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स्विट्जरलैंड के “फाउन्टेन ऑफ मर्सी” संगठन के सदस्यों को संत पापा फ्राँसिस का संबोधन

In Church on March 10, 2018 at 2:28 pm

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वाटिकन सिटी, शनिवार मार्च 2018 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 10 मार्च को वाटिकन के कार्डिनल मंडल भवन में स्विट्जरलैंड के “फाउन्टेन ऑफ मर्सी” अर्थात  ‘दया का झरना’ संगठन के सदस्यों से मुलाकात की।

संत पापा ने कहा,“रोम में आपकी तीर्थ यात्रा के अवसर पर मुझे आपसे मिलकर प्रसन्नता हो रही है मैं “दया का झरना” के सदस्यों के साथ-साथ उन सभी लोगों का भी अभिनंदन करता हूँ जिन्हें आप “प्रार्थना” और भाईचारे के साथ उनका साथ देते हैं।”

उन्होंने कहा,“आपके साथ मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ, जिसने आपको अपनी दया का अनुभव करने का अवसर दिया है और जिसने आपको उन्हें ढूँढ़ने और पास आने के लिए प्रेरित किया है ताकि वे आपके दिल में दृढ़ता से निवास कर सकें और आप दैनिक जीवन में शांति के साथ रह सकें। (सीएफ मिसरिकोरदिया एत मिसेरा, 3) मैं आपको प्रार्थना में नियमितता और स्थिरता के साथ दृढ़ रहने के लिए आमंत्रित करता हूँ। प्रभु के खुले दिल से निकले दया के झरने के जीवन जल का अनुभव करने के लिए हमें उसके वचनों का पाठ और उनसे नियमित रुप प्रार्थना में मुलाकात करना है। आप अपने धार्मिक जीवन के माध्यम से, प्रभु की दया के गवाह बन सकते हैं, जो सभी लोगों के लिए प्रभु के प्रेम के सौंदर्य और खुशी को पहचानने का एक आह्वान है।”

अंत में, मैं आपको भाईचारे के जीवन के माध्यम से और पवित्र आत्मा की मदद से “दूसरों के साथ मुलाकात कर, दया की संस्कृति को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ। यह एक ऐसी संस्कृति है जिसमें कोई भी उदास नहीं दिखता और जब वह भाइयों को पीड़ा में देखता है तो उससे अपनी नजरें फेर नहीं लेता परंतु पीड़ा में उनका साथ देता है। (सीएफ मिसरिकोरदिया एत मिसेरा, 20)

इस आशा के साथ, मैं आपको प्रभु और कुवारी मरियम की मध्यस्थता में सौंपता हूं। आपसे अपने लिए प्रार्थना की मांग करते हुए आपको और“फाउन्टेन ऑफ मर्सी” संगठन के सभी सदस्यों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद देता हूँ।


(Margaret Sumita Minj)

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ईश्वर में सच्ची सांत्वना

In Church on March 10, 2018 at 2:26 pm

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वाटिकन सिटी, शनिवार मार्च 2018 (रेई) : पास्का पर्व की उचित तैयारी के लिए काथलिक कलीसिया ने चालिसा काल के तीसरे सप्ताह के शुक्रवार को“प्रभु के लिए 24 घंटे” का दिन ठहराया है। संत पापा फ्राँसिस ने इस दिन अर्थात शुक्रवार 9 मार्च को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पुर्वाहन 5 बजे से पश्चाताप की धर्म विधि की अगवाई की और इसी दिन उन्होंने संदेश में लिखा,“बहुत से कामों की व्यस्तता में, जो वास्तव में महत्वपूर्ण है उसे हम दरकिनार कर देते हैं और वह है हमारा आध्यात्मिक जीवन और ईश्वर के साथ हमारा संबंध। तो आज जरा रुक जायें और प्रार्थना में समय बितायें।”

संत पापा ने अपने विचारों को जारी रखते हुए 10 मार्च के ट्वीट में लिखा,“अगर हम प्रार्थना के लिए अधिक समय समर्पित करते हैं, तो हमारा दिल उन झूठों को प्रकट कर देगा जिनके द्वारा हम खुद को धोखा देते आये हैं और हम ईश्वर में सच्ची सांत्वना पायेंगे।”


(Margaret Sumita Minj)

संत पापा बाल्टिक देशों की प्रेरितिक यात्रा सितम्बर माह में करेंगे

In Church on March 10, 2018 at 2:24 pm

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वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 मार्च 2018 (वाटिकन न्यूज़)˸ संत पापा फ्राँसिस सितम्बर माह में तीन बाल्टिक राष्ट्रों की प्रेरितिक यात्रा करेंगे।

वाटिकन प्रवक्ता ग्रेग बर्क ने 9 मार्च को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस बात की पुष्टि दी कि संत पापा आगामी सितम्बर माह में लितवानिया, लातविया और एस्तोनिया देशों का दौरा करेंगे।

उन्होंने विज्ञाप्ति में कहा, ̎उन राष्ट्रों के शीर्ष अधिकारियों एवं धर्माध्यक्षों के निमंत्रण का स्वागत करते हुए संत पापा फ्राँसिस 22 से 25 सितम्बर 2018 तक बालटिक राष्ट्रों का दौरा करेंगे। जिसमें वे लितवानिया के विलनियुस एवं कौनास, लातविया के रिगा एवं अग्लोना तथा एस्तोनिया के ताल्लिन्न शहरों का दौरा करेंगे। प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम कुछ समय बाद प्रकाशित किया जाएगा।̎

ये तीनों यूरोपीय देश एक ओर बाल्टिक सागर से और दूसरी ओर रूस, बेलारूस और पोलैंड से घिरे हैं।


(Usha Tirkey)

येसु चाहते हैं कि हम उन्हें प्यार करने दें

In Church on March 10, 2018 at 2:21 pm

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वाटिकन सिटी, शनिवार, 10 मार्च 2018 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार 9 मार्च को संत पेत्रुस महागिरजाघर में पश्चाताप की धर्मविधि का अनुष्ठान करते हुए ̎ ̎प्रभु के लिए 24 घंटे ̎ प्रार्थना दिवस का उद्घाटन किया।

प्रार्थना हेतु संत पापा के आह्वान का प्रत्युत्तर देते हुए हज़ारों विश्वासियों ने धर्मविधि में भाग लिया। धर्मविधि में प्रवचन देते हुए संत पापा ने संत मती रचित सुसमाचार एवं संत योहन के पत्र से लिए गये पाठों पर चिंतन किया जिनमें ईश्वर के प्रेम पर प्रकाश डाला गया है।

संत पापा ने कहा, ̎संत योहन के शब्दों में, हमारे लिए कितने महान आनन्द एवं सांत्वना की बात कही गयी है। ̎पिता ने हमें कितना प्यार किया है। हम ईश्वर की संतान कहलाते हैं और हम वास्तव में वही हैं। हम इतना ही जानते हैं कि जब ईश्वर का पुत्र प्रकट होगा तो हम उसके सदृश्य बन जायेंगे। उससे भी बढ़कर हम उनके प्रेम की महानता को पहचान लेंगे। ( 1यो. 3:1-10.19-22).  इतना ही नहीं, ईश्वर का प्रेम हमारी कल्पना के परे है, यह हमारे किसी भी पाप से परे जा सकता है जिसकी कीमत हमारी अंतःकरण को चुकाना पड़ता है। उनका प्रेम असीम है जिसकी कोई सीमा नहीं। यह उन सभी बाधाओं को पार कर सकता है जिसको हम भय के कारण दूसरों के सामने लाते ताकि वे हमारी स्वतंत्रता को समाप्त न कर दें।

संत पापा ने कहा कि हम जानते हैं कि पाप हमें ईश्वर से दूर कर देता है। वास्तव में, पाप एक ऐसा रास्ता है जो हमें ईश्वर से दूर ले जाता किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि ईश्वर हमसे दूर चले जाते हैं। कमजोरी एवं संदेह की स्थिति जो पाप से उत्पन्न होती है यह भी एक कारण है जिसके द्वारा ईश्वर हमारे नजदीक रहते हैं।

संत पापा ने इस बात को स्पष्ट किया कि प्रेरित हमें आश्वस्त करते हैं कि हमारे अंतःकरण को हमेशा बिना किसी संदेह के पिता के प्रेम पर भरोसा रखना चाहिए क्योंकि ईश्वर हमारे अंतःकरण से बड़े हैं और वे सब कुछ जानते हैं। (पद. 20)

उनकी कृपा हममें लगातार क्रियाशील है, हमारे हृदय को बल प्रदान करने के लिए ताकि उनका प्रेम, हमारे जीवन में उनकी उपस्थिति को अस्वीकार करने के द्वारा किये गये पाप के बावजूद कभी कम न हो।

आशा ही है जो हमें उस समय भी सचेत करती है जब हमारा जीवन अपनी दिशा खो देता है। संत पेत्रुस के साथ यही हुआ, जब मूर्गे ने बांग दी तो उसे येसु का कथन याद आया, मूर्गे के बांग देने के पूर्व तुम मुझे तीन बार अस्वीकार करोगे और वह बाहर जाकर फूटफूट कर रोने लगा। (मती. 26:74-75) मूर्गे की बांग ने उसे प्रेरित किया जो किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में था, जिसके द्वारा उसने येसु के शब्दों को याद किया। पेत्रुस ने आँसू बहाते हुए ईश्वर को पहचाना, जिसने ख्रीस्त में अपने को प्रकट किया था। जिन्हें घूंसा मारा गया था और जिसका अपमान किया गया था और जिसको स्वयं उसने अस्वीकार किया था वे अब उन्हीं के लिए अपना  बलिदान करने वाले हैं। पेत्रुस जो येसु के लिए अपनी जान देना चाहता था अब महसूस किया कि येसु की मृत्यु को स्वीकार करना आवश्यक है। पेत्रुस येसु को सिखलाना चाहता था, वह उनके आगे चलना चाहता था जबकि येसु उनके लिए मरने जा रहे हैं। पेत्रुस इसे नहीं समझा था और वह इसे समझना भी नहीं चाह रहा था किन्तु अब प्रभु का प्रेम पेत्रुस के सामने था। अंततः उसे समझ में आ गया कि प्रभु उसे प्यार करते हैं और वे उनसे मांग करते हैं कि वह भी उन्हें प्यार करे। पेत्रुस ने अनुभव किया कि वह उनसे प्रेम किये जाने से हमेशा इंकार किया था जिसके कारण वह उन्हें पूरी तरह प्रेम करना नहीं चाहता था।

संत पापा ने कहा, यह सचमुच कठिन है कि हम अपने आप को प्रेम किये जाने दें। हमारी चाह हमेशा रहती है कि हमारे जीवन का कुछ हिस्सा मुक्त हो जिसमें हम किसी के प्रति कृतज्ञ बनने से बच सकें जबकि हम पूरी तरह ऋणी हैं क्योंकि ईश्वर ने हमें पहले प्रेम किया है और अपने प्रेम के द्वारा उन्होंने हमें पूरी तरह बचाया लिया है।

संत पापा ने विश्वासियों का आह्वान किया कि वे ईश्वर से उनके प्रेम की महानता को समझने की कृपा के लिए प्रार्थना करें जो हमारे हर पाप को मिटा देते हैं। हम सदा उनके प्रेम द्वारा शुद्ध किये जाएँ ताकि उनके सच्चे प्रेम को समझ सकें।


(Usha Tirkey)

वाटिकन हैकथॉन वास्तविक समस्याओं का समाधान चाहता है, मोन्सिन्योर रुइज

In Church on March 10, 2018 at 2:19 pm

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वाटिकन सिटी, शनिवार मार्च 2018 (रेई) : वाटिकन संचार विभाग के सचिव मोन्सिन्योर लुसियो रुइज ने शुक्रवार 9 मार्च को एक साक्षात्कार में वाटिकन द्वारा पहल किये गये वाटिकन हैकथॉन के बारे बताया कि यह संत पापा के हृदय के सबसे निकटतम मुद्दों में युवा लोगों और प्रौद्योगिकी का योगदान है।

उन्होंने कहा कि वाटिकन हैकथॉन एक ऐसी पहल है जो आज दुनिया के कई विश्वविद्यालयों में लागू  किया जाता है। हैकथॉन प्रतियोगिताएँ हैं, उदाहरण के लिए, गणित में, या भौतिकी … वे घटनाएं हैं जो विभिन्न विश्वविद्यालयों के युवा लोगों को एक साथ लाती है जहां वे चुनौतियों का सामना करते हैं और समाधान पेश करते हैं। वाटिकन हैकथॉन सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेता है और इसे अपनी चुनौतियों के साथ उन सभी संदर्भों को वाटिकन में स्थानांतरित करता है जो संत पापा के लिए महत्वपूर्ण है। हमने युवाओं को यह देखने के लिए आमंत्रित किया है कि इन समस्याओं को सुलझाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाने हेतु कौन-सी तकनीकी प्रतिक्रिया उपलब्ध कराई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि संत पापा के दिल का निकटतम मुद्दा प्रवासियों और शरणार्थियों की समस्या है। वाटिकन द्वारा किये गये इस पहल पर संत पापा फ्राँसिस की प्रतिक्रिया के बारे में बताया कि संत पापा को शुरुआत से अवगत कराया गया है। जब वाटिकन हैकथॉन की पहल करने का विचार आया तो हमने तुरंत उसे संत पापा के समक्ष प्रस्तुत किया। वे बहुत खुश थे क्योंकि यह संस्कृति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, विश्वास और युवा लोगों को एक साथ आने, एक दूसरे को चुनौती देने और समकालीन संस्कृति की ठोस समस्याओं को हल करने की अनुमति देता है, जैसे वार्ता, प्रवासियों और शरणार्थियों की समस्याएँ इत्यादि।

हम आशा करते हैं कि हम समकालीन दुनिया की इन महान चुनौतियों का हल करने के लिए प्रौद्योगिकी का सहारा ले सकते हैं।


(Margaret Sumita Minj)

फादर कमिल बुल्के का अवशेष राँची लाया जाएगा

In Church on March 10, 2018 at 2:16 pm

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नई दिल्ली, शनिवार, 10 मार्च 2018 (ऊकान)˸ प्रसिद्ध बेलजिन जेस्विट मिशनरी फादर कमिल बुल्के के अवशेष को नई दिल्ली से राँची लाया जाएगा जहाँ उन्होंने अपनी प्रेरिताई का अधिकांश समय व्यतीत किया था।

फादर कमिल बुल्के के अवशेष को 5 मार्च को कब्र से बाहर निकाला गया।

राँची जेस्विट सोसाईटी के प्रोविंशल फादर जोसेफ मरियानुस कुजूर ने ऊका समाचार से कहा कि राँची में उनके स्थानंतरण की कार्यवाही पर विचार दो वर्षों से किया जा रहा था जहाँ मिशनरी को आदिवासियों के बीच शिक्षा तथा हिन्दी एवं स्थानीय संस्कृति में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाता है।

फादर कमिल बुल्के का निधन सन् 1982 को नई दिल्ली में हुआ था और कुछ कारणों से उन्हें राजधानी में दफनाया गया था किन्तु वहाँ के काथलिकों एवं जेस्विट पुरोहितों की तमन्ना है कि उनके अवशेष को राँची लाया जाए ताकि उनके प्रशंसक, उनके जन्म एवं उनकी मृत्यु की सालगिराह पर उनकी याद कर, उन्हें श्रद्धांजलि दे सकें।

उनके अवशेष को राँची स्थित संत जेवियर्स कॉलेज परिसर में 14 मार्च को दफनाया जाएगा जहाँ वे हिन्दी एवं संस्कृत विभाग के प्रमुख थे।

बेलजियन मिशनरी जो 1934 में भारत आये थे, सन् 1951 में भारत के स्थायी निवासी बन गये थे। उन्होंने भारतीय भाषाओं की पढ़ाई की तथा संस्कृत में स्नातकोत्तर एवं हिन्दी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की थी। कॉलेज में भाषाओं की शिक्षा देने के अलावा उन्होंने बाईबिल का अनुवाद हिन्दी में किया था।

भारत सरकार ने सन् 1974 में उन्हें पद्म भूषण की उपाधि से सम्मानित की थी जो देश की तीसरी सबसे सम्मानित उपाधि है।

एक समाज सेवी संजय बासु माल्लिक ने कहा, ̎महान पुरोहित के अवशेष को यहाँ लाया जाना एक अनोखी बात है जो देश के लिए जिये और मरे।̎

उन्होंने कहा कि फादर बुलके ने मुझे और हज़ारों लोगों को प्रेरित किया है कि हम स्थानीय भाषा और संस्कृति पर गर्व करें।


(Usha Tirkey)

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