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मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहन ने अपने हमलावरों को माफ कर दिया

In Church on February 27, 2018 at 3:43 pm

बंगलादेश, मंगलवार, 27 फरवरी 2018 (एशियान्यूज़): एशियान्यूज़ से मिली जानकारी के अनुसार बंगलादेश में सेवारत मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहन एम. मेडलिन पर 26 फरवरी को हिंसक हमला किया गया किन्तु उन्होंने हमलावरों पर केस दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया।

धर्मबहन एम. मेडलिन शैलहेत धर्मप्रांत के लोखीपुर काथलिक गिरजाघर स्थित “कुपोषण पीड़ित लोगों की सेवा में स्थापित केंद्र” में सेवारत हैं।

कुपोषण केंद्र में 100 से अधिक परित्यक्त एवं गरीब बच्चों को रखा गया है। धर्मबहन ने कहा, “वे हमारी संस्थापिका संत मदर तेरेसा के मनोभाव को नहीं समझते हैं जिनका आदर्श वाक्य था, प्रेम। हम केवल उन दुखित बच्चों की सेवा करते हैं। मैं उन लोगों को क्षमा देती हूँ जिन्होंने मुझ पर आक्रमण किया है।”

एशियान्यूज़ से बातें करते हुए सहायक पल्ली पुरोहित फादर सागोर लुईस रोजारियो ओमी ने कहा कि धर्मबहन पर उस समय हमला किया गया, जब वह अन्य धर्मबहनों के साथ मौलोविबाज़ार में कुलारूवा के एक बैंक से घर लौट रही थी। वह केंद्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बैंक से पैसा निकालने गयी थी। बैंक से वापस आते समय चार अज्ञात व्यक्ति जो मोटर साईकिल पर सवार थे उनका रास्ता रोक लिया। उन्होंने थैला को छीनने का प्रयास किया। सि. मेडलिन द्वारा इन्कार किये जाने पर उन्होंने एक चाकू निकाला तथा उसके बायें हाथ पर वार किया।

फादर ने कहा कि लुटेरे उनसे 1 लाख टके की मांग कर रहे थे जिसको धर्मबहनों ने उसी समय निकाला था। लुटेरों ने धर्मबहन को तब छोड़ा, जब वह दर्द से चिल्लायी। कुछ राहगीरों ने उनकी मदद की और उन्हें अस्पताल पहुँचाया। इस हमले में उसके काफी खून बह गये और उन्हें टांकें भी लगाने पड़े।

धर्मबहन ने केस दर्ज नहीं करने का निर्णय लिया किन्तु उसपर हमला की खबर शीघ्र फैल गयी तथा कुलापुरा की पुलिस ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की। पुलिस प्रमुख शमीम मूसा ने कहा, “हम उन लुटेरों की खोज कर रहे हैं। हमें उन्हें शीघ्र पकड़ना है।”

शैलहेत धर्मप्रांत के न्याय एवं शांति आयोग के सचिव बोनिफस खोनगला ने भी सि. मेडलिन से मुलाकात की। मदर तेरेसा की एक धर्मबहन पर हमले के प्रति काथलिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “धर्मप्रांत में जरूरतमंद लोगों के लिए मिशनरीस ऑफ चैरिटी की धर्मबहनों द्वारा दो केंद्र चलाये जा रहे हैं। जिनमें अधिकतर मुस्लिम और हिन्दू आते हैं। ये धर्मबहनें उन सभी लोगों की सेवा करती हैं जो समाज से बहिष्कृत हैं। यदि उन पर अत्याचार किये जाएँ तो भविष्य में कौन उन लोगों की सेवा करेगा।”


(Usha Tirkey)

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