Vatican Radio HIndi

Archive for March 1st, 2018|Daily archive page

संत पापा ने निकारागुवा की राजदूत का प्रत्यय पत्र स्वीकारा

In Church on March 1, 2018 at 4:25 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 मार्च 2018 (रेई): सन्त पापा फ्राँसिस ने, बृहस्पतिवार को, परमधर्मपीठ के लिये निकारागुवा की नई राजदूत एस्थेर मार्ग्रीता कारबल्लो माद्रीगाल का प्रत्यय पत्र स्वीकार किया।

नवनियुक्त राजदूत का जन्म 30 जनवरी 1954 को कातारिना में हुआ था। वे विवाहित हैं तथा दो बेटियों की माता हैं।

उन्होंने निकारागुवा के राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय से विज्ञान विषय पर स्नातक की डिग्री प्राप्त की है और विश्वविद्यालय में अध्यापन हेतु विशेषीकृत हैं। उन्होंने संत कारलोस विश्व विद्यालय से अनुसंधान की विधि एवं स्पेन के विश्व विद्यालय से उच्च शिक्षा के मूल्यांकन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है।

नवनियुक्त राजदूत ने सन् 1975 में संत जॉन ऑरियटल स्कूल में प्राथमिक शिक्षा के शिक्षक के रूप में अपना कार्य आरम्भ किया।

वे सन् 1980 से 1984 तक जैविक विज्ञान के प्रोफेसर रहे।

1984 से 1986 तक कृषि विज्ञान संकाय यूनान-मानागुआ के मेथोडोलॉजिकल टीचिंग विभाग में मेथोडोलॉजिकल कंसल्टेंट रहे।

1987 से 1993 तक राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय में कृषि विज्ञान के उच्च संस्थान के पंजीकरण और सांख्यिकी विभाग में प्रमुख का कार्यभार सँभाला।

1993 से 1997 तक राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय के महासचिव के रूप में काम किया।

1997 से 1998 तक राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम शिक्षण और विकास क्षेत्र के सदस्य रहे।

1998 से 2002 तक राष्ट्रीय कृषि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक संसाधन संकाय और पर्यावरण के शैक्षणिक सचिव रहे।

2002 से 2009 तक प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण के संकाय के डीन रहे तथा सन् 2006 से 2013 तक नेशनल काउंसिल ऑफ यूनिवर्सिटी के महासचिव का कार्य किया।


(Usha Tirkey)

Advertisements

नव-पेलाजियानिज्म एवं नव-नोस्टिसिज्म ख्रीस्त में विश्वास को विरूपित करता

In Church on March 1, 2018 at 4:23 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 मार्च 2018 (रेई): विश्वास के सिद्धान्त हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा प्रकाशित एक नये दस्तावेज में ख्रीस्तीय मुक्ति के पहलूओं पर प्रकाश डाला गया है जिसे आज की सांस्कृतिक परिवर्तन के कारण समझना कठिन हो सकता है।

दस्तावेज का नाम “प्लाकिट देयो” है जिसमें काथलिक कलीसिया के धर्माध्यक्षों को और सामान्य रूप में सभी ख्रीस्तीय विश्वासियों को सम्बोधित किया गया है।

प्लाकिट देयो खासकर दो आधुनिक प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालता है पहला, नव पेलाजियन ख्रीस्तीय विरोधी सिद्धांत जो व्यक्तिवाद पर जोर देता तथा विश्वास करता है कि मानव अपनी मुक्ति खुद कर सकता है, और दूसरा, नव नोस्टिसिज्म का सिद्धांत जो मुक्ति को केवल ईश्वर के साथ अंतरंग संबंध का परिणाम मानता है, जबकि वह अन्य लोगों एवं प्राकृतिक के साथ संबंध की अनदेखी करता है।

धर्माध्यक्षों को सम्बोधित इस पत्र में याद किया गया है कि संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा में उन प्रवृत्तियों की ओर झुकने वाले लोगों का जिक्र बार बार किया है जो इन प्राचीन सिद्धांतों से मिलता जुलता है।

नव पेलाजियन ख्रीस्तीय विरोधी सिद्धांत एवं नव नोस्टिसिज्म का सिद्धांत दोनों ही ख्रीस्त एवं एक विश्वव्यापी मुक्ति में विश्वास की अभिव्यक्ति से इनकार करते हैं।

विचार करने के बाद कि समकालीन विश्व ख्रीस्तीय मुक्ति को कैसे देखता है, पत्र का केंद्र, उद्धार के लिए मानव की अभिलाषा, उद्धारकर्ता और मुक्ति के रूप में येसु मसीह की अनूठी भूमिका और मसीह के शरीर कलीसिया में मुक्ति को बताता है। इस तरह यह ख्रीस्त एवं उनकी कलीसिया द्वारा मुक्ति हेतु ईश्वर की योजना का वर्णन करता है और पाप से मुक्ति एवं पवित्र त्रियेक ईश्वर के दिव्य जीवन से सहभागी होने पर बल देता है। यह संस्कारों की आवश्यकता की ओर इंगित करता है जिसके द्वारा ईश्वर मानव का उद्धार करना चाहते हैं।

ख्रीस्तीय मुक्ति का यह दर्शन नव पेलाजियानिज्म एवं नव नोस्टिसिज्म के सिद्धांतों से भिन्न है तथा अनिवार्य रूप से ख्रीस्तीयों को मिशनरी बनने के लिए बुलाता है। इसके लिए उन लोगों के साथ “उदार एवं रचनात्मक” वार्ता की आवश्यकता है जो दूसरे धार्मिक परम्पराओं पर विश्वास करते और मुक्तिदाता के निश्चित आगमन का इंतजार कर रहे हैं। शरीर एवं आत्मा का पूर्ण उद्धार ही हमारा अंतिम लक्ष्य है जिसके लिए ईश्वर समस्त मानव जाति का आह्वान करते हैं।

पत्र के अंत में कहा गया है कि विश्वास पर आधारित, आशा द्वारा पोषित तथा मुक्तिदाता की माता एवं मुक्ति पाने में प्रथम मरियम के उदाहरण पर, प्रेम के कार्यों से, हम आश्वस्त हैं कि हमारी नागरिकता स्वर्ग में है और जिसके कारण हम मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त का इंतजार करते हैं।


(Usha Tirkey)

कार्डिनल परिषद C9 की 23वीं सभा का संक्षिप्त प्रतिवेदन

In Church on March 1, 2018 at 4:22 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 मार्च 2018 (रेई): वाटिकन प्रवक्ता एवं वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक ग्रेग बर्क ने कार्डिनलों की सलाहकार परिषद की 23वीं सभा के समापन पर 28 फरवरी को सभा का सार प्रस्तुत किया।

तीन दिवसीय इस सभा में कार्डिनल जॉर्ज पेल को छोड़ परिषद के अन्य सभी सदस्य उपस्थित थे। कार्डिनल लौरेट मोनसेनगवो पसिन्या सोमवार शाम को सभा के लिए पहुँचे और संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन के समारोह के कारण बुधवार को पहली बेला के सत्र में अनुपस्थित रहे।

बर्क ने बतलाया कि सभा में, धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के ईशशास्त्रीय स्थिति, मानव संसाधनों एवं परमधर्मपीठ में खर्च में नियंत्रण तथा नाबालिग़ों की सुरक्षा आदि विषयों पर चर्चा की गयी। कार्डिनलों ने समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद, पूर्वी कलीसियाओं के परिषद एवं लोगों के लिए सुसमाचार प्रचार हेतु गठित समिति का अवलोकन किया। धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों पर चिंतन करते हुए कहा गया कि इसका गठन एवनजेली गौदियुम न. 32 द्वारा प्रेरित है। धर्माध्यक्षीय सम्मेलन का पद जो उन्हें ठोस अधिकारों के अधीनस्थ के रूप में ग्रहण करती है, उसमें कुछ प्रामाणिक सैद्धांतिक प्राधिकरणों को पर्याप्त रूप से नहीं समझाया गया है। कहा गया कि अत्यधिक केंद्रीकरण का सिद्धांत कलीसिया के जीवन और उसकी प्रेरितिक गतिशील को मदद करने की अपेक्षा उसे अधिक जटिल बना देता है। यहाँ विकेन्द्रीकरण की स्वस्थ भावना से मोतू प्रोप्रियो “अपोसतोलोस स्वोस” के पुनः अध्ययन की आवश्यकता है जिसके बारे संत पापा फ्राँसिस बार-बार दोहराते हैं कि यही कलीसिया की एकता की रक्षा करता है। कार्डिनल रेइनहार्ड मार्क्स ने कार्डिनलों की परिषद के समक्ष आर्थिक मामलों के लिए गठित परमधर्मपीठीय समिति के कार्यों को प्रस्तुत करते हुए मानव संसाधन की विषयवस्तु को सामने रखा।

इस पृष्टभूमि पर आर्थिक मामलों के लिए गठित समिति ने व्यय को कम करने के उद्देश्य से परमधर्मपीठीय संस्थानों के लिए एक दिशानिर्देश तैयार करने का निर्णय लिया। कार्डिनलों ने विश्वास के सिद्धांत के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा कम से कम समय में, बाल शोषण के मामलों की प्रक्रिया के विभिन्न विकल्पों पर भी चर्चा की। कार्डिनल पीटर टर्कसन ने समग्र मानव विकास हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद की प्रगति के बारे जानकारी दी।

कार्डिनल परिषद C9 की अगली सभा 23,24 और 25 अप्रैल 2018 को होगी।


(Usha Tirkey)

संत पापा ने सीरिया के लिए प्रार्थना की अपील की

In Church on March 1, 2018 at 4:21 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज़): संत पापा फ्राँसिस ने सीरिया को एक “शहीद राष्ट्र” की संज्ञा देते हुए, अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीयों के लिए प्रार्थना करने की अपील की।

बुधवार को साप्ताहिक आमदर्शन समारोह के दौरान अपनी धर्मशिक्षा जारी करने के उपरांत संत पापा ने आमदर्शन समारोह में उपस्थित सीरिया तथा मध्यपूर्व के लोगों का अभिवादन किया।

उन्होंने सीरिया को शहीद राष्ट्र पुकारते हुए वहाँ के अत्याचार के शिकार ख्रीस्तीयों के लिए प्रार्थना का आग्रह किया और कहा, “हमें उन भाई बहनों एवं अत्याचार के शिकार सभी ख्रीस्तीयों के लिए प्रार्थना करना चाहिए।”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने युद्ध विराम की अपील की है ताकि सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता पहुँचाया जा सके किन्तु सीरिया से मिलने वाली जानकारी के अनुसार युद्धविराम संधि के बावजूद संघर्ष जारी है।

संत पापा ने चालीसा काल हेतु अपने संदेश में, चालीसा काल को सच्चे विश्वास को सुदृढ़ करने के लिए मन-परिवर्तन एवं आध्यात्मिक नवीनीकरण हेतु दृढ़ संकल्प लेने का अवसर कहा था। उन्होंने स्मरण दिलाया था कि प्रेम विश्वासियों की जीवन शैली है जो उन्हें विशिष्टता प्रदान करता है।


(Usha Tirkey)

जबरन धर्मांतरण के आरोप में पेन्तेकोस्त पास्टर पर हमला

In Church on March 1, 2018 at 4:20 pm

बेत्तिया, बृहस्पिवार, 1 मार्च 18 (एशियान्यूज़): बिहार के पश्चिम चम्पारण में पेतेकोस्त कलीसिया के पास्टर जोसेफ पर, हिन्दू चरमपंथियों द्वारा हिंसक हमला किये जाने की घटना प्रकाश में आई है।

पुलिस अधीक्षक जयन्त कांत ने कहा कि घटना 26 फरवरी को उस समय घटी जब सुसमाचार गूँज प्रेरितिक सोसाईटी (जेमस) के मिशनरी 13 विश्वासियों के साथ बस द्वार यात्रा कर रहे थे। वे बेत्तिया के संत पौल पेतेकोस्ट गिरजाघर में एक प्रार्थना सभा में भाग लेने जा रहे थे।

स्थानीय जेमस पास्टर पालानिवेलू ने कहा कि यात्रा के दौरान पास्टर जोसेफ एवं उनके साथी बस में अन्य तीर्थयात्रियों के साथ सुसमाचार पर चर्चा कर रहे थे किन्तु उनमें से एक जो हिन्दू चरमपंथी दल का सदस्य था वह ख्रीस्तीयता पर चर्चा को पसंद नहीं किया। अतः वह ख्रीस्तीयों पर चिल्लाने तथा विश्वासियों को मूल रूप से हिन्दू धर्म के सदस्य मानते हुए, पास्टर पर धर्मपरिवर्तन का आरोप लगाने लगा।

यात्रियों में से एक शिबू थोमस ने मैटर्स इंडिया को बतलाया कि नाराज हिन्दू चरमपंथी ने अपने दल के अन्य सदस्य को सूचित कर दिया था। अतः जब वे बेत्तिया स्टेशन पर पहुँचे तो वहाँ चरमपंथियों की एक भीड़ ख्रीस्तीयों का इंतजार कर रही थी।”

उन्होंने बतलाया कि चरमपंथियों ने पास्टर जोसेफ एवं बालदेव सिन्ह को ख्रीस्तीयों के दल से अलग कर दिया तथा उनकी पूरी तरह से पिटाई की। थॉमस ने बतलाया कि जब वे मदद का आग्रह कर रहे थे तो किसी ने उनकी मदद नहीं की। एक ट्रैफ़िक एजेंट ने क्रोधित भीड़ को शांत करने की कोशिश की, किन्तु उसे भी गुस्से में भीड़ ने अलग कर दिया।

दोनों घायल ख्रीस्तीयों को अस्पताल में भर्ती किया गया है। पुलिस पहले तो केस दर्ज करने से इनकार की किन्तु बाद में पास्टर एवं अन्य लोगों की शिकायत दर्ज कराने के लिए तैयार हो गयी।


(Usha Tirkey)

%d bloggers like this: