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नर्सों एवं रोगियों की मदद करने वालों को संत पापा का संदेश

In Church on March 3, 2018 at 4:37 pm

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 मार्च 2018 (रेई): संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 मार्च को वाटिकन स्थित पौल षष्ठम सभागार में पेशेवर नर्सिंग, स्वास्थ्य सेवा एवं बाल चिकित्सा केंद्रों में कार्यरत लोगों के लिए गठित संघ के सदस्यों से मुलाकात की।

उन्हें सम्बोधित कर उन्होंने कहा, “नर्सों की भूमिका जो रोगियों की सहायता करना है वह सचमुच अपरिवर्तनीय है। एक नर्स का रोगियों के साथ सम्पर्क एवं संबंध लगातार होता है। वे हर दिन उनकी देखभाल करते, उनकी आवश्यकताओं को सुनते तथा उनकी शारीरिक जरूरतों की चिंता करते हैं।” संत पापा ने कहा कि इस प्रक्रिया में उनका व्यवहार खास महत्व रखता है जो उनकी चंगाई का आधार है।

संत पापा ने अंतर्राष्ट्रीय नर्सिंग नैतिक कोड पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका पेशा चार आधारभूत कार्यों को प्रस्तुत करता है- स्वास्थ्य को प्रोत्साहन, बीमारी के रोकथाम, स्वास्थ्य की रक्षा एवं पीड़ा को दूर करना। ये जटिल एवं बहुविध कार्य हैं जो देखभाल के हर क्षेत्र को प्रभावित करते तथा विभाग के अन्य कर्मचारियों के साथ सहयोग द्वारा पूरा किये जाते हैं। रोगनिवारक एवं निरोधक, स्वास्थ्य सुधारक एवं आराम देने वाला उनका कार्य उनसे उच्च स्तर की व्यावसायिकता की मांग करता है, तकनीकी के लगातार विकास के कारण उनसे विशिष्टीकरण एवं अद्यतन का तलब करता है।

उन्होंने कहा कि यह पेशा न केवल तकनीकी क्षेत्र में किन्तु मानवीय संबंध के क्षेत्र में व्यक्त होता है। अतः चिकित्सकों एवं परिवारों तथा रोगियों के साथ सम्पर्क में रहने के कारण अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और घरों में हज़ारों लोगों के साथ संबंध का एक चौराहा बन जाता है जो ध्यान, निपुणता एवं सुविधा की मांग करता है। यह वास्तव में तकनीकी कौशल एवं मानव संवेदना का एक ऐसा संयोग है जहाँ उनके कार्यों का महत्व एवं मूल्य स्पष्ट रूप से प्रकट होता है।

महिलाओं एवं पुरूषों, बच्चों एवं बुज़ुर्गों को उनके जीवन के हर क्षेत्र में जन्म से लेकर मृत्यु तक देखभाल करने हेतु उन्हें लगातार सुनना पड़ता है ताकि उनकी आवश्यकताओं को समझा जा सकें।

रोगियों के साथ मुलाकात करने में उन्हें संवेदनशीलता की आवश्यकता होती है जो उन्हें जीवन एवं प्रतिष्ठा का प्रोत्साहक बनाता है। संत पापा ने कहा कि वे तकनीकी की सही सीमा को पहचानें जिससे कि वह सर्वेसर्वा न बन जाए तथा मानव प्रतिष्ठा को धूमिल कर दे। संत पापा ने नर्सों को रोगियों की आध्यात्मिक एवं धार्मिक आवश्यकताओं पर भी ध्यान देने की सलाह दी जो कई रोगियों के जीवन में उनकी मानसिक शांति के लिए आवश्यक तत्व होता है।

संत पापा ने रोगियों के प्रति कलीसिया के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए कहा, “कलीसिया के लिए रोगी एक ऐसा व्यक्ति होता है जिसमें येसु उपस्थित होते हैं जो अपने आपको उनके रूप में प्रस्तुत करते हुए कहते हैं, “मैं बीमार था और तुम मुझे देखने आये।” (मती. 25:36) अपने सम्पूर्ण मिशन में येसु रोगियों के करीब रहे, उनके साथ स्नेह से पेश आये तथा बहुतों को चंगा किया। कोढ़ियों से मुलाकात कर उन्हें चंगाई प्रदान की। हम उनके सरल हावभाव के महत्व की अनदेखा नहीं कर सकते, यद्यपि मूसा की सहिंता के अनुसार कोढियों का स्पर्श करना एवं उनके आवासों पर जाना मना था उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर उनका स्पर्श किया। येसु संहिता के मूल में जाते तथा उसे पड़ोसियों के प्रति प्रेम के सार के रूप में प्रस्तुत करते हैं। येसु कोढ़ियों का स्पर्श करते हैं ताकि वे समुदाय के बाहर अलग न रखे जाएँ। इस तरह येसु जो चंगाई देते हैं वह न केवल शारीरिक है  किन्तु वे उनके हृदय को भी चंगा करते हैं।

संत पापा ने कहा कि वे भी रोगियों का स्पर्श करते हैं और उससे भी बढ़कर उनकी देखभाल करते हैं। जब वे ऐसा करते हैं तो याद रखें कि येसु ने कोढियों का स्पर्श उन्हें भटकाने, उदास अथवा परेशान करने के लिए नहीं था किन्तु वह स्नेहपूर्ण था जिसके द्वारा उन्होंने सम्मान और चिंता किये जाने का एहसास किया। मानवीय एवं भाईचारापूर्ण तरीके से लोगों से पेश आने में वे कभी न थकें।

संत पापा ने इस अवसर पर रोगियों को भी सम्बोधित कर कहा कि वे नर्सों से, जो सेवा प्राप्त करते हैं उसे यों ही न ग्रहण करें बल्कि नर्सों को मानवता के साथ सेवा देने में मदद करें। वे न केवल नर्सों से मुस्कान की अपेक्षा करें किन्तु उन लोगों के लिए अपनी मुस्कान दें जो उनकी सेवा में समर्पित हैं।

संत पापा ने संघ के सदस्यों से आशा व्यक्त की कि उनका सम्मेलन फलप्रद होगा तथा चिंतन एवं एक-दूसरे के साथ अपने विचारों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।


(Usha Tirkey)

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