th, 2018|Daily archive page

मार्च एवं अप्रैल महीनों में संत पापा के धर्मविधि समारोहों की सूची

In Church on February 15, 2018 at 4:38 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 15 फरवरी 18 (रेई): वाटिकन ने आगामी मार्च एवं अप्रैल महीनों में संत पापा फ्राँसिस के धर्मविधिक अनुष्ठानों की जानकारी को प्रकाशित कर दिया है।

संत पापा की धर्मविधिक अनुष्ठानों की व्यवस्था करने वाली समिति के संचालक मोनसिन्योर ग्वीदो मरिनी ने 15 फरवरी को एक विज्ञाप्ति जारी कर संत पापा के कार्यक्रम की सूची प्रस्तुत की जिसके अनुसार,

मार्च में संत पापा के कार्यक्रम इस प्रकार होंगे –

09 मार्च, शुक्रवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में, संध्या 5.00 बजे पश्चाताप की धर्मविधि का  अनुष्ठान।

17 मार्च, शनिवार, संत जोवान्नी रोतोंदो में प्रेरितिक यात्रा।

25 मार्च, रविवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, प्रातः 10.00 बजे खजूर रविवार का

मिस्सा एवं प्रभु के दुःखभोग का पाठ जिसमें प्रभु के येरूसालेम प्रवेश की यादगारी मनायी जायेगी।

29 मार्च, पुण्य बृहस्पतिवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में, प्रातः 9.30 बजे क्रिज्मा मिस्सा का अनुष्ठान।

30 मार्च, पुण्य शुक्रवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में, संध्या 5.00 बजे प्रभु के दुःखभोग की धर्मविधि तथा शाम 9.15 बजे रोम के कोलोसेयुम में क्रूस रास्ता का नेतृत्व।

31 मार्च, पुण्य शनिवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर में शाम 8.30 बजे पास्का जागरण की धर्मविधि।

अप्रैल माह में संत पापा के कार्यक्रम –

1 अप्रैल, पास्का रविवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में, प्रातः 10.00 बजे पास्का महापर्व का ख्रीस्तयाग समारोह। उसके बाद 12.00 बजे संत पेत्रुस महागिरजाघर के मुख्य बरमदा से उरबी एत ओरबी संदेश एवं आशीष।

8 अप्रैल रविवार, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में प्रातः 10.30 बजे दिव्य करुणा के उपलक्ष्य में ख्रीस्तयाग एवं करुणा के मिशनरियों से मुलाकात।


(Usha Tirkey)

फ्लोरिडा के स्कूल में हुई गोलीबारी के शिकार लोगों को संत पापा की संवेदना

In Church on February 15, 2018 at 4:35 pm

अमरीका, बृहस्पतिवार, 15 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): अमरीका के फ़्लोरिडा राज्य में पार्कलैंड

के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में कम से कम 17 लोगों की मौत हो गई।

अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल दानिएल दिनार्दो ने एक वक्तव्य जारी कर गोलीबारी की घटना पर दुःख प्रकट करते हुए कहा, “जीवन के व्यर्थ और दुःखद नुकसान से अमरीका के धर्माध्यक्ष अत्यधिक दुखित हैं तथा उन सभी के लिए प्रार्थना का आह्वान करते हैं जो इस घटना से प्रभावित हैं।”

उन्होंने कहा, “ईश्वर की दया शोकित परिवारों को सांत्वना प्रदान करे तथा उनके घावों को चंगा कर दे। काथलिक तथा अन्य ख्रीस्तीय समुदाय, आज से चालीसा काल की शुरूआत करते हैं। मैं आप सभी को प्रोत्साहन देता हूँ कि प्रार्थना एवं तपस्या में एक होकर, हिंसा से प्रभावित लोगों की सांत्वना एवं चंगाई हेतु प्रार्थना करें, साथ ही साथ, उन लोगों के मन-परिवर्तन के लिए भी प्रार्थना करें जो उन हिंसक घटनाओं को अंजाम देते हैं ताकि हमारे समुदाय एवं देश में शांति स्थापित हो।

बीबीसी के अनुसार गोलीबारी के संदिग्ध का नाम निकोलस क्रूज़ बताया जा रहा है। 19 साल के निकोलस स्कूल के पूर्व छात्र हैं जिन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। निकोलस ने स्कूल में फायर अलॉर्म बजाया जिसे लेकर अफरा तफरी की स्थिति हो गई और उसके बाद उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दी। शेरिफ़ कार्यालय के मुताबिक़, “अब तक 14 पीड़ितों के बारे में जानकारी मिली है।”

अमरीका के फ़्लोरिडा राज्य में पार्कलैंड के स्कूल में हुई गोलीबारी से प्रभावित लोगों के प्रति संत पापा फ्राँसिस ने भी गहन संवेदना व्यक्त की।

संत पापा की ओर से वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने मियामी के महाधर्माध्यक्ष थॉमस गेरहार्ड वेनस्की को, 15 फरवरी को एक तार संदेश प्रेषित कर कहा, “पार्कलैंड के स्कूल में बोलीबारी की भयंकर घटना सुन संत पापा फ्राँसिस अत्यन्त दुःखी हैं। वे उन सभी लोगों को अपना आध्यात्मिक सामीप्य प्रदान करते हैं जो इस हमले की घटना से प्रभावित हैं तथा सर्वशक्तिमान से प्रार्थना करते हैं कि वे मृतकों को अनन्त शांति प्रदान करें, घायलों को चंगा करें और इस हिंसक आक्रमण के कारण शोकित सभी लोगों को सांत्वना प्रदान करें। यह आशा करते हुए कि ऐसी असंवेदनशील घटना फिर कभी न हो, वे सभी लोगों पर शांति एवं सामर्थ्य के दिव्य आशीष की कामना करते हैं।”


(Usha Tirkey)

मोतू प्रोप्रियो : इस्तीफा देना सीखें

In Church on February 15, 2018 at 4:34 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 15 फऱवरी 2018 (रेई): सन्त पापा फ्राँसिस ने, बृहस्पतिवार, 15 फऱवरी को “मोतू प्रोप्रियो”अर्थात् स्वप्रेरणा से रचित पत्र “इस्तीफा देना सीखें” की घोषणा कर, कलीसियाई पदों से इस्तीफा देने की तैयारी हेतु सलाह प्रस्तुत की।

सन्त पापा फ्राँसिस के “मोतू प्रोप्रियो”में उन लोगों के आंतरिक मनोभाव हेतु चिंतन प्रस्तुत किया गया है  “जिन्हें उम्र के कारण कलीसियाई पदों से इस्तीफा देना पड़ता है अथवा कई कारणों से उनके पदों को दीर्घकालीन किया जाता है।” संत पापा उन लोगों को निमंत्रण देते हैं जो नेतृत्व के पद से इस्तीफा देने की तैयारी कर रहे हैं कि वे प्रार्थना द्वारा आत्मजाँच करें और यह चिंतन करने का प्रयास करे कि आने वाले समय को वे किस तरह व्यतीत करेंगे। उसके लिए जीवन की एक नई परियोजना तैयार करें। उन लोगों के लिए जिनसे सेवा निवृत होने के उपरांत भी काम करने की मांग की जाती है संत पापा ने कहा कि यह परमधर्मपीठीय निर्णय स्वचालित नहीं है किन्तु यह शासन की क्रिया है और जिसके लिए विवेक की आवश्यकता है जो सही निर्णय लेने में मदद करेगा।

अपने इस “मोतू प्रोप्रियो” के माध्यम से संत पापा ने दो कानूनों पर परिवर्तन किया है। अपना इस्तीफा जमा करने के उपरांत व्यक्ति तब तक कार्यालय में रहेगा जब तक कि उसके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया जाता और उस निर्दिष्ट या अनिर्दिष्ट समय के लिए, व्यक्ति को सूचित नहीं कर दिया जाता। (अनुच्छेद  5) परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के विभिन्न परिषदों के अध्यक्ष जो कार्डिनल नहीं हैं तथा वे पुरोहित जो परमधर्मपीठीय कार्यालय में सेवारत हैं अथवा परमधर्मपीठ का प्रतिनिधित्व करते हैं उनका पद 75 साल पूरा होने पर स्वतः समाप्त नहीं होगा बल्कि, उन्हें सर्वोच्च अधिकारी के पास इस्तीफा पत्र जमा करना पड़ेगा, जो ठोस परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हुए फैसला करेगा। (अनुच्छेद  2, 3)

संत पापा ने मोतू प्रोप्रियो में कहा है कि वे उम्र सीमा के आधार पर इस्तीफा देने के समय एवं प्रणाली के नियम में नवीनीकरण लाने की आवश्यकता के प्रति सचेत हैं।


(Usha Tirkey)

चालीसा काल रूकने, देखने एवं ईश्वर की कोमलता की ओर लौटने का अवसर, संत पापा

In Church on February 15, 2018 at 4:31 pm

रोम, बृहस्पतिवार,15 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 14 फरवरी को रोम के संत सबीना महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित कर राखबुध मनाया। परम्परा के अनुसार ख्रीस्तयाग के पूर्व, संत अनसेलेम महागिरजाघर में पश्चाताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करने के उपरांत, संत पापा शोभायात्रा के साथ संत सबिना महागिरजाघर गये, जहाँ उन्होंने राख की आशीष की तथा उसे विश्वासियों के माथे पर अंकित कर राखबुध की धर्मविधि पूरी की।

प्रवचन में उन्होंने विश्वासियों को सचेत करते हुए उनका आह्वान किया कि वे अविश्वास, उदासीनता और इस्तीफा के दानव पर विजय पायें तथा उस पिता की ओर बिना भय वापस लौटें जो बाहें फैलाये बड़ी उत्सुकता से हमारा इंतजार करते हैं और जो करुणा के धनी हैं।

संत पापा ने कहा कि चालीसा काल थोड़ी देर रूककर येसु ख्रीस्त के सच्चे चेहरे को देखने एवं उसपर चिंतन करने का समय है जो हम प्रत्येक के प्रेम के खातिर क्रूसित हुए एवं अपने पिता के पास वापस लौटे।

राखबुध जिससे चालीसा काल की शुरूआत होती है संत पापा ने अपने प्रवचन में कहा, “चालीसा काल अपने हर परदे को हटाने, अपने हृदय को येसु के हृदय के साथ धड़कने देने एवं प्रलोभनों पर विजय पाने का एक उपयुक्त समय है।”

संत पापा ने चालीसा काल हेतु तीन मुख्य बिन्दुओं पर चिंतन किया- रूकना, देखना और लौटना।

उन्होंने कहा, “थोड़ी देर रूकें, अशांत एवं शोर-गुल को पीछे छोड़ें जो हमारी आत्मा को कड़वाहट से भर देते हैं। भाग-दौड़ के लिए मजबूर जीवन को थोड़ा विराम दें जो उसे बिखेरता, विभाजित करता और अंततः ईश्वर प्रदत्त उसके बहुमूल्य समय को नष्ट करता है।”

हम थोड़ी देर रूकें ताकि दिखावे की आवश्यकता महसूस करने और लगातार ‘सूचना पट्ट’ में प्रस्तुत होने से बच सकें जो हमें घनिष्ठता और स्मृति के मूल्य को भूलने के लिए मजबूर करता है।

थोड़ी देर रूकें कि अभिमानी दिखावे, क्षणभंगुर और अपमानजनक टिप्पणी से बच सकें जो कोमलता, दया और दूसरों के साथ मुलाकात में सम्मान को भूलने से उत्पन्न होते हैं, खासकर, उनके प्रति जो कमजोर, ठेस, पाप एवं गलती से चिह्नित हैं।

हम थोड़ी देर रूकें, सबकुछ पर नियंत्रित करने की इच्छाशक्ति से बचने, सबकुछ को जानने एवं नष्ट करने की प्रवृति से बचने के लिए, यह जीवन के उपहार एवं हमने जो अच्छी चीजें प्राप्त की हैं उनके लिए कृतज्ञता को नजरअंदाज करने से आता है।

थोड़ी देर रूकें, उस शोर से बचने के लिए जो हमारे हृदय को कमजोर और भ्रमित करता और जो हमें मौन के फलप्रद एवं रचनात्मक शक्ति को भूलने हेतु मजबूत करता है।

थोड़ी देर रूकें, निष्फल और अनुत्पादक विचारों को बढ़ावा देने वाले मनोभाव से बचने के लिए जो एकाकीपन और आत्मदया से उत्पन्न होता है जिसके द्वारा हम बाहर जाकर दूसरों के दुःख-दर्द को बांटना भूल जाते हैं।

थोड़ी देर रूकें, हर प्रकार के खालीपन से बचने के लिए जो तात्कालिक और क्षणिक है जो हमें अपने मूल से वंचित करता, अपने संबंधों, समुदाय के महत्व तथा हमारी जीवन यात्रा के प्रति चेतना को नष्ट करता है।

हम रूकें ताकि देख सकें और चिंतन कर सकें।

उन चिन्हों को देखें जो उदारता की कमी को दूर करते, जो विश्वास और आशा की लौ को प्रज्वलित रखते। हम उन्हें ईश्वर की कोमलता एवं हमारे बीच लोगों के अच्छे कार्यों में देखें।

हमारे परिवारों के चेहरों को देखें जो जीवन में आगे बढ़ने के लिए कठिन संघर्ष कर रहे हैं और जो अत्यधिक कठिनाइयों के बावजूद अपने घरों में प्रेम की शिक्षा देते हैं।

उन बच्चों एवं युवाओं के चेहरों को देखें जो भविष्य की आशा से भरे हैं जो समर्पण एवं सुरक्षा की मांग करता है।

वयोवृद्धों को देखें जिनके चेहरों पर समय के चिन्ह अंकित हैं जो हमारे पूर्वजों की जीवित स्मृति को प्रकट करते हैं। वे चेहरे ईश्वर की प्रज्ञा को प्रतिबिम्बित करते हैं।

रोगियों एवं उनकी देखभाल करने वालों के चेहरों को देखें जो अपनी नाजुक स्थिति में हमें याद दिलाते हैं कि हर व्यक्ति का मूल्य कभी कम नहीं किया जा सकता।

उन चेहरों को देखें जो पश्चाताप करते हुए अपने गलतियों में सुधार लाना चाहते हैं और जो अपने दुर्भाग्य एवं दुःख से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

क्रूसित प्रेम को देखें एवं उस पर चिंतन करें जो आज भी क्रूस से हमारे लिए आशा प्रदान करते हैं जिन्होंने स्वयं असफलता, निराशा एवं मुसीबत के बोझ का एहसास किया है।

क्रूसित ख्रीस्त के सच्चे चेहरे को देखें और उस पर चिंतन करें जिन्होंने सभी के प्रेम के खातिर दुःख भोगा। उनके चेहरे को देखना चालीसा काल में एक आशा भरा निमंत्रण है ताकि अविश्वास, उदासीनता और इस्तीफा की बुराई पर विजय पाया जा सके। वह चेहरा जो हमें यह घोषित करने के लिए निमंत्रण देता है कि “ईश्वर का राज्य संभव है।”

संत पापा ने कहा कि रूकें, देखें एवं लौटें। बिना भय पिता के घर लौटें जो खुली बाहों से उत्सुकता पूर्वक हमारा इंतजार करते हैं और जो करूणा के धनी हैं। बिना भय हम वापस लौटें ताकि उन लोगों के साथ उत्सव में शरीक हो सकें जिन्हें क्षमा किया गया है। ईश्वर की चंगाई एवं उनके मेल-मिलाप की कोमलता का अनुभव करने के लिए बिना भय लौटें ताकि ईश्वर हमारे पाप के घावों को चंगा कर दें एवं उस प्रतिज्ञा को पूरा करें जिसको उन्होंने हमारे पूर्वजों से किया था, “मैं तुम लोगों को एक नया हृदय दूँगा और तुम में एक नया आत्मा रख दूँगा। मैं तुम्हारे शरीर से पत्थर का हृदय निकालकर तुम लोगों को रक्त और मांस का हृदय प्रदान करूँगा।” (एजे. 36: 26)


(Usha Tirkey)

ईश्वर की कोमलता

In Church on February 15, 2018 at 4:29 pm

 

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 15 फरवरी 18 (रेई): ईश्वर सदा हमारे साथ रहते हैं। वे न केवल खुशी के क्षणों में किन्तु दुःख की घड़ियों में भी हमारा साथ नहीं छोड़ते हैं। वे हमारे पापों एवं कमज़ोरियों को माफ कर, हमें प्रेम से आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करते हैं जिसको हम कई बार महसूस नहीं कर पाते तथा कठिनाइयों में निराश होने लगते हैं।

संत पापा फ्राँसिस ने 15 फरवरी के ट्वीट संदेश में ईश्वर की कोमलता का एहसास करने का निमंत्रण दिया।

उन्होंने संदेश में लिखा, “हमारे दैनिक जीवन में हम ईश्वर की कोमलता का एहसास करें जो हमें प्रेम से हमारे पापों, भय एवं चिंताओं से मुक्त कर देते हैं।”


(Usha Tirkey)

चालीसा काल उपवास एवं दया के कामों को करने का अवसर, कार्डिनल ऑस्वल्ड

In Church on February 15, 2018 at 4:27 pm

मुम्बई, बृहस्पतिवार, 15 फरवरी 2018 (रेई): मुम्बई के ‘पवित्र नाम’ महागिरजाघर में बुधवार 14 फरवरी को राखबुध मनाने के लिए करीब 500 विश्वासियों ने भाग लिया।

मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष एवं सीबीसीआई के नये अध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस ने राखबुध की धर्मविधि का अनुष्ठान किया। इस अवसर पर अपने संदेश में उन्होंने विश्वासियों को स्मरण दिलाया कि यह आध्यात्मिकता में बढ़ने तथा उपवास करने एवं दान देने का अवसर है।

उन्होंने संदेश में कहा, “राखबुध के साथ 14 फरवरी को हमने चालीसा के कृपाओं से भरे एक विशेष काल की शुरूआत की जिसमें हमें निमंत्रण दिया जाता है कि हम प्रभु के दुःखभोग, मृत्यु और पुनरूत्थान पर चिंतन करें।”

कार्डिनल ने कहा “चालीसा काल 2018 के लिए अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस हमें स्मरण दिलाते हैं कि येसु हमें उस परिस्थिति की चेतावनी देते हैं जिसमें शिष्यों के समुदाय में झूठे नबी होंगे जो उन्हें भटकने एवं सुसमाचार के मूल, प्रेम के सदगुण में ठंढ़ा पड़ने हेतु प्रेरित करेंगे।

संत पापा के संदेश का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सहानुभूति एवं दया की भावना तथा प्रेम के फलों को कभी ठंढ़ा नहीं पड़ना चाहिए। चालीसा काल में विशेषकर, ख्रीस्तयाग और ईश वचन के पाठ, हमारे लिए आध्यात्मिक नवीनीकरण के माध्यम हैं, साथ ही साथ, कलीसिया हमें सलाह देती है कि हम अधिक प्रार्थना, पश्चाताप एवं उदारता के कार्यों द्वारा अपना आध्यात्मिक नवीनीकरण करें।

कार्डिनल ने उपवास एवं परहेज के लिए प्रोत्साहन देते हुए कहा, “मैं आप सभी को प्रोत्साहन देता हूँ कि पुरानी परम्परा को अपनाते हुए राखबुध एवं चालीसा काल के शुक्रवारों को मांस से परहेज करें। हमें प्रभु के प्रति उदार बनने की आवश्यकता है। पुण्य शुक्रवार को प्रभु के दुःखभोग की याद करते हुए न केवल चालीसा काल में किन्तु साल भर के हर शुक्रवार को मांस से परहेज रखें। यह समय मेल-मिलाप संस्कार में भाग लेने का भी अवसर है। हम पवित्र सप्ताह का इंतजार न करें किन्तु अभी ही मेल-मिलाप संस्कार में भाग लेकर प्रभु की कृपा को ग्रहण करें।

कलीसिया के नियम संख्या 1249 को उद्धृत करते हुए उन्होंने हरेक विश्वासी को तपस्या करने का निमंत्रण दिया तथा उन्हें प्रार्थना, दया और उदारता के कार्यों, अपने कामों को अधिक निष्ठा पूर्वक पूरा करने की सलाह दी खासकर, उपवास एवं परहेज के माध्यम से।


(Usha Tirkey)

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