Vatican Radio HIndi

Archive for February, 2018|Monthly archive page

पर्वत प्रवचन कलीसियाई एवं मानवीय तीर्थयात्रा का मार्गदर्शक

In Church on February 23, 2018 at 2:47 pm

आरिच्या, इटली, शुक्रवार, 23 फरवरी 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): इटली के आरिच्या में सन्त पापा फ्राँसिस के साथ चालीसाकालीन आध्यात्मिक साधना में संलग्न परमधर्मपीठीय रोमी कार्यालय के धर्माधिकारियों के समक्ष शुक्रवार, 23 फरवरी को फादर होज़े तोलेनतीनो मेन्दोन्सा ने प्रभु येसु के पर्वत प्रवचन पर चिन्तन प्रस्तुत किया।

फादर मेन्दोन्सा ने कहा कि येसु द्वारा पर्वत पर किया गया प्रवचन मनुष्यों को जीने की राह सिखाता है, वह कानून से भी बढ़कर है जो व्यक्ति को उसकी अस्मिता का एहसास दिलाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रवचन में निहित आठ आशीर्वचन कलीसिया एवं मानव की तीर्थयात्रा में उनके मार्गदर्शक बनते हैं।

फादर मेन्दोन्सा ने कहा, “पर्वत प्रवचन के आशीर्वचनों में स्वयं येसु मसीह प्रकट होते हैं, विशेष रूप से जब वे कहते हैं, “धन्य हैं वे जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है”, इस आशीर्वचन में, उन्होंने कहा, “प्रत्येक विश्वासी येसु के मुखमण्डल के दर्शन कर उनपर चिन्तन कर सकता तथा उनके सदृश दीन मना बनने का प्रयास कर सकता है।”

फादर मेन्दोन्सा ने कहा कि प्रभु येसु ख्रीस्त स्वयं वैसे हैं जैसे उन्होंने अपने आशीर्वचनों द्वारा हमसे आग्रह किया है, मन के दीन, विनीत, दयावान, न्याय और शांति के प्यासे, शांति निर्माता, सबका आलिंगन करने को तैयार तथा समाज के निम्न कहलाने वालों की मदद को तत्पर। उन्होंने कहा कि प्रभु येसु ख्रीस्त चाहते हैं कि हम इन आशीर्वनचों का वरण करें तथा उन्हीं की तरह शत्रुता दीवारों को गिराकर शांति का निर्माण करें।

शांति निर्माण कार्यों में संलग्न व्यक्तियों को प्रोत्साहन देते हुए फादर मेन्दोन्सा ने कहा कि प्रभु येसु मसीह ने कहा है, “जो लोग मेल कराते हैं वे धन्य हैं, वे ईश्वर के पुत्र कहलायेंगे।”

कलीसिया के समस्त कार्यकर्त्ताओं का उन्होंने आह्वान किया कि सुसमाचार में निहित आशीर्वचनों को आत्मसात कर वे लोगों के बीच मैत्री, पुनर्मिलन तथा शांति की स्थापना हेतु वे अपने स्वार्थों का परित्याग करें। उन्होंने कहा, “कलीसिया तब एक सजीव और जीवन्त कलीसिया होती है जब वह सब चुनौतियों का सामना करते हुए ज़रूरतमन्दों के प्रति अपने दरवाज़ों को खोल देती है। वह तब जीवन्त कलीसिया होती है जब वह विश्व के चौराहों पर जीवन यापन करनेवाले लोगों के तनावों का अनुभव करती तथा उन्हें दूर करने का प्रयास करती है।”


(Juliet Genevive Christopher)

धर्मनिरपेक्षता की सुरक्षा का काथलिक धर्मसमाजियों ने किया प्रण

In Church on February 23, 2018 at 2:45 pm

राँची, शुक्रवार, 23 फरवरी 2018 (ऊका समचार): झारखण्ड में सेवारत  31 धर्मसमाजों एवं धर्मसंघों के काथलिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों ने भारतीय संविधान में निहित धर्मनिर्पेक्षता एवं प्रजातंत्रवाद की सुरक्षा का प्रण किया है।

हाल में कुछेक हिन्दू चरमपंथी संगठनों द्वारा भारत को एक थेयोक्रेटिक यानि धर्मतंत्रवादी राष्ट्र बनाने की घोषणा के उपरान्त राँची में काथलिक कलीसिया की न्याय एवं शांति सम्बन्धी समिति के तत्वाधान में एक तीन दिवसीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ।

इस सम्मेलन के उपरान्त समन्वयकर्त्ता काथलिक पुरोहित फादर जैकब पिन्नीकापरमपिल ने ऊका समाचार से कहा, “भारतीय संविधान की धर्मनिरपेक्ष, सामाजिक एवं प्रजातंत्रवादी प्रकृति को गौण करनेवाली शक्तियों की वास्तविकता के प्रति सचेत होकर हमें तत्काल इन मूल्यों की रक्षा हेतु प्रयास करने की नितान्त आवश्यकता है।”

उक्त सम्मेलन में विभिन्न धर्मसमाजों एवं धर्मसंघों के 60 से अधिक पुरोहितों एवं धर्मबहनों ने, “वर्तमान भारत में धर्मनिर्पेक्ष प्रजातंत्रवाद के समक्ष प्रस्तुत चुनौतियों पर विशद विचार-विमर्श किया।

फादर पिन्नीकापरमपिल ने कहा, “जब तक हम अपने संविधान, उसके धर्मनिरपेक्ष, सामाजिक और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रचार कर उन्हें सुरक्षित रखने हेतु प्रयास नहीं करेंगे तब तक देश में अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित नहीं हो पायेंगे।”

इसी बीच, समाज कार्यकर्त्ता फादर रॉय थॉमस ने शिक्षा द्वारा चरमपंथ एवं अतिवाद पर विजय पाने का परामर्श दिया और कहा, “समस्त ख्रीस्तीय स्कूलों में संवैधानिक मूल्यों की शिक्षा का प्रसार होना चाहिये ताकि छात्रों को इस बात का एहसास दिलाया जा सके कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों को देश में प्रजातंत्रवाद की स्थापना के लिये किस प्रकार का संघर्ष करना पड़ा था।”


(Juliet Genevive Christopher)

भारत की जनजातियों को मान्यता देने का आह्वान

In Church on February 23, 2018 at 2:43 pm

नई दिल्ली, शुक्रवार, 23 फरवरी 2018 (ऊका समचार): संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारी फूलमन चौधरी ने भारत के एक करोड़ चालीस लाख आदिवासियों को आधिकारिक मान्यता देने का आह्वान किया है।

नई दिल्ली में विगत सप्ताहान्त येसु धर्मसमाज द्वारा संचालित भारतीय सामाजिक संस्था में आदिवासियों के अधिकारों पर आयोजित दो दिवसीय मंच के दौरान प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए श्री चौधरी ने कहा, “एक दशक पूर्व संयुक्त राष्ट्र संघ ने आदिवासियों के अधिकारों पर एक घोषणा पत्र जारी किया था किन्तु अब तक भारत के आदिवासियों को आधिकारिक मान्यता नहीं मिल पाई है।”

उन्होंने कहा, “जब तक भारत आदिवासी समुदायों की पहचान स्वदेशी लोगों में नहीं करेगा तब तक आदिवासी आबादी पीड़ित रहेगी तथा संयुक्त राष्ट्र संघीय घोषणा पत्र में निहित उनके अधिकारों को सुनिश्चित नहीं किया जा सकेगा।”

उन्होंने ऊकान्यूज़डॉटकॉम से कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ का घोषणा पत्र सबसे व्यापक अंतरराष्ट्रीय साधन है क्योंकि यह स्वदेशी लोगों के जीवन, उनकी गरिमा और उनके कल्याण हेतु न्यूनतम मानकों का एक सार्वभौमिक ढांचा स्थापित करता है।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघीय घोषणा पत्र के अनुकूल आदिवासियों को स्वदेशी जातियों रूप में आधिकारिक मान्यता प्रदान करना उन्हें उनके अधिकारों से सम्मानित करना होगा।


(Juliet Genevive Christopher)

सीरिया, संघर्ष विराम पर बातचीत रही नाकाम

In Church on February 23, 2018 at 2:41 pm

न्यूयॉर्क, शुक्रवार, 23 फरवरी 2018 (एएफपी): संयुक्त राष्ट्र संघीय सुरक्षा परिषद में सिरियाई संघर्ष को रोकने हेतु गुरुवार को युद्धविराम प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

सिरिया में विगत कई दिनों से दमिश्क के निकटवर्ती पूर्वी गूता में संघर्ष सघन हो गया है जिसमें बताया जाता है कि केवल पिछले पाँच दिनों की बमबारी में कम से कम 400 लोगों की हत्या हो चुकी है।

संघर्ष को रोकने के अभिप्राय से गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र संघीय सुरक्षा परिषद की बैठक हुई जिसमें रूस की मनाही के बाद युद्ध विराम का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।

संघर्षविराम का प्रस्ताव स्वीडन और कुवैत की तरफ से पेश किया गया था, लेकिन रूस इस प्रस्ताव में संशोधन चाहता था क्योंकि उसका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव से सिरियाई सरकार पर ही दबाव बढ़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि वेस्ली नेबेनज़्या ने कहा कि रूस इस बात की गांरटी चाहता था कि पेश किया गया प्रस्ताव ज़मीनी तौर पर कारगर साबित हो। रूस का कहना था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को यथार्थवादी होना चाहिये केवल लोकप्रिय नहीं।”

पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने रूस के इस रवैये को सीरियाई सरकार का समर्थन करने वाला कदम बताया है।

संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार लगभग 3 लाख 93 हज़ार लोग गूता के संघर्षरत इलाकों में फँसें हैं जिन्हें मानवतावादी सहायता की नितान्त आवश्यकता है।


(Juliet Genevive Christopher)

33वें विश्व युवा दिवस हेतु संत पापा का संदेश

In Church on February 22, 2018 at 4:24 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 2018 (रेई): 33वें विश्व युवा दिवस 2018 के लिए संत पापा फ्राँसिस के संदेश को वाटिकन ने 22 फरवरी को प्रकाशित किया।

विश्व युवा दिवस की विषयवस्तु है, “मरियम, डरिये नहीं, आपको ईश्वर की कृपा प्राप्त है।” (लूक. 1:30)

संत पापा ने संदेश में लिखा, “प्रिय युवाओं, विश्व युवा दिवस 2018, पनामा में जनवरी 2019 में होने वाले विश्व युवा दिवस की तैयारी में एक-दूसरे पहल का प्रतिनिधित्व करता है। हमारे सौभाग्य का यह नया पहल, जो इस वर्ष धर्माध्यक्षों की धर्मसभा में पुष्ट किया जाएगा। यह एक सुखद संयोग है जिसमें कलीसिया की प्रार्थना एवं चिंतन का केंद्र बिन्दु युवा होंगे, इस चाह से कि आप जो ईश्वर, कलीसिया एवं विश्व के बहुमूल्य उपहार हैं उन्हें अपनाया जा सकें।”

संत पापा ने युवाओं को माता मरियम की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की प्रेरणा देते हुए कहा कि वे सिनॉड में तथा पनामा में आयोजित विश्व युवा दिवस में हमारे साथ चलेंगी। विश्व दिवस की विषय वस्तु “मरियम, डरिये नहीं, आपको ईश्वर की कृपा प्राप्त है” ये शब्द मरियम के लिए ईश्वर के संदेशवाहक महादूत गाब्रिएल के हैं जो गलीलिया के छोटे गाँव की एक साधारण लड़की थी।

संत पापा ने “डरिये नहीं” की व्याख्या करते हुए लिखा कि महादूत के अचानक प्रकट होने एवं रहस्यात्मक प्रणाम के कारण मरियम का डरना स्वाभाविक था। धर्मग्रंथ के अन्य नबियों की तरह वह भी ईश्वर की बुलाहट पर डर गयीं जिन्होंने उनके सामने अपनी महान योजना को रखा और यह उन्हें नगण्य होने का एहसास दिया। ईश्वर हमारे हृदय के सबसे गहरे भाव को भी पढ़ सकते हैं। वे जानते हैं कि हमें जीवन में किन प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। ये क्षण हमारे लिए भी भय के कारण परेशान करने वाले होते हैं।

संत पापा ने युवाओं से प्रश्न किया, “और आप युवाओं के लिए किस चीज का भय है? आपको क्या सबसे अधिक परेशान करता है?” कई लोग प्यार नहीं किये जाने अथवा स्वीकार नहीं किये जाने से डरते हैं। आज कई युवा अपनी असलियत से भिन्न दिखाई देने की आवश्यकता महसूस करते हैं तथा कृत्रिम अथवा दुर्लभ चीजों को अपनाना चाहते हैं। अपनी तस्वीर की फोटो शॉप करते एवं अपने को मास्क एवं झूठी पहचान के पीछे छिपाना चाहते हैं। कई लोगों में अधिक से अधिक लाईक पाने का जुनून सवार हो जाता है। इस तरह उनमें कई तरह के भय उत्पन्न हो जाते हैं। कई लोग नौकरी की अनिश्चितता से भयभीत रहते हैं। संतोषजनक पेशा का पद नहीं प्राप्त करने एवं अपने स्वप्नों को साकार नहीं कर पाने का डर सताता है। न केवल वे जिन्होंने विश्वास को ग्रहण नहीं किया है तथा अपनी बुलाहट के प्रति गंभीर नहीं है, भय के शिकार हैं किन्तु अपनी बुलाहट के प्रति गंभीर रहने वाले युवा भी इसके प्रभाव से अछूते नहीं हैं। शायद कुछ लोगों को चिंता है कि ईश्वर उनसे बहुत अधिक मांगेंगे। वे उस रास्ते पर खुश नहीं रह पायेंगे अथवा वे ईश्वर की मांग पूरी नहीं कर पायेंगे और निराश हो जायेंगे।

संत पापा ने सलाह दी कि जब हमारे हृदय में संदेह एवं डर भर जाता है तब आत्मजाँच की आवश्यकता है। आत्मजाँच हमारे विचारों एवं भावनाओं की भ्रांति को दूर करता है ताकि हम विवेक से काम कर सकें। भय से बाहर आने का पहला कदम है डर को पहचानना। संत पापा ने युवाओं को निमंत्रण दिया कि वे आत्मजाँच करें तथा अपने अंदर के भय को “नाम” दें। अपने आपसे पूछें कि मुझमें किस बात का डर है? मैं महत्वपूर्ण चुनाव करने का क्यों साहस नहीं करता। धर्मग्रंथ भय एवं उसके कारणों को अनदेखा नहीं करता। अब्राहम, याकूब, मूसा, पेत्रुस और येसु के प्रेरित भी भयभीत हुए। स्वयं येसु ने भी भय एवं चिंता महसूस किया।

येसु हमें यह समझने में मदद देते हैं कि भय किस तरह विश्वास के रास्ते पर बाधक है। जब हम आत्मजाँच करते हैं तो हमारे भय का कारण मालूम होता है जिसके कारण हम उनका सामना शांत होकर कर सकते हैं। एक ख्रीस्तीय के लिए भय अंतिम शब्द नहीं होना चाहिए बल्कि विश्वास एवं जीवन में बढ़ने का माध्यम बनना चाहिए, अर्थात् मौलिक अच्छाई के अस्तित्व पर विश्वास करना कि ईश्वर ने हमें अच्छाई प्रदान की है और वे हमें अंत में अच्छाई की ओर ले चलेंगे। इसके लिए  हमें प्रार्थनामय एकान्त की आवश्यकता है जहाँ हम ईश्वर की आवाज को सुन सकें। ईश्वर हमारे हृदय द्वार पर दस्तक देते हैं जैसा कि उन्होंने मरियम के साथ किया था। वे हमारे साथ प्रार्थना के माध्यम से संबंध स्थापित करना, पवित्र धर्मग्रंथ पाठ के द्वारा बात करना, मेल-मिलाप संस्कार द्वारा अपनी दया प्रदान करना एवं यूखरिस्त संस्कार द्वारा हमसे संयुक्त होना चाहते हैं।

संत पापा ने विश्वास में बढ़ने हेतु भाई बहनों से मुलाकात एवं वार्तालाप करने की सलाह दी जो उन्हें अच्छाई को देखने एवं विवेक पूर्ण चुनाव करने में मदद दे सकते हैं।

मरियम पर चिंतन करते हुए संत पापा ने कहा कि भयभीत नहीं होने का पहला कारण है कि ईश्वर ने हमें नाम लेकर पुकारा है। जब ईश्वर किसी को नाम लेकर बुलाते हैं तब वे उनकी बुलाहट को भी प्रकट करते हैं, पवित्रता एवं पूर्णता की अपनी योजना हेतु बुलाहट को उनके लिए प्रकट करते हैं। इसके द्वारा वह दूसरों के लिए वरदान बन जाता है। चूँकि ईश्वरीय बुलाहट अनोखा एवं व्यक्तिगत होता है अतः उसके योग्य बनाने के लिए उदारता के साहस की आवश्यकता होती है। ताकि हमारा जीवन कलीसिया एवं सभी लोगों के लिए सचमुच ईश्वर का एक सच्चा एवं स्थायी उपहार बन सके।

‘आपको ईश्वर की कृपा प्राप्त है’- मरियम को भयभीत नहीं होने का मूल कारण है कि उन्हें ईश्वर की कृपा प्राप्त है। ईश्वर की कृपा की निरंतर उपस्थिति हमें अपनी बुलाहट को दृढ़ता के साथ स्वीकार करने का प्रोत्साहन देता है। बुलाहट में एक समर्पण की आवश्यकता होती है जिसको हर दिन नवीकृत किया जाना पड़ता है। बुलाहट का यह पथ आसान नहीं होता किन्तु वह ईश्वर की कृपा से आगे बढ़ता है।

संत पापा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि प्रभु, कलीसिया एवं विश्व उनकी अनोखी बुलाहट के प्रत्युत्तर का इंतजार कर रहे हैं जिसको प्रत्येक ने अपने जीवन में प्राप्त किया है। संत पापा ने सभी युवाओं को पनामा में विश्व युवा दिवस की तैयारी आनन्द एवं उत्साह से करने का निमंत्रण दिया तथा कहा कि विश्व दिवस साहसी लोगों का है न कि उन युवाओं का जो आराम की खोज कर रहे हैं तथा कठिनाइयों में पीछे हट जाते हैं।


(Usha Tirkey)

आध्यात्मिक साधना : अपनी ही प्यास से पीना सीखें

In Church on February 22, 2018 at 4:22 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 2018 (रेई): मानवीय कमजोरी एवं प्रलोभन के साथ येसु का संघर्ष, अरिच्चा में संत पापा फ्राँसिस एवं परमधर्माध्यक्षीय रोमी कार्यालय के कर्मचारियों की आध्यात्मिक साधना के संचालन फादर होशे तोलेनतीनो मनदोनका का बुधवार के दूसरे प्रवचन के चिंतन का सार था।

सातवें चिंतन में फादर होसे ने कहा कि हमारी आध्यात्मिकता की सबसे बड़ी बाधा हमारी कमजोरी नहीं है बल्कि हमारी कठोरता और आत्मनिर्भरता है। अतः हमें अपनी प्यास से सीखना चाहिए। फादर होसे ने कहा कि हमारी प्यास को येसु के दुखभोग से प्रेरित होना चाहिए।

अपनी प्यास से पीने का अर्थ है आध्यात्मिक यात्रा करना में आगे बढ़ना। मानवता जिसका आलिंगन करने हेतु हम संघर्ष कर रहे हैं वह वही मानवता है जिसका आलिंगन येसु ने भी किया क्योंकि वे प्यार से हमारी वास्तविकता की ओर झुकाते हैं, न कि उस आदर्श की दिशा में जिसका निर्माण हम करते हैं। ईश्वर के पुत्र के रहस्य का अर्थ है जीवन के एक गैर-वैचारिक दृष्टि को अपनाना।

कुछ मायने में प्यास हमें मानवीय बनाता है और यही एक रास्ता है जिसके द्वारा हम आध्यात्मिक रूप से प्रौढ़ बनते हैं। थॉमस मेरटॉन के अनुसार ख्रीस्त अपने को उससे प्रकट करना चाहते थे जिससे हम अपने को प्यार नहीं करते। यही कारण था कि उन्होंने हमारे दुखों एवं पीड़ाओं को अपने ऊपर लिया। संत पौलुस भी कहते हैं, “जब मैं कमजोर हूँ तभी मैं बलवान हूँ।”

निर्जन प्रदेश में येसु की तीन परीक्षाएँ जिसमें पहली परीक्षा रोटी के लिए थी। येसु हमारी भौतिक आवश्यकताओं को जानते हैं किन्तु याद दिलाते हैं कि केवल रोटी ही नहीं है जिससे हम जीवित रह सकते हैं। उनका उत्तर वास्तविकता को अस्वीकार नहीं करता बल्कि यह समझने में मदद देता है कि हम एक बंजर भूमि की तरह है जिसको आत्मा के द्वारा आवास योग्य बनाये जाने की आवश्यकता है।

दूसरी परीक्षा को समझने के लिए फादर होसे ने मरूभूमि में इस्राएलों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मूसा से पीने हेतु जल की मांग की। हम भी उन्हीं की तरह सोचते हैं कि विश्वास करने का अर्थ है हमारी प्यास को तृप्त करना किन्तु येसु शिक्षा देते हैं कि हम अपनी प्यास को एकान्त में तथा प्रार्थना द्वारा व्यक्त करें।

येसु ने मूर्तिपूजा हेतु प्रलोभन का उत्तर देते हुए कह था, तुम अपने प्रभु ईश्वर की आराधना करो। संत मती रचित सुसमाचार में पुनर्जीवित प्रभु कहते हैं कि “उन्हें स्वर्ग में और पृथ्वी पर सारा अधिकार मिला है।”

फादर होसे ने कहा कि शैतान अपनी आराधना कराना चाहता था किन्तु उसकी शक्ति केवल दिखावा है जबकि ख्रीस्त अपने पूर्ण समर्पण के द्वारा क्रूस के रहस्य से जुड़े हैं। यह एक बड़ा जोखिम है जब सत्ता या पद का प्रलोभन हमें क्रूस के रहस्य से दूर ले जाता है। इस प्रकार हम अपने भाई बहनों की सेवा से अपने को दूर कर लेते हैं। येसु हमें सिखलाते हैं कि हम किस तरह दूसरों के गुलाम न बनें और न ही दूसरों को अपना गुलाम बनायें बल्कि केवल ईश्वर की आराधना करें एवं एक याजक के रूप में दूसरों की सेवा करें।


(Usha Tirkey)

23 फरवरी की प्रार्थना एवं उपवास के केंद्र में कोंगो एवं दक्षिणी सूडान

In Church on February 22, 2018 at 4:21 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 18 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने 23 फरवरी को प्रार्थना एवं उपवास का दिन घोषित किया है जिसमें मुख्य रूप से कोंगो गणराज्य एवं दक्षिणी सूडान के लिए विशेष प्रार्थना अर्पित की जाएगी।

कोंगो अफ्रीका का दूसरा बड़ा देश है। यह प्राकृतिक साधनों का धनी है फिर भी मानव विकाश की दृष्टिकोण से एक पिछड़ा देश है।

दक्षिणी सूडान में भी यही स्थिति है जो महत्वाकांक्षा के कारण राजनीतिक युद्ध का अखाड़ा बन गया है। यह स्थित जारी है, लेकिन जब से यहाँ विभिन्न जनजातियों के नेता हुए हैं इसे एक मजबूत जातीय विशेषता माना जा रहा है, जिसके साथ अब विभिन्न सैन्य गुटों को नियंत्रण से बाहर रखा गया है। इस तरह एक “मूक नरसंहार” जगह ले जा रहा है और चूँकि वहाँ कोई कानून एवं दण्ड मुक्ति की व्यवस्था नहीं है लोग अपराध को भी न्यायसंगत ठहरा रहे हैं। लोग भूखे हैं तथा उन्हें विभिन्न त्रासदी के अनुभवों से गहरा आघात मिला है। इन सबके कारण मानव जीवन का मूल्य निर्व्यक्तीकरण एवं संबंधों में दुर्बलता की स्थिति की ओर बढ़ रहा है। नरसंहार में बच्चे बूढ़े किसी को नहीं छोड़ा जा रहा है।

कोंगो तथा दक्षिणी सूडान दोनों ही देश मुसीबत, भूख, हिंसा और अस्थायित्व की कुंडली के केंद्र में हैं। जिसके कारण संत पापा ने उनके लिए विशेष प्रार्थना की मांग की है।

23 फरवरी को सभी ख्रीस्तीय विश्वासी संत पापा के इस आह्वान का उत्तर देते हुए आशा उत्पन्न करने हेतु बुलाये गये हैं। सबसे बढ़कर उन लोगों के दारुण रूदन को सुनने के लिए जो हमसे, नहीं भूला दिये जाने का आग्रह कर रहे हैं।

सिस्टर यूजेनिया ब्राक्वेहाइस कोनेसा, कोंगो की वर्तमान स्थिति के बारे बतलाते हुए कहती हैं कि आंतरिक कारण जैसे सत्ता की चाह, भ्रष्टाचार, लालच एवं आदिवासी संघर्ष के कारण कोंगो की स्थिति बदतर हो गयी है किन्तु इसकी बिगड़ी हालत का कारण अंतरराष्ट्रीय लाभ भी है क्योंकि हर कोई “केक का एक टुकड़ा चाहता है।” उन्होंने कहा कि मोबाईल और कंप्यूटर के निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले कोल्टन – खनिज की बात बहुत हो रही है, जो देश के पूर्वी भाग में संघर्ष का मुख्य मुद्दा है किन्तु इसके साथ कई अन्य कारण भी हैं।

सिस्टर यूजेनिया जो कोंगो गणराज्य के दक्षिण स्थित कानजेनजे गाँव में 2009 से रह रही हैं उनका विश्वास है कि शिक्षा ही लोगों में आशा जागृत कर सकती है। शिक्षा जैसा कि संत पापा कहते हैं एक ऐसा रास्ता है जो उत्पादन प्रक्रिया की ओर प्रेरित करती न कि जगह घेर लेती है।

देश में करीब 8 मिलियन निवासी हैं जिनमें से अधिकतर लोग जवान हैं। अतः सिस्टर का विश्वास है कि पीढियों के बीच मुलाकात एवं इतिहास के अध्ययन के द्वारा तथा ईश्वर की कृपा एवं सहायता से लोग अपने बीच अच्छी चीज उत्पन्न कर सकेंगे। उनका मानना है कि यदि लोग लोकतंत्र का चुनाव करेंगे तो वे भविष्य की समृद्धि एवं शांति की आशा अवश्य प्राप्त करेंगे।


(Usha Tirkey)

संत पेत्रुस के धर्मासन का पर्व

In Church on February 22, 2018 at 4:20 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): कलीसिया 22 फरवरी को प्रेरित संत पेत्रुस के धर्मासन का पर्व मनाती है। इस अवसर पर कलीसिया के सर्वोच्च अधिकारी के लिए विशेष प्रार्थना की जाती है।

कलीसिया के परमाध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस के लिए प्रार्थना-

हे ईश्वर, अपने विश्वस्त प्रजा के गड़ेरिये एवं शासक, अपने सेवक संत पापा फ्राँसिस पर दयादृष्टि कर। आपने उन्हें कलीसिया का संचालन करने के लिए एक गड़ेरिये के रूप में चुना है। हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि वे अपने शब्दों एवं वचनों से उन लोगों को शिक्षा दे सकें जिनके ऊपर उन्हें नियुक्त किया गया है ताकि उन्हें समर्पित झुण्ड के साथ वे भी एक दिन अनन्त जीवन प्राप्त कर सकें। हमारे प्रभु येसु ख्रीस्त के द्वारा, आमेन।


(Usha Tirkey)

मातृभाषा वैचारिक निरंकुशता के खिलाफ एक बचाव है, संत पापा

In Church on February 22, 2018 at 4:18 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 22 फरवरी 2018 (वाटिकन न्यूज़): 21 फरवरी विश्व मातृभाषा दिवस पर संत पापा फ्राँसिस के शब्द हमें स्मरण दिलाते हैं कि उपनिवेशवाद का विरोध करने और विश्वास को हस्तांतरित करने में मातृभाषा की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।

संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा घोषित विश्व मातृभाषा दिवस का उद्देश्य है भाषा और सांस्कृतिक विविधता एवं एक से अधिक भाषाओं को बोल पाने की क्षमता को बढ़ावा देना।

संत पापा फ्राँसिस मातृभाषा के प्रयोग का समर्थन करते हैं। उन्होंने 23 नवम्बर 2017 को वाटिकन के प्रेरितिक आवास संत मर्था में ख्रीस्तयाग प्रवचन में कहा था, “मातृभाषा वैचारिक एवं सांस्कृतिक उपनिवेशन के विरूद्ध सुरक्षा का गढ़ है तथा विविधता को नष्ट करने वाले प्रधानता की सोच के खिलाफ।”

संत पापा ने कहा था कि अपनी मातृभाषा बोल नहीं पाना एक प्रकार से इतिहास को मिटाना है ताकि विचारों की स्वतंत्रता को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि हर बोली की अपनी ऐतिहासिक जड़ होती है।

संत पापा ने बतलाया कि जब औपनिवेशीकरण का सामना करना पड़े तो दो चीजें हैं जो लोगों की रक्षा कर सकती हैं, स्मृति एवं बोली। स्मृति एवं बोली को कौन सुरक्षित रखता हैं? संत पापा ने कहा कि महिलाएँ उन्हें सुरक्षित रखती हैं जो पुरुषों के अधिक मजबूत होतीं। यही महिलाओं की शक्ति है कि वे संस्कृतिक एवं वैचारिक उपनिवेशन से बचाये रखती हैं। बाईबिल इसका साक्षी है।

संत पापा ने 7 जनवरी को बपतिस्मा प्राप्त बच्चों के माता-पिता से भी कहा था कि विश्वास माता-पिता और दादा-दादी की भाषा में हस्तांतरित होता है। वे उसे न भूलें। उनका कर्तव्य है कि वे विश्वास को हस्तांतरित करें। वे इसे प्रेम की भाषा में अपने परिवार में करें। सच्चा विश्वास माता के मुख से सिखा जा सकता है उस भाषा से जिसको उसके बच्चे समझ सकते हैं।


(Usha Tirkey)

संत पापा फ्राँसिस 25 फरवरी को संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे

In Church on February 20, 2018 at 4:31 pm

इटली, मंगलवार, 20 फऱवरी 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस आगामी 25 फरवरी को शाम 4.00 बजे, रोम स्थित संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे।

रोम विकारियेट द्वारा 20 फरवरी को जारी एक प्रेस विज्ञाप्ति में बतलाया गया है कि संत पापा फ्राँसिस 25 फरवरी को रोम में पोंते माम्मोलो के फेरमो कोरनी स्थित संत जेलासियो ई पापा पल्ली का दौरा करेंगे। वहाँ उनका स्वागत महाधर्माध्यक्ष अंजेलो दी दोनातिस, पल्ली पुरोहित डॉन जुसेप्पे राचिती एवं फादर अलफियो कारबोनारा, पल्ली के विश्वासियों के साथ करेंगे।

मुलाकात के दौरान संत पापा वहाँ के बच्चों, धर्मशिक्षा ले रहे बच्चों, पल्ली के युवाओं एवं परिवारों से मिलेंगे। वे वहाँ बीमारों, बुजुरगों, गरीबों तथा कारीतास केंद्र के कर्मचारियों से भी मुलाकात करेंगे। पल्ली में वे 18 एवं 25 साल के दो युवाओं से भी मुलाकात करेंगे जो जाम्बिया के हैं तथा पल्ली द्वारा स्वागत किये गये हैं। संत पापा पल्ली के कुछ विश्वासियों का पापस्वीकार भी सुनेंगे। मुलाकात के अंत में संत पापा संध्या 6.00 बजे ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे।

संत जेलासियो ई पापा पल्ली के पल्ली पुरोहित डॉन जुसेप्पे राचिती ने कहा, “मैं अपनी उस खुशी का वर्णन नहीं कर सकता जब मुझे संत पापा के दौरे की जानकारी दी गयी। पल्ली समुदाय घबराया हुआ है तथा प्रार्थना एवं स्वागत की तैयारी हेतु विभिन्न कार्यों में जुटा है।”

संत जेलासियो ई पापा पल्ली की स्थापना 1972 में हुई है। पल्ली में सैकड़ों विश्वासी हैं, युवा भी गिरजा के विभिन्न गति-विधियों में भाग लेते हैं। पल्ली हर बृहस्पतिवार को 250 गरीब लोगों की मदद कपड़े एवं भोजन के द्वारा करता है। 50 लोगों को नास्ता प्रदान किया जाता है। हर दूसरा रविवार परिवारों के लिए समर्पित है।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: