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Archive for February 19th, 2018|Daily archive page

येसु हमारी प्यास बुझाना चाहते हैं, फादर होसे टोलेंटीनो मेंडोन्सा

In Church on February 19, 2018 at 4:28 pm

अरिच्चा, सोमवार,19 फरवरी 2018 (रेई) : अरिच्चा स्थित ‘कासा देल दिवीनो मायेस्त्रो’ आध्यात्मिक साधना केंद्र में सोमवार 19 फरवरी को संत पापा एवं रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक साधना के संचालक पुर्तगीज फादर होसे टोलेंटीनो मेंडोन्सा ने अपने प्रवचन के लिए उस वाक्यांश को चुना है कि प्रेरित योहन ने प्रकाशना-ग्रंथ के अंतिम अध्याय में येसु के मुँह से निकलती है।” जो प्यासा है वह आये।” (प्रकाशना, 22,17)

येसु बिना शर्त प्रेम करते हैं

फादर होसे ने कहा,”येसु अपने स्वयं की अपूर्णता में, अपने खालीपन में हमारे पास आते हैं वे हमारे सामने खड़े हैं और इस वाक्यांश को दोहराते है, जो प्यासा है वह आये।”  येसु जीवन जल की बात करते हैं, वे बिना शर्त प्रेम करते हैं, वे जानते हैं कि हम अभी भी “अधूरे और पूर्णता के लिए कार्य कर रहे हैं।” फादर होसे सुझाव देते हुए कहा चूँकि यह येसु का अंतिम निमंत्रण है, हमें इसे स्वीकार करने की आवश्यकता है कि हम लोग प्यासे हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह है कि “हम कितने प्यासे हैं।”

प्यास एक शिक्षक है

जैसा कि किसी भी निर्जलित व्यक्ति का इलाज पानी है। अमेरिकी कवि एमिली डिकिन्सन का हवाला देते हुए फादर ने कहा, “प्यास से पानी की महत्ता सिखायी जाती है।” उन्होंने सवाल किया कि “क्या हम हमारे प्यास को जागरूकता का एक स्कूल बना सकते हैं ? अपनी और ईश्वर के प्रति जागरुकता।” हमारे प्यास में कोई शक नहीं है क्योंकि यह “दर्दनाक है।”  येसु हमारे “अस्तित्व के सबसे गहरा आयामों के बारे में बातचीत करने के लिए हमें आमंत्रित किया है, ताकि हम हर मानव में उस प्यास : रिश्ता, स्वीकृति और प्यार के लिए प्यास” को पूरा कर सकें।


(Margaret Sumita Minj)

आध्यात्मिक साधना हेतु संत पापा अरिच्चा में, येसु के प्यास की खोज

In Church on February 19, 2018 at 4:27 pm

अरिच्चा, सोमवार,19 फरवरी 2018 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के साथ रविवार 18 फरवरी पूर्वाहन को साप्ताहिक आध्यात्मिक साधना  के लिए रोम से बाहर अरिच्चा स्थित ‘कासा देल दिवीनो मायेस्त्रो’ आध्यात्मिक साधना केंद्र हेतु प्रस्थान किया।

संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक साधना का संचालन पुर्तगाल स्थित लिस्बन काथलिक विश्वविद्यालय के वाइस-रेक्टर और संस्कृति हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के सलाहकार फादर होसे टोलेंटीनो मेंडोन्सा कर रहे हैं।  आध्यात्मिक साधना हेतु विषय वस्तु है “प्यास की प्रशंसा”

रविवार शाम को संचालक फादर फादर जोस तोरेनतीनो ने आध्यात्मिक साधना के पहले ध्यान चिंतन के लिए संत योहन के सुसमाचार से उस भाग को लिया जहाँ याकुब के कुँए पर समारी स्त्री से येसु की मुलाकात होती है। (योहन 4.5-24)

याकुब के कुँए पर बैठे येसु ने समारी स्त्री से पानी मांगा। एक यहूदी का सामारी स्त्री से बातें करना और पानी मांगना एक आश्चर्यजनक और यहुदियों के लिए बड़ी ही शर्मिंदगी की बात है। आज येसु हमसे मांग करते हैं और कहते हैं “जो कुछ भी तुम्हारे पास है उसे मुझे दे दो। अपना दिल खोलो, मुझे बताओ कि तुम क्या हो।”

येसु का अनुरोध हमें परेशानी में डालता हैं क्योंकि हम उनसे पानी मांगने आये हैं। हम प्यासे हैं और इस प्यास को बुझाने के लिए कड़ी मेहनत और इच्छा की जरुरत है। फादर जोस ने कहा कि जो लोग दूसरों से कुछ पाने के लिए बैठे रहते हैं वे भिखारी हैं। दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद थकान का अनुभव करते हैं। येसु भी एक तरह से भिखारी हैं। उन्हें भी दूसरे के प्रेम और देखभाल की जरुरत थी। “न केवल मनुष्य है जो ईश्वर का भिखारी है। “ईश्वर भी मनुष्य का भिखारी है”।

अपनी कमजोरी के साथ वे हमारी तलाश करने आये

अपनी कमजोरी के साथ, येसु “हमें ढूंढ़ने आये” “सबसे कमजोर और हमारी कमजोरी के नींद में, आइए हम येसु की प्यास को समझें”। यह पानी की प्यास नहीं है,  इससे बहुत बड़ी है: यह “हमारे घावों के संपर्क में आने के लिए हमारी सीमाओं तक पहुंचने की प्यास है” “। वे हमसे पूछते है: “मुझे पानी दे दो।”

येसु खुद हमारे पास आते हैं वे हमसे मिलने की पहल करते हैं जैसा कि उन्होंने समारी स्त्री से किया था। जब येसु ने स्त्री को ज़िंदगी के सच्चाई को बताया, “यह उसे अपमानित या विवस करने के लिए नहीं। सच्चाई बताकर प्रभु ने उसे मुक्त किया। उसे प्रभु का अनुग्रह प्राप्त हुआ।

फादर जोस ने कहा कि ईश्वर जानते हैं कि हम उनके सामने हैं इन दिनों आइये हम प्रभु के लिए अपना दिल खोल दें प्रभु हमसे कहते हैं : “मैं सिर्फ तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं, तुम मुझे क्या दे रहे हो।”

संचालक फादर जोस ने कहा कि सोमवार 19 फरवरी से शुक्रवार 23 फरवरी तक आध्यात्मिक साधना का कार्यक्रम आस प्रकार होगीः

प्रातः 7.30 बजे पवित्र मिस्सा समारोह होगा, 9,30 बजे पहला उपदेश तथा शाम 4 बजे दूसरा उपदेश होगा। इसके बाद संध्या प्रार्थना और पवित्र साक्रामेंत की आराधना होगी।


(Margaret Sumita Minj)

आध्यात्मिक साधना की शुरुआत में संत पापा ने प्रार्थना का आग्रह किया

In Church on February 19, 2018 at 4:25 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार,19 फरवरी 2018 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के साथ रविवार 18 फरवरी से साप्ताहिक आध्यात्मिक साधना में भाग लेंगे।

संत पापा ने रविवार को ट्वीट प्रेषित कर आध्यात्मिक साधना की सफलता हेतु सभी विश्वासियों से प्रार्थना का अपील की। संदेश में उन्होंने लिखा,” मैं आप सभी को चालिसे की सफल यात्रा की शुभकामनाएं देता हूँ तथा आपसे मैं मेरे और मेरे सहयोगियों के लिए प्रार्थना का आग्रह करता हूँ क्योंकि हम आज से हम आध्यात्मिक साधना सप्ताह की शुरूआत करते हैं।”

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के पश्चात् विश्वासियों को अपने वार्षिक आध्यात्मिक साधना का स्मरण दिलाया तथा उनसे अपने एवं अपने सहयोगियों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया। संत पापा ने कहा,” मैं आप सभी से मेरे और रोमी कार्यालय के सहयोगियों को अपनी प्रार्थना में याद करने का आग्रह करता हूँ, इस शाम से हम साप्ताहिक आध्यात्मिक साधना शुरू करेंगे।”

गौरतलब है कि आध्यात्मिक साधना हर साल चालीसा काल के प्रथम सप्ताह में की जाती है तथा इस अवधि में संत पापा के सभी मुलाक़ातों समेत साप्ताहिक आमदर्शन समारोह स्थगित रहते हैं।

आध्यात्मिक साधना समाप्त कर संत पापा शुक्रवार को वाटिकन लौटेंगे।


(Margaret Sumita Minj)

मैं धर्मसभा में युवाओं की अधिकाधिक सहभागिता की अपेक्षा करता हूँ, संत पापा

In Church on February 19, 2018 at 4:24 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार,19 फरवरी 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 18 फरवरी के संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में हजारों की संख्या में उपस्थित तीर्थयात्रियों और विश्वासियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। इसके उपरांत उन्होंने विश्व के युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से पूर्व-धर्मसभा की प्रारंभिक बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। धर्मसभा का विषय है ‘विश्वास और बुलाहट पर आत्म-परख’

संत पापा ने कहा, “अक्टूबर में होने वाले धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की तैयारी हेतु मार्च महीने में पूर्व-धर्मसभा की प्रारंभिक बैठक में भाग लेने के लिए पूरे विश्व से 300 युवा रोम आयेंगे। परंतु मेरी दिली तमन्ना है कि सभी युवा लोग इस प्रारंभिक बैठक में अपनी सहभागिता दिखायें। वे कुछ युवा लोगों द्वारा संचालित विभिन्न भाषा समूहों के माध्यम से ऑनलाइन योगदान करने में सक्षम होंगे।” संत पापा धर्माध्यक्षीय धर्मसभा के महासचिव, कार्डिनल लोरेन्जो बालदीसेरी के निर्देशन में सचिवालय द्वारा तैयार किये गये एक पहल की बात कर रहे थे। धर्मसभा के वेब साइट के फेसबुक से युवा लोग जुड़ सकेंगे और 12 मार्च से विभिन्न भाषा समूह पेज पर सवाल पोस्ट किये जाएंगे। युवाओं द्वारा भेजे जवाबों को रोम में बैठक के योगदान में जोड़े जाएंगे।

सोशल मीडिया ने यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है कि युवा लोगों की आवाज़ आगामी धर्मसभा में सुनाई दे, जिसमें फेसबुक, ट्विटर, और इंस्टाग्राम खातों की सुविधा है।

(Margaret Sumita Minj)

संत पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों के संरक्षण आयोग में नए सदस्यों की नियुक्ति की

In Church on February 19, 2018 at 4:11 pm

वाटिकन सिटी, सोमवार,19 फरवरी 2018 ( वीआर) : संत पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों के संरक्षण हेतु बने परमधर्मपीठीय आयोग में विश्व के सभी क्षेतों से 9 नये सदस्यों सहित 16 सदस्यो को नियुक्त किया।

संत पापा फ्राँसिस ने नाबालिगों के संरक्षण के लिए परमधर्मपाठीय आयोग (पीसीपीएम) की सदस्यता का नवीकरण किया है, आयोग के अध्यक्ष के रूप में कार्डिनल सीन ओ’मेल्ली और सलाहकार बोर्ड में नौ नए सदस्यों को शामिल किया। संत पापा ने आयोग के सात सद्सयों को पुनः नियुक्त किया जिनकी सदस्यता दिसंबर में समाप्त हो गई थी।

कार्डिनल ओ-मेल्ली ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, “संत पापा ने इन सदस्यों को नामांकित करने में  प्रार्थना और काफी सोच-विचार किया है। नवनियुक्त सदस्य नाबालिगों और कमजोर वयस्कों के संरक्षण में आयोग के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में जोड़ दिये जाएंगे। कार्डिनल ओ-मेल्ली ने कहा कि संत पापा ने हमारे आयोग के काम में निरंतरता सुनिश्चित की है, जिसका कार्य सभी बच्चों, युवा लोगों और कमजोर वयस्कों को संरक्षण देने के अपने प्रयासों में स्थानीय कलीसियाओं की सहायता करना है।” नए सदस्यों में कई विशेषज्ञ अंग्रेजी बोलने वाले देशों से हैं, अस्ट्रेलिया से नेविल्ले ओवान, ग्रेट बृटेन से सिस्टर जेन बर्टल्सन, एफएमडीएम और संयुक्त राज्य अमेरिका से सुश्री तेरेसा केटलकैम्प।

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि आयोग में 8 पुरुष और 8 महिलायें हैं जिन्हें “बच्चों और कमजोर वयस्कों की यौन शोषण की सुरक्षा हेतु बहु-अनुशासनिक क्षेत्र से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को” चुना गया। “सदस्य कई अलग-अलग देशों से आते हैं,” जो कलीसिया की वैश्विक पहुंच और विविध सांस्कृतिक संदर्भों में संरचनाओं की रक्षा करने की चुनौती को दर्शाती है।”

प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आयोग के कई सदस्य खुद याजकों के यौन शोषण के शिकार हैं हालांकि, पीसीपीएम पीडि़तों की गोपनीयता का सम्मान करती है  और नामित लोगों ने अपने अनुभवों के बारे सार्वजनिक रूप से बात नहीं करने का चयन किया है।


(Margaret Sumita Minj)

इस वर्ष पापा पौल छठे संत घोषित किये जायेंगे, संत पापा फ्राँसिस

In Church on February 19, 2018 at 4:10 pm

रोम, सोमवार,19 फरवरी 2018 (वीआर) : संत पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को संत जोन लातेरन महागिरजाघर में रोम के पल्ली पुरोहितों से मुलाकात के दौरान इस वर्ष पापा पौल छठे के संत घोषणा के बारे संकेत किया।

संत पापा ने कहा “रोम के दो धर्माध्यक्ष हाल के वर्षो में संत बने हैं ” उन्होंने संत पापा जोन 23वें और संत पापा जॉन पॉल द्वितीय का जिक्र किया।  80 से अधिक पापा काथलिक कलीसिया द्वारा संतों के रूप में पहचाने गये हैं। पापा पियूस ग्यारहवें और पापा पौल छठे को धन्य घोषित किया गया है और पापा पियुस बारहवें के ‘साहसिक गुणों’ को मान्यता मिल गई है जो उन्हें प्रभु सेवक का सम्मान देती है। पापा जॉन पॉल प्रथम भी प्रभु सेवक हैं।

संत पापा ने मजाक करते हुए कहा, “मैं और सेवानिवृत पापा बेनेदिक्त सोलहवें भी प्रतीक्षा सूची में हैं, हमारे लिए प्रार्थना करें।”

‘परिवार पर असाधारण धर्मसभा’ के समापन समारोही ख्रीस्तयाग के दौरान उन्होंने पापा पौल छठे को धन्य घोषित किया था। संत पापा फ्राँसिस ने अपने पूर्ववर्ती परमाध्यक्ष जॉन छठे को एक “महान परमाध्यक्ष” और एक “अथक प्रेरित” कहा, उन्होंने “मसीह और उनकी कलीसिया के लिए नम्रता और साहस के साथ प्रेम और प्रेरितिक साक्ष्य दिया।”

पापा पौल छठे ने “एक धर्मनिरपेक्ष और प्रतिकूल समाज के आगमन से पहले, दूरदृष्टि और विवेक के साथ संत पेत्रुस के जहाज की पतवार को मजबूती से पकड़ा था। उसने खुशी और ईश्वर में अपना भरोसा कभी नहीं खोया।” पापा पौल छठे ने येसु ख्रीस्त के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए जीवन भर काम किया। उन्होंने माता कलीसिया की प्रेमपूर्वक अगुवाई की जो उस समय पूरे मानव परिवार की प्यारी माँ और लोगों का उद्धार करने में सहायक थी।”


(Margaret Sumita Minj)

चालीसा का प्रथम रविवार, प्रलोभन, मन-परिवर्तन एवं सुसमाचार पर चिंतन

In Church on February 19, 2018 at 4:08 pm


वाटिकन सिटी, सोमवार, 19 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 18 फरवरी को, संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।”

“चालीसा के इस प्रथम रविवार का सुसमाचार पाठ प्रलोभन, मन-परिवर्तन एवं शुभ समाचार की विषयवस्तु का स्मरण दिलाता है। सुसमाचार लेखक मारकुस लिखते हैं, “इसके बाद आत्मा ईसा को निर्जन प्रदेश ले चला। वह चालीस दिन वहाँ रहे और शैतान ने उनकी परीक्षा ली।” (मार 1: 12-13)

संत पापा ने कहा, “येसु दुनिया में अपने मिशन की तैयारी हेतु निर्जन प्रदेश जाते हैं। उन्हें मन- परिवर्तन की आवश्यकता नहीं थी किन्तु एक मनुष्य के रूप में, अपनी एवं पिता की इच्छा पूरी करने और हमारे लिए कृपा प्रदान करने के लिए उन्हें परीक्षा से होकर गुजरना था ताकि हम प्रलोभन से बच सकें। इस तैयारी का अर्थ है बुराई की आत्मा से संघर्ष करना अर्थात् शैतान के विरूद्ध संघर्ष। हमारे लिए भी चालीसा काल एक आध्यात्मिक संघर्ष का समय है। इस दरमियान हम प्रार्थना के द्वारा बुराई का सामना करने एवं ईश्वर की सहायता से हमारे दैनिक जीवन में उससे ऊपर उठने के लिए बुलाये जाते हैं। हम जानते हैं कि दुर्भाग्य से बुराई हमारे जीवन एवं हमारे आसपास क्रियाशील है जहाँ हिंसा, दूसरों का तिरस्कार, बंदी, युद्ध और अन्याय किया जा रहा है।

निर्जन प्रदेश में प्रलोभन के तुरन्त बाद, येसु सुसमाचार का प्रचार करना आरम्भ करते हैं। सुसमाचार व्यक्ति से मन-परिवर्तन एवं विश्वास की मांग करता है। येसु घोषणा करते हैं, “समय पूरा हो चुका है। ईश्वर का राज्य निकट आ गया है।” उसके बाद वे निमंत्रण देते हैं, “पश्चाताप करो और सुसमाचार में विश्वास करो।”(पद. 15)

उस सुसमाचार पर विश्वास करना कि ईश्वर का राज्य निकट आ गया है, हमारे जीवन में हमेशा और हर दिन मन-परिवर्तन की मांग करता है, कलीसिया हमें इसके लिए प्रार्थना करने हेतु प्रेरित करती है। वास्तव में, हम कभी भी ईश्वर की ओर पर्याप्त उन्मुख नहीं होते, अतः हमें अपने मन और हृदय को लगातार उनकी ओर मोड़ना चाहिए। इसके लिए हमें उन सभी चीजों का बहिष्कार करने के साहस की आवश्यकता है जो हमें उनसे दूर भटकाते हैं। वे हमारे स्वार्थ के द्वारा चुपके से आकर्षित कर हमें झूठे मूल्य के द्वारा धोखा देते हैं। जबकि हमें प्रभु पर, उनकी अच्छाई एवं हम प्रत्येक के लिए उनके प्रेम की योजना पर भरोसा रखना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि यह पश्चाताप की घड़ी है किन्तु उदास होकर विलाप करने का नहीं। यह सहर्ष एवं गंभीर समर्पण का, हमारे पुराने स्वभाव से लड़ने तथा बपतिस्मा की कृपा के अनुसार अपने आप के नवीकरण का समय है।

ईश्वर ही केवल हमें सच्ची खुशी प्रदान कर सकते हैं। यह व्यर्थ ही है कि हम उन्हें धन, सुख, सत्ता और पद आदि में खोजने का प्रयास करते हैं। ईश्वर का राज्य हमारी सबसे गहरी और वास्तविक आकांक्षाओं की पूर्ति है क्योंकि इससे एक ही समय में मानव की मुक्ति एवं ईश्वर की महिमा प्रकट होती है।

संत पापा ने कहा कि चालीसा काल के इस रविवार को हम मन-परिवर्तन हेतु येसु के आह्वान को ध्यान पूर्वक सुनें एवं सुसमाचार में विश्वास करें। हम पास्का की ओर यात्रा आरम्भ करने हेतु समर्पित होने के लिए प्रेरित किये जाते हैं ताकि हम ईश्वर की कृपा को ग्रहण कर सकें जो दुनिया को न्याय, शांति और भाईचारा के राज्य में बदलना चाहते हैं।

संत पापा ने चालीसा काल में ईशवचन के प्रति विश्वस्त बने रहने हेतु माता मरियम से प्रार्थना करने का आह्वान करते हुए कहा, “अति निष्कलंक मरियम इस चालीसा में ईशवचन के प्रति निष्ठावान बने रहने एवं निरंतर प्रार्थना करने में मदद दे, जैसा कि येसु ने निर्जन प्रदेश में किया। उस प्रेम का स्वागत करने की प्रबल चाह महत्वपूर्ण है जो ईश्वर से आता तथा हमारे जीवन एवं समस्त विश्व के जीवन को बदलना चाहता है।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने विभिन्न सूचनाएँ जारी करते हुए कहा, “एक महीने के अंदर 19 से 24 मार्च तक पूरे विश्व से करीब 300 युवा रोम में एकत्रित होंगे जो अक्तूबर में होने वाले सिनॉड की तैयारी हेतु आयोजित सभा में भाग लेंगे। मेरी तीव्र अभिलाषा है कि सभी युवा इस तैयारी के मुख्य पात्र बनें ताकि दूसरे युवा, विभिन्न भाषा के दलों के माध्यम से ऑनलाइन जुड़ सकें। नेटवर्क दलों के सहयोग से रोम की सभा में भाग लेने वाले युवा अपना योगदान दे सकेंगे। संत पापा ने युवाओं को सम्बोधित कर कहा, “प्रिय युवाओ, आप धर्माध्यक्षों के सिनॉड के सचिवालय के वेबसाईट पर जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं। आपके सहयोग के लिए धन्यवाद।

तदुपरांत संत पापा ने परिवारों, पल्ली दलों, संगठनों एवं सभी तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया जो इटली एवं विश्व के विभिन्न देशों से संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में एकत्रित थे। उन्होंने मुर्चा, वान्नेस, वार्साव एवं रोक्लो के विश्वासियों का अभिवादन किया।

इसके बाद संत पापा ने पुनः स्मरण दिलाते हुए कहा कि चालीसा के आरम्भ में जिसको मैंने मन परिवर्तन एवं बुराई से लड़ने की एक यात्रा कहा, मैं कैदियों को अपना विशेष अभिवादन भेजता हूँ। उन्होंने कहा, “प्रिय भाइयो एवं बहनो जो कैदखाने में हैं, मैं आप प्रत्येक को प्रोत्साहन देता हूँ कि आप चालीसा काल के इस समय को प्रभु की दयादृष्टि में मेल-मिलाप एवं अपने जीवन के नवीनीकरण के अवसर के रूप में लें। वे क्षमा करने से कभी नहीं थकते।”

अंत में संत पापा ने अपने तथा वाटिकन में अपने सभी कर्मचारियों के लिए प्रार्थना का आग्रह किया जो इस सप्ताह आध्यात्मिक साधना में भाग लेंगे। तब उन्होंने सभी को शुभ रविवार की मंगलकामनाएँ अर्पित की।


(Usha Tirkey)

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