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संत पापा फ्राँसिस का वीडियो संदेश, “आध्यात्मिक आत्म-परिक्षण में प्रशिक्षण”

In Church on March 2, 2018 at 4:05 pm

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 02 मार्च 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 2 मार्च को इस महीने की प्रेरितिक प्रार्थना हेतु वीडियो संदेश दिया।

संदेश में उन्होंने कहा,”जिस युग में हम रहते हैं, हमें यह समझने की गहरी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता है… यह जानने के लिए कि सभी आवाजों के बीच, कौन सी आवाज ईश्वर की है जो हमें जीवन और पुनरुत्थान की ओर ले जाती है और वह आवाज जो हमें ‘मौत की संस्कृति’ में गिरने से बचाती है।”

संत पापा ने कहा,”हमें अपने अंदर की आवाज सुनने की आवश्यकता है, जहाँ प्रभु हमसे प्रेम के लिए जीने और उसके प्रेम के मिशन को जारी रखने हेतु हमसे मांग करते हैं।”

उन्होंने कहा,”आइए, हम एक साथ प्रार्थना करें कि पूरी कलीसिया व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर, आध्यात्मिक आत्म-परिक्षण के प्रशिक्षण की आवश्यकता को पहचान सके।”


(Margaret Sumita Minj)

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इराक – किर्कुक के महाधर्माध्यक्ष ने मोन्सिन्योर राहो की शहादत को याद किया

In Church on March 2, 2018 at 4:04 pm


किर्कुक, शुक्रवार 02 मार्च 2018 (एशियान्यूज) : ईराक की कलीसिया मोसुल के महाधर्माध्यक्ष पॉल फर्राज राहो और उनके साथ “कई ख्रीस्तीय पीड़ितों” को “शहीद के रुप में मानने” के लिए प्रतिबद्ध है जिन्होंने “विश्वास की रक्षा करने के लिए अपना जीवन दे दिया।” किर्कुक के महाधर्माध्यक्ष युसुफ थॉमा मिरकिस ने कहा कि आज से ठीक 10 साल पहले, 29 फरवरी 2008 को महाधर्माध्यक्ष को अपहरण किया गया था और दो सप्ताह बाद 13 मार्च को उसे मार दिया गया था।

महाधर्माध्यक्ष मिरकिस ने कहा, “हम सभी को अपनी सहभागिता दिखानी है जिसे कि कलीसिया महाधर्माध्यक्ष और अन्य ख्रीस्तीयों को शहीद के रुप में स्वीकार करे। इसे ध्यान में रखते हुए, “हम संत प्रकरण हेतु परमधर्मपीठीय आयोग के सामने में पेश करने के लिए दस्तावेज पर काम कर रहे हैं।”

हम इराकी ख्रीस्तीयों के लिए यह बहुत जरुरी है कि हम उनकी मौत को याद करें क्योंकि यह इस देश में ख्रीस्तीयों की नींव का प्रमाण है।, दाएस (इस्लामी राज्य) के धर्मपरिवर्तन या मृत्यु की धमकी के बावजूद, इराक में हम विश्वास का एक उदाहरण बनना चाहते हैं। ”

दस साल पहले महाधर्माध्यक्ष का अपहरण प्रेरितिक दौरा कर लौटते वक्त रास्ते में हुआ। बंदूकधारियों ने पहले कार के टायर पर गोली मार दी, ड्राइवर और उसके दो साथियों को मार दिया। बंदूकधारियों ने महाधर्माध्यक्ष को अपहरण कर लिया और दो हफ्ते बाद मोसुल के करमा जिले में एक कब्रिस्तान के पास उनका शरीर मिला था।

महाधर्माध्यक्ष राहो “विनम्र और सरल स्वभाव वाले व्यक्ति” के रूप में याद किये जाते हैं। वे अपने लोगों और शहर से बहुत प्यार करते थे। यही वजह था कि वे सन् 2004 ई. में चालदीन जिले के शिफा में खतरों और बमबारी के बावजूद भी वहीं रहे।

महाधर्माध्यक्ष राहो की मौत के एक साल पहले सन् 2007 में खलदेई समुदाय ने फादर राघीद गान्नी और अन्य तीन ख्रीस्तीयों की शहादत का मातम मनाया था।

पापा एमेरितुस बेनेडिक्ट सोलहवें, तत्कालीन प्रधानमंत्री नूरि अल-मलिकी, ख्रीस्तीय, सुन्नी और शिया मुस्लिम मौलवियों, इराकी नेताओं, मध्य पूर्व के कलीसियाओं की परिषद सदस्यों ने उनके लापता होने पर गहरी संवेदना व्यक्त की थी ।

उनके अपहरण के समय संत पापा ने अपहरणकर्ताओं से तीन बार उन्हें छोड़ने की अपील की थी जिन्हें हृदय की बीमारी थी और उनका इलाज जरुरी था।

कई इराकी ख्रीस्तीय अपने विश्वास के लिए मारे गये। यह एक त्रासदी है जो आज भी जारी है।


(Margaret Sumita Minj)

केरल, एक पूर्व साक्रिस्टियन द्वारा पुरोहित की हत्या

In Church on March 2, 2018 at 4:03 pm

मुम्बई, शुक्रवार 02 मार्च 2018 (एशियान्यूज) : केरल के एक 52 वर्षीय पुरोहित को तीर्थयात्रा के दौरान एक पूर्व साक्रिस्टियन ने चाकू मार कर हत्या कर दी। फादर जेवियर थेलेकाट अंगमाली धर्मप्रांत, सीरो-मालाबार रीति के पुरोहित थे और संत थोमस अतरराष्ट्रीय तीर्थालय, कुर्सीमाला के रेक्टर थे।

तीर्थालय के प्रवक्ता जिम्मी ने सूचित किया कि पुरोहित पर हमला एक गिरजाघर की देखभाल और कब्रिस्तान के रखरखाव करने वाले पूर्व कर्मचारी जोन्नी ने किया।

स्थानीय स्रोतों के अनुसार, फादर थेलेकाट ने तीन महीने पहले उसे काम से निकाल देने की धमकी दी और काम पर नहीं आने को कहा था। गवाहों का कहना था कि जोन्नी ने बार-बार काम में दोबारा बहाल करने के लिए फादर से कहा, लेकिन फादर ने इसके लिए सहमति नहीं दी।

प्रवक्ता जिम्मी ने बताया कि घटना 1 मार्च को स्थानीय समय अनुसार दिन के 10,45 बजे के करीब हुई जब फादर थेटेकाट गिरजाघर के पीछे के पहाड़ से नीचे आ रहे थे। पूर्व साक्रिस्टियन ने फादर का रास्ता रोक दिया और दोनों में बहस शुरु हुई और गुस्से में आकर साक्रिस्टियन ने फादर को चाकू मार दिया।

फादर को धायल करने के बाद वह जंगल में भाग गया और अभी भी लापता है। फादर के एक जांघ में चाकू लगी। घायल फादर की अस्पताल पहुंचने से पहले ही अत्यधिक खून बह जाने की वजह से मृत्यु हो गई। तीर्थयात्रा स्थल, जंगल में बना है और सड़क से लगभग 3 किमी दूर है। यहाँ अस्पताल पहुँचने के लिए कोई यात्रा सुविधा नहीं है।

परंपरा के अनुसार, प्रेरित संत थॉमस सन् 52 ई. में केरल के तटीय क्षेत्र में उतरे और वहां उन्होंने 20 साल बिताया। तीर्थालय एक पहाड़ी पर बना हुआ है इसी एकान्त स्थान में प्रेरित घंटों प्रार्थना में समय बिताते थे।

वाटिकन ने सन् 2004 ई. में इसे एक अंतरराष्ट्रीय काथलिक तीर्थालय घोषित किया।


(Margaret Sumita Minj)

पुरोहित द्वारा नशाखोरी के इलाज में योगा के प्रयोग पर बने फिल्म ने जीता पुरस्कार

In Church on March 2, 2018 at 4:02 pm

मुम्बई, शुक्रवार 02 मार्च 2018 (ऊकान) : ब्रिटिश फिल्म निर्माता फिलिप फ्रिस्बी द्वारा फादर जोसफ परेरा के नशीली दवाओं की लत को छुड़ाने के लिए बने योग केंद्र पर बनाये गये फिल्म ने जयपुर अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2018 में पुरस्कार जीता।

मुंबई में कृपा धारावी सेंटर पर फिल्म, ‘द सर्कल’, एक कहानी है जिसे बताया जाना चाहिए, “फ्रिस्बी ने कहा, जो प्रमाणित आयंगर योग शिक्षक भी है।

इस फिल्म में चार सड़क पर जीने वाले बच्चों के जीवन का वर्णन किया गया है जो कचड़े से उपयोगी सामान खोजकर उन्हें बेचते हैं और इसतरह अपनी रोजी रोटी कमाते हैं। वे अपने आंतरिक दर्द को रोकने के लिए नशीली दवाओं का उपयोग करते और वे नशे के चंगुल में फँस जाते हैं।

इस फिल्म में बच्चे स्कूल जा रहे है, केंद्र में दूसरे लड़कों के साथ दोस्ती बनाते हैं और भविष्य के लिए आशा और उनके आत्मसम्मान के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत होती है।

फ्रिस्बी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “मैंने इस फिल्म के लिए मेरी बचत के लगभग सब रुपये खर्च कर दिया है और जब हमें पुरस्कार मिला है, तो मुझे बहुत खुशी मिली। लेकिन मेरे लिए, दुनिया के साथ इस प्रेरणादायक कहानी को साझा करना अधिक महत्वपूर्ण था।”

मुम्बई का धारावी इलाका एशिया का दूसरा सबसे बड़ा झोपड़ पट्टी है और यह 700,000 से ज्यादा लोगों का घर है। ड्रग्स के आदी रहे स्ट्रीट बच्चों के पुनर्वास के लिए दो दशक के पहले फादर परेरा ने ‘कृपा केंद्र’ शुरू किया था।

फादर परेरा ने बताया कि विदेशी विश्वविद्यालयों के कई युवा छात्र भी केंद्र का दौरा करते हैं और बच्चों के साथ विभिन्न उपयोगी कौशल साझा करते हैं।

निर्देशक फ्रिस्बी ने कहा कि अब ‘द सर्कल’ के माध्यम से इस बारे में और अधिक लोगों को पता चल जाएगा। उनके लिए यह एक अनूठा अनुभव था। ।


(Margaret Sumita Minj)

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