Vatican Radio HIndi

Archive for February 20th, 2018|Daily archive page

संत पापा फ्राँसिस 25 फरवरी को संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे

In Church on February 20, 2018 at 4:31 pm

इटली, मंगलवार, 20 फऱवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस आगामी 25 फरवरी को शाम 4.00 बजे, रोम स्थित संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे।

रोम विकारियेट द्वारा 20 फरवरी को जारी एक प्रेस विज्ञाप्ति में बतलाया गया है कि संत पापा फ्राँसिस 25 फरवरी को रोम में पोंते माम्मोलो के फेरमो कोरनी स्थित संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे। वहाँ उनका स्वागत महाधर्माध्यक्ष अंजेलो दी दोनातिस, पल्ली पुरोहित डॉन जुसेप्पे राचिती एवं फादर अलफियो कारबोनारा, पल्ली के विश्वासियों के साथ करेंगे।

मुलाकात के दौरान संत पापा वहाँ के बच्चों, धर्मशिक्षा ले रहे बच्चों, पल्ली के युवाओं एवं परिवारों से मिलेंगे। वे वहाँ बीमारों, बुजुरगों, गरीबों तथा कारीतास केंद्र के कर्मचारियों से भी मुलाकात करेंगे। पल्ली में वे 18 एवं 25 साल के दो युवाओं से भी मुलाकात करेंगे जो जाम्बिया के हैं तथा पल्ली द्वारा स्वागत किये गये हैं। संत पापा पल्ली के कुछ विश्वासियों का पापस्वीकार भी सुनेंगे। मुलाकात के अंत में संत पापा संध्या 6.00 बजे ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

संत जेलासियो ई पापा पल्ली के पल्ली पुरोहित डॉन जुसेप्पे राचिती ने कहा, “मैं अपनी उस खुशी का वर्णन नहीं कर सकता जब मुझे संत पापा के दौरे की जानकारी दी गयी। पल्ली समुदाय घबराया हुआ है तथा प्रार्थना एवं स्वागत की तैयारी हेतु विभिन्न कार्यों में जुटा है।”

संत जेलासियो ई पापा पल्ली की स्थापना 1972 में हुई है। पल्ली में सैकड़ों विश्वासी हैं, युवा भी गिरजा के विभिन्न गति-विधियों में भाग लेते हैं। पल्ली हर बृहस्पतिवार को 250 गरीब लोगों की मदद कपड़े एवं भोजन के द्वारा करता है। 50 लोगों को नास्ता प्रदान किया जाता है। हर दूसरा रविवार परिवारों के लिए समर्पित है।


(Usha Tirkey)

वयस्कों की मजबूरी और जवाब हीन सवाल

In Church on February 20, 2018 at 4:28 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़):”कुछ माता-पिता मजबूर हैं” “देखभाल को बढ़ावा उन कठिन परिस्थितियों में उनके सहायक हो सकते हैं।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने 4 जनवरी को रोमानिया के 30 बच्चों से वाटिकन में मुलाकात करते हुए कही।

वाटिकन प्रेस कार्यालय द्वारा 20 फरवरी को प्रकाशित जानकारी में बतलाया गया है कि संत पापा फ्राँसिस ने रोमानिया के 30 बच्चों से मुलाकात की थी जो सामाजिक रूप से बहिष्कार के खतरे में हैं तथा जिनकी मदद एक ग़ैरसरकारी संगठन “पी डी पी शिक्षा में मुख्यपात्र” करती है।

जानकारी के अनुसार इस मुलाकात में बच्चों ने संत पापा से कई सवाल किये, जो “क्यों” के सवाल  से भरे थे जिनका उत्तर उन्होंने बड़े ही कोमलता से दिया।

दल में से 21 वर्षीय एक युवक ने संत पापा से प्रश्न किया, “मेरी माँ मुझे क्यों स्वीकार नहीं करती? उसने मुझे क्यों एक अनाथालय में छोड़ दिया है? मेरी माँ मुझसे अच्छा व्यवहार नहीं करती और मैं छोड़ दिया गया हूँ।” इसके उत्तर में संत पापा ने उसे समझाते हुए कहा कि यह उसकी माँ की गलती नहीं है बल्कि वह मजबूर है। यह परेशानी जिसको वह झेल रहा है, सामाजिक अन्याय का परिणाम है जो छोटे, कमजोर एवं आध्यात्मिक रूप से गरीब लोगों को पीसता है। जो हृदय को कठोर बना देता और उसे उस चीज के लिए भड़काता है जो कि असम्भव लगता, यानी एक माँ अपने बच्चे को त्याग देती है। संत पापा ने उस युवक से कहा, “तुम्हारी माँ तुमसे प्यार करती है किन्तु वह नहीं जानता कि उसे किस तरह व्यक्त करे। वह उसे व्यक्त इसलिए नहीं कर पाती है क्योंकि उसका जीवन कठिन है, वह अन्याय के जाल में है। संत पापा ने उसे अपनी प्रार्थना का आश्वासन दिया ताकि वह एक दिन अपनी माँ के प्यार को महसूस कर सके।

संत पापा ने उस सवाल के उत्तर में कि क्यों माता-पिता केवल स्वस्थ बच्चों को ही प्यार करते और बीमार बच्चों को नहीं, कहा कि शायद उन्हें कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिला जो उस कमजोरी से ऊपर उठने एवं उस पर विजय पाने में उन्हें मदद करे। संत पापा ने कहा कि कमजोर माता-पिता के लिए उन्हें अपने जीवन को नहीं कोसना चाहिए बल्कि ईश्वर को इसलिए धन्यवाद देना चाहिए कि वे अपने माता-पिता की मजबूरी में उनकी मदद कर सकते हैं।

संत पापा ने रोमानिया के बच्चों को यह भी बतलाया कि कई ऐसे सवाल हैं जिनका कोई उत्तर नहीं है। उदाहरण के लिए, हमारा भाग्य क्यों ऐसा है? हम उन्हें केवल देख सकते, महसूस कर सकते एवं उनके लिए आँसू बहा सकते हैं।

संत पापा ने कहा, “इनका उत्तर केवल ईश्वर दे सकते हैं। येसु ने एक बार, जब उनसे पूछा गया था कि एक जन्म से अंधे बच्चे के लिए किसको दोष दिया जाना चाहिए, अपने शिष्यों को बतलाया था कि वह अंधा इसलिए है ताकि इसके द्वारा ईश्वर की महिमा प्रकट हो।” संत पापा ने कहा कि इस तरह ईश्वर हमारे दुःख, बीमारी और पीड़ा से हमें चंगा करना चाहते हैं।

जब हम गलती करते और पाप में पड़ जाते हैं तो हमें क्यों गिरजा जाना चाहिए? इस सवाल के उत्तर में संत पापा ने कहा कि गिरजाघर में हम अपने आप को ईश्वर के सम्मुख वैसे ही प्रस्तुत करते हैं जैसे हम हैं। गिरजाघर में प्रवेश करते हुए हमें कहना चाहिए, “प्रभु में प्रस्तुत हूँ। आप मुझे प्यार करते हैं, मैं एक पापी हूँ। मुझ पर दया कीजिए।” येसु कहते हैं कि यदि हम ऐसा करते हैं, हम क्षमा प्राप्त कर घर लौटते हैं। हम पहले जैसा नहीं रह जाते बल्कि ईश्वर हमारे हृदय में कार्य करते और उनका प्रेम हमारे हृदय में हमारे स्वार्थ का स्थान ले लेता है।


(Usha Tirkey)

आध्यात्मिक साधना : आलस्य के विरूद्ध, येसु के समान प्रेम

In Church on February 20, 2018 at 4:26 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 20 फरवरी (रेई): “जीवन की चाह एवं उसकी प्यास के विपरीत है आलस्य”, यह है संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के सदस्यों की आध्यात्मिक साधना के चौथे चिंतन की विषयवस्तु।

संत पापा फ्राँसिस वाटिकन के अपने सभी सहयोगियों के साथ, इस सप्ताह आध्यात्मिक साधना हेतु रोम के बाहर अरिच्चा आध्यात्मिक साधना केंद्र में हैं।

आध्यात्मिक साधना के तीसरे दिन संचालक फादर होसे तोलेनतिनो दी मेनडोनका ने आलस्य एवं जीवन के उत्साह को खो देने पर चिंतन किया। उन्होंने गौर किया कि कभी-कभी आलस्य हमपर आक्रमण करता और हमें बीमार बना देता है। जिसका प्रभाव प्यास (चाह) की कमी में प्रकट होता है।

उन्होंने कहा, “जब हममें प्यास नहीं रह जाती, तब हम सूखने लगते हैं। हम चाह रखने, मुलाकात, वार्तालाप, आदान-प्रदान, काम एवं प्रार्थना करने के उत्साह को खो देते हैं। दूसरों के प्रति हमारी उत्सुकता समाप्त हो जाती है और हमारे लिए सब कुछ नीरस प्रतीत होने लगता है।”

ऐसा लगता है कि मैं जो जीवन जी रहा हूँ वह दूसरे व्यक्ति का है। प्रेरितिक पत्र ‘एवंजेली गौदियुम’ सचेत करता है कि “कब्र की मानसिकता” हमें मीठी उदासी से चिपके रहने हेतु प्रेरित करती है। उन्होंने कहा, “यह स्पष्ट है कि आलस्य या नीरसता एक ऐसी स्थिति है जो केवल गोली दवाई से ठीक नहीं हो सकती बल्कि इसकी देखभाल के लिए पूरे व्यक्तित्व को सक्रिय होना है। हमारे जीवन में कई छिपी पीड़ाएँ हैं जिनके कारणों को खोजना है और जिनका मूल मानव एकाकी के रहस्य में है।

फादर होशे ने कहा कि एक दूसरी समस्या है, मानसिक शिथिलता। मानसिक शिथिलता भी एक याजक को बुरी तरह प्रभावित करता है। यह सामान्यतः तब होता है जब व्यक्ति परित्यक्त महसूस करता और उसमें केवल खालीपन रह जाता है जिसको वह चिंता, शराब, सामाजिक संचार माध्यमों, खाने-पीने या अति सक्रियता आदि द्वारा भरने का प्रयास करता है। यह खालीपन उन लोगों में बालावस्था में दुःख, तिरस्कार, शोषण, आर्थिक अभाव एवं युद्ध आदि के कारण से हो सकता है।

उदासी जो आलस्य से जुड़ी होती है हमें धनी युवक की याद दिलाती है जिसने सभी आज्ञाओं का पालन किया किन्तु निश्चित समय पर ईश्वर पर भरोसा रखने की अपेक्षा अपने धन का चुनाव किया। फादर ने कहा कि हमारी उदासी कई बार हमारी निर्णय लेने की असमर्थता से आती है।

अतः उन्होंने सलाह दी कि हम अपनी चाह की शिथिलता की जाँच करें क्योंकि समस्या हमेशा कामों से नहीं बल्कि सही प्रेरणा को ग्रहण नहीं करने से आती है।


(Usha Tirkey)

संत मर्था के प्रार्थनालय में संत पापा के ख्रीस्तयाग प्रवचन का तीसरा खंड प्रकाशित

In Church on February 20, 2018 at 4:24 pm

इटली, मंगलवार, 20 फरवरी 2018 (रेई): वाटिकन स्थित संत मर्था के प्रार्थनालय में संत पापा फ्राँसिस के दैनिक मिस्सा के प्रवचन का तीसरा खंड जिसमें सितम्बर 2015 से 2017 के प्रवचन का संकलन है, उसकी प्रतियाँ पुस्तक दुकान में पहुँच चुकी हैं।

“मानवता एवं विस्मयकारी” शीर्षक की किताब में कुल 200 लेख हैं।

कार्डिनल जॉनफ्रानो रावासी ने प्रस्तावना में लिखा, “संत मर्था के प्रार्थनालय में महान उपदेशक संत पापा फ्राँसिस के स्वभाव एवं दर्शन को समझने एवं आत्मसात करने का यह एक विशेष अवसर है, जिन्होंने जीने के एक नये रास्ते का उद्घाटन किया है। उनकी असलियत की पहचान उनके उपदेश में मिलता है जिसको वे बिना किसी सहायक सामग्री के स्वतः पारदर्शी एवं प्रभावपूर्ण भाषा में प्रस्तुत करते हैं।”

कार्डिनल जॉनफ्रानो ने लिखा कि संत पापा मौलिक तत्व पसंद करते हैं जो सरलता, प्रभावपूर्ण उद्घोषणा, पेचीदाहीन एवं वाक्यांशों में प्रकट होता है।

वाटिकन रेडियो के पत्रकार द्वारा संपादित 200 लेखों के इस तीसरे खंड में संत पापा सभी के साथ मेल-मिलाप करते हुए ईशवचन के हृदय में प्रवेश करने की कुँजी प्रदान करते हैं।

उन्होंने लिखा कि “समय बदलता है और हम ख्रीस्तीयों को भी बदलना है। हम येसु ख्रीस्त में दृढ़ विश्वास एवं सुसमाचार की सच्चाई के साथ अपने आप में बदलाव लायें। हमारा मनोभाव समय के चिन्ह के साथ आगे बढ़े। हम स्वतंत्रता के वरदान जिसको येसु प्रदान करते हैं, ग्रहण करने के लिए स्वतंत्र है किन्तु हमारा कर्तव्य है कि हम अपने विचारों एवं भावनाओं की परख करें तथा मौन, चिंतन एवं प्रार्थना के साथ समय के चिन्ह के अनुसार निर्णय लें।”


(Usha Tirkey)

विदेश में काम करने वाले फिलीपीनियों के प्रति एकात्मता

In Church on February 20, 2018 at 4:21 pm

मनिला, मंगलवार, 20 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): फिलीपींन्स की कलीसिया ने 32वीं राष्ट्रीय अप्रवासी रविवार पर, फिलीपींस के विदेशों में जाकर काम करने वालों के प्रति एकात्मता प्रकट करते हुए मेजबान देशों से, उनके प्रति बेहतर आचरण की मांग की।

राष्ट्रीय अप्रवासी रविवार की स्थापना आर्थिक प्रवासन की वास्तविकताओं के प्रति जागरूकता, समझदारी एवं सकारात्मक भावना जागृत करने के लिए की गयी है। इस वर्ष इसकी विषयवस्तु है “विस्थापितों एवं शरणार्थियों का स्वागत, सुरक्षा एवं एकीकरण।”

1987 में इसकी स्थापना के समय से ही कलीसिया ने अप्रवासियों के प्रति सहानुभूति रखी है।

इस समय फिलीपींस के करीब 10 मिलियन लोग विदेशों में काम कर रहे हैं और उनमें से कई सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, हांगकांग, कुवैत और कतर में हैं।

उनके द्वार भेजे हुए धन से देश की आर्थिक स्थिति का विकास हो रहा है। गत साल उन्होंने अपने देश के लिए 1.4 ट्रीलियन (2.6 बिलियन डॉलर) पेसो भेजा था।

14 फरवरी को, फिलिपीन्स अधिकारियों ने कुवैत से 10,000 प्रवासी श्रमिकों के प्रत्यावर्तन का आदेश दिया। इस आदेश के तहत दो दिनों पूर्व अमीरात में प्रवासन को पूरी तरह बंद कर दिया गया।

फिलीपींस के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अप्रवासी एवं शरणार्थियों की प्रेरितिक देखभाल विभाग के अध्यक्ष एवं बालांगा के धर्माध्यक्ष रूपेरतो क्रूज संतोस ने प्रवासियों का समर्थन करते हुए सरकार से अपील की है कि वह फिलीपींस के श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करे।

उन्होंने कहा, “हमारे प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित होना चाहिए। उन्हें भयभीत अथवा शोषित नहीं किया जाना चाहिए। उनके अधिकारों की रक्षा की जानी एवं उनकी प्रतिष्ठा का सम्मान किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सबसे बढ़कर एक प्रवासी एक व्यक्ति है। उसका भी अनुभव, भावना एवं इतिहास है। वह भी ईश्वर द्वारा सृष्ट एवं गुण सम्पन्न है अतः वह किसी के लाभ अथवा सुख का साधन न बने।


(Usha Tirkey)

नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मठीय समिति में भारतीय धर्मबहन

In Church on February 20, 2018 at 4:19 pm

मुम्बई, मंगलवार, 20 फरवरी 2018 (मैटर्स इंडिया): संत पापा फ्राँसिस ने सिस्टर अरिना गोनसालवेस को नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति में शामिल किया है।

सिस्टर अरिना मुम्बई महाधर्मप्रांत में बाल-सुरक्षा के कार्यों में लम्बे समय से जुड़ी हैं। वाटिकन ने इस नियुक्त की घोषणा 17 फरवरी को की।

सि. अरिना ने एशियान्यूज़ से कहा, “मैं इस नियुक्ति से अत्यन्त सम्मानित महसूस कर रही हूँ। यह मेरे लिए एक सौभाग्य है कि मैं भारत से विश्वव्यापी कलीसिया की सेवा कर सकती और उसे अपना योगदान दे सकती हूँ।”

2016 में मुम्बई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेशियस ने उन्हें बाल सुरक्षा समिति के एक दक्ष सदस्य के रूप में चुना था। सीबीसीआई के नये अध्यक्ष कार्डिनल ग्रेशियस ने सि. अरिना की नियुक्ति का स्वागत किया है।

उन्होंने कहा, “मैं सि. अरिना के चुनाव से अत्यन्त खुश हूँ। इस तरह हमारी एक भारतीय आवाज होगी जिन्हें विश्व व्यापी कलीसिया को सहयोग देने का अवसर प्राप्त होगा।”

सि. एरिना का कहना है कि उनका मिशन है हिंसा को दूर करना एवं बच्चों की मदद करना तथा कमजोर वयस्कों में जागृति लाना। काथलिक कलीसिया सचमुच बच्चों की मदद करना चाहती है और हमें वह सब कुछ करने का प्रयास करना चाहिए जिससे बच्चों की रक्षा की जा सके।

सि. अरिना, नाबालिगों की सुरक्षा हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के 9 नये सदस्यों में से एक हैं। इस समिति के अध्यक्ष कार्डिनल सीन ओ’मेल्ली हैं।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: