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नव-पेलाजियानिज्म एवं नव-नोस्टिसिज्म ख्रीस्त में विश्वास को विरूपित करता

In Church on March 1, 2018 at 4:23 pm

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 1 मार्च 2018 (रेई): विश्वास के सिद्धान्त हेतु गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ द्वारा प्रकाशित एक नये दस्तावेज में ख्रीस्तीय मुक्ति के पहलूओं पर प्रकाश डाला गया है जिसे आज की सांस्कृतिक परिवर्तन के कारण समझना कठिन हो सकता है।

दस्तावेज का नाम “प्लाकिट देयो” है जिसमें काथलिक कलीसिया के धर्माध्यक्षों को और सामान्य रूप में सभी ख्रीस्तीय विश्वासियों को सम्बोधित किया गया है।

प्लाकिट देयो खासकर दो आधुनिक प्रवृत्तियों पर प्रकाश डालता है पहला, नव पेलाजियन ख्रीस्तीय विरोधी सिद्धांत जो व्यक्तिवाद पर जोर देता तथा विश्वास करता है कि मानव अपनी मुक्ति खुद कर सकता है, और दूसरा, नव नोस्टिसिज्म का सिद्धांत जो मुक्ति को केवल ईश्वर के साथ अंतरंग संबंध का परिणाम मानता है, जबकि वह अन्य लोगों एवं प्राकृतिक के साथ संबंध की अनदेखी करता है।

धर्माध्यक्षों को सम्बोधित इस पत्र में याद किया गया है कि संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा में उन प्रवृत्तियों की ओर झुकने वाले लोगों का जिक्र बार बार किया है जो इन प्राचीन सिद्धांतों से मिलता जुलता है।

नव पेलाजियन ख्रीस्तीय विरोधी सिद्धांत एवं नव नोस्टिसिज्म का सिद्धांत दोनों ही ख्रीस्त एवं एक विश्वव्यापी मुक्ति में विश्वास की अभिव्यक्ति से इनकार करते हैं।

विचार करने के बाद कि समकालीन विश्व ख्रीस्तीय मुक्ति को कैसे देखता है, पत्र का केंद्र, उद्धार के लिए मानव की अभिलाषा, उद्धारकर्ता और मुक्ति के रूप में येसु मसीह की अनूठी भूमिका और मसीह के शरीर कलीसिया में मुक्ति को बताता है। इस तरह यह ख्रीस्त एवं उनकी कलीसिया द्वारा मुक्ति हेतु ईश्वर की योजना का वर्णन करता है और पाप से मुक्ति एवं पवित्र त्रियेक ईश्वर के दिव्य जीवन से सहभागी होने पर बल देता है। यह संस्कारों की आवश्यकता की ओर इंगित करता है जिसके द्वारा ईश्वर मानव का उद्धार करना चाहते हैं।

ख्रीस्तीय मुक्ति का यह दर्शन नव पेलाजियानिज्म एवं नव नोस्टिसिज्म के सिद्धांतों से भिन्न है तथा अनिवार्य रूप से ख्रीस्तीयों को मिशनरी बनने के लिए बुलाता है। इसके लिए उन लोगों के साथ “उदार एवं रचनात्मक” वार्ता की आवश्यकता है जो दूसरे धार्मिक परम्पराओं पर विश्वास करते और मुक्तिदाता के निश्चित आगमन का इंतजार कर रहे हैं। शरीर एवं आत्मा का पूर्ण उद्धार ही हमारा अंतिम लक्ष्य है जिसके लिए ईश्वर समस्त मानव जाति का आह्वान करते हैं।

पत्र के अंत में कहा गया है कि विश्वास पर आधारित, आशा द्वारा पोषित तथा मुक्तिदाता की माता एवं मुक्ति पाने में प्रथम मरियम के उदाहरण पर, प्रेम के कार्यों से, हम आश्वस्त हैं कि हमारी नागरिकता स्वर्ग में है और जिसके कारण हम मुक्तिदाता येसु ख्रीस्त का इंतजार करते हैं।


(Usha Tirkey)

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