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ईश्वर के पास खुले हृदय से जाएँ, वे पिता के समान हमारा इंतजार करते हैं, संत पापा

In Church on February 27, 2018 at 3:49 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (रेई): “प्रत्येक व्यक्ति को मन-परिवर्तन हेतु निमंत्रण देने, मन-परिवर्तन में उन्हें मदद करने के लिए उनकी ओर बढ़ने तथा एक पिता के समान स्नेह एवं विश्वास के साथ निमंत्रण देने से ईश्वर कभी नहीं थकते।” उक्त बात संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित प्रेरितिक आवास संत मर्था के प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित करते हुए प्रवचन में कही।

27 फरवरी को प्रवचन देते हुए संत पापा ने कहा, “चालीसा काल एक ऐसा समय है जो मन परिवर्तन करने एवं अपना जीवन बदलने के लिए ईश्वर के करीब आने में मदद देता है जिसके लिए हमें प्रभु से कृपा मांगने की आवश्यकता है।”

नबी इसायस के ग्रंथ से लिये गये पाठ पर चिंतन करते हुए संत पापा ने मन-परिवर्तन हेतु सच्चे निमंत्रण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि येसु पापियों को भयभीत नहीं करते किन्तु उनपर विश्वास करते हुए उन्हें कोमलता से बुलाते हैं। उन्होंने सोदोम एवं गोमोरा के शासकों को बुलाया जिन्हें उन्होंने पहले ही बुराई से बचने एवं भलाई करने की चेतावनी दी थी।

संत पापा ने कहा कि वे हमारे साथ भी यही करते हैं। प्रभु कहते हैं, “आओ हम एक साथ विचार करें। तुम्हारे पाप सिंदूर की तरह लाल क्यों न हों, वे हिम की तरह उज्ज्वल हो जायेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सचमुच एक पिता का अपने किशोर पुत्र के साथ वार्तालाप के समान है जिसने अपने लिए लड़की चुन लिया हो और पिता का तिरस्कार करता हो। पिता को मालूम है कि यदि वह उसपर बेंत चलायेगा तो ठीक नहीं होगा, इसलिए दृढ़ता के साथ उसके अंदर प्रवेश करता है।

प्रभु हमें बुलाते हैं। वे कहते हैं, डरो मत, मैं तुम्हें दण्ड नहीं दूँगा और वे पुत्र के मन को समझते हुए तुरन्त जोड़ते हैं कि “तुम्हारे पाप सिंदूर की तरह लाल क्यों न हों, वे हिम की तरह उज्ज्वल हो जायेंगे। वे किरमिच की तरह मटमैले क्यों न हों ऊन की तरह श्वेत हो जायेंगे।”

संत पापा ने कहा कि एक पिता का अपने किशोर पुत्र के साथ कोमल बर्ताव की तरह ही, येसु भी दृढ़ विश्वास के साथ क्षमाशीलता एवं मन-परिवर्तन को हमारे लिए लाते हैं। जिस तरह उन्होंने जकेयुस को मन-परिवर्तन में मदद दिया उसी तरह हमें भी मदद देते हैं।

हम उनकी अच्छाई के लिए उन्हें धन्यवाद दें। वे हमें दण्ड देना नहीं चाहते बल्कि उन्होंने अपना जीवन एवं अपनी अच्छाई हमारे लिए अर्पित कर दिया है तथा हमारे हृदय में प्रवेश करने की राह देखते हैं। संत पापा ने याजकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जब पुरोहित, प्रभु के स्थान पर पापस्वीकार सुनते हैं, उन्हें भी अच्छाई का मनोभाव धारण करना है जैसा कि प्रभु कहते हैं, “आओ हम विचार करें” इस निमंत्रण में अच्छाई और क्षमाशीलता है, धमकी नहीं।

खुले हृदय से प्रभु के पास जाने वाला शांति का अनुभव करेगा। प्रभु हमसे कहते हैं कि हम एक साथ विचार करें। हम उसने खुले हृदय से बातें करें एवं उसके द्वारा क्षमा प्राप्त करें।

प्रभु हमें पिता एवं पुत्र के बीच विश्वास के इस मनोभाव को देख पाने में मदद दे। हम अपनी यात्रा में उनके शब्दों को सुन सकें, आओ, डरो मत।” संत पापा ने कहा कि हम पिता के पास खुले हृदय से आयें क्योंकि वे हमें क्षमा प्रदान करते एवं हमेशा हमारा इंतजार करते हैं।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने महाधर्माध्यक्ष अलफ्रेड एवं बेट्टेनकॉर्ट को प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया

In Church on February 27, 2018 at 3:47 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को दो महाधर्माध्यक्षों की पद वृद्धि करते हुए उन्हें प्रेरितिक राजदूत का कार्यभार सौंपा।

उन्होंने वाटिकन राज्य के सचिवालय में प्रोटोकॉल के प्रमुख पद पर कार्यरत महाधर्माध्यक्ष होसे अविलीन बेट्टेनकॉर्ट को प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया।

महाधर्माध्यक्ष होसे अविलीन बेट्टेनकॉर्ट का जन्म 23 मई 1962 को पुर्तगाल में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 1993 में हुआ तथा 1999 में वे कोंगो के प्रेरितिक राजदूतावास में सेवा करते हुए परमधर्मपीठ के राजनयिक सेवा में भर्ती हुए। उन्होंने 2012 में वाटिकन राज्य के सचिवालय में प्रोटोकॉल के प्रमुख पद का कार्य करना आरम्भ किया।

माल्टा के महाधर्माध्यक्ष अलफ्रेड जुरेब को संत पापा ने कोरिया एवं मोंगोलिया का प्रेरितिक राजदूत नियुक्त किया।

उनका जन्म गोज़ो द्वीप पर 1958 में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक 1984 में हुआ। उन्होंने सन् 1991 में परमधर्मपीठीय लातेरन विश्व विद्यालय के सचिवालय में कार्य करना आरम्भ किया था। वाटिकन राज्य के सचिवालय में उन्होंने 1995 में सेवा देना आरम्भ किया जिसके बाद उनका तबादला नवम्बर 2000 में परमधर्मपीठीय हाऊसहोल्ड में हो गया।

वे वाटिकन राज्य सचिवालय आये तथा 2007 से संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें के सचिव के रूप में काम किया और बाद में संत पापा फ्राँसिस के भी सचिव रहे। 2013 के नवम्बर माह में वे वाटिकन बैंक के लिए परमधर्मपीठीय समिति एवं परमधर्मपीठ के आर्थिक ढाँचे के पुनर्गठन हेतु प्रतिनिधि नियुक्त हुए। 2014 के मार्च में वे अर्थव्यवस्था के सचिवालय के महासचिव नियुक्त हुए थे।

 

 


(Usha Tirkey)

2018 में C9 के कार्डिनलों से संत पापा की पहली मुलाकात

In Church on February 27, 2018 at 3:45 pm


वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 26 फरवरी को 9 कार्डिनलों की सलाहकार परिषद C9 से मुलाकात की, जो 2018 में उनकी पहली मुलाकात थी। कार्डिनलों का विशेष परिषद सोमवार से बुधवार तक परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय में सुधार हेतु 23वीं सभा में भाग ले रहा है।

वाटिकन न्यूज़ के साथ एक साक्षात्कार में C9 के सचिव धर्माध्यक्ष मरचेल्लो सेमेरारो ने कहा कि कार्य सत्र परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के विभिन्न परिषदों के अध्ययन के अंतिम चरण तक जारी रहेगा।

साक्षात्कार में धर्माध्यक्ष अलबानो ने कहा कि “विभिन्न विभागों में सुधार वास्तविक है और इनके ढाँचों में सुधार हो रहा है किन्तु प्रथम एवं स्थायी परिवर्तन की आवश्यक है मानसिकता में परिवर्तन।”

धर्माध्यक्ष सेमेरारो ने बतलाया कि सुधार “संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक प्रबोधन ‘एवनजेली गौदियुम’ के अनुरूप अभिव्यक्ति की चाह रखता है, जिसके प्रकाश में अन्य सभी संगठन एवं संस्थाएँ, मिशनरी गतिविधि के प्रतिमान और सुसमाचार के प्रचार के लिए अपने आप को समर्पित करते हैं।

C9 की स्थापना विश्वव्यापी कलीसिया के संचालन में संत पापा फ्राँसिस की सहायता एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय पास्तेर बोनुस पर प्रेरितिक संविधान के अध्ययन हेतु की गयी है।


(Usha Tirkey)

मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहन ने अपने हमलावरों को माफ कर दिया

In Church on February 27, 2018 at 3:43 pm

बंगलादेश, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): एशियान्यूज़ से मिली जानकारी के अनुसार बंगलादेश में सेवारत मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहन एम. मेडलिन पर 26 फरवरी को हिंसक हमला किया गया किन्तु उन्होंने हमलावरों पर केस दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया।

धर्मबहन एम. मेडलिन शैलहेत धर्मप्रांत के लोखीपुर काथलिक गिरजाघर स्थित “कुपोषण पीड़ित लोगों की सेवा में स्थापित केंद्र” में सेवारत हैं।

कुपोषण केंद्र में 100 से अधिक परित्यक्त एवं गरीब बच्चों को रखा गया है। धर्मबहन ने कहा, “वे हमारी संस्थापिका संत मदर तेरेसा के मनोभाव को नहीं समझते हैं जिनका आदर्श वाक्य था, प्रेम। हम केवल उन दुखित बच्चों की सेवा करते हैं। मैं उन लोगों को क्षमा देती हूँ जिन्होंने मुझ पर आक्रमण किया है।”

एशियान्यूज़ से बातें करते हुए सहायक पल्ली पुरोहित फादर सागोर लुईस रोजारियो ओमी ने कहा कि धर्मबहन पर उस समय हमला किया गया, जब वह अन्य धर्मबहनों के साथ मौलोविबाज़ार में कुलारूवा के एक बैंक से घर लौट रही थी। वह केंद्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बैंक से पैसा निकालने गयी थी। बैंक से वापस आते समय चार अज्ञात व्यक्ति जो मोटर साईकिल पर सवार थे उनका रास्ता रोक लिया। उन्होंने थैला को छीनने का प्रयास किया। सि. मेडलिन द्वारा इन्कार किये जाने पर उन्होंने एक चाकू निकाला तथा उसके बायें हाथ पर वार किया।

फादर ने कहा कि लुटेरे उनसे 1 लाख टके की मांग कर रहे थे जिसको धर्मबहनों ने उसी समय निकाला था। लुटेरों ने धर्मबहन को तब छोड़ा, जब वह दर्द से चिल्लायी। कुछ राहगीरों ने उनकी मदद की और उन्हें अस्पताल पहुँचाया। इस हमले में उसके काफी खून बह गये और उन्हें टांकें भी लगाने पड़े।

धर्मबहन ने केस दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया किन्तु उसपर हमला की खबर शीघ्र फैल गयी तथा कुलापुरा की पुलिस ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की। पुलिस प्रमुख शमीम मूसा ने कहा, “हम उन लुटेरों की खोज कर रहे हैं। हमें उन्हें शीघ्र पकड़ना है।”

शैलहेत धर्मप्रांत के न्याय एवं शांति आयोग के सचिव बोनिफस खोनगला ने भी सि. मेडलिन से मुलाकात की। मदर तेरेसा की एक धर्मबहन पर हमले के प्रति काथलिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “धर्मप्रांत में जरूरतमंद लोगों के लिए मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहनों द्वारा दो केंद्र चलाये जा रहे हैं। जिनमें अधिकतर मुस्लिम और हिन्दू आते हैं। ये धर्मबहनें उन सभी लोगों की सेवा करती हैं जो समाज से बहिष्कृत हैं। यदि उन पर अत्याचार किये जाएँ तो भविष्य में कौन उन लोगों की सेवा करेगा।”


(Usha Tirkey)

विशाखापटनम के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष का निधन

In Church on February 27, 2018 at 3:39 pm

बेंगलूरू, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (मैटर्स इंडिया): विशाखापटनम के सेवानिवृत महाधर्माध्यक्ष काजिथापू मारियादास का निधन 26 फरवरी को हुआ। वे 81 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 28 फरवरी को पूर्वाह्न 10.00 बजे, विशाखापटनम के संत पेत्रुस महागिरजाघर में किया जाएगा।

महाधर्माध्यक्ष का निधन रात के लगभग 2.30 बजे विशाखापटनम के संत जोसेफ अस्पताल में हुआ जहाँ वे एक माह पहले चिकित्सा हेतु भर्ती थे।

महाधर्माध्यक्ष काजिथापू का जन्म 7 सितम्बर 1936 को गणनापुरम में हुआ था। उनका पुरोहिताभिषेक सन् 1961 को संत फ्राँसिस दी सेल्स धर्मसमाज के मिशनरी के रूप में हुआ था।

संत पापा पौल षष्ठम ने उन्हें 1974 में गुनटूर के चौथे धर्माध्यक्ष नियुक्त किया था। सन् 1982 में उनकी नियुक्ति विशाखापटनम में हुई थी। 2001 में जब धर्मप्रांत को महाधर्मप्रांत का दर्जा मिला तब वे वहाँ के महाधर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये थे।

धर्माध्यक्ष बनने के पूर्व वे बैंगलोर स्थित संत पीटर सेमिनरी के प्रोफेसर भी रहे।

3 जुलाई 2012 को संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने उनका त्याग पत्र स्वीकार किया। वे 56 सालों तक पुरोहित रहे तथा 40 सालों तक धर्माध्यक्ष। पिछले पांच वर्षों से वे विशाखापटनम के जयंती गृह में रह रहे थे।


(Usha Tirkey)

येसु से मुलाकात का आनन्द

In Church on February 27, 2018 at 3:37 pm

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने चालीसा काल के इस अवसर पर अधिक प्रार्थना करने हेतु प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने 27 फरवरी को एक ट्वीट प्रेषित कर कहा, “हम उस आनन्द को अनुभव करने के लिए बुलाये गये हैं जो येसु से मुलाकात द्वारा आती है ताकि हम अपने स्वार्थ से ऊपर उठ सकें तथा हमारे आराम के क्षेत्र से बाहर निकल सकें।”


(Usha Tirkey)

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